गृहशोभा विशेष

चिंटू धीरेधीरे अपने घर की ओर बढ़ रहा था. उस के कंधे पर एक थैला था. थैला कुछ भारी था इसलिए चिंटू को उसे उठाने में थोड़ी दिक्कत हो रही थी. वह बारबार थैले को जमीन पर रखता, कुछ आराम करता और फिर चलता था. इस तरह वह काफी थक गया था परंतु उस के चेहरे पर आत्मसंतोष और आत्मविश्वास साफ झ?लक रहा था. चिंटू 7वीं कक्षा में पढ़ता था. वह पढ़नेलिखने में बहुत होशियार था परंतु बहुत ही नटखट और शरारती था. वह घर के कामकाज में अपनी मम्मी का हाथ बिलकुल भी नहीं बंटाता था. चिंटू की मम्मी उसे बहुत

समझ?ाती थी परंतु उस के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती थी. जब भी उस की मां उसे कुछ काम करने के लिए ???कहतीं, वह कहता, ‘‘मुझ?े खेलने दो. मुझे घर का काम करने की कहां जरूरत है? आप लोग हो न, घर को संभालने के लिए.’’

मम्मी फिर कहतीं, ‘‘यदि कुछ काम नहीं करोगे तो जिम्मेवार कैसे बनोगे? पढ़ाई के साथसाथ घर का कामकाज भी जरूरी होता है. घर का कामकाज करने से हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है.’’ परंतु चिंटू को मां की बातें बेकार की लगती थीं और वह उन्हें अनसुनी कर के अपने खेलकूद और मटरगश्ती में व्यस्त रहता था.

पिछले कुछ दिनों से चिंटू की मम्मी का स्वास्थ्य ठीक नहीं था. चिंटू के पापा को औफिस में बहुत काम रहता था इसलिए घर की कुछ जिम्मेदारी चिंटू पर आ पड़ी थी. उस दिन सुबह उसे बुला कर मम्मी ने कहा, ‘‘बेटा चिंटू, घर में राशन खत्म हो गया है. मैं लिस्ट बना देती हूं, तुम पास की दुकान से जा कर सब सामान ले आओ.’’ कुछ ही देर बाद चिंटू की मम्मी ने एक लिस्ट बना कर चिंटू को थमा दीं. मरता क्या न करता, मजबूरी आ पड़ी थी. चिंटू शौपिंग के लिए थैला ले कर बाजार की ओर चल पड़ा.

बाजार जा कर उस ने दुकानदार को लिस्ट पकड़ा दी और कहा, ‘‘भैया, जो सामान इस लिस्ट में लिखा है वह सब मुझे दे दो.’’ इस के बाद वह चुपचाप मोबाइल पर गेम खेलते हुए एक ओर खड़ा हो गया. दुकान वाले ने लिस्ट देख कर सामान दे दिया. चिंटू ने उस सामान को देखा तक नहीं. बस बिल देख कर सामान के पैसे दे दिए और फिर वह सामान ले कर घर की ओर चल पड़ा.

घर पहुंचते ही चिंटू ने अपनी मम्मी से कहा,‘‘देखो मम्मी, मैं सब सामान ले आया हूं. अब यह कभी मत कहना कि मैं काम नहीं करता.’’

चिंटू की मां चिंटू की बात सुन कर मुसकराते हुए बोलीं, ‘‘कभी नहीं कहूंगी. तू तो मेरा राजा बेटा है. भले ही तुम शरारती हो परंतु समय आने पर अपनी जिम्मेदारी निभाते हो, यही सब से अच्छी बात है. चलो, अब हम दोनों मिल कर यह देख लें कि सामान पूरा है कि नहीं और फिर बिल भी चेक कर लेते हैं कि दुकान वाले ने सब चीजों के सही दाम लगाए हैं कि नहीं.’’ इस के बाद चिंटू और उस की मम्मी दोनों मिल कर सामान चेक करने लगे. चिंटू थैले में से सामान निकाल कर दिखाता था और उस की मम्मी लिस्ट में से उस के रेट चेक कर रही थी. कुछ ही देर में चिंटू और उस की मम्मी ने सारा सामान चेक कर लिया परंतु यह सब करतेकरते चिंटू की मम्मी थक गई थीं. कई दिनों के बुखार के कारण उन का शरीर कमजोर हो गया?था.

