न आप कैदी, न ससुराल जेल
न आप कैदी, न ससुराल जेल

शादी के बाद नए घर में नए रिश्तों के साथ तालमेल बनाने के ये अहम सुझाव नई बहुएं जरूर जानें.

हाउसवाइफ नहीं हाउस हसबैंड
हाउसवाइफ नहीं हाउस हसबैंड

जब पति-पत्नी दोनों घर को संवारने के समान भागीदार हैं, तो घरेलू कामकाज की सारी जिम्मेदारी पत्नी के हिस्से में ही क्यों आती है? आइए, जवाब जानने की कोशिश करते हैं.

क्या है डबल बर्डन सिंड्रोम
क्या है डबल बर्डन सिंड्रोम

घर और बाहर की जिम्मेदारियों के बीच घिरी महिलाओं में एक बीमारी धीरे-धीरे दस्तक दे रही है. जानें इस से बचने के तरीके.

दें अपनों को तारीफ का तोहफा
दें अपनों को तारीफ का तोहफा

जिंदगी से हार चुके अपनों को मुसीबत से बाहर निकालने के लिए अगर इन बातों पर अमल किया जाए, तो सोच ही नहीं बल्कि जिंदगी जीने का नजरिया भी बदल जाएगा.

जीवन का मध्यांतर ठहराव से नहीं बदलाव से होगा
जीवन का मध्यांतर ठहराव से नहीं बदलाव से होगा

40-50 साल की आयु यानी जीवन का दोराहा. जरूरत है जीवन के सफर की लंबी, थकानभरी जिंदगी के बाद एक नई शुरुआत की.