अशोकवन में अन्य वर्षों की तरह इस वर्ष भी वाटर गेम होना था. इस गेम की तैयारी चल रही थी. नदी को सजाने के लिए साफसुथरा कर दिया गया था. दर्शकों के बैठने की तैयारी भी कर ली गई थी.

इस बार के मुख्य अतिथि थे, नीलवन के पिडी तेंदुआ. पिडी का स्वागत अशोकवन के मंत्री धारा हिरण ने किया. पिडी को सजी हुई कुर्सी पर बिठाया गया.

गेम की शुरुआत अशोकवन और नीलवन के बतखों के डांस से हुई. बतखों ने पानी में कई आकार बनाए और खूबसूरती से एक गोल घेरा

बना कर डांस किया. जब बतखों ने डांस करते हुए सुंदर फूल का आकार बनाया तो सभी ने जोरदार तालियां बजाईं. डांस खत्म होने के बाद वाटर पोलो गेम शुरू हुआ. बड़े जानवरों में नीलगाय, हिरन, भालू और अन्य जानवर इस गेम में भाग ले रहे थे. ये सभी पानी में कूद कर कबड्डी की तरह खेलने लगे.

नदी के एक कोने में खानेपीने की चीजें बेची जा रही थीं. शाम होतेहोते वन खूबसूरत रोशनियों से जगमगाने लगा.

इस साल एक नए गेम ‘बास्केट राइड’ की भी शुरुआत की गई थी, जिस में कछुओं और बतखों को भाग लेना था. कछुओं की टीम और बतखों की टीम को एक बास्केट को नदी के एक छोर से दूसरे छोर की ओर ले जाना था. फिर बतखों को तैरते हुए फूलों और फलों से इस बास्केट को भरना था. सोना बतख और टोनी कछुआ भी इस खेल में भाग ले रहे थे. सोना बहुत तेजी से फूल और फल बास्केट में डाल रही थी और टोनी कछुआ बास्केट को संभाल रहा था, ताकि फूल और फल नीचे न गिरें.

इस खेल में जीत उस टीम की होती, जो अधिक से अधिक फल और फूल ले कर सब से पहले नदी के दूसरे किनारे तक पहुंचती. टोनी बहुत तेजी से दूसरे किनारे की ओर जा रहा था, तभी उस का बास्केट उलट गया.

किंचू कछुआ बहुत आराम से, लेकिन सावधानी से चल रहा था, इसलिए वह दूसरे किनारे बास्केट ले कर पहुंचा और जीत गया. कई ने अपना संतुलन खोया और बीच में ही लुढ़क गए. टोनी बहुत दुखी था, लेकिन उस ने किंचू को बधाई दी. इस तरह खेलतेखेलते वाटर गेम पूरा हो गया. दूसरे दिन बोट रेस होना था.

चीनू गिलहरी और मीनू चूहा अच्छे दोस्त थे. दोनों नदी के किनारे रहते थे. चीनू पेड़ के ऊपर रहता था और मीनू पेड़ के नीचे. दोनों नदी के किनारे साथसाथ खेलतेकूदते थे. एक दिन चीनू बोला, ‘‘हम हर साल वाटर गेम देखते हैं, लेकिन कभी इस में भाग नहीं लेते.’’

‘‘मैं भी इस में भाग लेने की सोच रहा था, लेकिन हम दोनों बहुत छोटे हैं. बड़े खिलाडि़यों के साथ हमारा भाग लेना संभव नहीं है,’’ सीनू बोला. ‘‘कल बोट रेस होना है. क्यों न हम भी इस में भाग लें?’’ चीनू ने पूछा.

‘‘न तो हमारे पास बोट है और न ही हम बड़े खिलाडि़यों से जीत सकते हैं,’’ मीनू बोला. ‘‘जीतना या हारना महत्त्वपूर्ण नहीं है मीनू. बल्कि हम इस खेल के मजे लेंगे. यह तब हो सकता है, जब हम भी भाग लें,’’ चीनू बोला.

