आम के पेड़ ने उड़ते हुए कौओं के सरदार ब्लैकी को देख कर कहा, ‘‘आओ भाई, थोड़ी देर मेरी छांव में बैठ कर आराम कर लो.’’ यह सुन कर ब्लैकी ने कहा, ‘‘लेकिन तुम्हारी डालियों पर अब छांव कहां, जो हम बैठ कर आराम करें. तुम्हारी सारी पत्तियां तो पीली हो कर गिरती जा रही हैं. तुम हरेभरे नहीं रहे, ऊपर से सूखते जा रहे हो. असल में अब तुम बूढ़े हो गए हो.’’

‘‘हा…हा…हा…,’’ सारे कौए एक साथ हंस पड़े. ‘‘बुड्ढा कहीं का.’’ आम के पेड़ ने उन की बातों का बुरा नहीं माना. मुसकराते हुए बोला, ‘‘यह तो प्रकृति का नियम है, जो जवान है उसे एक न एक दिन तो बूढ़ा होना ही है. तुम सभी एक दिन बूढ़े हो जाओगे.’’

‘‘अपनी बकवास बंद करो, समझे,’’ ब्लैकी बोला, ‘‘हम चले इमली की उस घनी छाया में.’’ ‘‘ठीक है भाई.’’ कह कर आम का पेड़ कौओं को उड़ कर जाते हुए देखता रहा.

आम के पेड़ पर एक गिलहरी निक्की रहती थी. उस ने खानेपीने का सामान समेटा और पेड़ से नीचे उतरने लगी.

‘‘क्या हुआ निक्की बहन, कहां जा रही हो?’’ आम के पेड़ ने पूछा. ‘‘मैं दूसरे पेड़ पर रहने जा रही हूं,’’ निक्की बोली.

‘‘क्यों?’’ आम के पेड़ ने पूछा. ‘‘देखो, अब तुम तेजी से सूखते जा रहे हो, कुछ ही दिनों में पूरी तरह से सूख जाओगे और फिर एक दिन तुम आंधीतूफान से गिर जाओगे. बच भी गए तो गांव वाले तुम्हें काट ले जाएंगे. ऐसे में मैं अब और तुम पर घर बना कर नहीं रह सकती. मुझे माफ करना, मैं चली,’’ निक्की बोली.

‘‘ठीक है, अब तुम जाना ही चाहती हो तो मैं तुम्हें नहीं रोकूंगा.’’ आम के पेड़ ने दुखी मन से कहा. इस तरह सभी उसे छोड़ कर चले गए. उस के अगलबगल के पौधों ने भी उस से बातें करनी बंद कर दीं.

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अब आम का पेड़ दिनरात अपनी टहनियों को लटकाए चुपचाप खड़ा रहता और उस की पत्तियां तेजी से सूख कर झड़ती रहतीं. एक दिन गांव में पेड़पौधों पर रिसर्च करने वाले दो वैज्ञानिक आए. उन में से एक ने आम के पेड़ को देखा और कहा, ‘‘डा. स्मिथ, बेचारा यह पेड़ तो बूढ़ा हो गया. अब इस का कुछ नहीं हो सकता.’’

डाक्टर स्मिथ ने पेड़ को अच्छी तरह जांचते हुए कहा, ‘‘डा. जौन, यह पेड़ बूढ़ा नहीं हुआ, बल्कि यह बोट्रीयोडिप्लोडिया थियोब्रोमी नामक फफूंद से ग्रसित है.’’

‘‘ओह, यानी पेड़ को उलटा सूखा रोग हो गया है,’’ डा. जौन बोले. ‘‘हां, वही जिस में सब से पहले पत्तियों पर गहरे धब्बे बनते हैं, जिस की वजह से पत्तियां पीली हो कर गिरने लगती हैं और टहनियां नंगी हो कर ऊपर से नीचे की तरफ सूखने लगती हैं. हमें जल्द से जल्द इस पेड़ का इलाज करना होगा,’’ डा. स्मिथ ने कहा.

आम के पेड़ को कुछ आस बंधी. उसे लगा शायद वह ठीक हो जाएगा. ‘‘पर इस पेड़ की बीमारी कुछ ज्यादा ही बढ़ गई है. मुझे लगता नहीं है कि इस पेड़ को बचाया जा सकता है. चलिए, हम आगे चलें,’’ डा. जौन ने कहा, जिसे सुन कर आम का पेड़ बहुत निराश हो गया.

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‘‘हम इस पेड़ का इलाज करेंगे और इसे ठीक करने की पूरी कोशिश करेंगे,’’ डा. स्मिथ ने पेड़ को गौर से देखते हुए कहा. ‘‘कैसे?’’ डा. जौन ने पूछा.

‘‘टहनी जहां तक सूख गई है, उस के 10 सैंटीमीटर नीचे से पेड़ के स्वस्थ भाग को काट कर अलग करने के बाद कौपर औक्सीक्लोराइड का 15 दिनों के अंतर पर 2 बार छिड़काव कर के देखते हैं,’’ डा. स्मिथ बोले. ‘‘ठीक है, चलिए, इलाज शुरू करते हैं,’’ डा. जौन ने मुसकराते हुए कहा.

1-2 महीने के उपचार व परिश्रम से ही आम का पेड़ बिलकुल स्वस्थ हो गया. उस की टहनियों में नई पत्तियां निकल आईं. वह फिर से हराभरा हो कर झूमने लगा.

उसे हराभरा देख कर ब्लैकी अपने साथियों के साथ उस के पास आया और बोला, ‘‘हम उस दिन के अपने बुरे व्यवहार के लिए तुम से माफी मांगते हैं. हमें माफ कर दो.’’ ‘‘और मुझे भी माफ कर दो.’’ निक्की गिलहरी पेड़ पर चढ़ती हुए बोली.

आम का पेड़ सबकुछ भुला कर मुसकराते हुए बोला, ‘‘कोई बात नहीं, आप सब का फिर से स्वागत है.’’? नई जिंदगी पा कर आम का पेड़ खुशी से फूला नहीं समा रहा था. वह दिल की गहराइयों से डाक्टरों को धन्यवाद दे रहा था.