राशि और अमन का अफेयर पिछले 2 साल से चल रहा है. अब उन्होंने शादी करने का फैसला ले लिया, लेकिन वे इस बात को अच्छी तरह जानते थे कि उन के पेरैंट्स इस रिश्ते के सख्त खिलाफ होंगे और वे चाह कर भी घर वालों की रजामंदी से शादी नहीं कर पाएंगे. इसलिए उन्होंने कोर्टमैरिज के बारे में सोचा, लेकिन कोर्ट में शादी की क्या औपचारिकताएं होती हैं, इस बारे में उन्हें कुछ पता नहीं था. उन्होंने अपने एक कौमन फ्रैंड राजेश से बात की जिस ने अभी कुछ साल पहले ही कोर्टमैरिज की थी, लेकिन उस से भी उन्हें आधीअधूरी जानकारी ही मिली.

ऐसा कई जोड़ों के साथ होता है, वे शादी करना तो चाहते हैं, लेकिन उस का क्या प्रोसीजर है, इस के बारे में उन्हें कुछ पता नहीं होता और संकोचवश वे खुद इस की जांचपड़ताल करने से हिचकिचाते हैं. आइए जानें कि अगर पेरैंट्स राजी नहीं हैं और आप शादी के फैसले तक पहुंच गए हैं, तो आप विवाह कैसे कर सकते हैं.

आर्य समाज मंदिर में विवाह प्रक्रिया

आर्य समाज मंदिर में जो विवाह होते हैं, वे सभी हिंदू विवाह अधिनियम के अंतर्गत होते हैं. आर्य समाज मंदिर आमतौर पर विवाह की पंजिका रखते हैं और प्रमाणपत्र जारी करते हैं. विवाह से पहले यह भी जानकारी लेते हैं कि दोनों पक्ष विवाह के योग्य हैं भी या नहीं और विवाह दोनों की पूर्ण सहमति से हो रहा है.

  • आर्य समाज मंदिर वही विवाह कराते हैं जोकि कानूनन वैध हों. वहां दोनों की आयु के प्रमाणपत्र देखे जाते हैं. विवाह सूत्र में बंधने जा रहे युवकयुवती में कोई ऐसा संबंध तो नहीं जिस से विवाह अवैध हो, साथ ही यह भी देखा जाता है कि उन में से कोई विवाह के अयोग्य तो नहीं है. इस तरह हिंदू विवाह के लिए आवश्यक बातों को देखते हुए आर्य समाज मंदिर एक वैध विवाह संपन्न कराता है. वहां विवाह के साक्षी भी होते हैं. आर्य समाज मंदिर अपने रजिस्टर में इन सभी तथ्यों को अंकित करते हुए विवाह के बाद विवाह प्रमाणपत्र भी जारी करते हैं.
  • आर्य समाज मंदिर में शादी करने के लिए युवती की उम्र 18 साल और युवक की उम्र 21 साल होनी चाहिए.
  • युवकयुवती की डेट औफ बर्थ का पू्रफ होना चाहिए जैसे कि उन का 10वीं का सर्टिफिकेट या बर्थ सर्टिफिकेट आदि.
  • एड्रैस प्रूफ होना चाहिए.
  • 2 गवाह होने चाहिए.
  • शादी से 2 दिन पहले एक आवेदनपत्र भरना होगा और उस के साथ डेट औफ बर्थ सर्टिफिकेट अटैच करना होगा. इस तरह सभी औपचारिकताएं पूरी कर आवेदन करने के 2 दिन बाद आप वहां जा कर शादी कर सकते हैं.

