गरमी शुरू हो गई थी. लपटू सियार और बैडी भेडि़ए ने एक नया व्यापार शुरू किया. दोनों मिनरल वाटर के नाम पर बोतलों में हैंडपंप और नल का पानी भर कर बेचने लगे.

‘‘भाई, तुम्हारा मिनरल वाटर तो ठीक है, न?’’ उस दिन उस की दुकान से पानी की बोतल खरीदने से पहले मीकू चूहे ने पूछा.

‘‘बिलकुल, यह एकदम ताजा और शुद्ध पानी है.

ये सीधे हिमालय पर्वत से लाया गया पानी है,’’ लपटू बोला.

‘‘लेकिन इस का स्वाद इतना खराब क्यों लग रहा है? जैसे कि यह पानी नल का हो.’’ मीकू ने मिनरल वाटर की बोतल से पानी पीते हुए कहा.

‘‘यह बिलकुल शुद्ध पानी है. शायद तुम्हारी तबीयत खराब है, इसलिए तुम्हें पानी का स्वाद ऐसा लग रहा है,’’ उस की बात काटते हुए बैडी ने कहा.

यह सुन कर मीकू बोतल ले कर वहां से चला गया.

‘‘वह हमें मिनरल वाटर का स्वाद बताने चला है,’’ लपटू ने मुंह बनाते हुए कहा.

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तब तक कई और जानवर भी उस की दुकान पर आ गए. गरमी बहुत थी, इसलिए दोनों ने नकली मिनरल वाटर बेच कर काफी अच्छी कमाई की.

कुछ ही दिनों बाद जब वन में कई जानवरों में उलटी, दस्त फैलने की शिकायतें मिलने लगीं. तो राजा शेरसिंह को चिंता हुई.

‘‘डायरिया तो दूषित पानी पीने या दूषित खाना खाने से होता है. लेकिन हम ने तो कुछ ही महीने पहले सभी पाइपलाइन चेक किए थे. पानी के नमूनों की भी जांच की थी, तब तो सब ठीक था.’’ शेरसिंह ने अपने मंत्री ब्लैकी भालू से कहा.

‘‘महाराज. कुछ और बात है. मैं पता लगाता हूं. आप चिंता न करें.’’ इतना कह कर ब्लैकी इस की खोज में जुट गया.

जब उस ने जांच की तो पता चला कि बीमार होने वाले वही जानवर थे, जिन्होंने लपटू और बैडी की दुकान से मिनरल वाटर खरीदे थे.

ब्लैकी तुरंत उन की दुकान पर पहुंचा. उसे देखते ही लपटू और बैडी सतर्क हो गए.

‘‘आइए मंत्रीजी. आज इस ओर कैसे आना हुआ?’’ लपटू ने जानना चाहा.

‘‘हमें शिकायत मिली है कि तुम्हारे यहां का मिनरल वाटर पीने से कई जानवर बीमार पड़े हैं. क्या यह सच है?’’ ब्लैकी ने पूछा.

‘‘यह सच बात नहीं है, मंत्रीजी. हमारे लिए तो इस जंगल के जानवर परिवार जैसे हैं. हम भला उन्हें दूषित पानी कैसे दे सकते हैं?’’ लपटू बोला.

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‘‘आप गरमी से आए हैं. ये लीजिए, ठंडा पानी पीजिए.’’ इतना कहते हुए बैडी ने पानी की एक बोतल बढ़ा दी.

पानी ले कर ब्लैकी बोला, ‘‘यह देखना होगा कि इन में शुद्ध पानी है या दूषित पानी.’’

‘‘हां, हां, क्यों नहीं. आप चाहें तो उस बोतल का पानी चेक कर सकते हैं,’’ लपटू ने कहा.

ब्लैकी भालू अपने साथ कुछ टेस्टटयूब लाया?था. पानी के कुछ नमूने ले कर वह चला गया.

‘‘बालबाल बच गए,’’ लपटू बोला.

‘‘वह तो अच्छा हुआ कि हम ने प्रदूषित पानी की सारी बोतलों को कल हटा दिया था. नहीं तो हम फंस जाते,’’ बैडी ने कहा.

‘‘यह तुम ने बहुत अच्छा किया, बैडी. अब दुकान बंद करते हैं. मैं काफी थक गया हूं. घर जा कर आराम करता हूं.’’ लपटू ने थकान भरे स्वर में कहा.

