अकेलेपन और सिंगल लाइफ को अकसर लोग एकदूसरे से जोड़ कर देखते हैं. व्यक्ति सिंगल है, इस का मतलब उस की जिंदगी बेहद नीरस, एकाकी और बेचारगीपूर्ण होगी. लोग उसे दया की दृष्टि से देखने लगते हैं. शादी हो जाना यानी जिंदगी की एक बड़ी उपलब्धि या फिर यों कहें कि जिंदगी वास्तव में संपूर्ण होने की पहली शर्त.

सिंगल व्यक्तियों को लोग अधूरा मानते हैं, भले ही शादी किसी ऐसे शख्स से ही क्यों न हो जाए जो किसी भी तरह उस के लायक न हो. शादीशुदा हो जाना ही एक अचीवमैंट माना जाता है.

मगर आप को यह जान कर आश्चर्य होगा कि बहुत से लोग ऐसे हैं, जो स्वयं अपनी इच्छा से कुंआरा रहना पसंद करते हैं. उन के लिए शादी से कहीं और बड़े मकसद जिंदगी में होते हैं, तो कुछ ऐसे भी हैं, जो गलत व्यक्ति के साथ जीने के बजाय सिंगल लाइफ जीना ज्यादा पसंद करते हैं.

एक टीवी चैनल में ऐसोसिएट ऐडिटर, 35 वर्षीय निकिता राज कहती हैं, ‘‘मुझ से अकसर लोग पूछते हैं कि अब तक शादी क्यों नहीं हुई तुम्हारी? तो मैं जवाब देती हूं कि दरअसल अभी मैं ने शादी करने के बारे में सोचा ही नहीं.’’

सामान्य रूप से देखा जाए तो इन 2 वाक्यों में कोई खास अंतर नहीं दिखता. मगर जब आप इन में छिपे अर्थ पर गौर करेंगे तो काफी अंतर दिखेगा. शादी नहीं हुई यानी बेचारगी. कोशिश तो की पर कहीं बात बन नहीं पाई, किसी ने आप को पसंद नहीं किया. वहीं दूसरी तरफ शादी नहीं की यानी अभी वक्त ही नहीं मिला इस बारे में सोचने का.

इस संदर्भ में कोलंबिया एशिया हौस्पिटल और अपोलो क्लीनिक के कंसलटैंट व द रिट्रीट रिहैबिलिएशन सैंटर, मानेसर के निदेशक व मुख्य मनोरोग चिकित्सक, डा. आशीष कुमार मित्तल कहते हैं, ‘‘कई वजहों से आजकल लोग काफी समय तक अविवाहित रहते हैं, जिन में प्रमुख वजहें हैं, व्यक्तिगत मरजी, कैरियर को अधिक तरजीह देना, अतीत में प्रेम का कटु अनुभव, चिकित्सीय या मनोवैज्ञानिक समस्याएं वगैरह.’’

ऐसा जरूरी नहीं कि जो अविवाहित हैं, वे खुश नहीं रह सकते. डा. आशीष कहते हैं, ‘‘पश्चिमी देशों में करीब आधी शादियों का अंत तलाक में ही होता है. इसलिए शादी करना सामाजिक जीवन में सफल होने का एकमात्र तरीका नहीं. दोनों ही विकल्पों में जीवन के अन्य क्षेत्रों की तरह ही अलगअलग जोखिम हैं. बहुत से लोग हैं जो भावनात्मक रूप से शादीशुदा युवक या युवती की अपेक्षा कहीं ज्यादा मजबूत होते हैं. कुछ लोग कहते हैं कि परिवार का वंश बढ़ाने के लिए हमें शादी करनी चाहिए, एक बच्चे को जन्म देना चाहिए. जबकि कुछ लोग बच्चे को गोद लेना पसंद करते हैं ताकि इस दुनिया में वे कम से कम एक अनाथ बच्चे का जीवन सुधार सकें.’’

