गृहशोभा विशेष

किसी भी रिश्ते की मजबूती के लिए जरूरी होता है आपसी प्यार और विश्वास. जबकि पैसा आपसी प्यार और विश्वास पर चोट करता है, एकदूसरे के प्रति शक और दूरियों की वजह बनता है. तभी तो किसी भी रिश्ते के बीच अगर पैसा आ जाए तो समझिए रिश्तों में खटास का सिलसिला शुरू हो गया.

संबंधों पर प्रभाव

दिल्ली के तीसहजारी कोर्ट के वकील आलोक शर्मा का मानना है कि पैसा किसी भी मजबूत रिश्ते को कमजोर बना सकता है. वे कहते हैं, ‘‘पैसा शुरू से ही व्यक्ति की कमजोरी रहा है. यह पैसा ही है, जिस के लालच में व्यक्ति अपनों से भी विश्वासघात करने में कोई गुरेज नहीं करता.

‘‘बुजुर्ग मांबाप खुद के घर से बेटे द्वारा बेदखल किए जाने के बाद जब न्याय की आस लिए कोर्ट की शरण में आते हैं, तो पता चलता है कि पैसा किस तरह रिश्तों में खटास की वजह बनता है. कोर्ट में आएदिन लोग चैक बाउंस का केस दायर करने भी आते हैं और बताते हैं कि किस तरह उन्होंने मुसीबत के वक्त अपने करीबी को पैसे दिए और जब लौटाने की बारी आई तो विश्वासघात के शिकार बन बैठे. कल तक जिस रिश्ते में शहद घुला रहता था, पैसे के लेनदेन के कारण उस में खटास आ जाती है और बात कोर्टकचहरी तक पहुंच जाती है.’’

खुद का विवेक जरूरी

ऐसे में सवाल यह उठता है कि पैसा और रिश्ते में से किसे ज्यादा अहमियत देनी चाहिए? मनोचिकित्सक समीर पारीख कहते हैं, ‘‘पैसों को ज्यादा अहमियत देना रिश्तों में दूरी की वजह बनता है. जब किसी विषम परिस्थिति में कोई दोस्त या नजदीकी रिश्तेदार पैसा उधार मांगे और पास में पैसे हों तो इनकार करना मुश्किल होता है. अब यह इस बात पर निर्भर करता है कि किसी व्यक्ति के लिए पैसा ज्यादा अहमियत रखता है या रिश्ता? हां, इस में कोई दोराय नहीं कि जो व्यक्ति सिर्फ पैसे को अहमियत देता है उस का जीवन और समाज को देखने का नजरिया बदल जाता है. मगर वक्त और परिस्थिति के मुताबिक पैसों का लेनदेन किसी व्यक्ति को खुद के विवेक से करना चाहिए.’’

वहीं चार्टर्ड अकाउंटेंट के. एल. चांडक के विचार अलग हैं. वे मानते हैं कि पैसा रिश्तों में खटास की वजह हो सकता है पर यह खटास तब होती है जब नीयत में खोट आ जाए अथवा पैसे के लिए मन ही बदल जाए. कभीकभी परिस्थितियां अनुकूल नहीं होतीं. हाथ में पैसे नहीं हों तो कर्ज लौटाने या चुकता करने में वक्त लगता है, इसलिए थोड़ा धैर्य रखना भी जरूरी होता है. मगर जब आप का कोई खास आप से थोड़े पैसे उधार मांगे तो देने से पहले यह सोच लेना बेहतर होगा कि अगर दिए पैसे वापस आ गए तो ठीक वरना जिस समय दें मान कर चलें कि वापस नहीं होंगे. इस से रिश्ते मधुर बने रहेंगे.

समीर पारीख कहते हैं, ‘‘देखिए, रिश्तों में खटास की वजह अगर पैसा बने तो इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए कि ऐसी नौबत ही न आए. इस के लिए खुद को न सिर्फ फाइनैंशियल बल्कि मानसिक रूप से भी मजबूत बनाएं.’’

खास वजहें

– पैतृक संपत्ति की वजह से नीयत में खोट आ जाने से रिश्तों में खटास पैदा हो जाती है.
 – पत्नी द्वारा फुजूलखर्च और पति पर पैसे के लिए दबाव खटास की वजह बनता है.
– दोस्तों, रिश्तेदारों के साथ पैसे के लेनदेन से विवाद बढ़ता है और रिश्तों में खटास आ जाती है.

क्या करें

– जितनी लंबी चादर उतने ही पांव फैलाने की नीति पर अमल करें.
– लालची रिश्तेदारों, दोस्तों से दूरी बनाए रखें.
– बजट का सही मैनेजमैंट आप को दूसरों से कर्ज लेने से रोक सकता है.
– इंश्योरैंस पौलिसी अथवा बैंक की बचत संबंधी स्कीम का लाभ उठाएं.
– अगर कर्ज लेनेदेने की आवश्यकता पड़े तो भी इस में धैर्य का होना जरूरी है. संयम खोने से पैसा और रिश्ता दोनों से ही हाथ धो सकते हैं.

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