लेकिन आर्य समाज मंदिर में विवाह के बारे में गे्रटर नोएडा आर्य समाज मंदिर के धर्माचार्य जनमेजय शास्त्रीजी का कहना है कि मई, 2013 में हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने एक मामले की सुनवाई के दौरान राज्य के आर्य समाज मंदिरों के लिए एक गाइडलाइन तैयार की है. अपने फैसले में जस्टिस एन के मोदी ने कहा कि कई युवतियां किशोरावस्था पार करते ही अचानक घर छोड़ कर गायब हो जाती हैं और आर्य समाज मंदिर में शादी कर के आसानी से शादी का प्रमाणपत्र ले लेती हैं. बिना मांबाप की सहमति और उन्हें पूर्व सूचना दिए होने वाले इस तरह के विवाह के कारण ही सामाजिक परेशानियां खड़ी हो रही हैं. इसी वजह से हाईकोर्ट ने ऐसी शादियों के नियम कड़े कर दिए हैं. अब आर्य समाज पद्धति से विवाह करना आसान नहीं होगा.

आर्य समाज मंदिर में शादी कराने से 6 दिन पहले युवकयुवती के पेरैंट्स को सूचना देनी होगी. इस के साथ ही संबंधित थाने में भी जानकारी देनी होगी. आर्य समाज मंदिर को शादी कराने से पहले युवकयुवती से लिखित में स्वीकृति लेनी होगी साथ ही यह भी तय करना होगा कि शादी के समय युवक और युवती की ओर से 5-5 परिजन मौजूद रहें. अदालत ने इस आदेश की कौपी थाने में चिपकाने के भी आदेश दिए हैं. यह आदेश पंजाब, राजस्थान और मध्य प्रदेश में लागू हो चुका है, लेकिन दिल्ली एनसीआर में अभी यह नियम लागू नहीं है, इसलिए यहां अभी पुराने तरीकों से ही विवाह संपन्न हो रहे हैं.

बिना धर्म बदले हो सकती है शादी

स्पेशल मैरिज ऐक्ट के तहत बिना धर्म बदले भी शादी हो सकती है. इस के लिए आप को अपने क्षेत्र के मैरिज अधिकारी, एसडीएम, डीएम, मैरिज पंजीयक या किसी भी सक्षम अधिकारी के पास अर्जी लगानी पड़ेगी. इस के लिए अधिकारी 30 दिन का नोटिस जारी कर आपत्ति मंगवाएंगे कि कहीं कोई पार्टी नाबालिग या शादीशुदा तो नहीं है. इस के 30 दिन बाद आप शादी कर सकते हैं, क्योंकि अगर आप 21 साल के हैं, तो शादी हो सकती है. हां, यदि युवती के मातापिता राजी नहीं हैं तो आर्य समाज मंदिर में जा कर शुद्धिकरण यज्ञ के बाद शादी कर सकते हैं, जो बाद में हिंदू मैरिज ऐक्ट के तहत रजिस्टर हो सकती है. इस में कोई नोटिस नहीं दिया जाता है.

अमूमन आर्य समाज मंदिर में शादी के तुरंत बाद प्रमाणपत्र मिल जाता है और उस के बाद 2-3 दिन में ही आप हिंदू मैरिज ऐक्ट के तहत अपनी शादी रजिस्टर करवा सकते हैं. उस के बाद आप के खिलाफ यदि कोई मामला दर्ज कराता है, तो वह खारिज हो जाएगा. लेकिन ध्यान रहे कि शादी रजिस्टर्ड आर्य समाज मंदिर जो सार्वदेशिक आर्य सभा से संबंधित हो, से ही करवाएं. अन्य संस्थाएं फर्जी हैं, जिन के शादी के पू्रफ मान्य नहीं होते हैं. आप अपने किसी बालिग मित्र जो पैनकार्ड व पासपोर्ट धारक हो, को साथ ले जाएं ताकि आसानी से उन का रजिस्टे्रशन हो जाए. अब राजपत्रित अधिकारी या पारिवारिक सदस्य की आवश्यकता नहीं होती.

मुसलिम ला

15 वर्ष या उस से ज्यादा उम्र की मुसलिम युवती अगर प्यूबर्टी यानी शारीरिक रूप से बालिग है, तो वह शादी कर सकती है. ऐसी शादी को अवैध नहीं ठहराया जा सकता. मुसलिम ला के तहत निकाह सिविल कौंटैक्ट है और निकाह के लिए प्रस्ताव दिया जाता है, जिसे युवती स्वीकार करती है. इस के तहत मेहर की रकम तय होती है, जो युवती को दी जाती है. निकाह कबूल करने के बाद यह पूरा माना जाता है. काजी और गवाह की मौजूदगी में यह निकाह होता है. यह निकाह मौलवी साहब कहीं भी पढ़वा सकते हैं, फिर चाहे वह घर ही क्यों न हो. इस के लिए युवक और युवती का मुसलिम होना जरूरी है.

