गृहशोभा विशेष

बहुत पहले तिब्बत में एक मंत्री रहता था. उस का नाम लौंपो घार था. वह अपने ज्ञान और बुद्धि के लिए बहुत प्रसिद्ध था. उस का एक सीधासादा बेटा भी था. लौंपो घार अपने बेटे के भविष्य को ले कर बहुत चिंतित रहता था.

‘मुझे उस की बुद्धि और समझ की अवश्य ही जांच करनी चाहिए ताकि उसे होनहार बनाया जा सके,’ लौंपो घार ने सोचा. अगले दिन लौंपो घार ने अपने बेटे को बुलाया और कहा, ‘‘बेटा, इन सौ भेड़ों को शहर ले जाओ और जौ की सौ बोरियां ले आओ. लेकिन ध्यान रखना कि तुम्हें भेड़ों को बेचना नहीं है.’’

उस का बेटा भेड़ों को ले कर शहर चला गया, लेकिन वह नहीं जानता था कि बिना भेड़ों को बेचे जौ की सौ बोरियां कैसे लाएगा. एक लड़की जो पास से गुजर रही थी, उस ने पूछा, ‘‘तुम इतने उदास क्यों हो?’’

‘‘मुझे भेड़ों को बेचे बिना.? जौ की सौ बोरियां लानी है, नहीं तो मेरे पिताजी मुझे घर में घुसने नहीं देंगे,’’ लड़के ने उदास हो कर बताया. ‘‘तुम इन भेड़ों के ऊन क्यों नहीं बेच देते? उस रुपए से तुम आसानी से जौ की बोरियां खरीद सकते हो,’’ लड़की ने सुझाया.

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लड़के का चेहरा इस सुझाव से चमक उठा और उस ने वही किया जैसा कि लड़की ने कहा. वह खुश हो कर घर लौटा और अपने पिताजी को सबकुछ बताया. लेकिन लौंपो घार अपने बेटे को एक और चुनौती देना चाहते थे.

‘‘तुम जरूर थक गए होगे. जाओ, अब सो जाओ,’’ उन्होंने कहा. अगले दिन उन्होंने अपने बेटे को बुलाया और कहा, ‘‘इन भेड़ों को फिर शहर ले जाओ और बिना इन्हें बेचे मेरे लिए फिर से सौ बोरी जौ ले आओ.’’

लड़का एक बार फिर शहर गया. इस बार वह बड़ी उत्सुकता से उसी लड़की का इंतजार करने लगा. लड़की आई तो उस ने उसे सारी बात बताई. ‘‘तुम इन भेड़ों के सींग को काट कर बेच दो? उन से तुम्हें रुपए मिल जाएंगे,’’ लड़की ने सुझाव दिया.

लड़के ने वही किया जैसा कि लड़की ने कहा था, और जौ की बोरियां ले कर घर लौटा. लौंपो घार प्रभावित हुआ, लेकिन अगले दिन उन्होंने अपने बेटे से कहा, ‘‘मुझे पांच फुट लंबी एक राख की बनी हुई रस्सी ला दो.’’

लड़के ने इस बारे में लड़की को बताया. लड़की ने एक लोहे की पट्टी पर पांच फुट लंबी एक रस्सी बांध कर इसे जला दिया. पट्टी पर रस्सी के आकार की सिर्फ राख रह गई. वह पट्टी के साथ राख वाली रस्सी ले कर लौंपो घार के पास आई और बोली, ‘‘राख की बनी रस्सी यह रही. अब आप को इसे पहनना है.’’

लौंपो घार सोचने लगे, ‘राख तो मेरे छूते ही पलभर में गायब हो जाएगी. राख की रस्सी को पहनने का तो सवाल ही नहीं उठता.’ लौंपो घार ने कहा, ‘‘मैं तुम्हारी बुद्धिमानी से

बहुत खुश हूं और मेरी इच्छा है कि तुम मेरे बेटे से शादी करो.’’ लौंपो घार अब बहुत खुश थे कि उन की एक बहू भी आ गई जो बुद्धिमानी और चतुराई में उन से भी आगे है. बुद्धिमान और सुंदर पत्नी को पा कर उन का बेटा भी बहुत खुश था.

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