गृहशोभा विशेष

त्योहार जीवन को खुशहाल और रिश्तों को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं. वे जीवन में जीने का उत्साह और उल्लास का रंग भरते हैं. इतना ही नहीं ये सजनेसंवरने और नएनए पकवान चखने का भी मौका देते हैं. त्योहारों के कारण सभी अपने परिवारजनों से मिलते हैं. ये सैलिब्रेशन रिश्तों में आई दूरियों को भी मिटाते हैं. तो फिर चलिए इन त्योहारों पर पुराने दोस्तों और रिश्तेदारों से रिश्ते की नई शुरुआत करते हैं ताकि जीवन में सिर्फ और सिर्फ खुशियां व प्यार हो.

रिश्तों का महत्त्व

रिश्ते उन महकते फूलों की तरह होते हैं, जो हमारे जीवन में ताजगी और खुशहाली भर देते हैं. रिश्ते न हों तो किसी भी खुशी को जाहिर करने और उसे सैलिब्रेट करने का कोई मतलब नहीं रह जाता. गम हो या खुशी जब तक उसे अपनों के साथ न बांटा जाए उस की महत्ता का पता ही नहीं चलता. रिश्ते ही तो हैं, जो हमें अच्छेबुरे वक्त में संभालते हैं और यह एहसास दिलाते हैं कि हम अकेले नहीं हैं कुछ लोग हमारे साथ हर पल खड़े हैं. यही वजह है कि तीजत्योहारों के समय उन की कमी खलती है. इसलिए अपने रिश्तों को इतना करीबी बनाएं कि हर फैस्टिवल और खास मौके को साथ मनाएं.

रिश्तेदारों से संबंध बढ़ाने के लिए त्योहार अच्छा औप्शन: कब किसे किस तरह की मदद की जरूरत पड़ जाए कहा नहीं जा सकता, इसलिए जरूरत पड़ने पर दोस्तों और रिश्तेदारों से ही मदद की उम्मीद की जा सकती है. लेकिन ऐसा तभी हो सकता है जब उन से आप के संबंध अच्छे हों. अगर ऐसा नहीं है, तो उन्हें अपने करीब लाने का त्योहार अच्छा जरीया होते हैं. इसलिए इस बार उन्हें अपना बनाने के लिए क्यों न पहला कदम आप ही उठाएं.

इस के लिए त्योहार वाले दिन उन के घर मिठाई और गिफ्ट ले कर जाएं. आप त्योहार वाले दिन जाएंगे, तो वे भी अपने दिल का मैल खत्म कर के सारे गिलेशिकवे भुला देंगे और फिर से नए रिश्ते की शुरुआत हो जाएगी. रिश्तों का नवीकरण करें: जिंदगी की उधेड़बुन में फंसे रहने के कारण कुछ रिश्ते पीछे रह जाते हैं और फिर हम उन्हें चाह कर भी करीब नहीं ला पाते. उन से हमारा कोई बैर नहीं, बल्कि मधुर संबंध ही थे, फिर भी वे करीब नहीं होते.

आशा का कहना है, ‘‘मेरी ससुराल में मेरे पति की मौसी की बेटी लंबे समय तक हमारे शहर में रही. तब हर त्योहार पर उन से मिलना, उन के साथ मिलबांट कर त्योहार मनाने की आदत थी. लेकिन फिर कुछ ही सालों बाद वे दूसरे शहर शिफ्ट हो गए और हम अपने में बिजी हो गए. इस तरह त्योहार आते रहे जाते रहे. लेकिन इस बार हम ने सोचा है कि त्योहार मिल कर मनाएंगे. अत: हम ने उन्हें अपने यहां त्योहार पर आमंत्रित किया है ताकि हम सभी को पुराना समय याद आ सके.’’

