गृहशोभा विशेष

दोस्ती की जरूरत जीवन के हर पड़ाव पर होती है. फिर चाहे वह बचपन में स्कूल या पड़ोस की दोस्ती हो, किशोरावस्था या युवावस्था में अपने हमउम्र कालेज, औफिस की दोस्ती हो. लेकिन जब एक लड़का और लड़की वैवाहिक बंधन में बंध कर पतिपत्नी बन जाते हैं तो दोस्ती के माने बदल जाते हैं.

अधिकांश मामलों में विवाह के बाद लड़कियों का अपनी सहेलियों से साथ छूट जाता है और उन्हें पति के दोस्तों की पत्नियों से ही दोस्ती निभानी पड़ती है. लेकिन कुछ केसेज अपवाद भी होते हैं जहां लड़की की विवाह के बाद भी अपनी सहेली से दोस्ती बरकरार रहती है. विवाह के बाद भी उन का एकदूसरे से मिलनाजुलना, एकदूसरे के घर आनाजाना जारी रहता है और आप की सहेली के पति की दोस्ती आप के पति से हो जाती है.

शुरूशुरू में तो दोनों सहेलियों को अपने पतियों की यह दोस्ती खूब भाती है. उन्हें लगता है कि कितना अच्छा है कि दोनों के पति भी आपस में दोस्त बन गए हैं. अब इन की दोस्ती भी ताउम्र बरकरार रहेगी, लेकिन पतियों की दोस्ती का शुरुआत में अच्छा लगना बाद में किस कदर मुसीबतों व परेशानियों का सबब बन सकता है आइए एक नजर डालें:

मेरा पति मेरा न रहा: सहेली के पति के साथ आप के पति की दोस्ती कभीकभार साथ में चाय पीने, महीने में एकाध बार आउटिंग तक सीमित हो तो ठीक, लेकिन जब यह दोस्ती 24×7 की हो जाए यानी आप का पति आप का टाइम चुरा कर सहेली के पति को देने लगे तो आप के मन में यही खयाल आएगा न कि मेरा पति मेरा न रहा.

सुबह की व्हाट्सऐप गुडमौर्निंग से ले कर दिन भर एकदूसरे के साथ जोक्स शेयर करना, औफिस से इकट्ठे लौटना, लौटने के बाद बाहर घूमने निकल जाना और तो और आप डिनर टेबल पर उन की मनपसंद डिश बना कर उन का इंतजार कर रही हैं और वे आप की सहेली के पति के साथ बाहर से खाना खा कर आएं तो आप के पास अपना सिर पीटने और उस दिन को कोसने के अलावा कोई चारा नहीं बचेगा, जिस दिन आप ने अपने पति की दोस्ती सहेली के पति से कराई थी.

सहेली का पति बनाम सौतन: पहला उदाहरण, आप ने पति के साथ शाम में रोमांटिक मूवी देखने का प्रोग्राम बनाया, लेकिन पति भूल कर सहेली के दोस्त के साथ हौरर मूवी देखने चले गए.

दूसरा उदाहरण, आप की शादी की सालगिरह का खास दिन है. आप पति से कुछ अपनी पसंद का सरप्राइज गिफ्ट, कैंडल लाइट डिनर की उम्मीद कर रही हैं, लेकिन पहले तो पति लेट आते हैं और फिर आते हैं, तो सहेली की पसंद का गिफ्ट उस के पति के साथ ले कर आ धमकते हैं. गिफ्ट और सहेली के पति को देख कर आप को उस में अपनी सौतन दिखने लगती है.

तीसरा उदाहरण, आप को अपनी सहेली से अपने बैडरूम की वे बातें पता चलती हैं, जो केवल आप और आप के पति के बीच थीं, तब आप को समझते देर नहीं लगती कि ये बातें सहेली तक आप के पति द्वारा इन के खास दोस्त यानी सहेली के पति द्वारा ही पहुंची हैं. अपने प्राइवेट पलों के बारे में अपनी सखी के मुंह से सुन कर आप के पास झेंपने के अलावा कोई चारा नहीं रहता.

आर्थिक मामलों में दखलंदाजी: सहेली के पति से आप के पति की दोस्ती ने आप का पर्सनल टाइम तो चुराया ही, लेकिन जब वह आप के फाइनैंशियल मैटर्स में भी दखल देने लगे तो आप पर क्या गुजरेगी. सहेली के पति से दोस्ती से पहले आप के पति घर के आर्थिक मामलों पर आप की राय लेते थे. कौन सी पौलिसी लेनी है, निवेश कितना और कहां करना है. इन सभी मसलों पर आप को साझीदार बनाते थे, लेकिन जब से उन का यह दोस्ताना हुआ उन्होंने आप की राय लेनी बंद कर दी.

ऐसे में आप को सहेली के पति को देख कर कुढ़न ही होगी और ऐसा होना वाजिब भी है, क्योंकि आर्थिक मसलों पर आप के परिवार का भविष्य जो निर्भर करता है. वैसे भी यह भला किस पत्नी को सुहाएगा कि उस का पति घर के महत्त्वपूर्ण मामलों में उस की राय लेने, उसे महत्त्व देने के बजाय दोस्त को महत्त्व देने लगे.

हाथ से न निकल जाए पति: आप ने तो अपने पति की दोस्ती सहेली के पति से यह सोच कर कराई थी कि आप दोनों सहेलियों का दोस्ताना बना रहेगा, लेकिन कहीं भविष्य में इस की आप को बड़ी कीमत न चुकानी पड़े, क्योंकि हो सकता है आप का पति सीधासादा, बिना कोई ऐब वाला फैमिली पर्सन हो, लेकिन सहेली का पति ऐब वाला हो यानी वह शराब, शबाब सब का सेवन करता हो. ऐसे में सहेली के पति की संगत आप के पति को भी बिगाड़ सकती है और वह गलत आदतों का शिकार हो कर हो सकता है आप के हाथ से भी निकल जाए.

सहेलियों की दोस्ती में दरार: सहेलियों के पतियों की दोस्ती आप दोनों सहेलियों की दोस्ती में दरार डालने का भी सबब बन सकती है, क्योंकि हो सकता है आप को लगे आप के पति को सहेली का पति बिगाड़ रहा है. उधर आप की सहेली को लगे कि आप का पति उस के पति को बिगाड़ रहा है. तो इस आरोपप्रत्यारोप के चलते आप दोनों की दोस्ती में दरार आ सकती है.

पति हो सकता है गैरजिम्मेदार: एक स्थिति ऐसी भी आ सकती है कि आप के पति को आप की सहेली के पति यानी आप के इस नए दोस्त पर कुछ ज्यादा ही विश्वास हो और वह अपनी गैरमौजूदगी में हर काम के लिए दोस्त पर निर्भर रहने लगे. मसलन, आप के पति कुछ दिनों के लिए शहर से बाहर जा रहे हैं पीछे से वे आप के घरपरिवार की जिम्मेदारी बेफिक्र हो कर दोस्त को सौंप जाए.

ऐसी स्थिति में कोई भी पत्नी नहीं चाहेगी जहां उस का पति अपने परिवार की हर जिम्मेदारी अपने दोस्त को सौंपने लगे, क्योंकि आप के परिवार की जिम्मेदारी आप के पति की है और आप चाहेंगी उसे आप का पति ही निभाए.