रिश्तों में स्पेस उतनी ही जरूरी है जितनी जीने के लिए औक्सीजन जैसे अगर वातावरण में औक्सीजन की कमी हो जाए तो घुटन होती है ठीक उसी तरह रिश्तों में भी बिना स्पेस के प्यार कहीं खोने लगता है. यदि आप भी अपने सब से प्यारे रिश्ते को ताउम्र तरोताजा रखना चाहती हैं, तो आप को देना होगा अपने बैटर हाफ को एक छोटा सा ब्रेक.

उन के इस स्वभाव को समझें, लेकिन साथ न छोड़ें. यकीनन इस ब्रेक के बाद जब वे लौट कर आप के पास आएंगे, तो आप का यह मिलन निश्चित रूप से जादुई होगा. उस में अपनेआप पहले वाली ताजगी लौट चुकी होगी. निश्चित ही ब्रेक के बाद रिश्ते में पहले से कहीं ज्यादा मिठास होगी और ताजगी भी.

‘‘एक वक्त ऐसा आया था, जब हम दोनों को लगने लगा कि हमारा यह रिश्ता अब ज्यादा दिन नहीं चलेगा, लेकिन आज एकदूसरे की कीमत हम से ज्यादा कोई नहीं जानता. यह कमाल है एक छोटे से ब्रेक का,’’ चेहरे पर कौन्फिडैंस लिए यह कहना था करुणा शर्मा का.

पता नहीं पहले कभी आप ने सुना हो या नहीं, लेकिन सच्चे और लंबे समय के मिलन के लिए जुदाई बहुत जरूरी है. अगर आप के रिश्ते में कभी ब्रेक नहीं लगा, तो यकीनन आप कुछ खो रहे हैं. आज के हर युवा को चाहिए रिलेशनशिप में थोड़ी सी स्पेस और एक छोटा सा ब्रेक. कई लोगों ने इसे आजमाया और यही पाया कि कुछ समय बिछुड़ने के बाद मिलना बहुत सुखदायक होता है.

लिव इन रिलेशनशिप, आसानी से मिलने वाला प्यार और इन दिनों आम हो रहे प्रेम प्रसंगों ने ही इस नए चलन को जन्मा है. आइए मिलते हैं, ऐसे ही कुछ लोगों से जिन की जिंदगी में इस ब्रेक की बहुत जरूरत थी :

इम्तिहान के वे 5 महीने

जयपुर की रहने वाली स्मिता कहती हैं, ‘‘हमारे रिश्ते को अब पूरे 5 साल हो गए. इन 5 सालों में करीब 5 महीने की एक लंबी जुदाई आई. करीब 3 साल लगातार हमारा प्यार परवान चढ़ा रहा. पहले एकदूसरे में कभी कोई कमी नजर नहीं आती थी, लेकिन एक वक्त ऐसा भी आया जब रिश्ता घुटन बनने लगा. किसी को जब आप बहुत ज्यादा जान लेते हैं, तो भी मुसीबतें खड़ी होने लगती हैं. जिन बातों को पहले हम नजरअंदाज कर दिया करते थे, वही अब बड़ी लग रही थीं.

‘‘आखिरकार वही हुआ, जिस का हमें अंदाजा था. एकदूसरे की सहमति से हम ने

इस रिश्ते को हमेशा के लिए खत्म करने का फैसला किया. दोनों ने वादा किया कि अब

कभी फोन, किसी संदेश और दूसरी तरह से संपर्क नहीं होगा. हुआ भी ऐसा ही. मैं भी अपनी दुनिया में व्यस्त हो गई और वे भी. कभीकभी उन की याद भी आती, तो उसे मैं दिल में ही दबा देती.

‘‘पूरे 5 महीने बाद मौसम बदला और दिल में किसी की कमी महसूस होने लगी. उस से कभी बात न करने का वादा किया था, लेकिन नजरों को फिर उसी की तलाश थी. कुदरत ने साथ दिया और हम वापस मिले, लेकिन इस बार हमेशा के लिए. इतने बड़े अंतराल में एक बात साबित हो गई थी कि रिश्ता भले कोई भी हो, उस में थोड़ी स्पेस जरूर हो.’’

रबड़बैंड थ्यौरी

रिश्ते की इन उलझनों को समझने के लिए आप का रबड़बैंड थ्यौरी को समझना बहुत जरूरी है. जान ग्रे की बुक ‘मैन्स आर फ्रौम मार्स ऐंड विमन आर फ्रौम वीनस’ स्त्रीपुरुष की रिलेशनशिप को समझने और सुधारने के लिए एक बेहतर किताब है. इस में साफतौर पर पुरुष की मनोस्थिति को बताते हुए उन की तुलना एक रबड़बैंड से की गई है.

