हौप्पी मेढक को रंगों से डर लगता था. जब भी कोई ‘होली है’ बोलता, तो वह डर जाता.

‘क्या होगा यदि कोई मेरे ऊपर गंदा रंग फेंक दे?’ वह सोचता. होली नजदीक आती जा रही थी और हौप्पी का यह सोचसोच कर बुरा हाल होता जा रहा था.

एक दिन वह बड़बड़ा रहा था, ‘‘होली वा दिन मैं ऐसी जगह पर जा कर छिप जाऊंगा, जहां कोई मुझे ढूंढ़ न सके.’’

आखिरकार होली आ गई. सुबह से ही चारों ओर उत्सव जैसा माहौल था. हौप्पी ने सोचा, ‘मैं अपने घर में ही छिप जाता हूं. यदि मैं बाहर नहीं निकलूंगा, तो मेरे दोस्त मुझे भूल जाएंगे और मुझे रंग नहीं लगा पाएंगे.’ यह सोच कर हौप्पी ने खुद को अपने घर में ही छिपा लिया.

‘‘खट…खट…हौप्पी, दरवाजा खोलो,’’ दरवाजा खटखटाते हुए उस का दोस्त क्रोकी बोला.

‘‘ओह नो, अब मैं क्या करूं? यदि मैं ने दरवाजा नहीं खोला, तो वे दरवाजा तोड़ कर अंदर आ जाएंगे और मुझे रंगों से सराबोर कर देंगे.’’

वह दरवाजा खोलता उस से पहले क्रोकी ने दरवाजा खोल दिया और अंदर आ गया. वह चिल्लाया, ‘‘हैप्पी होली.’’ और थोड़ा सा रंग हौप्पी के चेहरे पर लगा दिया. हौप्पी कुछ बोल पाता उस से पहले क्रोकी ने ‘बाय’ कहा और दूसरे घरों में अपने दोस्तों के साथ रंग खेलने चला गया.

‘‘यह तो अच्छा हुआ कि मेरे चेहरे पर थोड़ा सा ही रंग लगा. यदि क्रोकी रंगों में नहला देता तो क्या होता?’’ हौप्पी बुदबुदाया और उस के सामने कई रंगों के खतरनाक चित्र बनने लगे.

वह सोचने लगा, ‘मैं सब को कैसे रोक सकता हूं? यह तो शुरुआत है. कई दोस्त आएंगे. यदि कोई रंगों की बालटी ले कर आ जाए, तो मैं खुद को कैसे बचाऊंगा? मुझे घर के बाहर छिपने की जगह ढूंढ़नी होगी. हां, यही सही रहेगा?’

हौप्पी ने अपने घर को बंद किया और तालाब की ओर चल पड़ा. लेकिन तालाब के पास पहुंच कर वह हैरान रह गया.

तालाब पर मछलियों का कब्जा था और सभी उस में शोरगुल मचा रही थीं उन्होंने तालाब को रंगों से भर दिया था और उस में खेलकूद रही थीं .

हौप्पी उस जगह से भागना चाहता था, लेकिन गोल्डी गोल्डफिश ने उसे देख लिया. बोली, ‘‘हौप्पी, हमारे रंगों भरे पानी में आ कर डुबकी लगा लो.’’

यह कह कर उस ने हौप्पी पर रंग फेंकना शुरू कर दिया. हौप्पी किसी तरह वहां से भाग पाया.

‘शरारती गोल्डी तो मुझे रंगों में सराबोर कर देती. वह तो अच्छा हुआ कि मैं वहां से भाग गया,’ हौप्पी सोच रहा था. लेकिन जब उस ने अपनी पैंट देखी, तो वह रंगों से रंगी हुई थी.

‘मेरी पैंट में ही रंग लगे हैं, मेरे शरीर में नहीं,’ सोचते हुए हौप्पी छिपने की दूसरी जगह तलाश करने लगा.

‘मैं किसी बिल में क्यों न छिप जाऊं?’ उस ने सोचा. पास ही एक बिल देख कर वह उस के अंदर चला गया.

‘‘देखो दोस्तो, कौन आया है? हम उसे रंगों से नहाते हैं, जल्दी आओ.’’ चूहों का एक झुंड वहां जमा हो कर शोर मचाने लगे.

हौप्पी वहां से भाग पाता, तभी चूहों ने उसे पकड़ कर एक रंगों से भरी बालटी में डाल दिया.

हौप्पी किसी तरह बालटी से बाहर निकला, एक लंबी सांस ली और बिल से निकल कर भागा.

‘अरे, ये चूहे कितने भयानक दिख रहे थे. मैं तो वहां मर ही जाता. वह तो अच्छा हुआ कि मेरे केवल पैर ही भींगे, थोड़ा सा ही रंग मेरी पैंट और शर्ट पर लगे. यदि मैं पूरी तरह उस बालटी में डूब जाता, तो पता नहीं क्या हो जाता. कितना डरावना था सब कुछ.’ हौप्पी वहां से भागते हुए सोच रहा?था.

वह भागते हुए एक बड़े बरगद के पेड़ के पास जा पहुंचा. वहां आसपास कोई नहीं था और चारों ओर शांति थी. वह पेड़ के पास चुपचाप बैठ गया. ‘‘ओह, अब मैं सुरक्षित हूं. मुझे इस जगह के बारे में पहले क्यों नहीं खयाल आया? यहां तो शांति ही शांति है. मुझे पहले ही इस जगह पर आ जाना चाहिए था.’’

तभी रंगों की बौछार शुरू हो गई और वह पूरी तरह सराबोर हो गया. उस ने मिनी मैना को हंसते हुए सुना. ‘‘हैप्पी होली, हौप्पी, तुम्हें रंगों में सराबोर कर मुझे बहुत मजा आया. कृपया बुरा मत मानो, होली में ऐसा ही होता है.’’

हौप्पी बहुत उदास और गुस्से में था. फिर उस ने सोचा, ‘यह तो अच्छा हुआ कि मिनी की बालटी बहुत छोटी थी और रंग भी हलके थे. यदि बालटी बड़ी होती और उस में कीचड़ भरा होता, तो क्या होता?’

दोपहर हो गई थी. होली खेलने वाले थक कर अपनेअपने घर चले गए थे. हौप्पी खुश था कि उस का दिन इतना भी बुरा नहीं गुजरा, जितना वह सोचता था. वह भी अपने घर की ओर चला. रास्ते में उसे मीकू ने देखा और ताली बजाते हुए बोला, ‘‘ओ हौप्पी, आज तो तुम ने भी होली खेली है. तुम तो सिर से पैर तक रंगों में रंगे हुए हो.’’

घर पहुंच कर हौप्पी ने खुद को आईने में देखा, तब उसे पता चला कि वह तो ऊपर से नीचे तक अलगअलग रंगों में रंगा हुआ है. उस की शर्ट और पैंट भी. फिर बचा क्या?

‘यह तो बहुत अच्छा हुआ. मैं ने भी होली खेल ली और मुझे पता भी नहीं चला. रंग लगने में बुराई नहीं है. मैं तो बेकार ही डर रहा था,’ हौप्पी ने सोचा.

उस दिन उसे लगा कि रंग कोई डरने वाली चीज नहीं है. मना करते हुए भी उस ने होली का मजा ले ही लिया था.