हिंदू मैरिज ऐक्ट

हिंदू मैरिज ऐक्ट 1955 के तहत 18 साल से कम उम्र की युवती की अगर शादी होती है, तो वह भी अमान्य नहीं है. हिंदू मैरिज ऐक्ट के तहत हिंदू रीतिरिवाज से शादी होनी चाहिए. इस के तहत हिंदू युवक और युवती जो प्रोहिबिटेड रिलेशन यानी नजदीकी रिश्तेदार और स्पिंडा रिलेशन यानी पिता की 5 पीढ़ी और मां की 3 पीढ़ी में होना न हो, शादी कर सकते हैं. इस के लिए अग्नि के सामने फेरे और वचन के साथसाथ अन्य कई रीतिरिवाजों का पालन होता है. इस के बाद ही शादी पूर्ण मानी जाती है, लेकिन अगर कोई शख्स 18 साल से कम उम्र का है और वह शादी करता है, तो बालिग होने के बाद ऐसी शादी को अमान्य करार देने के लिए गुहार लगा सकता है. अगर शादी को अमान्य करने के लिए गुहार नहीं लगाई जाती, तो शादी मान्य मानी जाती है.

वकीलों का प्रेमी जोड़ों के लिए मैरिज पैकेज

जून, 2013 में अखबार में छपी एक खबर के अनुसार हाईटैक होती शादियों के बीच अब प्रेमी जोड़ों के विवाहबंधन में बंधने का नया ट्रैंड चल पड़ा है. परिजनों की मरजी के खिलाफ विवाह करने के इच्छुक जोड़ों को वकील बाकायदा मैरिज पैकेज दे रहे हैं. इस में मंदिर, पुजारी, फेरे, कोर्टमैरिज व सुरक्षा खर्च तक की व्यवस्था शामिल है. नए ट्रैंड का फायदा उठाते हुए पंडित भी वकीलों को ग्राहक लाने के लिए एसएमएस कर रहे हैं.

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की वकेशन बैंच के सामने इन दिनों आधे से ज्यादा केस प्रेमी जोड़ों की सुरक्षा से संबंधित हैं. जब कोई प्रेमी जोड़ा हाईकोर्ट में सुरक्षा लेने के लिए आता है, तो वकील विवाह कराने के लिए पंडितों की सेवा लेते हैं. विभिन्न मंदिरों के पुजारियों समेत कई अन्य धार्मिक संस्थानों के प्रतिनिधि हाईकोर्ट के वकीलों के संपर्क में रहते हैं.

भाग कर शादी करने वाले जोड़ों को मिलेगी शैल्टर होम्स की सुरक्षा

जून, 2013 में छपी एक खबर के अनुसार पेरैंट्स की इच्छा के विरुद्ध प्रेम विवाह करने वाले जोड़ों के लिए एक अच्छी खबर है. राजस्थान सरकार प्रेम विवाह करने वाले जोड़ों के लिए कपल शैल्टर होम्स बनाने जा रही है.

गैर सरकारी संगठनों की पहल पर पहले चरण में सरकार जयपुर में इस तरह के कपल शैल्टर होम की योजना बनाने जा रही है, जो बाद में संभाग मुख्यालयों पर भी बनाए जा सकते हैं. पड़ोसी राज्य हरियाणा में ब्लौक स्तर पर शैल्टर कपल होम बनाए गए हैं, जहां सरकारी खर्च पर प्रेम विवाह करने वाले जोड़ों के रहने का इंतजाम किया जाता है. प्रेमी युगल के खिलाफ खाप पंचायतों के फरमानों के मद्देनजर हरियाणा सरकार ने यह कदम उठाया. राज्य में पिछले कुछ वर्षों से प्रेम विवाह करने वाले जोड़ों के खिलाफ हिंसक घटनाएं हो रही हैं.

