गृहशोभा विशेष

रिश्ते हमारे जीवन में बहुत महत्त्वपूर्ण स्थान रखते हैं और इन्हीं रिश्तों में सब से खास और करीबी रिश्ता होता है पतिपत्नी का, जिन्हें एकदूसरे का अंग माना जाता है. जीवन की गाड़ी इन्हीं 2 पहियों पर चलती है, इसलिए यह माना जाता है कि इन दोनों का एकदूसरे के साथ सहयोग बना कर प्रेम से चलना बहुत जरूरी है. यह माना गया है कि महिलाएं पुरुषों की अपेक्षा ज्यादा भावुक होती हैं, उन पर किसी भी अच्छीबुरी या छोटीबड़ी बात का प्रभाव जल्दी पड़ता है. लेकिन यही औरतें दिल से पुरुषों की तुलना में अधिक मजबूत होती हैं. इसी कारण वे बड़े से बड़ा दर्द भी सह लेती हैं और किसी से कुछ नहीं कहतीं, अपने पति से नहीं. लेकिन इस रिश्ते में प्यार बनाए रखने के लिए जरूरी यह होता है कि दोनों एकदूसरे के राजदार बनें.

पतिपत्नी से जुड़े इस विषय पर हम ने गुजरावाला टाउन, दिल्ली के सीनियर मनोरोग विशेषज्ञ डा. गुरमुख सिंह से बात की, जिस में उन्होंने कुछ प्रश्नों के तार्किक उत्तर इस तरह दिए:

पतिपत्नी का रिश्ता कैसा होना चाहिए?

पतिपत्नी को हमेशा एक अच्छे दोस्त या साथी की ही तरह होना चाहिए. केवल पत्नी को ही नहीं, बल्कि पति को भी अपनी पत्नी को अपना राजदार बनाना चाहिए.

पतिपत्नी दोस्त कैसे बन सकते हैं?

हमारे यहां आज भी जौइंट फैमिली में बहुत से लोग रहते हैं, जिस में कभीकभी समस्याएं और कठिनाइयां भी आने लगती हैं. ऐसे में पति को चाहिए कि वह अपनी पत्नी और अपनी मां दोनों को समय दे. पत्नी को भी ध्यान रखना चाहिए कि वह केवल अपने बारे में नहीं, बल्कि पूरे परिवार के बारे में सोचे और थोड़ाथोड़ा स्वयं को भी बदलने का प्रयास करे.

क्या ऐसा केवल लव मैरिज में ही संभव है या अरेंज्ड मैरिज वाले पतिपत्नी भी दोस्त बन सकते हैं?

एकदूसरे के साथ सामंजस्य बना कर रखना किसी भी तरह की शादी का मूलमंत्र है. शादी के लव या अरेंज्ड होने का इस पर कोई खास असर नहीं पड़ता. जरूरी है कि एकदूसरे के प्रति लव और केयर दोनों तरफ से हो.

कितना जरूरी होता है एकदूसरे को राजदार बनाना?

आज के समय में पतिपत्नी दोनों ज्यादातर वर्किंग ही होते हैं. ऐसे में एकदूसरे पर विश्वास की कमी रहती है. दिमाग में हमेशा एक शक पनपता रहता है. इसलिए यह बहुत जरूरी है कि दोनों एकदूसरे से सब कुछ शेयर करें ताकि यह विश्वास पनप सके कि मुझ से कुछ भी नहीं छिपाया जा रहा. लेकिन कभीकभी सब कुछ शेयर नहीं भी करना चाहिए, क्योंकि 100% राजदार बनाने से आप का यह पवित्र बंधन टूटने के कगार पर भी पहुंच सकता है. कुछ बातें या राज ऐसे होते हैं, जिन का राज रहना ही सही रहता है.

अगर पति एक्सप्रैसिव न हो तो तालमेल कैसे बैठाएं?

सब की अपनी, अलग पर्सनैलिटी होती है. यह तो कुछ समय बाद हर किसी को एकदूसरे के बारे में समझ में आने लगता है. बस हमें स्वयं अपनी भावनाओं पर संयम रखना आना चाहिए और समय के अनुकूल ही कहना और अपेक्षा करनी चाहिए.

आप के पास इस तरह के कितने केस आते हैं और आप उन्हें कैसे सुलझाते हैं?

हमारे यहां ऐसे बहुत से केस आते हैं, जहां पतिपत्नी के रिलेशन में फ्रैंडशिप की कमी होती है. इस तरह के केसेज में हम दोनों पक्षों की बात सुनते हैं और फिर सुलझाते हैं.

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