बदलाव का अवसर है यह: संयुक्त परिवार में अपनों का साथ त्योहार की खुशियों को और बढ़ा देता था. जहां दादाजी दीए लाते, ताऊचाचा बच्चों के लिए पटाखे लाते थे तो दादी, चाची, ताई, मां मिल कर तरहतरह के व्यंजन बनाते थे. घरबाहर हर जगह उल्लास ही उल्लास होता था. हम ने अपना बचपन कुछ ऐसे ही जीया है. लेकिन क्या आप नहीं चाहते कि इस बार अपने बचपन को अपने बच्चों में लौटा लाएं? अपने बच्चों को भी संयुक्त परिवार के त्योहार का वह रंग दिखाएं, जो हम ने कभी देखा था?

ऐसा करना मुश्किल भी नहीं है. आप अपने गांव एक फोन कर के तो देखें. वहां आप के स्वागत की तैयारी आप के फोन बंद करने से पहले शुरू हो जाएगी. अगर आप के भाई दूसरे शहर में रहते हैं, तो उन्हें भी बुला लें. अगर गांव से संपर्क न हो तब भी इस बार त्योहार संयुक्त रूप से मनाएं. यकीन मानिए इस बात के लिए आप के रिश्तेदार भी मना नहीं कर पाएंगे, क्योंकि कहीं न कहीं उन के मन में भी यही इच्छा दबी होगी, लेकिन वे पहल नहीं कर पाए होंगे.

तोहफा हो कुछ खास: अगर तोहफा अपने मांबाबूजी के लिए लेना है, तो उन की उम्र को ध्यान में रख कर लें जैसे कोई मसाजर, शुगर टैस्ट करने की मशीन, बीपी मशीन, कोई हैल्थ पैकेज आदि. इसी तरह भाईबहनों के लिए भी उन की पसंद के उपहार लें. ऐसा न सोचें कि बहुत पैसे खर्च हो जाएंगे, बल्कि अपना बजट बनाएं और फिर उस के अनसुर खर्च करें. त्योहार में सभी एकदूसरे को उपहार देते हैं. इस से संबंध मजबूत बनते हैं.

साथ मेला आदि देखने जाएं: यह भी जरूरी नहीं है कि त्योहार है, तो अपने घर पर ही मिला जाए. आप चाहें तो ऐसी जगह का चुनाव करें, जो सब को पास पड़े. वहां मिलने का प्रोग्राम बनाएं. त्योहारों में मेले आदि भी लगे होते हैं. उन में भी मिल सकते हैं. बच्चे भी वहां खूब ऐंजौय करेंगे. फिर किसी रैस्टोरैंट में लंच या डिनर करें. इस तरह त्योहार के नाम पर बिताया गया यह पूरा दिन सभी को साल भर याद रहेगा.

पूल पार्टी भी कर सकते हैं: अगर आप को लग रहा है कि इतने सारे लोगों को घर पर बुला कर खाने आदि का प्रबंध करना मुश्किल होगा, तो फिर आप पूल पार्टी भी कर सकते हैं. सभी रिश्तेदार अपनेअपने घर से एक डिश बना कर ले आएं और फिर मिल कर ऐंजौय करते हुए खूब धूम मचाएं.

दोस्तों से मिलने जाएं: फोन पर त्योहार की शुभकामनाएं देने से ज्यादा बढि़या होता है खुद जा कर बधाई या तोहफे देना. इसलिए आप के जो दोस्त, रिश्तेदार दूर रहते हैं उन में मिलने जाएं. त्योहार से 1-2 वीकैंड पहले भी जाया जा सकता है, क्योंकि फैस्टिवल के दिनों में आप का निकलना मुश्किल हो सकता है और फिर उन्हें भी त्योहार की भागदौड़ में आप को टाइम देना कठिन हो सकता है. भले आप साल भर न मिलें, लेकिन फैस्टिवल के दिनों में एकदूसरे के घर आनाजाना जरूर रखें, इस से रिश्ते बने रहेंगे.

त्योहारों में रिश्तों को मजबूत करने के टिप्स

यदि आप बहुत समय से अपने घर नहीं गए हैं, तो इस त्योहार जाएं और अपने भाईबहनों से भी वहां पहुंचने को कहें. जब सभी लोग साथ मिल कर त्योहार मनाएंगे, तो नजदीकियां बढ़ेंगी और प्यार भी, साथ ही आप के बच्चे भी रिश्तों को समझेंगे.

