अकसर देखा जाता है कि घर में सासबहू के झगड़े के बीच पुरुष बेचारे फंस जाते हैं और परिवार की खुशियां दांव पर लग जाती हैं. पर यदि रिश्तों को थोड़े प्यार और समझदारी से जिया जाए तो यही रिश्ते हमारी जिंदगी को खुशनुमा बना देते हैं.

जानिए, कुछ ऐसे टिप्स जो सासबहू के बीच बनाएं संतुलन रखेंगे.

कैसे बनें अच्छी बहू

१ मैरिज काउंसलर कमल खुराना के मुताबिक, बेटा, जो शुरू से ही मां के इतना करीब था कि उस का हर काम मां खुद करती थीं, वही शादी के बाद किसी और का होने लगता है. ऐसे में न चाहते हुए भी मां के दिल में असुरक्षा की भावना आ जाती है. आप अपनी सास की इस स्थिति को समझते हुए शुरू से ही उन से सदभाव का व्यवहार करेंगी तो यकीनन रिश्ते की बुनियाद मजबूत बनेगी.

२ बहू दूसरे घर से आती है. अचानक सास उसे बेटी की तरह प्यार करने लगे, यह सोचना गलत है. प्यार तो धीरेधीरे बढ़ता है. यदि आप धैर्य रखते हुए अपनी तरफ से सास को मां का प्यार और सम्मान देती रहेंगी, तो समय के साथ सास के मन में भी आप के लिए प्यार गहरा होता जाएगा.

३ सास के साथ कम्यूनिकेशन बनाए रखें. नाराज होने पर भी बातचीत बंद न करें.

४ यदि आप से कोई गलती हुई है, आप ने सास के प्रति गलत व्यवहार किया है या कोई काम गलत हो गया है तो सहजता से उसे स्वीकार करते हुए सौरी कह दें.

५ सास से यह अपेक्षा न रखें कि वे अपनी गलतियां स्वीकार कर आप से सौरी कहेंगी.

६ अपनी कमियां और मजबूरियां सास के आगे खुल कर कहें. इस से सास भविष्य में यह सब ध्यान में रख कर ही आप से कुछ करने को कहेंगी या कोई उम्मीद रखेंगी.

७ यदि सास आप के पति से किसी घरेलू विषय पर बात कर रही हैं तो आप वहां न जाएं. कभीकभी सास और पति को अकेले में भी बातें करने दें.

८ आप का घर दूर है तो कभीकभी सास को बिना जरूरत भी सिर्फ हालचाल पूछने के लिए फोन करें. इस से उन्हें महसूस होगा कि आप को उन की भी फिक्र है.

९ सास और पति के प्रति ईमानदार रहें. शांति, सचाई और स्पष्टता के साथ उन के आगे अपनी इच्छाओं और भावनाओं को प्रकट करें.

१० सास को स्मार्ट बनाएं. नई बातें सीखने में उन की रुचि जगाएं. नई तकनीकों का प्रयोग करना सिखाएं. इस से छोटीमोटी बातों से उन का ध्यान हटा रहेगा और वे खुश रहेंगी.

११ पर्सनैलिटी, पेरैंटिंग, स्टाइल या घर की सफाई जैसे मुद्दों पर सास द्वारा आप की आलोचना किए जाने पर शिकायत ले कर पति के पास न पहुंचे, बल्कि शांति के साथ सास के समक्ष अपना पक्ष रखें और बताएं कि ऐसा क्यों है.

१२ पति का सपोर्ट अपनी तरफ रखने का प्रयास करें. पतिप्रिया बनें ताकि वे सास का ध्यान आप की अच्छाइयों की तरफ दिलाने का प्रयास करते रहें.

१३ अपने फैसलों पर दृढ़ रहें. सास के साथ छोटेछोटे विवादों में पड़ कर रोने या खुद को कमजोर महसूस करने से बचें. आप अपनी इज्जत करेंगी, तभी दूसरे आप की इज्जत करेंगे.