पुरुषों का यह स्वाभाविक अंदाज है कि वे किसी महिला के पूरी तरह पास आने के कुछ समय बाद दूर जाने लगते हैं. चाहे महिला कितना भी प्रेम करे. ऐसा होना स्वाभाविक है. अपनी आजादी और अस्तित्व को तलाशने के लिए वे ऐसा करते हैं. लेकिन यह भी सच है कि जब वे पूरी तरह से दूर जाते हैं. तभी लौट कर आते भी हैं. जब वे वापस आते हैं, तो उन का प्यार और अपने पार्टनर के प्रति आस्था कहीं ज्यादा हो चुकी होती है. महिलाएं अकसर उन के इस स्वभाव से धोखा खा कर उन का साथ छोड़ देती हैं.

जानबूझ कर लिया ब्रेक

फीके पड़ते रिश्तों में फिर से पहले वाली मिठास भरने के लिए कुछ कपल जानबूझ कर भी ब्रेक लेने लगे हैं. वे जानना चाहते हैं कि क्या वे वाकई एकदूसरे के बिना नहीं रह सकते? उन के बीच सच में प्यार है या महज आकर्षण? उन्हें लगने लगा है कि दूरी ही वह राह है, जो उन्हें सही मंजिल का पता दे सकती है.

एमबीए स्टूडैंट विकास शर्मा कहते हैं, ‘‘अगर हम रोजरोज दाल खाएंगे, तो एक दिन ऐसा जरूर होगा जब हमें उस से नफरत हो चुकी होगी. जिस तरह हम रोज एक स्वाद का खाना नहीं खा सकते, ठीक उसी तरह रोजाना एक

ही पैटर्न पर जिंदगी भी नहीं चल सकती.

कोई आप से हमेशा के लिए दूर हो जाए, उस से तो अच्छा है कि उसे कुछ दिन के लिए ही दूर करें.

‘‘मैं निशा को बहुत प्यार करता हूं. जब वह मुझे मिली नहीं थी, तो मैं उसे पाने के लिए कुछ भी कर सकता था, लेकिन जब वह मेरी हो गई तो धीरेधीरे उस की कद्र भी कम हो गई. उस की हर बात मेरे लिए इतनी गंभीर नहीं होती थी, क्योंकि मुझे मालूम था कि वह मुझ से प्यार करती है और मुझे छोड़ कर कहीं नहीं जाएगी. अपने इस रवैए से मैं खुद परेशान होने लगा. अपने प्यार के एहसास को फिर से वापस पाने के लिए मैं ने निशा से एक छोटा सा ब्रेकअप किया. वह उस समय बहुत रोई, लेकिन मैं ने अपने दिल पर पत्थर रखते हुए उसे अपने से अलग कर दिया. शुरुआत में उस के फोन भी रिसीव नहीं किए.

‘‘करीब 1 साल बाद उसी तारीख को जब हम जुदा हुए थे, मेरे अंदर प्यार और पागलपन फिर से वापस आने लगा. मेरे पास उस का जो नंबर था, वह बदल गया था. उस की कोई खबर नहीं थी, लेकिन मैं चाहता था कि मुझे दिलोजान से प्यार करने वाली निशा फिर से मेरी जिंदगी में आ जाए. उस के दोस्तों से मिल कर उस के घर का नंबर लिया. उस समय शायद वह मुझे बेवफा समझ रही थी, इसलिए फोन पर आने को भी तैयार नहीं थी. काफी कोशिश कर के उस से फिर मुलाकात हो पाई. जब अपने दूर होने का कारण उसे बताया, तो उस की नम आंखें मुझे घूर रही थीं. मैं उस की एक हां के लिए फिर से तरस रहा था. उस दिन पता चला कि अगर यह ब्रेकअप न होता, तो हम कभी इस प्यार की गहराई को नहीं समझ सकते थे.’’

हम भी आजमाते हैं इसे

विशाल और कविता का प्रेमविवाह हुआ है. दोनों सेम प्रोफैशन के तो हैं ही, साथ ही उन के विचार भी एकजैसे हैं. वे कहते हैं, ‘‘अकसर लोग हमें कहते हैं कि प्यार का जोश कुछ समय में ठंडा हो जाता है. पहले जैसा जोश और प्यार उन के रिश्ते में नहीं रहता. हमें मालूम है कि हमें लंबे समय तक अपने प्यार को जिंदा रखने के लिए क्या करना है? प्यार को ताजा रखने के लिए हमें एकदूसरे को जगह और आजादी देना जरूरी है. हर वक्त यह उम्मीद लगाए नहीं बैठना चाहिए कि हम साथ हों.’’

