सवाल
मैं अपने 4 सालों के वैवाहिक जीवन में तालमेल नहीं बैठा पाई. अपने अड़ियल स्वभाव के कारण बात इतनी बढ़ गई कि मेरा तलाक हो गया. पति से अलग हो जाने के बाद मुझे एहसास हुआ कि मैं ने जिंदगी में क्या खो दिया है. मुझे अपनी गलतियों और व्यवहार के लिए बहुत पछतावा है. मैं ने अपने पति से कई बार माफी मांगी है. उन से कहा कि मैं कुसूरवार हूं और बहुत शर्मिंदा हूं. वे मुझे माफ कर दें. पर वे कहते हैं कि उन्हें मुझ से कोई मतलब नहीं है. वे मुझ से बात भी नहीं करना चाहते. बताएं क्या करूं?

जवाब
वैवाहिक जीवन में तालमेल बैठाने का प्रयास करने के बजाय आप ने संबंधविच्छेद करने का फैसला ले लिया. तलाक किसी समस्या का हल नहीं है. तलाक लेने के बाद आप पछता रही हैं लेकिन अब पछताने से कुछ हासिल नहीं होने वाला. इतना बड़ा फैसला लेने से पहले आप ने ठंडे दिमाग से सोचा होता तो आज आप को अपराधबोध न होता. अब चूंकि आप निर्णय ले चुकी हैं और तलाक भी हो चुका है तो अब पति के सम्मुख जा कर माफी मांगने या गिड़गिड़ाने से कुछ नहीं होगा.

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जब लेना ही पड़े तलाक तो जिंदगी में कुछ इस तरह आगे बढ़ें

गणेशस्पीक्स डौटकौम नाम के वैब पोर्टल द्वारा किए गए एक सर्वे में पाया गया है कि  65% महिलाएं तलाक या जीवनसाथी द्वारा धोखा दिए जाने के मसलों को ले कर काफी परेशान रहती हैं जबकि 35% पुरुषों में ही यह तनाव पाया गया.

यह आकलन पोर्टल द्वारा फोन पर उपलब्ध कराई जाने वाली परामर्श काल सेवा से मिले डाटा के आधार पर तैयार किया गया है. 2016 में महिलाओं द्वारा रिलेशनशिप से संबंधित मुद्दों के लिए की गईं काल्स में पिछले वर्ष की तुलना में 45% का इजाफा हुआ. जाहिर है आज की महिलाएं अपने विवाह को जन्मजन्मांतर का बंधन मान कर हर ज्यादती चुपचाप सहने को तैयार नहीं हैं. उन्हें अपने जीवनसाथी का पूरा भरोसा एवं बीवी होने का पूरा हक चाहिए. पति या ससुराल वालों के अत्याचार सहने के बजाय वे तलाक ले कर अलग हो जाने को बेहतर मानती हैं.

दरअसल, अब लड़कियां पढ़लिख कर आत्मनिर्भर बन रही हैं. शादी के बाद वे अपने कैरियर को पूरा महत्त्व देती हैं और पति से भी बराबरी का हक चाहती हैं. ऐसे में जब दोनों के अहं टकराते हैं, तो आत्मसम्मान खोने के बजाय वे अलग दुनिया बसाना पसंद करती हैं. यही नहीं आज लोगों के मन में कम समय में अधिक से अधिक हासिल करने की प्रवृत्ति भी जोर पकड़ती जा रही है. पतिपत्नी

दोनों ही परिवार को कम वक्त दे पाते हैं, जिस से घर में तनाव रहता है. पतिपत्नी के बीच तालमेल का अभाव और शक की दीवारें भी दूरियां बढ़ाती हैं.