खासतौर पर दोनों के परिवार वाले और समाज की ओर से आएदिन उत्पीड़न की खबरें मिलती रहती हैं. पुलिस सूत्रों की मानें, तो पेरैंट्स की ओर से दर्ज कराए जाने वाले अपहरण से संबंधित करीब आधे मामले प्रेम विवाह से संबंधित होते हैं. जिन में युवकयुवती अपनी मरजी से या तो घर छोड़ कर चले जाते हैं या फिर भाग कर शादी रचा लेते हैं.

अकसर ऐसे मामलों में पुलिस का व्यवहार भी प्रेमी युगल के खिलाफ ही होता है. यही वजह है कि इस तरह के कपल के लिए शैल्टर होम्स बनाए जा रहे हैं.

सैफ और करीना ने की कोर्टमैरिज

शादी से पहले करीना के धर्म बदलने की खबरों के बीच सैफ ने सुरक्षित रास्ता अपनाते हुए निकाह के लिए कानून का रास्ता अपनाया. इस के लिए सैफ और करीना बांद्रा स्थित रजिस्ट्रार औफिस गए और शादी के लिए जरूरी कागजात जमा किए व आवेदन के 30 दिन के भीतर कोर्टमैरिज कर ली.

चिरंजीवी की बेटी ने भाग कर शादी की

तेलुगु सुपरस्टार चिरंजीवी की दूसरी बेटी श्रीजा ने परिवार की मरजी के खिलाफ घर से भाग कर अपने प्रेमी श्रीश भारद्वाज से हैदराबाद के एक आर्य समाज मंदिर में शादी की.

नरगिस और सुनील दत्त ने आर्य समाज में किया था विवाह

11 मार्च, 1958 को जानेमाने फिल्मी कलाकार नरगिस और सुनील दत्त ने भी आर्य समाज मंदिर में शादी की थी.     

कोर्टमैरिज

अगर आप ने शादी का फैसला ले लिया है और आप के पास थोड़ा सा भी समय है, तो आप कोर्टमैरिज कर सकते हैं. दरअसल, विशेष विवाह अधिनियम के अंतर्गत होने वाले विवाह को ही कोर्टमैरिज कहते हैं.

– इस के लिए युवकयुवती को निर्धारित प्रपत्र में विवाह करने के आशय की सूचना जिला विवाह अधिकारी को प्रस्तुत करनी होती है.

– साथ ही नोटिस जारी करने का शुल्क जमा करना होता है जोकि नाममात्र का होता है.

– इस आवेदन के साथ युवकयुवती के फोटो पहचानपत्र भी प्रस्तुत करने होते हैं. इस संबंध में पूरी जानकारी जिला कलैक्टर कार्यालय में विशेष विवाह अधिनियम के मामले देखने वाले लिपिक से प्राप्त की जा सकती है.

– यह आवेदन कलैक्टर के कार्यालय की नोटिस बुक में रहता है, जिसे कोई भी देख सकता है और उसे कार्यालय के किसी सार्वजनिक स्थान पर चिपकाया जाता है. यदि विवाह के इच्छुक दोनों व्यक्ति या दोनों में से कोई एक किसी दूसरे जिले का निवासी है, तो यह नोटिस उस जिले के कलैक्टर को भेजा जाता है और वहां सार्वजनिक स्थान पर चिपकाया जाता है. इस नोटिस का उद्देश्य यह जानना है कि युवकयुवती दोनों विवाह के लिए पात्रता रखते हैं या नहीं.

– यदि विवाह में कोई कानूनी बाधा न हो, तो नोटिस जारी करने के 30 दिन के अंदर या फिर आवेदन प्रस्तुत करने के 3 माह समाप्त होने से पहले कभी भी जिला विवाह अधिकारी के समक्ष विवाह संपन्न कराया जा सकता है, जिस के बाद जिला विवाह अधिकारी विवाह का प्रमाणपत्र जारी कर देता है.

– कोर्ट में युवकयुवती जाति और धर्म के अंतर के बावजूद विवाह कर सकते हैं.