चीनू गिलहरी को घूमना बहुत पसंद था. नईनई चीजों को देखने के लिए वह एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर फुदकती रहती. मम्मी समझातीं, ‘‘ इस वन में कई खतरनाक चीजें हैं. थोड़ा सावधान रहो, चीनू.’’ ‘‘मम्मी, आप हर समय मेरे लिए चिंतित क्यों रहती हो? मुझे वन में इधरउधर घूमते रहना पसंद है, लेकिन मैं हर समय सतर्क रहती हूं,’’ चीनू कहती.

‘‘चीनू, तुम अभी छोटी हो. तुम्हें अभी बहुत कुछ सीखना है. यह तुम्हारे लिए अच्छा होगा कि वन में अकेले मत घूमा करो,’’ मम्मी कहतीं. ‘‘मैं अपना ध्यान खुद रख सकती हूं, मम्मी.’’ कह कर चीनू फुदक कर भाग जाती.

मम्मी की चिंता के बाद भी चीनू नहीं मानती. वन में घूमने के साथसाथ वह अजनबियों से भी दोस्ती कर लेती और उन के साथ भी घूमनेफिरने निकल जाती. एक दिन सुबह मम्मी खाने की तलाश में निकल गई, तो चीनू भी बाहर घूमनेफिरने निकली.

एक पेड़ की डाल पर उसे पीकू तोता आराम करता हुआ मिला. ‘‘तुम्हारे तो बहुत सुंदर पंख हैं,’’ चीनू बोली. वह बात करने के मूड में थी. ‘‘मुझे बताओ, तुम्हें उड़ना किस ने सिखाया?’’ उस ने पूछा.

पीकू तोते ने नन्ही गिलहरी की ओर देखा और मुसकरा कर बोला, ‘‘मेरे मम्मीपापा ने. मम्मीपापा ही तुम्हें ऊपर बढ़ना और दौड़ना सिखाते हैं.’’ लेकिन मेरे मम्मीपापा ने तो मुझे कुछ नहीं सिखाया,’’ चीनू ने घमंड से कहा, ‘‘मैं ने हर चीज खुद ही सीखी है.’’

‘‘यह सही नहीं है. हमारे मातापिता हमें बहुत कुछ सिखाते हैं,’’ पीकू ने अपने पंख फैलाते हुए कहा. ‘‘तो क्या तुम मुझे उड़ना सिखाओगे?’’ चीनू ने बेचैनी से पूछा.

पीकू ने हैरानी से चीनू को देखा. ‘‘उड़ने के लिए तुम्हारे पंख होने चाहिए. तुम गिलहरी हो, इसलिए तुम्हारे पंख नहीं हैं.’’ ‘‘हमें पंख कहां से मिल सकते हैं?’’ चीनू ने पूछा.

‘‘चिडि़यां पंखों के साथ ही जन्म लेती हैं. जैसे तुम्हारा जन्म इतनी सुंदर पूंछ के साथ हुआ है. तुम पंख खरीद नहीं सकते,’’ पीकू ने बताया. चीनू उदास हो गई. ‘‘लेकिन मेरी पूंछ तो किसी काम की नहीं है. यदि मेरे पंख होते, तो मैं भी वन के ऊपर नीले आकाश में उड़ती,’’ उस ने कहा.

तभी उस ने मम्मी की बात याद करते हुए कहा, ‘‘मेरी मम्मी नहीं चाहती कि मैं कहीं अकेली जाऊं या अजनबियों से बात करूं.’’ पीकू कुछ सोचते हुए बोला, ‘‘तुम्हारी मम्मी ठीक कहती हैं. तुम नहीं जान सकते कि दोस्त के रूप में कौन दुश्मन है.’’

‘‘आप भी तो दोस्त जैसे हैं. तो क्या मैं आप पर विश्वास न करूं?’’ चीनू ने पूछा. पीकू ने सिर हिलाया. ‘‘चीनू, मैं तो छोटा सा पक्षी हूं. मुझ से डरने की जरूरत नहीं है. लेकिन अजनबियों से सावधान रहो,’’ पीकू ने चेतावनी देते हुए कहा.

‘‘आप भी तो अजनबी हो और मैं आप से अभी भी बात कर रही हूं. आप मुझे अच्छी बातें बता रहे हो,’’ चीनू ने कहा, ‘‘मुझे तो लगता है मम्मी बिना वजह चिंता करती हैं.’’ चीनू बात करने में मजा तो ले रही थी, लेकिन पीकू की सलाह पर उस का ध्यान नहीं था.

पीकू उड़ गया. चीनू दुखी हो गई. जब मम्मी लौट कर आई, तो चीनू को शांत बैठा देखा. ‘‘चीनू, तुम उदास क्यों हो?’’ मम्मी ने पूछा.

‘‘कुछ नहीं, मम्मी,’’ चीनू बोली. ‘‘सचसच बताओ, आज तुम किस से मिली हो?’’ मम्मी ने पूछा.

चीनू ने पूरी बात बताई. मम्मी फिर से चिंता में डूब गईं.

‘‘चीनू, मैं ने तुम से कहा था कि अजनबियों से बात मत किया करो, पर तुम तो सुनती ही नहीं हो,’’ मम्मी ने गुस्से में कहा. चीनू दुखी लग रही थी. फिर मम्मी ने प्यार से

कहा, ‘‘मेरी प्यारी बेटी, हमें अजनबियों से बच कर रहना चाहिए.’’ ‘‘जी मम्मी, पीकू ने भी मुझे अकेली न घूमने और अजनबियों से बात नहीं करने की ही सलाह दी थी,’’ चीनू बोली.

