गृहशोभा विशेष

उस शाम रवि के पिताजी थोड़ी जल्दी घर आ गए. इस समय रवि घर में अकेला ही रहता है, यह उन्हें मालूम था. लेकिन वे यह देख कर हैरान रह गए कि घर में कोई नहीं था. घर की सारी बत्तियां जल रही थीं, पंखे और टीवी भी चल रहे थे. रवि कहीं दिखाई नहीं दे रहा था. पिताजी के कई बार पुकारने पर वह आंगन से आया. पिताजी ने उस से पूछा, ‘‘तुम कहां थे?’’

रवि ने उत्तर दिया, ‘‘पापा, मैं आंगन में खेल रहा था.’’

‘‘तो घर की सारी बत्तियां क्यों जल रही हैं और पंखे किस के लिए चल रहे हैं? तुम से कितनी बार कहा है कि जब जरूरत न हो तो सारी बत्तियां, पंखे आदि बंद कर दिया करो.’’ ‘‘सौरी पापा, मैं बाहर जाते समय भूल गया था,’’ रवि ने कहा.

उस के पिताजी ने कहा, ‘‘रवि, यह कोई साधारण बात नहीं है कि तुम इसे भूल जाओ. जानते हो, ये बत्ती और पंखे कैसे चलते हैं?’’ ‘‘हां पापा, बिजली से,’’ रवि ने कहा.

‘‘और बिजली कहां से आती है?’’ ‘‘बिजली तो तारों से आती है,’’ रवि ने सोचते

हुए कहा. ‘‘और तारों में बिजली कहां से आती है?’’ पिताजी ने पूछा.

‘‘बिजली घर से,’’ रवि आत्मविश्वास से बोला. ‘‘बहुत अच्छा,’’ पापा भी खुश हुए. ‘‘लेकिन बिजली घर में बिजली कहां से आती है?’’kids stories

‘‘वहां बिजली बनती है,’’ रवि बोला. ‘‘बिलकुल ठीक, पर क्या तुम्हें मालूम है कि बिजली बनती कैसे है?’’

‘‘नहीं पापा,’’ रवि ने कहा. ‘‘ठीक है, मैं तुम्हें बताता हूं,’’ पिताजी ने उसे पास बैठाते हुए कहा, ‘‘ बिजली, कोयले अथवा खनिज तेल को जला कर बनाई जाती है और इसे बनाने में बहुत खर्चा आता है जबकि सरकार जनता को इसे सस्ते दर पर देती है. चूंकि इस पर सरकार का बहुत खर्च आता है इसलिए सरकार को अपने कुछ महत्त्वपूर्ण योजनाओं में कटौती करनी पड़ती है. इस के लिए हमें क्या करना चाहिए?’’

‘‘हमें बिजली खर्च कम करनी चाहिए,’’ रवि बोला. ‘‘बिलकुल ठीक, हमें बिजली वहीं खर्च करनी चाहिए, जहां उस की आवश्यकता हो. इस प्रकार बचाई गई बिजली का उपयोग अन्य आवश्यकतओं को पूरा करने के लिए किया जा सकता है. जैसे उसे गांवों में किसानों को दिया जा सकता है ताकि उस का उपयोग खेती में किया जा सके.’’

रवि बड़े ध्यान से उन की बातें सुन रहा था. पिताजी ने आगे कहना शुरू किया, ‘‘ लेकिन बिजली के दुरुपयोग को रोकने का सब से बड़ा कारण दूसरा ही है.’’

‘‘वह क्या पिताजी?’’ ‘‘ज्यादातर बिजली कोयले से बनती है. लेकिन कोयला का हमारे यहां सीमित भंडार है और जब यह भंडार समाप्त हो जाएगा तो हम बिजली नहीं बना पाएंगे. इसलिए हमें बिजली को बचाने की कोशिश करनी चाहिए और इस का उपयोग सिर्फ आवश्यकता के अनुसार ही करना चाहिए.’’

रवि ने पूछा, ‘‘क्या हम पेट्रोल से बिजली नहीं बना सकते?’’