१४ सास की तबीयत का खयाल रखें. उन की उम्र अधिक है. ऐसे में कमजोरी, डिप्रैशन और दूसरी तकलीफों को नजरअंदाज न करें. जरूरी हो तो जिद कर के डाक्टर के पास ले जाएं.

१५ सास से यह बात स्पष्ट करें कि वे आप के या पति के अधीन नहीं हैं, बल्कि अपनी मरजी चला सकती हैं. आप उन को आदर और सम्मान देंगी तो बदले में आप को भी प्यार मिलेगा.

१६ क्रोध में आ कर सास पर चिल्लाने या उन से बातचीत बंद करने की भूल न करें, क्योंकि ऐसी घटनाएं इंसान कभी नहीं भूलता और रिश्तों में हमेशा के लिए दरार पड़ जाती है. अत: हमेशा धैर्य बनाए रखें.

१७ यदि आप के मन में सास के लिए आदर भाव पैदा नहीं होता, क्योंकि वे कम पढ़ीलिखी हैं, देहाती हैं या चिड़चिड़ी अथवा बीमार हैं, तो भी कोशिश कर के उन्हें मान देना सीखें. वे कैसी भी हों, उम्र में आप से बड़ी हैं और सब से बढ़ कर, वे आप के पति की मां हैं, इसलिए आदर की पात्र हैं.

१८ जरूरत पड़ने पर सास की मदद करें पर नियंत्रण करने का प्रयास न करें. उदाहरण के लिए उन्हें कुछ रुपए उधार चाहिए तो उन्हें दे दें, पर यह न सोचें कि वे आप के कहे अनुसार ही उन्हें खर्च करें.

१९ अपनी सास की इच्छाओं और जरूरतों का ध्यान रखें. एक अच्छी बहू सास की इच्छाओं को मान देती है.

२० अपनी दुनिया में अपनी सास को शामिल करें. उन को साथ ले कर टहलने, योगा क्लास, आर्ट गैलरी, ब्यूटीपार्लर आदि जाएं आप उन की पसंद की जगहों पर भी जा सकती हैं. इस से रिश्ते में मजबूती और भावनात्मक लगाव बढ़ेगा.

२१ पति को ले कर सास को ताने न मारें.

२२ इस बात को स्वीकार कर लें कि आप दोनों के बीच उम्र में फासले की वजह से पसंद, सोच और सामाजिक मूल्यों का अंतर है. इस वजह से वैचारिक मतभेद होना स्वाभाविक है. उन्हें प्रेम से स्वीकार करें.

२३ सहेलियों के सामने सास का मजाक न उड़ाएं.

२४ सास को व्यंग्यात्मक या नकारात्मक भाव वाले चुटकुले या घटनाएं न सुनाएं वरना वे उन्हें खुद से जोड़ कर झगड़ सकती हैं.

२५ सास के आगे हर बात पर बहाने बनाने या अपनी बात सही साबित करने के लिए बहस करने से बचें.

२६ अपनी बात पर कायम रहें पर सास को इस विषय पर भाषण दे कर या जलीकटी सुना कर गुस्सा न करें. 

२७ सास कुछ सिखा रही हैं तो रुचि ले कर उसे सीखें. उन्हें अच्छा लगेगा.

२८ छोटीमोटी बातों को इश्यू न बनाएं. उन्हें हलके ढंग से लें.

२९ यह अपेक्षा न करें कि आप की सास और पति आप का चेहरा पढ़ कर सारी बात समझ जाएंगे. उन के आगे शांति और ईमानदारी से अपनी बात रखें.

३० बहू के तौर पर सास की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के प्रयास में खुद की पहचान बदल लेने से अच्छा है, आप जैसी हैं मूल रूप से वैसी ही रहें. थोड़ाबहुत पौजिटिव चेंज ला सकती हैं, पर जरूरत से ज्यादा खुद में बदलाव लाने का प्रयास आप के मन में असंतुष्टि और झल्लाहट भर देगा और रिश्ता ज्यादा खराब होने का भय रहेगा.