सिंगल लाइफ की वकालत करने वाली और इसी विषय पर किताब लिख चुकीं सोशल साइकोलौजिस्ट बेला डी पाउलो के मुताबिक, ‘‘यदि इसी तरह का अध्ययन विवाहित जिंदगी की तारीफ में छपा होता तो इसे काफी लंबीचौड़ी मीडिया कवरेज मिलती. मगर चूंकि यह अध्ययन सिंगल लाइफ के समर्थन में छपा था, इसलिए इसे कोई मीडिया अटैंशन नहीं मिला.’’

विशेषज्ञों ने यह भी पाया कि विवाहित जिंदगी में कार्डियोवैस्क्युलर डिजीज का रिस्क स्त्रीपुरुष दोनों के लिए 2% तक बढ़ जाता है.

अधिक लंबी शादी के साथ कम हैल्दी बिहैवियर जुड़ा हुआ है, जो हाइपरटैंशन, डायबिटीज और हाई कोलैस्ट्रौल आदि के लिए जिम्मेदार है.

फायदे और भी

तनाव की कमी: एक विवाहित की जिंदगी में तनाव की कमी नहीं रहती. बच्चों के जन्म से ले कर लालनपालन, शिक्षा और फिर रिश्तों को निभाने की जंग उन्हें मुश्किल में डाले रखती है. जबकि सिंगल लाइफ इन समस्याओं से दूर होती है.

– अविवाहित ज्यादा स्वस्थ रहते हैं. अध्ययनों के मुताबिक, सिंगल व्यक्ति अधिक ऐक्सरसाइज करते हैं. वे स्वयं को ज्यादा फिट रख पाते हैं.

– अध्ययनों में यह पाया गया कि शादी के बाद महिलाएं मोटी हो जाती हैं. जबकि अविवाहित महिलाएं बेहतर ढंग से अपनी फिगर और हैल्थ मैंटेन कर पाती हैं.

– महिलाएं जो सदैव अविवाहित रही हैं उन की ओवरऔल हैल्थ ज्यादा बेहतर रहती है. नैशनल हैल्थ इंटरव्यू की स्टडी में पाए गए निष्कर्षों के मुताबिक, अविवाहित महिलाएं बुखार या दूसरी आम बीमारियों के कारण बैड पर कम समय रहती हैं.

ज्यादा सामाजिक: शादी के बाद इनसान अपने दोस्तों और अभिभावकों से कम कनैक्टेड रह जाता है. यह सिर्फ तुरंत शादी के बाद ही नहीं वरन इस के कई सालों बाद भी यह स्थिति बनी रहती है.

– वे लोग जो सदैव अविवाहित रहे हैं, वे अपने दोस्तों, परिवार और पड़ोसियों से ज्यादा विनीत और उदार पाए गए, उन के बजाय जो विवाहित हैं.

– सिंगल लोगों के सिविक और्गनाइजेशंस के लिए वौलंटियर करने की संभावना ज्यादा होती है.

– पुरुषों पर की गई एक स्टडी के मुताबिक, विवाहित पुरुष वैसे काम कम करते हैं, जिन में मौद्रिक लाभ न छिपा हो.

– फ्रिन कौर्नवैल द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया कि सिंगल व्यक्ति विवाहितों की तुलना में अपने दोस्तों व रिश्तेदारों के साथ कम समय बिताते हैं. 2000 से 2008 के बीच 35 से ऊपर की आयु पर किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि पार्टनर के साथ रहने वाले लोग दोस्तों के साथ अपनी शामें नहीं बिता पाते.

– लोग सिंगल लोगों की कंपनी ज्यादा पसंद करते हैं, क्योंकि वे ज्यादा इंट्रैस्टिंग और फन लविंग होते हैं जबकि विवाहित अपनी पारिवारिक समस्याओं से त्रस्त नजर आते हैं. इसलिए उन की बातों में समस्याएं ज्यादा नजर आती हैं.

– सिंगल व्यक्ति अकेले ज्यादा वक्त बिता पाते हैं, इसलिए उन्हें अकेले में सोचने और खुद का साक्षात्कार करने का वक्त ज्यादा मिलता है. सिंगल लोगों को अकेलापन हासिल होता है, जो क्रिएटिविटी के लिए बहुत जरूरी है. हमारे बहुत से महान कलाकार और लेखकों ने इस एकाकीपन के फायदे पर काफी कुछ लिखा है.