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‘‘तुम आराम करो. मैं कुछ दुकानों में नकली मिनरल वाटर की सप्लाई कर के आता हूं,’’ बैडी ने कहा.

लपटू जब घर पहुंचा तो उस की तबीयत ज्यादा बिगड़ चुकी थी. वह डा. डमरू के पास इलाज के लिए पहुंचा.

‘‘तुम्हारा मुंह और गला लाल और सूखा हुआ है. आंखें भी पीली हो गई हैं. तुम्हारे शरीर में पानी की कमी हो गई है. तुम्हें काफी पानी पीना होगा, नहीं तो अस्पताल में भरती कर स्लाइन की बोतल चढ़ानी होगी.’’

‘‘मैं अस्पताल से बहुत डरता हूं. मैं घर जा कर ही खूब पानी पीना शुरू कर देता हूं,’’ लपटू बोला.

जब वह घर आया तो वहां पानी की खाली बोतलें थीं. वाटर फिल्टर भी खराब पड़ा हुआ था.

‘‘अब मैं क्या करूं? इस पानी को भी अभी ही खत्म होना था,’’ लपटू भुनभुनाया.

इस के बाद उस ने बैडी को फोन लगाया.

‘‘ बैडी, आते समय कुछ मिनरल वाटर ले आना. घर में पीने का पानी नहीं है और मैं बाहर खरीदने नहीं जाना चाहता.’’

थोड़ी देर बाद बैडी मिनरल वाटर ले कर पहुंचा.

‘‘धन्यवाद बैडी, बहुत प्यास लगी है.’’ इतना कहते हुए वह पानी पी कर सो गया. जब वह सुबह उठा, तो उस की हालत और खराब थी. उसे उल्टियां और दस्त होने लगे. अब तो लपटू की कुछ समझ में नहीं आ रहा था.

‘‘लगता है कि इस गरमी में ज्यादा दौड़धूप करने से मेरी तबीयत बिगड़ गई है,’’ लपटू बोला.

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‘‘आज तुम दुकान पर मत जाओ लपटू, आराम करो,’’ बैडी ने उस की हालत देख कर कहा.

अभी लपटू बेसिन के पास मुंह धोने ही गया था कि उसे फिर से उल्टियां होने लगीं. जैसेतैसे बैडी उसे बेड तक ले गया.

‘‘मैं डा. डमरू को बुलाता हूं.’’ कह कर बैडी बाहर भागा.

‘‘प्रदूषित पानी पीने की वजह से इसे डायरिया हो गया है.’’ डा. डमरू ने लपटू की जांच करने के बाद कहा.

यह सुनते ही लपटू, बैडी एकदूसरे का मुंह देखने लगे. ‘‘दूषित पानी?’’

‘‘बैडी, तुम ने मुझे जो मिनरल वाटर दिया था, वह किस दुकान का था?’’ लपटू ने पूछा.

‘‘जंपी बंदर की दुकान का,’’ बैडी बोला.

‘‘अरे, उस के यहां भी तो हम दूषित मिनरल वाटर की सप्लाई करते हैं. इस का मतलब कि मैं अपना ही पानी पीने से बीमार पड़ा हूं.’’ लपटू सिर पकड़ कर बोला.

‘‘तो यह बात है. तुम दोनों की वजह से सभी जानवर बीमार पड़े हैं. तुम दूसरों की जिंदगी से खिलवाड़ करते रहे. आज खुद पर पड़ी है, तो तकलीफ का एहसास हो रहा है.’’ डा. डमरू ने उन की बात सुन कर कहा.

‘‘मुझे बचाने के लिए धन्यवाद डाक्टर डमरू. मैं वादा करता हूं कि अब कभी दूषित पानी नहीं बेचूंगा.’’ लपटू ने माफी मांगते हुए कहा.

बैडी को भी भूल का एहसास हो चुका था. उस ने भी माफी मांगी.

‘‘माफी दूंगा, लेकिन एक शर्त पर. ठीक होने के बाद तुम दोनों राजा शेरसिंह से माफी मांगोगे और फिर कभी ऐसी हरकत नहीं करोगे,’’ डमरू बोला.

लपटू बैडी ने तब वादा किया कि वे खुद को सुधारेंगे और वन के जानवरों को शुद्ध और साफ पानी ही सप्लाई करेंगे.