गृहशोभा विशेष

मीकू चूहा एक बड़े घर में रहता था. लेकिन घर पुराना हो गया था. दीवारों की पेंट खराब हो गई थी. घर की छत से पानी टपकने लगा था.

एक दिन मीकू ने सोचा, ‘ मुझे अब नए घर में शिफ्ट कर जाना चाहिए. इस घर को बारबार ठीक करवाने का अब कोई फायदा नहीं है.’

उस ने जल्दी ही एक घर ढूंढ़ लिया और उस में जाने की तैयारी करने लगा. लेकिन शिफ्ट करना आसान काम नहीं था.

किचन का सामान, फर्नीचर और अलमारियों की पैकिंग करतेकरते वह थक गया जब कि अभी बहुत कुछ पैक करना बाकी था.

मीकू ने सोचा कि यदि अकेला मैं ही यह काम करता  रहूं, तो कई दिन लग जाएंगे. क्यों न अपने दोस्त कीकू की सहायता ली जाए.

कीकू, मीकू का सब से अच्छा दोस्त था. वह खुशीखुशी उस की सहायता करने के लिए तैयार हो गया. दूसरे दिन सुबहसुबह वह मीकू के घर पर पहुंच गया. दोनों ने मिल कर पैकिंग शुरू कर दी तो बहुत काम जल्दी हो गया.

अचानक मीकू को याद आया कि उस दिन औफिस में बहुत ही जरूरी मीटिंग है. उस ने कीकू से कहा, ‘‘मुझे जल्दी से औफिस पहुंचना है. तुम जितनी पैकिंग कर सकते हो कर लो, मैं शाम को आऊंगा तो दोनों मिल कर और काम पूरा कर लेंगे.’’

कीकू बोला, ‘‘चिंता मत करो. तुम अपने औफिस जाओ, मैं सारी पैकिंग कर लूंगा.’’

मीकू के जाते ही कीकू ने दरवाजा बंद कर दिया और पैकिंग शुरू कर दी.

थोड़ी देर बाद दरवाजे की घंटी बजी.

कीकू ने सोचा, ‘इतनी जल्दी मीकू वापस कैसे आ गया? चल कर देखते हैं कि कौन है.’

उस ने कीहोल से देखा, तो हैरान रह गया. बाहर एक मोटी बिल्ली खड़ी थी.

कीकू डर से कांपने लगा और वहीं बैठ गया. उस ने सोचा, ‘यह तो अच्छा हुआ कि दरवाजा खोलने से पहले मैं ने देख लिया.’

बिल्ली खिड़की पर पंजे मार रही थी और चिल्ला भी रही थी. कीकू ने परदा खींच दिया. वह बहुत डर गया था.

‘अब मेरा क्या होगा?’ कीकू सोच रहा?था, ‘मीकू ने मुझे अकेला क्यों छोड़ दिया?’

तभी किचन की खिड़की पर खटखटाने की आवाज आने लगी.

वह किचन में पहुंचा, तो देखा कि खिड़की खुली है और बिल्ली उस से अंदर आने की कोशिश कर रही है.

कीकू ने तेजी से एक जार उठाया और बिल्ली के सिर पर दे मारा. बिल्ली चिल्लाते हुए पीछे हट गई. कीकू ने तेजी से खिड़की बंद कर दी.

कीकू डरते हुए सोच रहा था, ‘यह बिल्ली मुझे खाए बिना यहां से नहीं जाएगी.’

कीकू ने सारी खिड़कियां और दरवाजे ठीक से बंद किए, ताकि बिल्ली अंदर न आ सके. फिर वह मीकू का इंतजार करने लगा.

लेकिन बिल्ली अभी भी दरवाजे और खिड़कियां खटखटा रही थी और कुछ बोल भी रही थी.

कीकू को अब यह चिंता होने लगी कि मीकू घर के अंदर कैसे आएगा. ‘आज हम दोनों को यह बिल्ली खा कर ही जाएगी,’ कीकू सोच रहा?था.

समय गुजरता जा रहा था. कीकू कोई काम भी नहीं कर पा रहा था. वह एक कोने में बैठा चुपचाप थरथर कांप रहा?था.

शाम को मीकू ने जब दरवाजा खटखटाया, तो कीकू ने जल्दी से दरवाजा खोल दिया. मीकू ने कीकू की स्थिति देखी, तो पूछ बैठा, ‘‘क्या हुआ कीकू? क्या तुम बीमार हो?’’

कीकू कुछ जवाब दे पाता तभी उस की नजर उसी बिल्ली पर पड़ी, जो मीकू के पीछे खड़ी थी. वह कीकू को गुस्से से देख रही थी. उस ने अपना पंजा उठाया.

कीकू डर से चिल्लाया, ‘‘मी…कू, तुम अपने पीछे देखो.’’ और कीकू बेहोश हो गया.

जब उसे होश आया, तो रात हो गई थी और मीकू सारी पैंकिंग कर चुका था. वह मीकू को आवाज लगाता, तभी उस ने देखा कि वही बिल्ली मीकू की सहायता कर रही है.

मीकू बोला, ‘‘सौरी कीकू, यह सब कुछ मेरी वजह से हुआ है. मुझे अपनी दोस्त किटी बिल्ली के बारे में तुम्हें पहले ही बताना चाहिए था. दरअसल, मैं जब औफिस जा रहा था तो मुझे लगा कि तुम अकेले ही पैकिंग करतेकरते परेशान हो जाओगे इसलिए तुम्हारी सहायता के लिए किटी को भेजा था. लेकिन तुम्हें बताना भूल गया. इसलिए तुम डर गए.’’

किटी ने मुसकराते हुए कहा, ‘‘ हां, मैं भी कीकू को यही बताना चाह रही थी लेकिन वह मेरी बात सुनना ही नहीं चाह रहा था.’’

सारी बातें सुन कर कीकू हैरान था. उस ने कभी एक चूहे और एक बिल्ली को दोस्त के रूप में नहीं देखा था.

कीकू और मीकू ने सारा सामान किटी की पीठ पर डाल दिया और सभी मीकू के नए घर की ओर चल पड़े.

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