गृहशोभा विशेष

आर्यन दिल्ली के एक पब्लिक स्कूल में चौथी कक्षा में पढ़ता है. पढ़ाई में भी अच्छा है और व्यवहारकुशल भी है. हमेशा स्कूल खुशीखुशी जाता था. मगर अचानक स्कूल जाने से कतराने लगा. कभी सिरदर्द का बहाना बनाने लगा तो कभी बुखार होने का. 2 दिन से आर्यन फिर स्कूल नहीं जा रहा था. कारण था वह जब स्कूल में रेस प्रतियोगिता में फर्स्ट आने ही वाला था कि तभी उसी की क्लास के एक बच्चे ने टंगड़ी मार कर उसे गिरा दिया, जिस से उस के दोनों घुटने बुरी तरह छिल गए. आर्यन की मां रूपा कहती हैं कि पता नहीं स्कूल में बच्चे आर्यन को क्यों तंग करते हैं.

इसी तरह मोनिका कहती हैं कि उन्हें काफी समय तक पता ही नहीं चला कि उन की बेटी वंशिका स्कूल में टिफिन नहीं खा पाती है. उसी की क्लास का एक बच्चा उस का टिफिन चुपके से खा लेता. आर्यन और वंशिका की तरह और न जाने कितने बच्चे स्कूल में अपने साथी बच्चों द्वारा प्रताडि़त होते होंगे. कोलकाता में तो एक 9 वर्ष की बच्ची को उस की सीनियर्स ने बाथरूम में ही बंद कर दिया और वहीं उस की मृत्यु हो गई. ऐसी घटनाएं लगभग सभी स्कूलों में घटती हैं. कहींकहीं ये बोलचाल के जरीए या फिर हाथपैर चला कर शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखने को मिलती हैं. रूपा और मोनिका की तरह हर बच्चे की मां की दिनचर्या बच्चे को समय से उठाने, तैयार करने, बैग, टिफिन, पानी की बोतल थमाने व स्कूल बस में चढ़ाने और फिर दोपहर को घर लाने तक ही सीमित होती है. पर क्या आप ने कभी इस बात पर ध्यान दिया कि खुशीखुशी स्कूल जाने वाला आप का बेटा या बेटी अचानक पेट दर्द, सिरदर्द आदि बहाना कर स्कूल जाने से कतराने लगी है. ऐसा है तो आप सतर्क हो जाएं. हो सकता है कि आप का बेटा या बेटी स्कूल में बुलिंग की शिकार हो रही हो यानी कोई बच्चा अपनी बात मनवाने या फिर वैसे ही मजा लेने के लिए बेवजह उसे तंग कर रहा हो. यानी वह बुली हो सकता है.

कौन होते बुलीज

कैलाश अस्पताल के वरिष्ठ सलाहकार मनोचिकित्सक डा. अजय डोगरा कहते हैं कि अकसर देखने में आता है कि बुली बच्चे डौमिनेटिंग होते हैं. ये शारीरिक रूप से शक्तिशाली भी होते हैं. ऐसे बच्चे अपने दोस्तों, स्कूल के साथियों और छोटे बच्चों के बीच अपनी धाक जमाने के लिए दादागीरी करते हैं. पासपड़ोस और स्कूल में ये लड़ाकू बच्चों के रूप में जाने जाते हैं. ऐसे बच्चे जो स्कूल में दादागीरी करते हैं वे अकेले भी हो सकते हैं और 3-4 के ग्रुप में भी, जिन्हें मिल कर अपने से कमजोर बच्चों को प्रताडि़त करने में खूब मजा आता है.

बुलिंग के शिकार बच्चों में निम्न लक्षण पाए जाते हैं:

डा. अजय डोगरा कहते हैं कि बुलिंग के शिकार बच्चों को बारबार बुखार आता है. स्कूल जाने से कतराते हैं, पेट दर्द, सिरदर्द का बहाना बनाते हैं. स्कूल जाने के लिए अपना दैनिक कार्य बहुत धीरेधीरे करते हैं ताकि स्कूल बस छूट जाए.

अकसर बिस्तर गीला करने लगते हैं.

हमेशा घबराए घबराए से रहते हैं.

पढ़ाई में थोड़ा कमजोर हो जाते हैं अथवा पढ़ाई में मन नहीं लगता.

इन की दिनचर्या में अचानक परिवर्तन आ जाता है.

अचानक पौकेट मनी की मांग करने लगते हैं.

छोटीछोटी बातों पर रोने लगते हैं और कोशिश करते हैं कि उन की बात मान ली जाए.

उन में आत्मविश्वास की कमी आने लगती है. ज्यादा कुछ होने पर डिप्रैशन में भी चले जाते हैं.