३१ अपनी सास के प्रति आलोचनात्मक रुख न रखें. बहुत सी बहुएं सास के व्यवहार के आधार पर आक्रामक/विरोधी रवैया अपना लेती हैं. जबकि सच यह है कि आप जैसा व्यवहार करेंगी, वैसा ही प्रत्युत्तर आप को मिलेगा.

३२ सास के द्वारा पति से आप की शिकायत, तुलना या आलोचना करने पर आपा न खोए वरन हर मैटर को शांति को हल करें.

३३ अपने बच्चों के आगे सास की बुराई न करें.

३४ पति के घर आते ही उन के आगे उन की मां की शिकायतों का पोथा खोल कर न बैठें. कोई भी पति ऐसी स्थिति में झल्ला उठेगा.

३५ बहुत सी बहुएं अनजाने ही अपनी मां की पक्षपाती बन सास के प्रति बेरुखी का रवैया अपना लेती हैं. मसलन, बच्चों को अपनी मां के पास तो घंटों छोड़ देती हैं पर जब सास वक्त गुजारना चाहे तो पढ़ाई आदि का बहाना बना कर दूर कर देती हैं. याद रखें, आप के बच्चों में आप की सास की जान बसती है. इसलिए बच्चों को दादीमां के पास भी थोड़े प्यार भरे लमहे गुजारने दें.

३६ पति पर थोड़ा तरस खाएं. उन्हें आप दोनों से प्यार है. हर घड़ी उन का इम्तिहान न लें. सास की प्रतियोगी बनने के बजाय उन की सहयोगी की भूमिका निभाएं.

३७ कभीकभी सास की पसंद का खाना भी बनाएं. यदि सास को किसी चीज से परहेज है तो उन के लिए अलग से खाना बनाने में नानुकुर न करें.

३८ खुद को सासू मां की जगह रख कर सोचें. उन की नजर में आप का अनुभव कम है. आप जो काम कर रही हैं, उन की नजर में वह गलत है तो स्वाभाविक है कि वे टोकेंगी. इस में बुरा मानने के बजाय प्यार से उन के आगे अपना पक्ष रखें.

३९ सास से कुछ बोलने से पहले सोचें कि आप अपनी मां से बात कर रही हैं. उसी लहजे और अंदाज में बात करें, जैसे अपनी मां से करती हैं. तब आप को यह आभास होगा कि कई दफा आप सास के प्रति उतनी कोमल नहीं होतीं, जितना आप को होना चाहिए था.

कैसे बनें अच्छी सास

४० यह स्वीकार लें कि बेटा बड़ा हो गया है. उस का अपना परिवार है, बच्चे हैं, जिन्हें वह प्यार करता है. इसलिए अब बहू का सिर्फ आप की ही नहीं, उन की भी जिम्मेदारी उठानी है.

४१ बहू को बदलने का प्रयास न करें. हर किसी का अपना व्यक्तित्व होता है.

४२ पोतेपोतियों के पालने के मुद्दे पर अकसर सासबहू में बहस होती है. आप को समझना होगा कि मां होने के नाते उसे हक है कि वह अपने बच्चों का पालनपोषण अपने ढंग से करें. बहू को जौब करने से रोकें नहीं, बल्कि आगे बढ़ने का मौका दें.

४३ कभी जो प्रभुता आप के हाथ में थी, उसे खुशीखुशी बहू को सौंपें. बहू पर जिम्मेदारियां डाल कर निश्चिंत रहें. सास द्वारा अपनी सत्ता कायम रखने की चाह ही मतभेदों को जन्म देती है.

४४ बेटे को बहू के खिलाफ भड़काएं नहीं, बल्कि उन के बीच प्यार बढ़ाने और उन्हें करीब लाने का प्रयास करें. तभी घर में खुशियां फैलेंगी.

