लड़कियां भी लड़कों के समान ही उच्च शिक्षा हासिल कर सरकारी और प्राइवेट दोनों ही क्षेत्रों में उच्च पदों पर आसीन हैं. आजकल लड़के भी कामकाजी पत्नी को ही प्राथमिकता देते हैं ताकि एक की व्यस्तता में दूसरे को अकेलेपन का एहसास न हो. लड़कियां भी अपनी उच्च शिक्षा को घर बैठ कर जाया नहीं करना चाहतीं. यदि आज पतिपत्नी दोनों नौकरी न करें तो उन के लिए महंगाई के इस दौर में जीवन को भलीभांति चलाना मुश्किल हो जाएगा.

कामकाजी दंपतियों की जिंदगी एक मशीनी ढर्रे पर चलती है. उन के बीच का प्यार शादी के कुछ समय बाद ही हवा हो जाता है. रीता और रमन ने 2 साल के लंबे अफेयर के बाद काफी मशक्कत कर के अपने घर वालों को मना कर अंतर्जातीय विवाह किया था. 1 साल के बाद जब उन के घर में एक बेटी ने जन्म लिया तो दोनों के बीच प्यार की जगह रोज छोटीछोटी बातों पर होने वाली तकरार ने ले ली और शीघ्र ही उन का रिश्ता टूटने के कगार पर आ गया.

वास्तव में पतिपत्नी के रिश्ते में प्यार एक ऐसी भावना है जिसे जीवंत बनाए रखने के लिए दोनों को बस थोड़ा सा प्रयास करना होता है. इस के विद्यमान रहते यह रिश्ता एक खूबसूरत एहसास की अनुभूति बन जाता है जबकि इस की अनुपस्थिति में यह रिश्ता बोझिल, एकदूसरे को नीचा दिखाने और परस्पर ताना मारने में परिवर्तित हो जाता है. कैसे काम करतेकरते इस रिश्ते में प्यार के एहसास को बरकरार रखा जाए, आइए जानें:

परस्पर सहयोग और समझदारी: ऋचा औैर सौरभ एक मल्टीनैशनल कंपनी में मैनेजर के पद पर काम करते हैं, परंतु सौरभ ऋचा से 2 घंटे पूर्व घर आ जाता है. वह औफिस से आते समय अपनी 2 साल की बेटी को प्ले स्कूल से ला कर कपड़े बदलवा कर खाना खिला देता है. ऋचा के आने पर दोनों एकसाथ चायनाश्ता करते हैं. ऋचा के रात के खाना बनाते समय सौरभ बेटी के साथ खेलतेखेलते घर भी व्यवस्थित कर देता है. साथसाथ खाना खा कर तीनों सोसाइटी के गार्डन में घूमते हैं.

सौरभ के इस व्यवहार पर ऋचा कहती है, ‘‘सौरभ का इतना सहयोग मुझे पूरा दिन ऊर्जावान बनाए रखता है. मैं पूरा दिन उस के प्यार से सराबोर रहती हूं.’’

आप कहां और कैसे एकदूसरे के मददगार साबित हो सकते हैं, इसे समझें और अपने पार्टनर को यथोचित सहयोग दे कर अपनी जीवनरूपी गाड़ी को प्यार की डोर से बांध कर आगे पढ़ाएं.

कार्यों का विभाजन: घर औैर बाहर के अनेक कार्य होते हैं. ऐसे में एक दूसरे पर काम थोपने के बजाय जो जिस कार्य को करने में दक्ष है वह उसे करे. इस के लिए आपस में कार्यों का विभाजन कर लें. इस में बच्चों को भी शामिल करें. इस से आप का कार्य शीघ्र होगा और समय भी बचेगा. घर के प्रत्येक व्यक्ति को उस की उम्र औैर रुचि के अनुसार कार्य करने को कहें. बचे समय को आप अपने परिवार के साथ ऐंजौय करें.

ईगो न आने दें: पतिपत्नी के मध्य अहं जैसा कोई भाव नहीं होना चाहिए. हालात चाहे कैसे भी हों, आप चाहे कितने भी क्रोध में हों परंतु एकदूसरे के प्रति सम्मान की भावना लुप्त न होने दें. अपने परिवार वालों के सामने भी इस बात का विशेष ध्यान रखें कि आप की किसी भी बात या व्यवहार से आप के साथी को चोट न पहुंचे. किसी बात पर मतभेद या तकरार हो जाने पर उसे ईगो पौइंट न बना कर सोने से पहले मसले को हल कर लें. सदैव रात गई बात गई का सिद्घांत अपनाएं.

