सोनू और मोनू गिलहरी जैसलमेर के एक गांव में नीम के पेड़ के नीचे रहते थे. उन की एक बेटी थी, चुनिया. चुनिया बहुत ही शरारती और सीखने वाली बच्ची थी. वह दिन भर पेड़ पर इधरउधर उछलती रहती थी. कभीकभी वह पेड़ के कमजोर तनों पर लटक जाती और चिल्लाती, ‘‘मम्मी, मम्मी तुम देखो, मैं कैसे लटकी हुई हूं.’’ चुनिया के मम्मीपापा दौड़ कर जाते और उसे उतार कर अपने बिल में ले आते. वे उसे समझाते, ‘‘तुम यदि इसी तरह लटकती रही तो कभी अपना हाथपैर तोड़ लोगी. अभी तुम बहुत छोटी हो, तुम्हें ये सब चीजें नहीं करनी चाहिए.’’ वे डांटते.

जब भी चुनिया को डांट पड़ती, तो वह उदास हो जाती. लेकिन वह शरारत से बाज नहीं आती.

एक दिन चुनिया ने बगीचे में एक गोल और लंबी हरी चीज देखी. इस के ऊपर भूरी और उजली लाइनें बनी हुई थीं. उस ने अपनी मम्मी से कहा, ‘‘वहां वह क्या है?’’ चुनिया की मम्मी ने उधर देखते हुए कहा, ‘‘चुन्नी, वह तरबूज है.’’ मम्मी को जब अधिक प्यार आता तो वह चुनिया को चुन्नी कहती थीं.

चुनिया के आश्चर्य का ठिकाना न था. वह आंखें फाड़ कर तरबूज को देख रही थी. उस दिन तक न तो उस ने तरबूज देखे थे, न ही खाने का मौका मिला था. उस ने मम्मी से पूछा, ‘‘मम्मी, इस का स्वाद कैसा होता है?’’ मम्मी ने कहा, ‘‘खाने में तो यह बहुत मीठा होता है.’’

तरबूज को देख कर उस के मुंह में पानी भर गया. उस ने कहा, ‘‘मम्मी, मुझे यह खाना है.’’ ‘‘अभी नहीं, हम एक जरूरी काम से जा रहे हैं. वापस आ कर देखेंगे.’’ मम्मी ने कहा.

चुनिया चिल्ला पड़ी, ‘‘नहीं, मैं अभी तरबूज खाना चाहती हूं.’’

मम्मी ने उसे शांत करते हुए कहा, ‘‘हम वापस आते ही तुम्हें दिला देंगे.’’ लेकिन चुनिया अड़ गई, ‘‘मैं अभी जा कर एक टुकड़ा खा लेती हूं.’’

मम्मी ने गुस्से से चिल्लाते हुए कहा, ‘‘ तुम्हें वहां जा कर नहीं खाना चाहिए. तुम्हें अभी दुनिया का पता नहीं है. तुम वहां जा कर फंस सकती हो. चीजें जैसी दिखती हैं, वैसी ही नहीं होतीं.’’ तभी वहां चुनिया के पापा आ गए. वह एक पेड़ की डाल पर बैठे थे. वे यह सोच रहे थे कि अभी पेड़ के नीचे उतरना सुरक्षित है या नही. पापा ने चुनिया और उस की मम्मी की बातें सुन ली थीं. उन्होंने चुनिया से सावधान रहने को कहा.

वहां से जाने से पहले चुनिया की मम्मी उस से गले लगते हुए बोली, ‘‘मैं जब वापस आऊंगी तो तुम्हारे लिए तरबूज ला दूंगी. सावधान रहना और अपने बिल के पास ही खेलना.’’ चुनिया ने अपने मम्मीपापा को जाते हुए देखा. वे आंखों से ओझल हो गए. उस की नजर फिर से तरबूज पर जा कर जम गई. लेकिन उस के दिमाग से अभी भी मम्मीपापा की चेतावनी

और सलाह गई नहीं थी. उस ने तरबूजे से खुद को दूर करना चाहा. तरबूज उसे न दिखे इसलिए वह पेड़ की सब से ऊंची डाल पर जा कर बैठ गई. लेकिन तरबूज तो हर जगह, हर कोने से दिखाई दे रहा था. इस से तरबूज

खाने की उस की इच्छा और बढ़ती ही जा रही थी. वह इधर से उधर तो उछल रही थी लेकिन अपने दिमाग से तरबूज को नहीं निकाल पा रही थी. अंत में उस ने सोचा कि मैं तुरंत जा कर एक टुकड़ा खा कर वापस आ जाऊंगी. बिना देरी किए चुनिया पेड़ से नीचे उतर गई. वह तरबूज को कुतरने लगी. उसे ऊपरी मोटे छिलके का स्वाद अच्छा नहीं लगा. उस ने सोचा, ‘मम्मी ने तो कहा था कि इस का स्वाद मीठा है. लेकिन ऐसा तो है नहीं, मम्मी भी गलत नहीं हो सकतीं. अभी मुझे थोड़ा और खा कर देखना चाहिए.’

उस की मेहनत रंग लाई. वह तरबूजे के मीठे भाग तक पहुंच गई थी. वह तरबूजे के रसदार, मीठे और लाल रंग के भाग को खाने का मजा लेने लगी. उस ने आज तक इतने मीठे फल का स्वाद नहीं लिया था. वह फल के हर टुकड़े को चाव से खाने लगी. वह अपने आसपास से बेखबर हो चुकी थी. चुनिया तरबूजे को कुतरतेकुतरते दूसरे भाग तक पहुंच गई थी. तभी उस का मुंह किसी चीज में अटक गया. अब न तो वह मुंह हिला पा रही थी, न ही बाहर निकाल पा रही थी. उस ने छुड़ाने की कोशिश भी की पर सफल नहीं हुई. वह अपने पापामम्मी को बुलाने लगी. लेकिन पापामम्मी तो वहां थे ही नहीं.

Siraj Farooqi phans gayi chuniya

अब उसे पापामम्मी की सलाह और चेतावनी याद आने लगी. वे ठीक कह रहे थे. उन्होंने उसे पेड़ से उतरने से मना किया था. अब वह जाल में फंस चुकी थी. अब उस की सुनने वाला वहां कोई नहीं था. चिल्लाते रहने से उस का गला भी सूख गया था. उस ने लंबी सांसें लीं और कमजोर आवाज में बोली, ‘‘पापामम्मी, प्लीज, मुझे बचाओ.’’ तभी मम्मीपापा वापस आ गए. उन्होंने बिल में जब चुनिया को नहीं देखा, तो चिंतित हो गए. वे चुनिया को आवाज लगाने लगे. तभी मम्मी ने महसूस किया कि एक तरफ से कमजोर सी आवाज आ रही है. उस ने अपने पति को बुलाया.

उन्हें समझते देर नहीं लगी कि यह चुनिया की ही आवाज है. दोनों बगीचे की ओर दौड़ पड़े. चुनिया बहुत बुरी हालत में थी. उस का आधा सिर तरबूजे के अंदर घुसा हुआ था. वह अपने मम्मीपापा को चिल्ला रही थी. चुनिया के मम्मीपापा ने तुरंत तरबूजे को काट कर चुनिया को बचाया. चुनिया ने वादा किया कि अब वह कभी भी मम्मीपापा की सलाह या चेतावनी को मानने से मना नहीं करेगी और अपनी गलती के लिए माफी भी मांगी. मम्मीपापा ने उसे गले से लगा लिया और खुश थे कि उस की चुनिया सुरक्षित है.