– सिंगल व्यक्ति दुनिया को बदल रहे हैं. यूरोप, जापान, अमेरिका में अकेले रहने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. 50 सालों में यह बहुत बड़ा सामाजिक परिवर्तन है. यूएस सैंसस ब्यूरो के मुताबिक, 2012 में वहां की ऐडल्ट पौपुलेशन का करीब 47% अविवाहित था.

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कुछ बातें, जिन्हें करने से सिंगल महिलाओं को बचना चाहिए :

टाइमटेबल फ्रेम कर के जीना

जिंदगी में कभी हम स्वयं तो कभी हमारे हितैषी हमारे लिए एक टाइमटेबल सैट कर देते हैं. इस उम्र में पढ़ाई, इस उम्र में शादी तो इस उम्र में बच्चे. वैसे तो जिंदगी में सब कुछ समय पर होना जरूरी है, मगर कई दफा इस तरह की अपेक्षाएं जिंदगी को बहुत ही रोबोटिक बना डालती हैं और यदि समय पर कुछ करने में सफल न हो पाएं तो मानसिक तनाव पैदा हो जाता है.

क्या करना चाहिए: स्वस्थ या पौजिटिव अपेक्षाएं तो स्वीकार कीजिए, मगर जिन पर हमारा वश नहीं उन की वजह से नैगेटिव सोच डैवलप करने से बचें. अपनी मैंटल अलार्म क्लौक को बंद कर दीजिए और वर्तमान में जीने का प्रयास कीजिए, जो हालात मिले हैं उन्हीं में बेहतरीन जिंदगी जीने का प्रयास करें. भविष्य की योजना तो बनाएं पर अपने आज को नजरअंदाज न करें. प्यार और शादी होनी है तो किसी भी उम्र में हो जाएगी, इन मामलों में स्वयं को स्वतंत्र छोड़ दें. फिर देखिए, जिंदगी खूबसूरत रूप में सामने आएगी.

साथ का इंतजार

कई महिलाएं जो स्काई डाइविंग, ट्रैवलिंग या दूसरे रोमांचक ट्रिप्स में रुचि रखती है, मगर सिर्फ इस वजह से निकलने में हिचकिचाती हैं, क्योंकि उन के साथ कोई नहीं. यह सच है कि प्रेमी या पति और बच्चों के साथ घूमने का मजा कुछ और होता है, मगर सिर्फ इस वजह से कि आप को अकेला घूमता देख कोई क्या सोचेगा, अपनी इच्छाओं को होल्ड पर रखना कतई समझदारी नहीं. जिंदगी बहुत छोटी है.

क्या करना चाहिए: आप सुरक्षाचक्र के बंधन से बाहर निकलें. कभीकभी सब से बेहतर अनुभव अपने हिसाब से कुछ करने से होता है. जब आप 10 लोगों के बीच होते हैं, तो आप एक घिसेपिटे अंदाज से व्यवहार करने को बाध्य होते हैं, मगर जब आप अपनी इच्छा से अकेले, अपने हिसाब से निकलती हैं तो आप वह सब कर पाती हैं, जो कभी न करतीं. ऐसा करना जरूरी भी है, क्योंकि इस से आप को अपनी क्षमताओं के बारे में पता चलता है.

स्वयं को पहचानें

प्रत्येक शख्स किसी खास मकसद के साथ इस दुनिया में आया है. यदि आप सिंगल हैं तो इस का तात्पर्य यह है कि संभवतया अकेले रह कर ही आप अपना मकसद पा सकती हैं. तभी आप की सोच और परिस्थितियां इस के अनुरूप हैं, यह भी हो सकता है कि आने वाले समय में आप स्वयं शादी के बंधन में बंध जाएं, मगर जब तक सिंगल हैं, अपने इस स्टेटस का पौजिटिव यूज करें. नैगेटिव न सोचें. ऐसी स्थिति में आप के पास सलाहों का अंबार लग सकता है. यह आप को सोचना होगा कि आप को सलाहों के हिसाब से अपनी जिंदगी जीनी है या अपनी शर्तों पर.

