गजवन में भयंकर सूखा पड़ा था और पानी खत्म हो गया था. इसी कारण जंबो हाथी और अन्य सभी हाथी सुंदरवन की ओर चल पड़े थे.

लेकिन उन के बड़े आकार के कारण सुंदरवन के जानवर डर गए थे और कोई उन से कुछ नहीं कह पा रहा था. एक दिन सुबह जंबो चुन्नू चूहे की मिठाई की दुकान पर गया.

‘‘कृपया मुझे पांच किलो जलेबी और 10 लीटर दूध दो,’’ उस ने कहा. दुकान पर मौजूद ग्राहक उस की बात सुन कर हैरान रह गए.

‘‘क्या तुम्हारे घर पर पार्टी है?’’ पिंटू बंदर ने पूछा, जो वहां बैठा था.

‘‘नहीं, कोई पार्टी नहीं है,’’ जंबो ने कहा.

‘‘तो तुम इतनी सारी जलेबियां और दूध क्यों खरीद रहे हो?’’ मिंटू भेड़ ने हैरानी से पूछा.

‘‘यह सिर्फ मेरे लिए है,’’ जंबो ने कहा तो वहां मौजूद सभी जानवर यह सुन कर हंसने लगे.

‘‘क्या तुम सच में इतना खाते हो? तब तो जल्दी ही हमारे लिए भी खाने की कमी हो जाएगी,’’ पिंटू ने हंसते हुए कहा.

‘‘यह बिलकुल हो सकता है. यह मोटा हाथी एक दिन में जितना खाता है, वह खाना हम सभी के लिए पूरे एक महीने का है. मैं नहीं जानता कि कहां से हमारे जंगल में आ गया,’’ गुस्से से मिंटू ने कहा.

‘‘वैसे तो वे सभी हाथी अच्छे हैं, पर यहां बेकार हैं और वे हमारा खाना भी खा रहे हैं. हम क्यों बाहरियों को अपने जंगल में आने दें और हर चीज को बरबाद करने दें?’’ टोटो कछुए ने कहा.

आंखों में आंसू लिए जंबो तुरंत मिठाई की दुकान पर  से चला गया.

चुन्नू ने उसे पीछे से पुकारा और कहा कि अपनी जलेबियां और दूध ले जाओ, लेकिन जंबो ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा.

जंबो उदास चला जा रहा था, तभी उसे उस का दोस्त मोटू हाथी मिला.

‘‘क्या बात है, जंबो?’’ मोटू ने पूछा.

‘‘मोटू, हमें यहां कोई भी पसंद नहीं करता. वे सभी हमारा मजाक उड़ाते हैं और सोचते हैं कि हम इन के किसी काम के नहीं हैं,’’ जंबो ने उदास हो कर कहा.

‘‘हां, हमारे आकार के कारण हमारे साथ न तो कोई खेल सकता है और न ही बात कर सकता है. वे सोचते हैं कि हम शरारती हैं लेकिन सच में ऐसा नहीं है. हम उन के लिए कुछ कर सकते हैं,’’ मोटू ने कहा.

‘‘हम क्यों न यहां के दूसरे जानवरों की सहायता करना शुरू करें. हो सकता है तब वे हमें आलसी

नहीं कहें और हमारे दोस्त बन जाएं,’’ जंबो बोला.

‘‘हम कैसे सहायता कर सकते हैं, जंबो? हम भारी सामान उठाने में अच्छे हैं. लेकिन जानवर सोचते हैं कि हम उन का सामान ले कर भाग जाएंगे और इसलिए कोई भी हमारी मदद लेना नहीं चाहेगा,’’ मोटू ने कहा.stories for kids

‘‘चलो, हम खुद के लिए कुछ करने की सोचते हैं, जो दूसरों के लिए भी मददगार साबित हो सके.’’ ‘‘सोचना जारी रखो, जंबो. अभी मैं खाना खाने जाऊंगा, फिर आऊंगा,’’ मोटू ने अपनी सूंड़ को लहराते हुए कहा.

