तलाक यानी एक हंसते खेलते परिवार का टूट कर बिखर जाना. परिवार से जुड़े कितने ही लोगों की जिंदगी में दर्द और घुटन का पसरना. रिश्ता टूटने की कोई आवाज नहीं होती मगर इस का प्रभाव बहुत गहरा होता है. लंबे समय तक बच्चे इस हादसे से उबर नहीं पाते. ये अलग बात है कि दंपत्ति समझदार हों तो अपने रिश्ते की दरार का  प्रभाव बच्चों पर पड़ने से रोक सकते हैं. जैसा कि सुपरस्टार रितिक और उनकी एक्स वाइफ सुजैन ने किया.

रितिक और सुजैन की शादी 2000 में हुई थी. दोनों के दो बच्चे रेहान और रिदान हैं. दोनों ने साल 2014 में तलाक ले लिया था. 17  साल की खुशहाल शादीशुदा जिंदगी बिताने के बाद अचानक रितिक और सुजैन की तलाक की खबर ने सब को चौंका दिया था. सुजैन ने कहा था कि हम जिंदगी के ऐसे मोड़ पर पहुंच चुके थे जहां हमारा अलग होना ही बेहतर था. झूठे रिश्ते में रहने से बेहतर है कि अपने रिश्ते की असलियत को पहचानें.

दोनों ने तलाक भले ही ले लिया, लेकिन अब भी दोनों कई जगह साथ दिखते हैं. उन्हें अक्सर हौलीडे, इवेंट्स, पार्टी में साथ देखा जाता है. दोनों ने कई बार कहा भी है कि उन के बच्चे ही उन की प्राथमिकता है और उन के लिए दोनों साथ में डिनर करने और मूवी देखने साथ जाते हैं.

भारत की दिग्गज फार्मा कंपनी कैडिला फार्मास्यूटिकल्स के चेयरमैन राजीव मोदी अपनी पत्नी मोनिका मोदी से तलाक लेने जा रहे हैं.  गत 6  अक्टूबर को अहमदाबाद की फैमिली कोर्ट में मोदी दंपती ने एक दूसरे की सहमति से तलाक की अर्जी लगाई.

उन की शादी को 26 साल हो गए हैं. लेकिन पिछले दो महीने से राजीव और मोनिका दोनों के बीच मनमुटाव चल रहा था. यह मामला पुलिस तक भी पहुंचा था, जिसके बाद दोनों के बीच मनमुटाव की बात जाहिर  हुई. उन का एक 17 साल का बेटा भी है, जो राजीव मोदी के साथ ही रहेगा.

राजीव मोदी गुजारा भत्ता के तौर पर मोनिका को 200 करोड़ रुपये देंगे. तलाक की अर्जी में दोनों ने एकदूसरे पर किसी भी तरह का कोई आरोप नहीं लगाया है. अर्जी में लिखा गया है ‘अब हमें साथ रहना पसंद नहीं है, इसलिए हम तलाक चाहते हैं.’

वस्तुतः  रिश्ता टूटना कभी सुखकर नहीं होता. मन तन और धन के साथ बचपन पर भी बुरा प्रभाव पडता है. क्यों न अपने रिश्ते को थोड़ा सहेज कर चलें.  कुछ बातों का खयाल रखें तो शायद ऐसी नौबत ही न आये.

इस सन्दर्भ में रिलेशनशिप एक्सपर्ट मानव आहुजा कहते हैं कि जब दो लोग साथ रहने का फैसला करते हैं तो उन्हें आपस में सामंजस्य बैठाना पड़ता है. एकसाथ जीवन बिताने का फैसला लेना कोई छोटी बात नहीं है. जिंदगी में कईं ऐसे मोड़ आते हैं जब दोनों की सोच और ईगो टकराते हैं. कईं बार ऐसा लगता है कि सामंजस्य बैठाना मुश्किल हो रहा है तो लड़ाईयां भी हो जाती हैं. लेकिन दोनों को ही ये बात याद रखनी चाहिए कि कोई भी झगड़ा रिश्ते से बड़ा नहीं होता.

पैचअप के लिए ये कदम उठाएं

पार्टनर्स के बीच झगड़ा होना सामान्य है, लेकिन ये झगड़ा इतना नहीं बढ़ना चाहिए कि रिश्तों में दरार आ जाए. बहुत जरूरी है कि झगड़ों को आपसी प्रेम और संबंधों से बड़ा न होने दिया जाए.

अलग नहीं होंगे

जब आप अपना पार्टनर चुनते हो तो उस के साथ पूरा जीवन बिताने का निर्णय लेते हो. ऐसे में बहुत जरूरी है कि जब आपके संबंध सामान्य हों तभी आपस में ये कमिंटमेंट कर लें कि हम कभी अलग नहीं होंगे. अगर किसी ने गुस्से में कुछ बोल दिया या डांट दिया तो उसे बात को पकड़ कर नहीं बैठेंगे. ज्यादा समय तक एकदूसरे से नाराज नहीं रहेंगे.