सपोर्ट नैटवर्क मजबूत बनाएं

हम सब की जिंदगी में दोस्त बहुत बड़े सपोर्ट सिस्टम का काम करते हैं. अपने सामाजिक दायरे को बढ़ाएं. पासपड़ोस, रिश्तेदार, कुलीग्स और दोस्तों के साथ मजबूत नैटवर्क कायम करें. फिर देखिए, आप को कभी अकेलेपन का एहसास नहीं होगा.

मस्ती भी करें

आप अकेली महिला हैं, तो इस का मतलब यह नहीं कि आप जिंदगी ऐंजौय न करें. उन कामों के लिए समय निकालें जो आप को खुशी देते हैं. रोमांटिक नौवल्स पढ़ें, मूवी देखें, लड़कियों के साथ मिल कर नाइट पार्टी करें, अपनी हौबी को समय दें, नियमित ऐक्सरसाइज करें, स्वयं को पैंपर करें, हर सप्ताह एक नए व्यक्ति से मिलने और परिचय बढ़ाने का नियम बनाएं. ग्रुप में ट्रैवलिंग के लिए निकलें, वूमंस कौन्फ्रैंस अटैंड करें. ग्रुप ट्रैवलिंग आप के लिए अच्छा जरीया हो सकता है, क्योंकि जब आप ग्रुप में ट्रैवल करती हैं तो नई जगहों के बारे में जानने के साथसाथ नए लोगों के बारे में भी जानती हैं.

हम ऐसा कतई नहीं कह रहे कि सिंगल लाइफ मैरिड लाइफ की तुलना में ज्यादा बेहतर है. वस्तुत: शादी करना गलत नहीं, मगर उस के साथ करना सही है, जिस के साथ आप कंफर्टेबल महसूस करती हों,  जो आप की भावनाओं को समझता हो, आप जैसी सोच रखता हो, जिस से आप प्यार करती हों.

जिंदगी ने हमें जो भी परिस्थिति दी है, उसे सकारात्मक रूप में देखें. क्योंकि जो वर्तमान में आप को मिला है, वह आप के लिए सब से अच्छा है. ये लमहे फिर लौट कर नहीं आएंगे. इन्हें लाइक कीजिए.           

सास के साथ

आप जल्दीजल्दी नहाधो कर किचन में घुसती हैं और सब की पसंद की डिशेज बनाने लगती हैं, मगर पीछे से सास की चिकचिक भी आप लगातार सुन रही हैं. वे न तो आप के बनाने के सलीके से खुश हैं और न ही तैयार खाने से.

– सास का तीखा स्वर आप के कानों में पड़ता है कि कैसा जमाना आ गया है, अब तक बहू सो रही है और मुझे चाय बनानी पड़ रही है.

– आप औफिस जा कर भी अपनी सास की बातों को नहीं भूल पातीं. उन की बातें आप के कानों में गूंजती रहती हैं.

– घर जा कर आप को सास का भड़का चेहरा देखने को मिलता है. किचन जैसे की तैसी पड़ी है. आप सफाई और खाना बनाने में जुट जाती हैं. उधर बच्चा पूरा वक्त आप को डिस्टर्ब करता रहता है.

बिना सास के

आप आराम से उठ कर चाय बना कर पीती हैं. फिर अपना मनपसंद नाश्ता बनाती हैं. घर में मां हैं तो शानदार नाश्ता तैयार मिल जाता है.

– आप की अभी उठने की इच्छा नहीं है. अत: आप करवट बदल कर फिर से सो जाती हैं.

– औफिस जा कर आप सुकून के साथ अपना काम करती हैं.

– आप घर जाती हैं तो मम्मी ने खाना बना कर रखा है. होस्टल में हैं या फ्रैंड के साथ रूम ले कर रह रही हैं तो भी नजारा बहुत अलग होगा.