मम्मी ने चिंटू से कहा, ‘‘बेटा चिंटू, थोड़ी चाय बना दो और चाय के साथ मुझे वह बिस्कुट भी दे दो, जो तुम अभी बाजार से लाए हो.’’ चिंटू मम्मी के द्वारा की गई प्रशंसा से बहुत खुश व उत्साहित था. वह जल्दी से रसोई में गया और दो कप गरमागरम चाय बना कर ले आया. उस ने अपनी मम्मी को चाय के साथ बिस्कुट का पैकेट खोल कर कुछ बिस्कुट भी दिए. फिर वह स्वयं भी बिस्कुट खाने लगा क्योंकि उसे भी भूख लगी थी.

जैसे ही चिंटू ने बिस्कुट अपने मुंह में रखा उसे स्वाद कुछ अजीब सा लगा. चिंटू अपनी मम्मी से बोला, ‘‘मम्मी, जब आप यही बिस्कुट बाजार से लाती हैं, तो वह मुझे अधिक स्वादिष्ट लगता है.’’ मम्मी मुसकरा कर बोलीं, ‘‘यह सच है कि मां के हाथों का खाना अधिक स्वादिष्ठ लगता है परंतु इस समय यह बिस्कुट स्वादिष्ठ नहीं लगने का यह कारण नहीं है. मुझे लगता है कि यह बिस्कुट पुराना है इसलिए इन का स्वाद बिगड़ गया है.’’

‘‘यानी कि यह इस के एक्सपायरी डेट होने के कारण हुआ है. यह तो गलत है. दुकानदार को मुझे ऐसे बिस्कुट नहीं देने चाहिए थे.’’ चिंटू थोड़ा जोश में आ कर बोला. मम्मी बोलीं, ‘‘हां, यह ठीक है कि दुकानदार को ऐसे बिस्कुट नहीं देने चाहिए थे पर बेटा, इस में तुम्हारी भी गलती है. अधिकतर दुकानदार अपना माल बेचने के लिए ऐसा करते हैं. ऐसे में जागरूक ग्राहक एक्सपायरी डेट देख कर ही सामान खरीदते हैं. चूंकि तुम्हें ऐसा कोई अनुभव नहीं था इसलिए तुम बिना देखे ही सब सामान ले कर आए होगे.’’

चिंटू उदास हो गया क्योंकि मम्मी की बात सच थी. वह बोला, ‘‘मम्मी, काश कि मैं ने आप की बात मानी होती और घर के कामकाज में हाथ बंटाया होता तो आज मुझे भी इस बात की जानकारी होती कि हमें सब सामान, खास कर दवाइयां और खानेपीने का सामान, एक्सपायरी डेट देख कर ही खरीदना चाहिए.’’

चिंटू को उदास देख कर मम्मी बोलीं, ‘‘बेटा, इस में इतना उदास होने की बात नहीं है. ऐसी गलती सभी करते हैं. लाओ, मैं सारे सामान की एक्सपायरी डेट चेक कर लूं. यदि किसी में गड़बड़ी हुई तो तुम दुकान पर जा कर वह सामान लौटा आना तथा उस के बदले में दूसरा सामान ले आना.’’ यह सुन कर चिंटू थोड़ा घबरा गया और बोला, ‘‘मम्मी, क्या दुकानदार अपना बेचा हुआ सामान वापस ले लेगा? कहीं उस ने मुझ से झगड़ा किया तो?’’

मम्मी बोलीं, ‘‘हां, यदि दुकानदार नासमझ और झगड़ालू किस्म का हुआ तो वह ऐसा कर सकता है. ऐसे में तुम चुपचाप घर चले आना. फिर हम उस चीज की कंपनी वालों से बात करेंगे और वे हमारी समस्या का समाधान अवश्य निकालेंगे क्योंकि उन्हें उपभोक्ता अधिकारों के नियमानुसार चलना पड़ता है.’’ चिंटू आश्वस्त हो गया. वह मम्मी के साथ मिल कर सभी वस्तुओं की एक्सपायरी डेट चेक करने लग गया, क्योंकि ऐसा कर के ही वह एक जागरूक उपभोक्ता बन सकता था. मन ही मन उस ने यह भी निर्णय लिया कि आगे से वह पढ़ाईलिखाई के साथसाथ अपने मातापिता का घरेलू कामकाज में भी हाथ बंटाएगा ताकि भविष्य में वह एक जिम्मेदार नागरिक बन सके.