४५ इस बात को समझें कि बहू अलग सामाजिक पृष्ठभूमि, संस्कृति और रीतिरिवाजों के बीच पलबढ़ कर आई है. आप दोनों की सोच और विचारों में अंतर होगा ही, पर इस का मतलब यह नहीं कि आप उस के विचारों को बिलकुल अहमियत न दें. कुछ उस की मानें कुछ अपनी मनवाए.

४६ पैसों के मामले में बहूबेटे को आजादी दें. उन्हें अपने ढंग से आर्थिक योजनाएं बनाने दें.

४७ बहू के प्रति पूर्वाग्रह से ग्रस्त न हों. पहले दिन से ही उसे किसी खास कैटेगरी गर्ल, जैसे पार्टी गर्ल, स्माल टाउन गर्ल, बेवकूफ, घमंडी या जिद्दी घोषित न करें. उसे मौका दें, खुद को प्रूव करने का.

४८ आप अपने लिए प्यारसम्मान की इच्छा रखती हैं, तो वैसा ही प्यारसम्मान आप को बहू को देना होगा.

४९ आप बहू की मां या अभिभावक नहीं हैं, इसलिए उन की तरह बहू पर और्डर न चलाएं.

५० बहू को बेटी की तरह ट्रीट करें. तभी वह भी मां की तरह आप से अपने दिल की हर बात शेयर करेगी. ऐसा होने पर रिश्ते में सदा मिठास कायम रहेगी.

५१ हर वक्त बहू की आलोचना करना छोड़ दें. वह कैसे कपड़े पहनती है, क्या खाती है, कैसा व्यवहार करती है, इन्हें डिसकस करने से अच्छा है, उस की खूबियों पर ध्यान दें. उसे अच्छा करने को प्रेरित करें.

५२ आप बहू से कुछ उलटासीधा कहेंगी तो यह बात सीधे आप के बेटे तक पहुंचेगी और आप बहू के साथसाथ बेटे की नजरों में भी गिर जाएंगी.

५३ बहू की बुराई रिश्तेदारों और पड़ोसियों में न करें, क्योंकि इस तरह घूमफिर कर बात बहू तक पहुंचेगी और स्थिति विस्फोटक हो जाएगी. पुरुष अपनी पत्नी से भावनात्मक रूप से जुड़े होते हैं, इसलिए संभव है आप का यह व्यवहार आप को उन से दूर कर दे.

५४ याद रखें, बहू आप के बेटे की जीवनसाथी है और उस की जो बातें या जरूरतें वह समझ सकती है या पूरी कर सकती है, आप नहीं कर सकतीं.

५५ बहू को अपने मामलों में फैसले लेने का हक दें. किसी भी बात पर बहू की तरफ से स्वयं निर्णय लेने की भूल न करें. उस के वजूद को स्वीकारें.

५६ अगर बहू घर गंदा रखती है तो नाकभौं सिकोड़ने के बजाय उस की मदद करें. संभव है, काम अधिक होने की वजह से वह सफाई न कर सकी हो. ऐसे में बातें सुनाने के बजाय स्वयं सफाई करने लगें. आप को काम करते देख वह खुद भी उस काम में लग जाएगी और अगली बार से कोशिश करेगी कि ऐसी नौबत ही न आए.

५७ कुछ खास मौकों पर परिवार के दूसरे सदस्यों के साथ अपनी बहू के लिए भी  कोई तोहफा लें. इस से रिश्तों में प्रगाढ़ता आती है.

५८ बहू को भी मान दें. कभीकभी उस की तारीफ भी करें. इस से उस के दिल में अच्छा काम करने का उत्साह बढ़ेगा.

५९ बेटेबहू के बीच झगड़ा होने पर किसी एक की साइड लेने से बचें.

६० बेटे की पुरानी गर्लफ्रैंड या पत्नी से बहू की तुलना न करें.