2010 में प्रकाशित, प्यू रिसर्च रिपोर्ट के निष्कर्ष काफी रोचक हैं. इस नैशनल सर्वे में सिंगल लोगों से की गई बातचीत के आधार पर पाया गया कि इन में से केवल 46% लोग ही शादी करने के इच्छुक थे. 25% लोगों ने कहा कि वे शादी करना ही नहीं चाहते, क्योंकि उन्होंने अपनी इच्छा से अकेले रहने का निर्णय लिया है. बाकी के 29% लोग इस बारे में दुविधा में थे कि वे मौका मिलने पर शादी करेंगे या नहीं.एक नजर विवाहित और अविवाहित महिला की जिंदगी पर

विवाहिता की दिनचर्या

सुबह 6.00 बजे

बच्चे को चुप कराने के चक्कर में आप सो नहीं पाईं. बच्चे ने बिस्तर गंदा कर रखा है. न चाहते हुए भी आप को उठना पड़ता है.

सुबह 6.30 बजे

– आप बच्चे को थोड़ी देर और सुलाना चाहती हैं, मगर वह सोने को तैयार नहीं. जाहिर है, आप भी बिस्तर छोड़ कर फ्रैश होने चली जाती हैं.

सुबह 7.00 बजे

– आप ने आज नाश्ते में आलू के परांठे बनाए हैं. मगर बड़ी बेटी परांठे खाने को तैयार नहीं. वह चाउमिन की रट लगाए बैठी थी.

सुबह 8.00 बजे

आप नहाने जा रही हैं और टब में पानी भर कर आती हैं. कपड़े ले कर अंदर घुसती हैं तब तक छोटू टब में साबुन डाल देता है.

सुबह 9.00 बजे

– आप तेजी से सीढि़यां चढ़ कर जा रही हैं. मगर आप ने यह नहीं देखा कि बच्चे ने वहां तेल गिरा रखा है. आप फिसल कर गिर पड़ती हैं.

सुबह 10.00 बजे

बच्चे को चुप करा कर आप मेकअपरूम में आती हैं. मगर वहां सारा मेकअप का सामान इधरउधर बिखरा पड़ा है.

पूरा दिन

– आप पूरा दिन बच्चे और घर के टैंशन में हैं कि कैसे जल्दी घर पहुंचें और बच्चे को संभालें.

शाम 6.30 बजे

– आप जल्दी से किचन में घुस जाती हैं. आप सब्जी काट रही हैं और बच्चा कटी सब्जी फेंक रहा है, बरतन इधरउधर फेंक रहा है. आधे घंटे के काम में 1 घंटा लग जाता है.

संडे

आप ने कहीं घूमने का प्रोग्राम तय किया, मगर बच्चा वहां जाने को तैयार नहीं. वह जू में जाने की जिद कर रहा है.

 

अविवाहिता की दिनचर्या

सुबह 6.00 बजे

सुबह उठ कर आप ने घड़ी देखी और करवट ले कर फिर सो गईं. उठने की कोई हड़बड़ी नहीं है.

सुबह 6.30 बजे

– अभी आप ने अपनी नींद तोड़ी है. उठ कर फिर सोने का जो मजा है, उसे कैसे छोड़ सकती हैं.

सुबह 7.00 बजे

– आप आराम से सो कर उठीं और तकिया दूर फेंका. फिर रात को देखा हुआ सपना याद कर मुसकराने लगीं.

सुबह 8.00 बजे

आप अपना बिस्तर और कमरा ठीक करने के बाद नहाने चली जाती हैं. इस बीच मां ने गीजर औन कर दिया है.

सुबह 9.00 बजे

– आप जब तक नहा कर निकलती हैं, तब तक मम्मी या रसोइए ने नाश्ता तैयार कर रखा होता है.

सुबह 10.00 बजे

आप अपनी स्कूटी निकालती हैं और अपनी सहेली को साथ ले कर औफिस के लिए निकल जाती हैं.

पूरा दिन

– पूरी तत्परता के साथ दिन भर औफिस का काम करती हैं और दोस्तों के साथ हंसीमजाक में भी शरीक होती रहती हैं.

शाम 6.30 बजे

– आप आराम से शाम को अपनी सहेली के घर से खा कर लौटती हैं या घर जा कर चायनाश्ते के बाद किचन में मां की सहायता करती हैं, फिर टीवी पर मनचाहा प्रोग्राम देखने लगती हैं.

संडे

आप अपनी इच्छानुसार दोस्तों के साथ मूवी और शौपिंग का प्रोग्राम बनाती हैं. फिर डिनर कर के घर लौटती हैं.

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