 बातों के अलावा यह भी होता है:

पैंसिल बौक्स में टूटी चीजें मिलें या स्कूल बैग से कभी टिफिन बौक्स, कभी पानी की बोतल, कभी किताबकौपी, पैन आदि का गायब हो जाना.

अकसर शारीरिक चोट खा कर आना.

भारत में किए गए एक सर्वेक्षण से पता चला है कि बुलिंग बहुत ही गंभीर समस्या है. लगभग 500 बच्चों पर एक अध्ययन हुआ जिन की उम्र 8 से 12 वर्ष थी. इस से पता चला कि 31.4% बच्चे या तो बोलचाल से या फिर शारीरिक रूप से चोट पहुंचाने की नीयत से शिकार हुए हैं.

बुलिंग के प्रकार

मानसिक बुलिंग: इस तरह की बुलिंग में दादागीरी दिखाने वाले बच्चे अन्य बच्चों को अपने ग्रुप में शामिल नहीं करते. खाना अपने साथ नहीं खाने देते. खेल में भी अपने साथ शामिल नहीं करते. यहां तक कि कोई अफवाह फैला कर उन्हें मानसिक रूप से तंग करते हैं.

वर्बल (मौखिक) बुलिंग: तरहतरह के नामों से पुकारना या उन के पहनावे, शक्लसूरत आदि की हंसी उड़ाना. किसी जाति विशेष के तौरतरीकों के बारे में व्यंग्य करना, मजाक उड़ाना आदि.

फिजिकल बुलिंग: इस में डांटना, मारना, काटना, चुटकी काटना, बाल खींचना, चोट पहुंचाना और धमकी देना शामिल है.

सैक्सुअल बुलिंग: अनचाहे शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश करना, यौन रूप से प्रताडि़त करना अथवा इस तरह का कोई कमैंट पास करना आदि.

साइबर बुलिंग: डा. अजय डोगरा कहते हैं कि आजकल इस तरह की बुलिंग टीनऐजर्स में काफी होने लगी है. इंटरनैट पर बुलिंग की परिभाषा है कि एक ऐसा कार्य जिस में किसी एक टीन या टीनऐजर समूह द्वारा किसी अन्य टीनऐजर को इंटरनैट पर, सोशल साइट्स पर या मोबाइल पर संदेशों अथवा चित्रों द्वारा परेशान और उस की व्यक्तिगत सूचना को सार्वजनिक किया जाता है. इस से पीडि़त टीनऐजर अपनेआप को असहज महसूस करने लगता है, कमजोर समझता है. साइबर बुलिंग में चीन और सिंगापुर के बाद भारत तीसरे नंबर पर है.

अकसर यह माना जाता है कि बुलिंग ज्यादातर लड़के ही करते हैं, परंतु ऐसा नहीं है. देखा गया है कि लड़के और लड़कियां दोनों ही बुली होते हैं. यह अलग बात है कि लड़का और लड़की होने के नाते दोनों के तरीके अलगअलग हों. लड़कियां ज्यादा मनोवैज्ञानिक तरीके से तंग करती हैं जैसे सीट पर साथ न बैठने देना, साथ खाना खाने से मना करना, साथ खेलने न देना या किसी पार्टी में निमंत्रण न देना, जबकि लड़के अधिकतर शारीरिक रूप से तंग करते हैं जैसे धक्का देना, गालीगलौज करना आदि.

मातापिता ऐसे करें सहायता

मनोचिकित्सक डा. अजय डोगरा के अनुसार जब आप का बच्चा बुलिंग का शिकार हो तो आप के लिए भी काउंसलिंग की जरूरत है ताकि आप बच्चे पर नाराज न हों. हालांकि मातापिता भी परेशान हो जाते हैं, पर बच्चे के सामने जाहिर न होने दें. आप का दुख बच्चे को हताश कर सकता है. अत: निम्न बातों को अपनाएं ताकि बच्चा बुलिंग का शिकार होने से बच सके:

अपने बच्चे के साथ दोस्ताना व्यवहार करें ताकि आप के और उस के बीच दोस्तों जैसा रिश्ता बन सके. तब वह स्कूल की कोई भी बात कहने से हिचकेगा नहीं. इस तरह उस की प्रत्येक गतिविधि की आप को पूरी जानकारी मिल सकेगी.

उसे बताएं कि वह बुली से न लड़े. जरूरत हो तो अपने टीचर की सहायता ले.

उसे समझाएं कि वह बहादुरी दिखाए और ऐसे बच्चों की बातों को अनुसनी कर अपने दोस्तों के साथ रहे.

यदि इन तरीके से भी समस्या का समाधान न हो तो बच्चे के साथ स्कूल जा कर प्रिंसिपल या टीचर से चर्चा करें. यदि जरूरी हो तो बुली के मातापिता को स्कूल बुला कर समस्या को हल करें.

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