गृहशोभा विशेष

भानु को रेलगाड़ी में बैठने का बहुत शौक था. वह जब भी रेल में सफर करता अपने पापा के साथ इंजन देखने जरूर जाता. उस का मन करता था कि वह भी इंजन चलाए.

एक दिन जब टीचर ने बताया कि उन्हें दिल्ली का रेल म्यूजियम दिखाने ले जा रहे हैं तो वह बहुत खुश हुआ.

घर आ कर भानु ने बताया, ‘‘मां, कल हम स्कूल की ओर से चाणक्यपुरी में नेशनल रेल म्यूजियम देखने जा रहे हैं. मुझे जल्दी उठा देना, मेरी बस न छूट जाए.’’

खुशी के मारे रात को भानु ठीक से सो भी नहीं पाया. सुबह को वह सब बच्चों के साथ रेल म्यूजियम जा पहुंचा. टीचर ने बताया कि यह 1977 में शुरू हुआ था.

रेल म्यूजियम में बच्चों ने विश्व का सब से पुराना भाप से चलने वाला इंजन देखा. डीजल व बिजली से चलने वाले इंजन भी वहां दिखाए गए थे. मैसूर व इंदौर के महाराजा के रेल कोच भी उन्होंने देखे.

विश्व प्रसिद्ध जौन मौरिस का 1914 में बनाया सब से पहला फायर इंजन और पटियाला की मोनोरेल भी केवल यहीं पर थी. इस के अलावा बच्चों ने रेल के नक्शे, चार्ट, किताबें जो 160 साल से ज्यादा का रेल का इतिहास बताती हैं, भी देखीं.

3डी शो के जरीए वहां रेल का इतिहास दिखाया गया, जिस से बच्चों को बहुत जानकारी मिली. सब से ज्यादा मजा उन्हें टौय ट्रेन में बैठ कर म्यूजियम की सैर करने में आया.

म्यूजियम देखने के बाद भानु अपने स्कूल की बस में आ कर बैठा तो उसे दुख हुआ. इतना अच्छा मौका मिला था, इतनी पास में इंजन खड़े थे फिर भी उन्हें चला कर नहीं देखा. वह अपनेआप को रोक नहीं पाया और

बस से उतर कर दोबारा म्यूजियम में घुस गया. उस के दोस्त निखिल ने पूछा, ‘‘कहां जा रहे हो?’’

उस ने झूठ बोल दिया कि उस की कैप अंदर छूट गई है, उसे लेने जा रहा है. अंदर जा कर वह सब की नजर बचा कर एक इंजन पर बैठ गया. स्टार्ट का बटन दबाते ही इंजन चालू हो गया और वह उसे ले कर गेट तोड़ते हुए भाग निकला.

बाहर निखिल उस के इंतजार में खड़ा था. इंजन की सवारी का लालच वह भी नहीं छोड़ पाया और कूद कर भानु के साथ ही बैठ गया. बड़ा अनोखा नजारा था. आज तक किसी ने रेल का इंजन सड़क पर दौड़ते हुए नहीं देखा था.

story for kids engine ride

सभी ट्रैफिक के बजाय इंजन को देखने लगे और इस चक्कर में कई एक्सीडेंट हो गए. भानु ने भी एक कार से बचाने के चक्कर में इंजन को एक फल के ट्रक से टकरा दिया. सारे फल सड़क पर बिखर गए. निखिल जोर से चिल्लाया, ‘‘भानु, जल्दी भाग, फल वाला चिल्लाता हुआ हमारे पीछे आ रहा है.’’

तेजी से भागने के चक्कर में भानु ने इंजन को रेडलाइट में से निकाल दिया. ट्रैफिक पुलिस वाले ने सीटी बजाई पर तब तक भानु का इंजन आगे निकल चुका था.

ट्रैफिक पुलिस वाले ने अगले चौराहे पर खबर कर दी, ‘‘एक इंजन सड़क पर तेजी से दौड़ रहा है. उस के कारण बहुत एक्सीडेंट हो रहे हैं, उसे रोको.’’

कुछ ही देर बाद निखिल चिल्लाया, ‘‘भानु, हमारे पीछे बाइक पर दो पुलिस वाले आ रहे हैं, जल्दी भाग.’’

‘‘पर जाऊं कहां? कोई जगह भी तो नहीं है,’’ भानु घबरा कर बोला. पास में एक बगीचा था. घबराहट में भानु ने इंजन को उसी में घुसा दिया.

‘‘भानु, बहुत बड़ा पेड़ है, इस से बच,’’ निखिल चिल्लाया.

पर भानु इंजन को उस पेड़ से बचा नहीं पाया. इंजन पेड़ से टकरा गया और झटका लगते ही भानु दूर जा कर गिरा.

आंखें खुलीं तो भानु ने अपनेआप को बस की सीट के नीचे गिरा पाया. बराबर में निखिल बैठा था.

उस ने पूछा, ‘‘क्या बात है, भानु? म्यूजियम देख कर इतना थक गए कि बस चलते ही सो गए और जरा सा झटका लगते ही नीचे गिर गए. चोट तो नहीं लगी?’’

‘‘तुम तो मेरे साथ इंजन में थे और हम तो गार्डन में थे, फिर यहां कैसे आ गए?’’ भानु ने हैरानी से पूछा.

‘‘इंजन, गार्डन… ये सब तुम क्या कह रहे हो, हम तो म्यूजियम देख कर वापस बस में जा रहे हैं. कोई सपना देखा क्या?’’ निखिल ने पूछा.

‘‘हां, रात को ठीक से सोया नहीं था, तो नींद आ गई,’’ भानु बोला.

‘अच्छा हुआ कि सपना था.’ भानु ने मन में सोचा और चैन की सांस ली.

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