मम्मी बोली, ‘‘इस का मतलब पीकू एक अच्छा पक्षी है लेकिन सभी ऐसे ही नहीं होते.’’ ‘‘मैं ने पीकू से कहा कि मुझे भी उड़ना सिखाए, लेकिन पीकू ने कहा कि मैं नहीं उड़ सकता क्योंकि मेरे पंख नहीं हैं,’’ चीनू बोला.

‘‘चीनू, हम पृथ्वी पर कहीं भी जा सकते हैं लेकिन हम पक्षी नहीं हैं इसलिए हम उड़ नहीं सकते. अब किसी से उड़ने की बात मत करना वरना बेवकूफ बन जाओगी,’’ मम्मी ने कहा. मम्मी की बातों का कुछ दिनों तक तो चीनू पर असर रहा पर जल्दी ही चीनू अपनी पुरानी आदतों में लग गई.

बीजू चील बहुत दिनों से चीनू पर नजर बनाए हुए थी. वह पीकू को अकेला घूमते हुए देखती थी. वह नन्ही गिलहरी को खाना चाहती थी. इसलिए वह मौके की प्रतीक्षा में थी. वह दिन जल्दी ही आ गया. एक दिन चीनू एक डाल पर बैठ कर बीजू को आकाश की ऊंचाइयों में उड़ते हुए देख रहा था. उसे अकेला देख कर बीजू ने इस मौके का फायदा उठाने की सोची.

वह पेड़ की उस डाली के पास उतरी, जिस पर चीनू बैठी थी. चीनू नीचे वाली डाल पर बैठी थी. उसे लग रहा था कि वह बीजू से सुरक्षित दूरी पर बैठी है.

बीजू बोली, ‘‘तुम क्या देख रही हो, बच्ची?’’ ‘‘कुछ नहीं, मैं तो बस आप को उड़ते हुए देख रही थी,’’ चीनू ने जवाब दिया.

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‘‘क्या तुम उड़ना चाहोगी?’’ बीजू ने पूछा. ‘‘हां, मैं उड़ना चाहती हूं, लेकिन मेरे तो पंख नहीं हैं,’’ चीनू ने कहा.

‘‘पंख नहीं हैं, तो क्या हुआ? फिर भी तुम आकाश की सैर कर सकती हो,’’ बीजू ने उदास हो कर कहा. ‘‘कैसे?’’ चीनू ने पूछा, ‘‘और मुझे सैर कराने कौन ले जाएगा?’’

‘‘क्यों, क्या तुम ने मेरे मजबूत पंख नहीं देखे हैं?’’ कह कर बीजू ने अपने पंख फड़फड़ाए. ‘‘सचमुच?’’ चीनू ने पूछा. लेकिन तभी उसे मम्मी की बात याद आ गई. उस ने कहा, ‘‘नहीं, आप तो अजनबी हो. मम्मी ने कहा है कि किसी अजनबी पर भरोसा मत करो.’’

‘‘हम एकदूसरे से बात कर रहे हैं. फिर हम अजनबी कैसे हुए?’’ बीजू बोली, ‘‘लेकिन तुम्हें ऐसा लगता है तो अपनी मम्मी से बात कर लो. हम कल सैर कर लेंगे.’’ ‘‘मम्मी तो कभी अनुमति नहीं देंगी.’’ चीनू ने अपना सिर हिलाते हुए कहा.

‘‘तब आज ही सैर करने चलते हैं. तुम्हारी मम्मी को पता भी नहीं चलेगा,’’ बीजू बोली. चीनू असमंजस में थी. ‘‘आप मुझे सैर कराने कैसे ले जाओगे?’’ चीनू ने पूछा.

‘‘अपनी पीठ पर,’’ बीजू बोली. वह तुरंत उड़ कर चीनू के नीचे वाली डाल पर पहुंच गई. ‘‘चिंता मत करो, मैं कई जानवरों को इस तरह सैर करवा चुकी हूं.’’

चीनू छिपी हुई जगह से बाहर निकल आई. ‘‘कूदो, जल्दी,’’ बीजू बोली.

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चीनू कूद गई. बीजू ने अपना मुंह खोल दिया. बीजू का मुंह एक बड़ी अंधेरी गुफा की तरह लग रहा था.

चीनू उस के मुंह में न जा कर नीचे कांटेदार झाडि़यों में

जा गिरी. बीजू ने उसे लपकने की कोशिश की, पर असफल रही. वह बहुत निराश हुई.

चीनू नीचे गिर कर बेहोश हो गई. जब चीनू घर नहीं लौटी, तो उस की मम्मी उसे ढूंढ़ने निकल पड़ी. चीनू को जब होश आया, तो वह हिल भी नहीं पा रही थी. वह कंटीली झाडि़यों में फंस गई थी. डर से नन्ही गिलहरी रोने लगी. उस का रोना सुन कर मम्मी उस के पास पहुंच गई. उसे घर

ले आई. चीनू दहशत में थी. मम्मी ने उस के पूरे शरीर पर दवा का लेप किया. जल्दी ही चीनू ठीक हो गई. वह मम्मी से लिपट कर बोली, ‘‘माफ करना, मम्मी. मैं ने आप की बात नहीं मानी. मुझे सबक मिल गया.’’

‘‘क्या हुआ?’’ मम्मी ने पूछा. चीनू ने सारी बात बताई. उस ने वादा किया कि अब कभी वह मम्मी की बात अनसुनी नहीं करेगी. मम्मी की हर बात मानेगी.

आखिरकार चीनू को अपनी गलती से सबक मिल गया था.

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