झगड़े की जड़ पता लगाएं

जब झगड़ा खत्म हो जाए तो दोनों को बैठ कर सोचना चाहिए कि उन के बीच ये स्थिति क्यों आई, इस की जड़ क्या है. जिस की गलती है वह  अच्छी तरह इनालिसिस करने के बाद पैचअप की पहल करे. जब तक आप झगड़े की जड़ नहीं तलाशेंगे, बारबार झगड़े होंगे.

ईगो हावी न होने दें

झगड़े के बाद एकदूसरे से नाराज होना स्वाभाविक है, लेकिन ज्यादा इगोइस्टिक न बनें. ईगो भूल कर पैचअप कर लें.

निष्पक्ष और अनुभवी व्यक्ति से सलाह लें

कईं बार झगड़ा इतना बढ़ जाता है कि पार्टनर, रिश्ते में आई कड़वाहट को आपस में दूर नहीं कर पाते हैं.  ऐसे में किसी तीसरे व्यक्ति की सलाह लेना जरुरी हो जाता है. आप किसी व्यक्ति की सलाह इसलिए न लें कि वो आप को पसंद है. वो व्यक्ति ऐसा होना चाहिए जिस को झगड़ा होने या न होने से कोई फर्क न पड़े. जो सारी बातों को ध्यान से सुनने के बाद अपनी निष्पक्ष राय दे. अगर वह  व्यक्ति अनुभवी हो तो ज्यादा बेहतर रहता है, क्यों कि अपने पिछले अनुभवों से उस के लिए आप की स्थिति को समझना आसान होगा.

नकारात्मक बातें याद न करें

लड़ाई-झगड़ों में कईं बार ऐसे शब्द मुंह से निकल जाते हैं जो कानों में गूंजते रहते हैं. आप बैचेन हो जाते हैं कि आप के पार्टनर ने आप के साथ ये किया या ऐसा कहा. मानव स्वभाव ही ऐसा होता है कि वह एक्सट्रीम इमोशंस को याद रखता है, चाहे वे  खुशी के पल हों या दुःख के. आप को यह  सोचना चाहिए कि आप दोनों के बीच हमेशा अच्छी बातें ही होती हैं. झगड़ा तो कभीकभी ही होता है. तो ऐसी बातों को याद न करना ही बेहतर है.

बच्चों को शामिल करें

अगर झगड़ा अधिक बढ़ने लगे तो बच्चों को शामिल कर लें. बच्चे सामने होते हैं तो व्यवहार थोड़ा संयमित होता है.  गुस्से में भी व्यक्ति ऐसे शब्द बोलने से बचता है जिस का बच्चों पर गलत प्रभाव पड़े. ऐसे में पैचअप करना आसान हो जाता है.

अपनी गलती को ढूंढे

एकदूसरे पर दोष मढ़ने से अच्छा है कि अपनी गलतियां ढूंढे. झगड़े के बाद दोनों को सोचना चाहिए कि उन की गलती कहां थी. जहां अपनी गलती लगे उसे मानें और माफी मांग लें.

आत्म नियंत्रण है जरूरी

खुद पर नियंत्रण रखें कि चाहे कुछ भी हो जाए मैं झगड़ा करूंगा/करूंगी ही नहीं. जब एक को गुस्से आए तो दूसरा शांत हो जाए. गुस्से में अगर आप का साथी कोई ऐसी बात कह दे या ऐसा व्यवहार कर ले जिस से आप को तकलीफ पहुंचे तो आप उस का गुस्सा ठंडा होने के बाद उस से चर्चा करें.

दिमाग कहीं और लगाएं

अगर कोई बात आप दोनों के बीच झगड़े की वजह बन रही है तो उस से ध्यान हटा लें. इस से झगड़ा बढ़ने से रूक जाएगा और आपसी कड़वाहट भी कम होगी.

माफ करना सीखें

अगर आप के पार्टनर ने अपने कहे शब्दों या गलत व्यवहार के लिए माफी मांग ली है तो उन बातों को बारबार याद न करें. माफ करना सीखें. लड़ाई के बाद अगर आप पैचअप करने में अधिक समय लगाएंगे तो इस से रिश्ता कमजोर होगा.

अपने गुस्से को नियंत्रण में रखें

कईं बार ऐसा होता है कि पार्टनर्स के बीच एक बार झगड़ा शुरू होने के बाद लगातार कईं दिनों तक चलता रहता है. इस स्थिति से बचने के लिए अपने माइंड को डायवर्ट करें, खुद से प्रॉमिस करें कि आप झगड़े को नहीं बढ़ाएंगे. अपने दिमाग को शांत रखने का प्रयास करें. संगीत सुने या अपना मनपसंद कोई और काम करें. जब गुस्सा ठंडा हो जाए तो दुबारा उसपर चर्चा करें.

ब्रेक लें

अगर कभी झगड़ा इतना बढ़ जाए कि आप को लगे कि पैचअप होना संभव नहीं है तो रिश्ता खत्म करने का निर्णय लेने से पहले कुछ समय का ब्रेक लें. समय के साथ चीजों थोड़ी सामान्य होने लगती हैं. ऐसे में दोनों की जिम्मेदारी बनती है कि दूरियों को कम करने का प्रयास करें.