औफिस को घर न लाएं: हमेशा दोनों यह कोशिश करें कि औफिस के काम को घर पर न ले कर आएं ताकि घर पर आप एकदूसरे को पर्याप्त समय दे सकें. औफिस से निकलते समय सारा तनाव या काम का बोझ वहीं छोड़ कर आएं. यदि कभी दोनों में से एक औफिस के किसी कार्य या किसी सहयोगी को ले कर परेशान है तो दूसरा उस की भावनाओं को समझे न कि उसे किसी प्रकार का ताना मारे. कई बार एक पार्टनर पर काम का इतना अधिक दबाव होता है कि उसे मजबूरी में घर पर काम करना पड़ता है ऐसे में दूसरे को पर्याप्त और समुचित सहयोग करें.

तकनीक का प्रयोग करें दुरुपयोग नहीं: आज तकनीक का युग है. आप बिजली, टैलीफोन के बिल भरने जैसे अनेक कार्यों को औनलाइन करें ताकि आप का समय बचे परंतु घर में फेसबुक, व्हाटसऐप जैसी सोशल मीडिया वैबसाइट्स पर अधिक समय देने में तकनीक का दुरुपयोग न करें. इस के लिए आप दोनों मिल कर एक समय निर्धारित करें औैर उस समय लैपटौप और मोबाइल को हाथ न लगाएं.

हौलीडे फन: छुट्टी के दिन एक पर काम का बोझ डाल कर दूसरा आराम करने की जगह दोनों मिल कर गृहकार्य निबटाएं और कहीं साथ घूमने जाएं. भोपाल की मीनू शर्मा कहती हैं, ‘‘ मुझे वीकैंड का बेसब्री से इंतजार रहता है. 2 दिन की छुट्टी में हम दोनों एक दिन घर के सारे कार्य निबटा कर दूसरे दिन घूमने पर चले जाते हैं. संडे इज फन डे फौर अस.’’

प्यार जताएं: शादी से पूर्व या प्रारंभिक दिनों में पतिपत्नी एकदूसरे को गिफ्ट देते हैं, साथी की पसंदनापसंद का ध्यान रखते हैं. फिर शादी के बाद क्यों नहीं? इस के लिए आप अचानक साथी के लिए वह करें जो वह बहुत दिनों से करना चाहती हैं. बच्चों के सामने भी मर्यादित प्यार जताने में संकोच न करें. प्यार जता कर अपने साथी को प्यार की उष्मा से सराबोर रखें. राजीव औैर रीना दोनों बैंक में काम करते हैं. राजीव कहते हैं, ‘‘मेरे जन्मदिन पर रीना ने मुझे मेरी वह मनपसंद घड़ी ला कर दी जिसे मैं 1 साल से लेने की सोच रहा था. मैं तो उस की प्यार जताने की इस अदा पर बिछ गया.’’

परिवार के सदस्यों का सम्मान करें: एकदूसरे के परिवार के सदस्यों को भरपूर प्यार और सम्मान दें. जहां आप एकदूसरे के परिवार के प्रति अनुचित व्यवहार करते हैं, वहीं से आपसी रिश्ते में कड़वाहट शुरू हो जाती है. रेलवे में कार्यरत निशा कहती हैं, ‘‘मेरे पति नमन मेरे परिवार वालों का भी उतना ही ध्यान रखते हैं जितना कि अपने परिवार वालों का. इस से मैं सदैव उन के प्रति प्यार अभिभूत रहती हूं, क्योंकि मैं अपने मातापिता की इकलौती संतान हूं.’’

विश्वास का दामन न छोड़ें: पतिपत्नी का रिश्ता विश्वास पर टिका होता है. अपने काम के दौरान महिला को पुरुषों से भी बातचीत करनी होती है. कई बार उसे बौस के साथ टूअर पर भी जाना पड़ता है. ऐसी स्थिति पुरुष के समक्ष भी आती है. ऐसे में परस्पर विश्वास की जड़ें इतनी मजबूत रखें कि वहां शक का बीज पनपने की गुंजाइश ही न रहे. यदि कभी कोई बात मन में खटकती भी है तो उसे बातचीत के द्वारा सुलझाएं.

आर्थिक पारदर्शिता बनाए रखें: आपसी खर्चे, वेतन आदि के बारे में साथी के साथ पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखें. इस के अतिरिक्त किसी एक की सैलरी कम या ज्यादा होने की स्थिति में कभी ताना न मारें. घरेलू खर्चों औैर बचत आदि के बारे में दोनों मिल कर निर्णय लें.