विशाल कहते हैं, ‘‘मैं अपनी पत्नी को उस के दोस्तों के साथ और परिवार वालों के साथ भी समयसमय पर भेजता हूं. यह वह वक्त होता है, जब मैं उसे एक भी फोन नहीं करता. हर वक्त वह भी मुझ से सवाल नहीं करती. ऐसा करते हुए हम एकदूसरे का लगातार खयाल रखते हैं. जब हम अपने इस अकेलेपन के मूड से निकल कर फिर एक होते हैं, तो प्यार अपनेआप ताजा हो जाता है.’’

जरूरी है थोड़ी सी स्पेस

राजस्थान यूनिवर्सिटी जयपुर में समाजशास्त्र की प्रोफैसर अंजलि सिन्हा कहती हैं, ‘‘काम की थकान के बाद नींद अच्छी आती है. अच्छी नींद अच्छे ख्वाब लाती है. रिश्ते भी इसी तरह के मीठे ख्वाब हैं, जिन्हें सुकून होने पर ही महसूस कर पाते हैं. लेकिन यह तब होता है जब आप रिश्तों को जीते हैं. ब्रेक लेने का मतलब यह नहीं कि आप अपने साथी को बिसरा दें, बल्कि तनहाई में सोचें कि कितना पाया है आप ने इस रिश्ते में. साथ ही यह भी कि दिया कितना है? दोनों पलड़ों का संतुलन देखें और सोचें अगर कहीं संतुलन नहीं बन पा रहा है, तो वजह क्या है?

‘‘आप से दूर रहना आप के जीवनसाथी को भी इतनी मोहलत देगा कि वे सोच सकें कि आप उन की जिंदगी में कितने अहम हैं. उन्हें हर समय खुद में उलझाए रखा तो आप उन से वह समय भी ले लेंगी, जिस में वे आप के बारे में सोचना चाहते हैं और यह समय छोटे से ब्रेक से उन्हें दे सकती हैं. जरूरी नहीं कि यह महीनों लंबा हो, लेकिन इतना जरूर हो कि आप एक जिम्मेदारी की तरह उन्हें याद न आएं. याद आएं तो इस तरह कि वे फिर बस आप के पास लौट आने के लिए बेकरार हो उठें.’’

गौरतलब है कि हर पतिपत्नी के बीच झगड़े की खास वजह असुरक्षा और ईगो होता है. यदि आप अपने पार्टनर को प्रौपर स्पेस देते हैं,

तो उस के मन में किसी तरह की असुरक्षा की भावना नहीं रहेगी और न ही आप के मन में रहेगी. आप दोनों हमेशा प्यार से रहें, हंसीमजाक करे, लेकिन शक के घेरे में ले कर हजार सवाल न पूछें. किसी भी रिश्ते में स्पेस देने से भरोसा और भी ज्यादा बढ़ता है. इतना ही नहीं, आप के पार्टनर आप से ज्यादा खुल कर बात कर सकते हैं. साथ ही इस से आप दोनों के बीच सम्मान और प्यार बढ़ता है. ऐसे में पतिपत्नी को पर्सनल स्पेस का ध्यान रखना चाहिए. जिस से कि रिश्ते में प्यार बना रहे.

इन सब के बावजूद भी रिश्ते में सही तालमेल नहीं बैठ रहा है, तो अलगअलग समय बिताने की कोशिश करें. 1 या 2 सप्ताह के लिए एकदूसरे को नहीं देखने की सहमति लें और यह तय करने के बाद स्पष्ट करें कि आप अभी भी एकसाथ हैं और अपना रिश्ता इस समय के दौरान खास रहेगा. ऐसे वक्त में एकसाथ समय नहीं बिताएं न एकदूसरे को मैसेज भेजें. न ही फोन पर बात करें. यह जुदाई आप के लिए यह जानने में मददगार साबित होगी कि आप इस रिश्ते को कितना महत्त्व देते हैं.