तलाक का फैसला लेना आसान है पर आज भी तलाक के बाद जिंदगी खासतौर पर एक महिला की उतनी आसान नहीं रह जाती. इस संदर्भ में अपनी किताब ‘द गुड इनफ’ में डाक्टर ब्रैड साक्स का कथन सही है कि पतिपत्नी सोचते हैं तलाक के बाद उन की जिंदगी में सुकून आ जाएगा. रोजरोज के झगड़ों का अंत हो जाएगा. पर यह उसी तरह संभव नहीं जैसे एक ऐसी शादीशुदा जिंदगी की कल्पना जिस में केवल खुशियां ही खुशियां हों. इसलिए प्रयास यही होना चाहिए कि जितना हो सके तलाक को टाला जाए.

कब जरूरी है तलाक

जब पतिपत्नी के बीच ‘तीसरा’ मौजूद हो: पति हो या पत्नी, किसी के लिए भी बेवफाई का गम सहना आसान नहीं होता. पतिपत्नी के बीच इस मसले पर झगड़े बढ़ते हैं और बात मरनेमारने तक पहुंच जाती है. समझदारी इसी में है कि ऐसे हालात में दोनों आपसी सहमति से अलग हो जाएं.

बेमेल जोड़े: कई दफा परिस्थितिवश बेमेल जोड़े बन जाते हैं. पतिपत्नी की आदतें, विचार, जीवन के प्रति नजरिया, स्टेटस, शिक्षा वगैरह सब अलगअलग होते हैं. उन के मन भी नहीं मिलते. ऐसे में उम्र भर खुद को या परिस्थितियों को कोसते रहने से बेहतर है तलाक ले कर मनपसंद साथी के साथ नया जीवन शुरू करना.

तनाव और घुटन: कभीकभी रिश्तों में इतनी कड़वाहट भर जाती है कि पतिपत्नी के लिए एक ही छत के नीचे रहना कठिन हो जाता है. रोजरोज के लड़ाईझगड़ों से उन का दम घुटने लगता है. इस का बुरा असर काम और बच्चों पर भी पड़ता है. ऐसे में जीवन को बिखरने से बचाने के लिए बुरी यादों को अलविदा कहना जरूरी है.

जाहिर है कि जब वैवाहिक जिंदगी बोझ बन जाए तो उस बोझ को उतार देना ही बेहतर है. तलाक के बाद परेशानियां आएंगी पर मन में विश्वास रखिए कि लंबी काली सुरंग का दूसरा सिरा रोशनी में खुलता है. यदि आप धैर्य और समझदारी से काम लेंगे तो कोई वजह नहीं कि परेशानियां खुद हार मान लें. तलाक यदि दलदल है तो गंद तो लगेगा ही पर प्रयास किया जाए तो इस दलदल से उबरना नामुमकिन नहीं.

लंदन की किंग्सटन यूनिवर्सिटी द्वारा 16 से 60 साल की उम्र के 10 हजार लोगों पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि तलाक के करीब5 साल बाद नकारात्मक वित्तीय अवस्था के बावजूद महिलाएं ज्यादा खुश और संतुष्ट पाई गईं और इस की वजह काफी हद तक उन की आजादी थी.

तलाक के बाद आने वाली परेशानियों को समझदारी से दूर किया जा सकता है. आइए, जानते हैं कि कैसे:

आर्थिक परेशानियां

तलाक के बाद रहनसहन का स्तर प्रभावित होता है. आमदनी के स्रोत तो घट जाते हैं पर जिम्मेदारियां और खर्च दोगुने हो जाते हैं. घर अलग होता है, तो स्वाभाविक है कि उसे चलाने का खर्च भी बढ़ेगा.

सामान्य कंफर्ट की चीजों के अलावा खानेपीने, घूमनेफिरने, रहने का सारा खर्च

अकेले वहन करना पड़ता है. मनोरंजन हो या नई ड्रैसेज पर किया जाने वाला खर्च, आप को कम से कम रुपयों में बेहतर पाने का प्रयास करना सीखना पड़ेगा.

