गृहशोभा विशेष

बच्चों की परवरिश में माता-पिता का बहुत बड़ा हाथ होता है. इसके लिए जन्म से उनमें सही आदतें डालने की जरुरत होती है. जिसमें शिक्षा सबसे ऊपर आती है. बाल दिवस के अवसर पर ‘ब्रेन डेवलपमेंट’ के इस बात को ध्यान में रखते हुए ‘सेवेन सीज अकादमी’ ने पहली बार पूरे भारत के 10 शहरों के 200 स्कूलों के 60,000 बच्चों में केवल दो मास्टरमाइंड बच्चों को उनके माता-पिता सहित ‘नासा’ जाने का अवसर दिया.

इस अवसर पर ब्रांड एम्बेसेडर अभिनेत्री रवीना टंडन कहती हैं कि स्कूल में बच्चे पढने के लिए जाते है पर इसके साथ-साथ घर पर भी उनकी शिक्षा सही तरह से होनी चाहिए. उसके लिए केवल किताबें ही नहीं, बल्कि उन्हें रोजमर्रा की अच्छी आदतों से भी अवगत करवाना चाहिए. मुझे याद आता है कि बचपन में हमलोग पढाई के अलावा खेलते भी थे, पर आजकल के बच्चे खेलते नहीं हैं. खेलने के लिए उनके पास समय और जगह नहीं होती. बच्चें इसे खो रहे हैं.

आजकल गेम्स भी क्लासेस में ही सिखाए जा रहे हैं. केवल पढाई पर ही उनका ध्यान रहता है. स्कूल के साथ परिवार की जिम्मेदारी भी बड़ी होती है. आज तकनीकें बदली हैं, बच्चों पर पढाई का बोझ भी अधिक है. ऐसे में उनके दैनिक दिनचर्या पर भी ध्यान देना आवश्यक है. इसके अलावा बच्चों की क्षमता को भी माता-पिता को देखना चाहिए. आजकल के पेरेंट्स बहुत अधिक डिमांडिंग होते जा रहे हैं, जिसका प्रभाव बच्चों पर सबसे अधिक देखा जाता है. मैं चाहती हूं कि माता-पिता इसे समझे और उन्हें बेसिक जानकारी दे.

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