गृहशोभा विशेष

शाम हो गई थी. फिफी जुगनू चारों ओर उड़ रहा था. जल्दी ही वह वहां पहुंच गया जहां जोजो गधा काम कर रहा था.

‘‘जोजो, काफी शाम हो गई है. अभी भी तुम काम क्यों कर रहे हो?’’ फिफी ने पूछा.

‘‘मेरा काम अभी पूरा नहीं हुआ है,’’ जोजो ने कहा.

‘‘तुम कौन सा काम कर रहे हो?’’ फिफी ने हैरानी से पूछा.

‘‘कलियां जल्दी ही पेड़ों पर खिलने वाली हैं. मुझे पेड़ की जड़ों के पास एक छेद बनाने की जरूरत है ताकि उन्हें हमेशा पानी मिल सके,’’ जोजो ने कहा.

‘‘तुम्हें ये सब करने की जरूरत क्यों है?’’ फिफी ने पूछा.

‘‘अगर उन्हें पानी दिया जाएगा तो उन में बहुत सारे फूल खिलेंगे जो बाद में फल बनेंगे,’’ जोजो ने कहा.

फिफी ने जोजो के साथ थोड़ी देर और बात की और उस के बाद उड़ कर चला गया. उस के जाने के बाद जोजो ने भी जल्दी से अपना काम पूरा किया.

जोजो और फिफी अकसर मिला करते थे और बातें किया करते थे. फलों के मौसम के दौरान जोजो सभी जानवरों और पक्षियों को फल खिलाया करता था. जो कोई भी उस से मिलने आता, उस का स्वागत फलों से ही करता था.

हमेशा की तरह उस की मेहनत से पेड़ों पर बहुत सारे फल लद गए. वह अपने पेड़ों की देखभाल करने में अपना पूरा दिन बिताने लगा.

एक दिन सुबह जोजो जब उठा और बाहर आया तो उस ने बहुत सारे पके फलों को जमीन पर गिरा हुआ देखा, जो आधे खाए हुए थे. उसे बहुत दुख पहुंचा. उसे समझ नहीं आया कि रात में किस ने उस के फलों को बरबाद कर दिया. उस ने पता लगाने की कोशिश की, लेकिन उसे कुछ पता नहीं चला.

तभी उधर से गिन्नी बकरी गुजरी तो जोजो ने उसे गिरे और खाए हुए फल दिखाए. जोजो ने उस से पूछा, ‘‘क्या तुम बता सकती हो कि ऐसा किस ने किया होगा?’’

‘‘यह काम चमगादड़ों का है. वे ही रातों में उड़ते हैं और फल खाते हैं, बचे हुए फलों को दूर फेंक देते हैं,’’ गिन्नी ने कहा.

‘‘लेकिन मैं यहां फलों की रखवाली लगातार कर रहा था. मैं नहीं जानता कि वे कब आए,’’ दुख के साथ जोजो ने कहा.

‘‘वे जरूर तुम्हें देख रहे होंगे और तुम्हारे सोने का इंतजार कर रहे होंगे ताकि फलों को खाया जा सके,’’ गिन्नी ने कहा.

‘‘हां, तुम सही कह रही हो. मुझे भी लग रहा है कि ऐसा ही हुआ है. अब मैं पूरी रात बैठा करूंगा ताकि कोई अंदर न आ सके,’’ जोजो ने कहा.

‘‘लेकिन तुम अकेले ही इतनी बड़ी जिम्मेदारी को कैसे संभालोगे,’’ गिन्नी ने पूछा.

‘‘चिंता न करो, मैं संभाल लूंगा,’’ जोजो ने कहा. उस ने गिन्नी को कुछ फल दिए. वहां कुछ समय बिताने के बाद गिन्नी चली गई.

जोजो दिनभर इसी सोचविचार में डूबा रहा. शाम को जब फिफी जोजो से मिला, तो उस ने जोजो से पूछा, ‘‘क्या हुआ जोजो, तुम इतने उदास क्यों हो?’’