भविष्य में संभावित आर्थिक परेशानियों से बचने के लिए तलाक की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही फाइनैंशियल मसलों पर सतर्क रहना बहुत जरूरी है. तलाक के बाद संपत्ति में से मिलने वाला हिस्सा और ऐलीमनी आप के भविष्य को आसान या कठिन बना सकती है.

यदि आप जौब नहीं कर रहीं तब तो फाइनैंशियल सिक्योरिटी और भी अहम हो जाती है. अकसर शादी के दौरान महिलाएं फाइनैंशियल मामलों को पूरी तरह पति पर छोड़ देती हैं. यह उचित नहीं. अपने पति की इनकम, टैक्स पेमैंट्स, लोन इंस्टालमैंट्स, एफडीज, क्रैडिट बैलेंस और डिसपोजिशन, बैंक अकाउंट्स, मंथली बिल्स आदि के बारे में पूरी जानकारी रखें. इस के अलावा मैरिटल प्रौपर्टीज, ज्वैलरीज, व्हीकल्स और इंश्योरैंस पौलिसीज

जैसी चीजों को नजरअंदाज करने की गंभीर गलती न करें.

ये सब ऐलीमनी तय करने के काम आते हैं. यही नहीं, शेयर्स और म्यूचुअल फंड्स में भी अपने पति के निवेश का ट्रैक रखें. तलाक से पहले ये फाइनैंशियल डिसीजन लेने में देर न करें:

  • क्रैडिट कार्ड्स ब्लौक कर दें.
  • जौइंट अकाउंट्स क्लोज करें.
  • अपने पीएफ अकाउंट, डिमैट अकाउंट, सेविंग अकाउंट्स वगैरह में नौमिनी बदल दें.
  • इंश्योरैंस नौमिनी भी बदल दें.
  • वसीयत में बदलाव लाएं.
  • ईसीएस टर्मिनेट करें. किसी भी जौइंट लोन के लिए अपने बैंक को सूचित कर दें.

यह भी ध्यान रखें कि स्त्रीधन आप का अपना है, उसे पति के साथ तलाक के समय बांटने की जरूरत नहीं है. कोई भी फैसला लेते समय अपने बच्चों के भविष्य को फाइनैंशियल रूप से मजबूत करने के बारे में जरूर सोचें.

बच्चों पर असर

कहीं न कहीं तलाक का गहरा असर बच्चों के मन पर पड़ता है. तलाक यानी बच्चों की दुनिया का बंट जाना. 2 शख्स जिन्हें वह दुनिया में सब से ज्यादा प्यार करता था, उन का आपस में एकदूसरे से प्यार नहीं करने का एहसास बच्चों को भयभीत, चिड़चिड़ा और विद्रोही बना देता है. स्कूलकालेज में उन की परफौर्मैंस खराब रहने लगती है. कई दफा वे खुद को तलाक का दोषी मानने लगते हैं.

इन बातों का मतलब यह नहीं कि बच्चों की खातिर आप टूटे हुए रिश्ते को ढोने का प्रयास करती रहें, क्योंकि घर के तनाव एवं लड़ाईझगड़ों का असर वैसे भी बच्चों के दिमाग को कुंद कर देता है.

बेहतर होगा कि आप प्यार से बच्चों को समझाएं कि इस सब के पीछे उन का कोई दोष नहीं. ईमानदारी के साथ उन के हर सवाल का जवाब दें. अपने जीवन की हकीकत बताएं और हौसला बढ़ाएं कि सब ठीक हो जाएगा. अलग होने के बावजूद मांबाप दोनों बच्चों को क्वालिटी टाइम दें, तो धीरेधीरे वे सामान्य जीवन जीने लगेंगे.

सामाजिक बहिष्कार

तलाक के बाद अकसर महिलाएं सामाजिक रूप से अलगथलग पड़ जाती हैं. कई दफा वे लोग भी उन्हें नजरअंदाज करने लगते हैं जिन्हें वे खुद के करीब मानती थीं.