६१ बहूओं को यह बात चुभती है कि सास हर मिनट का हाल जानना चाहती है कि वह क्या कर रही है, उस की जिंदगी में क्या घट रहा है या रुपए कहां खर्च हो रहे हैं वगैरह. ऐसा न कर के थोड़ा स्पेस दे कर चलें. विवाहित बेटे की जिंदगी में जरूरत से ज्यादा दखल न दें.

६२ बच्चों को बहू बेटे के निजी मामलों का पता करने का जरीया न बनाएं. यह हकीकत बहूबेटे के आगे आएगी तो उन की नजरों में आप का सम्मान कम हो जाएगा.

६३ अपनी बहू से बेटी की तरह व्यवहार करें. उस की राजदार और सहायक बनें. दुख, तकलीफ और संघर्ष के क्षणों में उस का साथ दें.

६४ कभीकभी बहू को प्यार से छुएं, आशीर्वाद दें, गले लगाएं. इस से वह खुद को आप के करीब महसूस करेगी.

६५ अपनी बहू पर एक मां की तरह विश्वास रखें. तभी वह बेटी की तरह आप से सब बातें खुल कर कह सकेगी.

६६ कुछ खास मसलों पर उस की सलाह भी मांगें और उसे मानें भी. बहू को यह बहुत अच्छा लगेगा.

६७ हमेशा बहू की खामियों पर ही ध्यान  न दें. उस के अच्छे पक्ष को भी देखें, क्योंकि कोई भी पूर्ण नहीं होता.

६८ बहू के साथ प्रतियोगिता की भावना न रखें, इस से सिर्फ आप दोनों के बीच तनाव बढ़ेगा.

६९ बहू की भावनाओं का भी खयाल रखें. वह बीमार है तो उस की केयर करें. ऐसी बातें दिल को छू जाती हैं.

७० अपने बेटे को घर के कामकाज में बहू की मदद करने के लिए कहें. इस से बहू के मन में आप के प्रति सम्मान कई गुना बढ़ जाएगा.

७१ यह अपेक्षा न रखें कि आप दूर रहती हैं तो बहूबेटा हर सप्ताह आप से मिलने आएंगे ही. कभीकभी वे अपनी मरजी से सप्ताहांत बिताना चाहें तो चिढ़ें नहीं.

७२ जब बेटे के घर फोन करें और फोन बहू उठाए तो तुरंत बेटे या पोते से बात करने की इच्छा न जताएं. ऐसी बातें बहू को अंदर ही अंदर चुभ जाती हैं और दूरी बढ़ती है. बेहतर होगा कि 2-4 मिनट आप बहू से हालचाल पूछें, बातें करें, फिर बेटे की खोजखबर लें.

७३ हमेशा अपने पोतेपोतियों को सुधारने के मिशन में न लगी रहें. इस से बहू को लगेगा कि आप अप्रत्यक्ष रूप से उस की पेरैंटिंग को नकार रही हैं.    
७४बहूबेटा कोई योजना बनाते हैं तो उन के बीच न आएं. उन के फैसलों की भी इज्जत करें.

७५ बातबात पर बहू पर नियंत्रण रखने का प्रयास न करें. इस से बहू मन ही मन आप को दुश्मन समझने लगेगी.

७६ घर की व्यक्तिगत समस्याओं की चर्चा दूसरों के बीच न करें.

७७ घर को युद्ध का अखाड़ा बनाने से बचें. इस से नुकसान आप का ही होगा. आप का बेटा, जिसे आप प्यार करती हैं, वह भी खुश नहीं रह सकेगा. इसलिए हमेशा धैर्य से काम लें.

७८ काम कैसे करना है, हर वक्त यह डिक्टेट न करती रहें. इस से टैंशन ही बढ़ेगी. हर इंसान दूसरे से भिन्न होता है और भिन्न तरीके से किसी काम को हैंडल करता है, इस सच को समझें.

७९ प्यार पाना है तो इसे दिखाएं भी. बहू को अपनी सपोर्ट दें. फिर देखें केसे वह आप के आगेपीछे घूमती है.

८० बहूबेटे के जीवन में बेवजह दखलंदाजी करने से बचें.

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