‘‘बीती रात पेड़ के सभी फलों को चमगादड़ों ने बरबाद कर दिया,’’ जोजो ने पूरी घटना का जिक्र फिफी से किया.

‘‘चिंता न करो, जोजो. हम एकसाथ मिल कर कुछ सोचते हैं,’’ फिफी ने कहा.

‘‘लेकिन तुम क्या कर सकते हो? तुम तो बहुत ही छोटे हो,’’ जोजो ने उस का मजाक उड़ाते हुए कहा.

‘‘मैं बहुत कुछ कर सकता हूं. थोड़ा इंतजार करो और देखो,’’ फिफी ने कहा और चला गया.

जैसे ही शाम हुई जोजो चिंतित हो गया. वह बाहर परेशान हो कर फिफी के आने का इंतजार करने लगा और सोचने लगा कि आगे क्या किया जाए. कुछ देर में फिफी आ गया. उस के साथ बहुत सारे दोस्त जुगनू थे.

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‘‘आज की रात हम सब तुम्हारी मदद करेंगे,’’ फिफी ने कहा.

‘‘तुम ऐसा कैसे करोगे?’’ जोजो ने पूछा.

‘‘थोड़ा इंतजार करो और देखो,’’ फिफी ने कहा.

जोजो ने देखा, सभी जुगनू अलगअलग पेड़ों पर जा कर बैठ गए. आधी रात के करीब बंटी और उस के दोस्त पेड़ों की ओर आए. जैसे ही वे पेड़ों के निकट आए जुगनुओं ने जलना शुरू कर दिया. हर पेड़ रात में तेज रोशनी से जगममाने लगा. चमगादड़  रोशनी में नहीं देख सकते थे. वे डर गए और वहां से भाग गए. सभी जुगनू पेड़ों पर कुछ देर तक रुके रहे और जब चमगादड़ चले गए तो वे आराम करने लगे.

सुबह में फिफी ने जोजो को बताया,‘‘चमगादड़ों का झुंड अब नहीं आएगा और तुम्हें परेशान नहीं करेगा. चमगादड़ रोशनी में नहीं देख पाते हैं. अब वे सोचेंगे कि पेड़ जलते हैं, इसलिए वे नहीं लौटेंगे.’’

‘‘जो कुछ भी तुम कह रहे हो, हो सकता है कि सच हो. लेकिन वे कुछ दिनों बाद लौट सकते हैं,’’ जोजो ने कहा. लेकिन जोजो चमगादड़ों के लौटने की बात को ले कर निश्चित भी नहीं था.

‘‘चिंता न करो. हम भी यहां कुछ दिनों के लिए रहेंगे और तुम्हारे पेड़ों की देखभाल करेंगे. जब चमगादड़ों को भरोसा हो जाएगा कि पेड़ हर रात जलते हैं तो वे फिर कभी ?नहीं आएंगे,’’ फिफी ने फिर जोजो को भरोसा दिलाया.

‘‘तुम सब का बहुत एहसान होगा. तुम्हारी इस दया के बदले मैं कुछ नहीं दे सकता,’’ जोजो बोला.

‘‘तुम ने तो पहले ही अपने फल हमें खिला दिए हैं,’’ फिफी ने कहा.

‘‘अब चिंता न करो. अब से हम यहीं रहेंगे,’’ फिफी ने कहा. वह अपने दोस्तों के साथ फल पकने तक पेड़ों की सुरक्षा करता रहा.

जब फल तैयार हो गए तो जोजो उन्हें तोड़ कर बाजार में बेच आया. जोजो ने कुछ फल फिफी और उस के दोस्तों को भी दिए. फिफी के दोस्त फल खा कर बहुत खुश हुए और जोजो यह सोच कर बहुत खुश था कि उस के दोस्त फिफी ने कैसे अपनी बुद्धि से उस के बगीचे और पेड़ों को बचाया था.