यह पहली बार में मुश्किल जरूर हो सकता है. लेकिन यदि आप अपने जीवन में अपने पार्टनर के बिना सुकून महसूस करते हैं, तो शायद ब्रेक ले लेना एक अच्छा विचार है. इसे आप रिश्ते को बेहतर बनाने का एक बेहतरीन विकल्प भी कह सकते हैं. अब यदि आप शुरुआती कुछ दिनों में ब्रेकअप में आनंद महसूस करते हैं, लेकिन उस के बाद आप अपने पार्टनर को मिस करने लगते हैं और अपना जीवन उस के बिना अधूरा महसूस करते हैं, तो आप को रिश्ते को फिर से सुधारने की पहल करनी चाहिए.  

निजी आजादी का सम्मान

– विनिता छाबड़ा

‘‘रिश्तों में निजी आजादी के लिए घट रहे स्पेस की वजह से परिवार टूट रहे हैं. आए दिन ऐसे मामले बढ़ रहे हैं. आजादी की जितनी दरकार एक देश को, एक समाज को, हमारे विचारों को और हमारी अभिव्यक्ति को है, उतनी ही आजादी की मांग एक मजबूत रिश्ता भी करता है. इस तरह के मामलों को बढ़ने से आ रही दरार को खत्म कर यदि मजबूत रिश्ता चाहते हैं, तो यह बेहद जरूरी है कि एकदूसरे की निजी आजादी का सम्मान करना होगा.’’

स्पेस में भी रिश्ता रहे मजबूत

– डा. सावित्री सराधना, प्रोफैसर, समाजशास्त्र, राजस्थान विश्वविद्यालय मनोचिकित्सक, एसएमएस अस्पताल, जयपुर

‘‘हर इनसान को अपनी आजादी प्यारी होती है, क्योंकि कोई भी रिश्ता सिर्फ प्यार से ही नहीं चलता, बल्कि उसे चलाने के लिए कई ऐसी चीजें हैं, जो अपनी जगह माने रखती हैं. कई बार जरूरत से ज्यादा रोकटोक रिश्ते में दरार पैदा कर देती है. ऐसे में रिश्ते में स्पेस देना जरूरी हो जाता है. खासतौर से शादीशुदा जिंदगी में स्पेस बहुत जरूरी हो जाता है. ज्यादा दखलंदाजी रिश्ते को खराब कर सकती है. ऐसे में जरूरी है कि सब से पहले अपने पार्टनर को समय दें. साथ ही उस की जिंदगी में ज्यादा ताकझांक या रोकाटोकी न करें. ऐसे में पार्टनर को अकेला छोड़ने के बजाय उसे उस की सोच को कायम रखने के लिए सोचने का मौका दिया जाए. इस दौरान अपने साथी को हमेशा उस की गलतियां बताने में न रहे, क्योंकि ऐसे वक्त में सही बात भी गलत लगने लगती है.’’

फायदे फैमिली ब्रेक के

कैरियर और निवेश ने आप का कल तो सुरक्षित कर दिया, लेकिन आज की खुशियों का क्या? कल की चिंता में कई बार हम आज की खुशियों के छोटेछोटे पलों को नजरअंदाज कर देते हैं. अब ऐसा न हो, इस के लिए फैमिली ब्रेक लेने के कुछ मौके बिलकुल न गंवाएं.

त्योहार हमें परिवार के साथ समय बिताने का पूरा मौका देते हैं लेकिन हम तीजत्योहार की रीतिरस्म निभाने में इतना व्यस्त हो जाते हैं कि त्योहार की छुट्टियां कब आईं और चली गईं, हमें पता ही नहीं चलता. यदि इन सब चीजों को दरकिनार कर क्वालिटी फैमिली टाइम बिताना है तो फैमिली डिनर, शौर्ट ट्रिप इत्यादि ऐसे विकल्प हैं, जो न सिर्फ आपसी रिश्तों को ताजगी से सराबोर करेंगे, बल्कि फैमिली के हर सदस्य के बारे में करीब से जानने का मौका भी देंगे.

फैमिली डिनर आउटिंग पत्नी को रोज के घरेलू कामों से थोड़ा ब्रेक देगी, तो वह भी रिलैक्स हो कर आप के साथ क्लालिटी टाइम बिता पाएगी और फिर पत्नीबच्चों के साथ शौर्ट ट्रिप या लौंग ड्राइव पर जाने से बेहतर तो शायद और कुछ न हो, क्योंकि ऐसे पल आपसी बौंडिंग को मजबूत करने के साथ यादगार पलों का तोहफा भी दे जाते हैं.

किसी विज्ञापन की एक लाइन यहां याद आती है कि दूर जाओगे तभी तो अपनों के करीब आओगे.

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