बल्लु और बेन्नी भालू नंदनवन के अपने फूडकोर्ट में गए. चूंकि यह एक फूडकोर्ट था, इसलिए उन्हें सुबह इसे खोलना पड़ता था और रात में काफी देर तक चलने वाले डिनर के बाद बंद करना पड़ता था. अधिक व्यस्तता के कारण उन्हें अपने घर पर ज्यादा समय बिताने का अवसर नहीं मिलता था. उन का बेटा टैड्डी भालू एक मौर्निंग स्कूल में पढ़ने जाता था और दोपहर में घर आ जाता था. बल्लु के पापा बौब जो कि बहुत बूढ़े थे, अकेले घर पर रहते थे. बौब दिन में घर पर अकेलापन महसूस करते. उन के पास कुछ करने को न था.

एक दिन दोपहर में वे घर पर आराम कुरसी पर बैठे हुए थे तभी टैड्डी स्कूल से आया. टैड्डी ने देखा कि उस के दादाजी बहुत उदास थे. उस ने पूछा, ‘‘क्या हुआ, दादाजी? आज आप इतने उदास क्यों हैं?’’ बौब ने टैड्डी के सिर को प्यार से सहलाते हुए कहा, ‘‘मेरे प्यारे बच्चे, कोई बात नहीं है.’’ लेकिन टैड्डी ने देखा कि दादाजी कुछ छिपाने की कोशिश कर रहे हैं.

शाम को टैड्डी अपने स्कूल के एक प्रोजैक्ट को बनाने में व्यस्त था. उस के मम्मीपापा अपने काम से वापस घर आ गए थे. टैड्डी ने उन्हें अपने और दादाजी के बीच दोपहर में हुई बातें बताईं. टैड्डी की बातों को सुन कर बल्लु अपने पापा को ले कर चिंतित हो गया. बेन्नी ने कहा, ‘‘मेरे विचार में उन की उदासी का कारण उन की बढ़ती उम्र और उन के अंदर बढ़ता डर हो सकता है. वे संघर्षशील हैं. अब उन्हें किसी की सहायता की जरूरत है. चूंकि हम पूरा दिन अपने काम से घर से बाहर रहते हैं, इसलिए वे अपने मन की बातों को हमारे साथ साझा नहीं कर पाते हैं.’’

अगले दिन भी टैड्डी अपने दादाजी और मम्मीपापा के बीच हुई बातचीत के बारे में ही सोचता रहा. वह अपने दादाजी और उन्हीं के जैसे नंदनवन के अन्य वरिष्ठ नागरिकों की सहायता करना चाहता था. अचानक उस शाम उसे एक आइडिया आया और वह दौड़ता हुआ दादाजी के पास गया. बोला, ‘‘क्यों न हम नंदनवन में एक वरिष्ठ नागरिक क्लब की शुरुआत करें.’’ बौब टैड्डी के इस प्रस्ताव को सुन कर हैरान रह गए. उन्होंने पूछा, ‘‘तुम्हारा क्या मतलब है, टैड्डी?’’

टैड्डी ने विस्तार से बताते हुए कहा, ‘‘दादाजी, आप और आप ही की तरह नंदनवन में रहने वाले वरिष्ठ नागरिक एक वरिष्ठ नागरिक क्लब की शुरुआत कर सकते हैं. क्लब के सदस्य एक साथ मिल कर अलगअलग कार्यों जैसे कि मिलनाजुलना, योगा कैंप्स, चाय पार्टी और पिकनिक वगैरह का आयोजन कर सकते हैं. आप हमारे स्कूल में अच्छी बातों पर भाषण देने के लिए भी आ सकते हैं. जैसे कि आप के जीवन के अनुभव जिस से कि छात्रों को व्यावहारिक सीख मिलेगी.’’ बेन्नी जो कि आज काम से जल्दी ही लौट आई थी, दरवाजे के पास से ही यह सबकुछ सुन रही थी. बोली, ‘‘ यह एक बहुत ही बढि़या सुझाव है, टैड्डी. इस तरह से सभी वरिष्ठ नागरिकों को एकदूसरे का साथ मिलेगा और वे कुछ एक्टिविटी में लगे रहेंगे. बल्लु और मैं दिन में काम से घर से बाहर रहते हैं. हमारा घर मीटिंग और मिलनेजुलने लिए उपयोग हो सकता है.’’

बौब इस बात को जान कर बहुत खुश हुए. वे अकेलापन महसूस करते थे लेकिन उन के परिवार को भी उन की फिक्र थी. उन्होंने टैड्डी की सहायता से क्लब बनाया और सदस्यों को आमंत्रित किया. कुछ ही समय में नंदनवन का वरिष्ठ नागरिक क्लब उस वन में प्रसिद्ध हो गया.

वे सभी सदस्य जिन्होंने क्लब को जौइन किया, अलगअलग सामाजिक कार्यों जैसे कि पिकनिक, योगासत्र, तैराकी और पार्टियों का आयोजन करने और इन में भाग लेने लगे. क्लब के कार्यक्रमों के लिए वरिष्ठ नागरिकों के खानेपीने का प्रबंध करना बल्लु की जिम्मेदारी थी इसलिए बल्लु के फूडकोर्ट से ही इन के लिए खाना आने लगा था. दादाजी अब खुश थे. टैड्डी भी बहुत खुश था

क्योंकि वह दादाजी के साथसाथ सभी वरिष्ठ नागरिकों की सहायता करना चाहता था, जो अब पूरा हो गया था.

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