त्योहार पर जा रहे हैं, तो मीनमेख न निकालें. कुछ लोगों की ऐसी आदत होती है, इसलिए लोग उन्हें बुलाने से कतराते हैं.

अगर सब लोग एक जगह हैं, तो नैगेटिव बातों से बचें. त्योहार के उन्माद में अच्छीअच्छी पौजिटिव बातें करें. किसी की भी बुराई कर मजा खराब न करें.

पहले थाली में घर की बनी मिठाई सजा कर रखी जाती थी, जिसे किसी कढ़ाईदार कपड़े से ढका जाता था. ये थालियां अपने पासपड़ोस के सभी घरों में दी जाती थीं. हां, इन थालियों में एक खास बात यह होती थी कि इन में खीलबताशे जरूर होते थे.

सब रिश्तेदार साथ बैठ कर पुरानी यादें ताजा करें. हो सके तो आप अपने और रिश्तेदारों की कुछ पुरानी तसवीरों को फ्रेम करा कर उन्हें इस मौके पर दें. इस से सभी पुरानी यादों में खो जाएंगे.

सरप्राइज पार्टी दें, जिस में अपने सभी भाईबहनों और दोस्तों को शामिल करें. पार्टी दीवाली, क्रिसमस, न्यू ईयर आदि मौकों पर कर सकते हैं.

नोट: त्योहार मनाने की विधियों में जो विकृतियां आ गई हैं जैसे कि नशा करना, जुआ खेलना, धार्मिक उन्माद उत्पन्न करना, ध्वनि प्रदूषण, वायु प्रदूषण उन्हें शीघ्र समाप्त करना होगा. त्योहारों को उन की मूल भावना के साथ मनाएं ताकि सुखशांति में वृद्धि हो सके.       

फैस्टिवल पर क्यों होती है खुशी

क्या कभी सोचा है कि त्योहार के आने से हमारा मूड खुद ही अच्छा क्यों हो जाता है? जरमन वैज्ञानिक मानफ्रेड के मुताबिक कई चीजें ऐसी होती हैं, जो हमारे दिमाग को किसी खास दिन के इंतजार के लिए तैयार करती हैं जैसे गाना गाना, खास पकवानों का बनना, तोहफे मिलना और एकसाथ होने के बारे में सोचना वगैरह.

त्योहारों के मौकों पर होने वाले गीतसंगीत के कार्यक्रमों से दिमाग में भय के रिसैप्टर निष्क्रिय और आनंद से जुड़े न्यूरोट्रांसमीटर सक्रिय हो जाते हैं. त्योहार के साथ और भी कई तरह के इंतजार जुड़े होते हैं. अकसर जब लोगों को बिना उम्मीद के कोई तोहफा मिलता है, तो वे और भी खुश हो जाते हैं. आश्चर्य के भाव के साथ कुछ ऐसे न्यूरोट्रांसमीटर और हारमोन जुड़े होते हैं, जो हमें खुशी देते हैं. हमारा मस्तिष्क शरीर के बाकी सभी हिस्सों से सब से ज्यादा संपर्क में रहता है. दिमाग में एक से दूसरी जगह संदेश भेजने के लिए करीब 100 अरब न्यूरौन और 1000 अरब सूत्रयुग्मन होते हैं. सूत्रयुग्मन ऐसी संरचना है, जिस से सिगनल ग्राही कोशिकाओं तक पहुंचते हैं. शोधकर्ताओं ने पाया है कि तोहफे को खोलते समय हमारी उंगलियों को खास एहसास होता है. कई बार वे खुशी से कांपने भी लगती हैं. ऐसा दिमाग में चल रही प्रक्रियाओं के कारण होता है. इंतजार से जुड़े न्यूरोट्रांसमीटर हमें यह एहसास कराते हैं.

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