जब पत्थरों से भरे एक सड़क पर मोटू चला जा रहा था तो जंबो को एक आइडिया सूझा. उस ने मोटू को वापस बुलाया.

‘‘क्या है, जंबो? तुम ने मुझे वापस क्यों बुलाया?’’ मोटू ने पूछा.

‘‘मोटू, क्या तुम ने इस बात पर ध्यान दिया कि जब तुम सड़क से जा रहे थे तो चट्टान और पत्थर जमीन में धंसते जा रहे थे?’’ जंबो ने पूछा.

‘‘ही, ही,’’ मोटू हंसा. ‘‘बिलकुल, क्योंकि मेरे जैसा वजन वाला कोई भी पत्थरों और चट्टानों पर चलेगा तो वे जमीन में धंसेंगे ही.’’

‘‘हां, लेकिन सड़क पर चलना इस से आसान हो जाएगा,’’ जंबो उत्साहित हो कर बोला.

‘‘चलना आसान होगा, तुम्हारा क्या मतलब है?’’ मोटू ने पूछा.

‘‘यहां सुंदरवन में बहुत सी सड़कें हैं जिन पर पत्थर और चट्टानें हैं, जिस की वजह से इन जानवरों को चलने में मुश्किलें आती हैं. हम क्यों न उन पर चलें और उन्हें चिकना और समतल बना दें?’’

‘‘लेकिन हमें इस का क्या फायदा होगा,’’ मोटू ने पूछा.

‘‘मोटू, किसी को हमेशा अपने बारे में ही नहीं सोचना चाहिए. चूंकि हम इसी जंगल में रह रहे हैं, इसलिए इस से हमें भी फायदा होगा. चुन्नू चूहे को हमारे घर तक आने में आसानी रहेगी और मिठाई की दुकान से हमारे और्डर को जल्दी से पूरा करना भी उस के लिए आसान होगा.’’

‘‘वाह, तब तो यह बड़ा अच्छा रहेगा. अब मुझे भूख लग रही है,’’ मोटू ने अपनी सूंड़ से अपने पेट को सहलाते हुए कहा और जंबो के प्लान को अपनी सहमति दे दी.stories for kids

जल्दी ही जंबो ने अन्य हाथियों को इस काम में मदद के लिए राजी कर लिया. जब जंबो और उस की टीम के सदस्य किसी खराब सड़क को देखते तो उसे चिकना और चलने लायक बनाने के लिए उस पर चलने लगते.

जब सुंदरवन के जानवरों को उन के अच्छे काम की जानकारी मिली तो उन्होंने भी जंबो और अन्य हाथियों के साथ बात की. उन्हें अन्य खराब सड़कों के बारे में बताने लगे और उन्हें चलने लायक बनाने के लिए मदद करने को कहा.

जंबो और अन्य हाथी इस काम के साथसाथ दूसरे काम भी करने लगे. अगर उन्हें किसी जगह के बारे में पता चलता कि वहां आग लगी है तो वे तुरंत अपनी सूंड़ में पानी भर कर आग बुझाने के लिए चल पड़ते थे. एक स्थान से दूसरे स्थान तक सामानों को पहुंचाने में भी वे मदद करने लगे.

जल्दी ही जंबो और अन्य हाथी जंगल में ‘सब की सहायता ब्रिगेड’ के रुप में जाना जाने लगे. वे जानवर जो पहले उन का मजाक उड़ाया करते थे और बातचीत नहीं करते थे, उन की प्रशंसा करने लगे और साथ रहने लगे.

उन सभी को विश्वास हो गया कि हम सब एक जैसे ही हैं और हमें अपना दिल और दिमाग खुला रखना चाहिए. उन के साथ भी हमें सहयोग करना चाहिए जो दिखने में हम से अलग हैं या जिन्हें हमारी जरूरत है.

VIDEO : पीकौक फेदर नेल आर्ट

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