संभव है कि तलाक के बाद कौमन फ्रैंड्स आप के ऐक्स को तो इनवाइट करें पर आप की काल्स को भी नजरअंदाज कर दें. आप की मां आप के ऐक्स की साइड ले कर बात कर आप के दोष गिनाएं.

इन बुरे दिनों में आप को हर जगह कपल्स नजर आएंगे. आप वीकैंड भी ऐंजौय नहीं कर सकेंगी, क्योंकि यह फैमिली टाइम होता है, जबकि फैमिली आप के पास है ही नहीं. बच्चों से मिलने के लिए भी अपनी बारी का इंतजार करना बहुत कष्टकारी होगा.

सिनेमा हाल, मौल, मार्केट, रैस्टोरैंट वगैरह कहीं भी जाने से आप बचना चाहेंगी. आप को महसूस होगा जैसे लोग आप को ही घूर रहे हैं या दया की नजरों से देख रहे हैं. आप के दोस्त/रिश्तेदार अपने पति, बच्चों या दोस्तों के साथ व्यस्त मिलेंगे.

ऐसे हालात में टूटने या सिमट जाने से बेहतर है कि रिश्तों की असलियत स्वीकारते हुए नए दोस्त बनाएं, अपने जैसी स्थिति वालों से मिलें. आप को जीने का नया नजरिया, नया अंदाज मिलेगा. मुमकिन है कि आप को नया जीवनसाथी भी मिल जाए, जो आप की कद्र करे, आप को समझे.

लोलुप नजरों का सामना

प्राय: तलाक के बाद औफिस और आसपास के कुछ पुरुष स्त्रियों को लोलुप नजरों से देखने लगते हैं. यदि आप सिंगल हैं और सिंगल होने को तैयार नहीं तो भी पुरुष आप के आगेपीछे घूमने से बाज नहीं आते. ऐसे लोग चांस मारने का कोई मौका नहीं छोड़ते. जाहिर है, आप बहुत असहज महसूस करेंगी.

ध्यान रखें, आप नहीं वरन आप की स्थितियों की वजह से लोग इस नजर से देख रहे हैं. परेशान होने के बजाय इन बातों को हैंडल करना सीखें. बिंदास बनें. जमाने की परवाह करने से जमाना और भी पीछे पड़ जाता है. अपनी जिंदगी अपने हिसाब से जीएं.

असर आप पर

तलाक के दौरान आप के आत्मविश्वास की धज्जियां उड़ती हैं. लोगों के ताने सुनने पड़ते हैं कि आप अपने रिश्ते को बना कर नहीं रख पाईं. आपसी सहमति से तलाक नहीं मिला तो कोर्ट में लंबे समय तक मामला खिंचता है. इस दौरान आप के चरित्र पर प्रश्नचिह्न लगाने और कीचड़ उछालने वालों की कमी नहीं रहती.

तलाक के बाद प्राय: आप का खुद से और रिश्तों से भी विश्वास उठ जाता है. आप यह बात फिर स्वीकार नहीं कर पातीं कि कोई आप से सच्चा प्यार भी कर सकता है. कहीं दोबारा शादी करने पर फिर ऐसा ही हुआ तो? यह सवाल आप के जेहन में उठता रहता है.

यही नहीं, एक तरफ आप अपने पूर्व साथी से अभी भी प्यार करती होंगी, क्योंकि बीते वक्त में आप एक मन और 2 शरीर थे. वहीं दूसरी तरफ आप को उस पर गुस्सा भी आता होगा. आप खुद को उलझन में, अपमानित और बेसहारा महसूस करती होंगी. साथ बिताए हसीन पल आप को रहरह कर याद आएंगे.

इन सब से आप को खुद उबरना होगा. सामाजिक बनें, नई नौकरी जौइन करें, साथ ही पुरानी बातें भूल कर जिंदगी को नए सिरे से देखें, नया कल आप को बांहों में थाम लेगा.