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‘‘ठीक है, लेकिन हम बोट कहां से लाएंगे? यदि हमें बोट मिल भी गए, तो हम उसे चलाएंगे कैसे. हम तो बहुत छोटे हैं,’’ मीनू ने कहा. ‘‘मुझे विश्वास है कि हम कुछ कर सकते हैं,’’

चीनू बोला. अचानक चीनू ने सामने खड़े बेल के पेड़ की ओर देखा, जिस में एक पका हुआ बेल लटक रहा था.

‘‘मिल गया आइडिया,’’ चीनू खुशी से चिल्लाया और मीनू के कान में फुसफुसाया. दोनों उस पेड़ के ऊपर चढ़ गए और कुछ बेल तोड़ कर नीचे फेंक दिया. दोनों ने मिल कर एक बेल के फल के बाहरी कठोर भाग को बास्केट जैसा बना लिया, जिस में वे आसानी से आ सकते थे.

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‘‘तैयार हो गया हमारा बोट. अब हमें पतवार की जरूरत है,’’ चीनू बोला. ‘‘मेरे पास लकड़ी की दो कलछियां हैं. क्या हम उन्हें पतवार की तरह उपयोग कर सकते हैं?’’ मीनू ने पूछा.

‘‘हां, हम उन का उपयोग पतवार की तरह कर सकते हैं,’’ चीनू बोला. फिर मीनू वे कलछियां ले आया और दोनों ने मिल कर उसे काटाछांटा और पतवार बना लिया. इस के बाद दोनों दिन भर उसी बोट से नदी में रेस का अभ्यास करने लगे. कुछ दिनों के अभ्यास के बाद दोनों को विश्वास हो गया कि वे रेस में भाग ले सकते हैं.

रेस वाले दिन सभी वहां पहुंच गए. पिडी और धारा, चीनू और मीनू को अपनी छोटी बोट के साथ वहां मौजूद देख हैरान रह गए. दूसरे जानवर उस का मजाक उड़ाने लगे.

रेस के शुरू होते ही चीनू और मीनू तेजी से पतवार चलाने लगे. उन का मुकाबला बड़े जानवरों से था. बड़ी टीम जब फिनिश लाइन के पास पहुंच गई थी, तब चीनू और मीनू आधी दूरी ही तय कर पाए थे.

जब दो टीमें फिनिश लाइन पर पहुंच गईं, तब भी चीनू और मीनू वहां तक पहुंचने के लिए पूरा जोर लगा रहे थे. विजेता टीम चीनू और मीनू का मजाक उड़ाने लगी. तभी धारा हिरन चिल्लाते हुए बोला, ‘‘तुम सभी आज एक खिलाड़ी हो इसलिए एकदूसरे का आदर करना भी सीखो. यह महत्त्वपूर्ण नहीं है कि कौन बड़ा है और कौन छोटा. महत्त्वपूर्ण तो यह है कि खेलने का उत्साह है कि नहीं, जो मीनू और चीनू ने साहस कर के दिखा दिया है.’’

तब तक चीनू और मीनू फिनिश लाइन पर पहुंच गए. हालांकि दोनों यह रेस नहीं जीत पाए थे, फिर भी बहुत खुश थे. पुरस्कार वितरण समारोह के समय पिडी तेंदुए ने कहा, ‘‘चीनू और मीनू ने अपना खुद का बोट बनाया. इस से साबित होता है कि वे आप सभी के साथ इस रेस में भाग लेने के लिए कितने उत्साहित थे. जीतना ही उन का लक्ष्य नहीं था. दोनों को इस उत्साह और साहस के लिए एक विशेष पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा. कृपया इन दोनों के लिए जोरदार तालियां बजाएं.’’

सभी ने खड़े हो कर दोनों के लिए तालियां बजाईं. चीनू और मीनू बहुत खुश थे. उन्होंने अन्य विजेताओं के साथ खूब मजे किए.