‘‘बना तो सकते हैं पर पेट्रोल बहुत ही महंगा होता है क्योंकि पेट्रोल बाहर के देशों से मंगवाना पड़ता है और हमें इस के लिए विदेशी रुपयों से भुगतान करना पड़ता है. हमें विदेशी रुपए तभी मिलते हैं, जब लोग हम से सामान खरीदते हैं और यह संतुलित तब हो सकता है, जब हम से अधिक सामान खरीदे जाएं. पेट्रोल का भंडार भी सीमित है और यदि हम सावधान नहीं रहेंगे तो एक दिन ऐसा आएगा जब संसार में न कोयला रहेगा और न ही पेट्रोल. कोयले और पेट्रोल की जगह पानी के प्रवाह से पनबिजली भी बनाई जाती है. अत: पनबिजली बनाने में सस्ती पड़ती है पर उस के लिए बांध बनाना और मशीन आदि लगाना बहुत महंगा पड़ता है और यह वहीं लगाई जा सकती है जहां पानी पर्याप्त मात्रा में हो. आजकल आणविक शक्ति से भी बिजली बनाई जाती है पर उस में भी दूसरे प्रकार की कठिनाइयां हैं और इस में जोखिम भी बहुत है.’’ तभी बिजली चली गई तथा चारों ओर अंधेरा छा गया. रवि डर गया तो पिताजी ने तुरंत एमर्जेंसी लाइट जला दी.

पिताजी ने कहा, ‘‘बिजली एक प्रकार की ऊर्जा या शक्ति है, सारी ऊर्जा रवि से आती है.’’ ‘‘मुझ से बिजली कैसे आ सकती है?’’kids stories

रवि हंसने लगा. पिताजी भी हंसने लगे. बोले, ‘‘तुम नहीं, रवि यानी सूरज. सूरज ही ऊर्जा का मूल स्रोत है. कोयला और पेट्रोल भी सूरज की गरमी से ही बने हैं. एमर्जेंसी लाइट की बैटरी भी सूरज की रोशनी से चार्ज होती है. सूरज की रोशनी की कोई कीमत नहीं होती और इस के भंडार के समाप्त होने का भय अभी नहीं है.

‘‘अत: सूर्य की किरणों से बनने वाली बिजली सब से सस्ती और सब से अच्छी होती है. क्योंकि इस से धुंआ नहीं होता और किसी प्रकार का प्रदूषण नहीं फैलता. आजकल सूरज की रोशनी अर्थात सौर ऊर्जा का उपयोग बिजली के सारे उपकरण चलाने के लिए किया जा सकता है और इस से बहुत पैसा बचाया जा सकता है. अच्छा बताओ, सौर ऊर्जा के उपयोग से और कौन से लाभ हैं?’’ रवि ने झट से उत्तर दिया, ‘‘ इस से प्रदूषण नहीं होता.’’ ‘‘ठीक कहा, इसलिए हमें इस ऊर्जा का उपयोग अधिक से अधिक करना चाहिए और कोयला तथा खनिज तेल से बनी ऊर्जा का कम,’’ पिताजी ने कहा.

फिर उन्होंने रवि से पूछा, ‘‘लेकिन अभी हमें क्या करना चाहिए?’’ रवि ने कहा, ‘‘हमें बिजली का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए. पापा, मैं वादा करता हूं कि अब मैं कभी भी बिजली का दुरुपयोग नहीं करूंगा और इस का कम से कम उपयोग करने की कोशिश करूंगा.’’

पिताजी ने हंसते हुए कहा, ‘‘ठीक है, यह है रवि यानी तुम्हारा वादा और आकाश के रवि का वादा है कि वह हमें बिना खर्च के स्वच्छ, शुद्ध और पर्यावरण प्रदूषण से मुक्त ऊर्जा देता रहेगा.’’

VIDEO : ट्रांइगुलर स्ट्रिप्स नेल आर्ट

ऐसे ही वीडियो देखने के लिए यहां क्लिक कर SUBSCRIBE करें गृहशोभा का YouTube चैनल.

आप इस लेख को सोशल मीडिया पर भी शेयर कर सकते हैं