गृहशोभा विशेष

हालफिलहाल दिल्ली और उस के आसपास घटी कुछ घटनाओं पर गौर करें-

24 अप्रैल, 2018 को दिल्ली के मंगोलपुरी इलाके में विनोद नाम के एक शख्स ने अपने बेटे के सामने अपनी 38 वर्षीय पत्नी सविता को हथौड़े से पीटपीट कर मार डाला.

सविता और विनोद की शादी 18 साल पहले हुई थी. दोनों के बीच अकसर झगड़ा होता था. इस वजह से दोनों अलगअलग फ्लोर पर रहने लगे थे. उन की 2 बेटियां और 1 बेटा था.

22 अप्रैल को दिल्ली के ही रंजीत नगर में क्व50 हजार न देने पर पत्नी ने व्यवसायी पति की पिटाई कर दी. इन दोनों की शादी को 27 साल हो चुके हैं.

पिछले साल पत्नी की कुछ सीक्रेट बातें पता लगने के बाद दोनों के संबंधों में खटास आ गई थी. इस वजह से पतिपत्नी अलगअलग कमरे में रहते थे.

6 अप्रैल को दिल्ली में रहने वाले एक दंपती के बीच हुई तकरार मारपीट तक पहुंच गई.

पति ने पत्नी को कमरे में बंद कर लातघूसों से इतना पीटा कि उस के पेट का औपरेशन करना पड़ा. 16 अप्रैल को गुरुग्राम में अपनी 32 वर्षीय पत्नी की हत्या के आरोप में गिरफ्तार शख्स से जब पुलिस ने पूछताछ की तो उस ने चौंकाने वाला खुलासा किया.

गुरुग्राम के सैक्टर 92 में रहने वाले हरिओम ने बताया कि उस की पत्नी फेसबुक और व्हाट्सऐप पर इतनी व्यस्त रहती थी कि घर का कोई काम नहीं करती थी. समय पर खाना न देना, पति का खयाल न रखना उस की आदत बन गई थी. इन सब बातों से आजिज आ कर उस ने पत्नी की हत्या कर दी.

कहते हैं न ‘शादी का लड्डू जो खाए वह भी पछताए और जो न खाए वह भी पछताए’. हालांकि हम इस कहावत को मजाक में लेते हैं, मगर हकीकत में जिस ने भी यह कहावत बनाई है उस ने जरूर शादी के पहले व बाद के पहलुओं को संजीदगी से समझा होगा.

मैक्स अस्पताल की डा. दीपाली बत्रा (साइकोलौजिस्ट) कहती हैं कि शादी के समय प्यार व खुशियों से भरी जिंदगी की कल्पना उस समय धरातल पर आ जाती है जब रोजमर्रा की जिंदगी में दोनों को एकदूसरे के प्रति शिकायतें होने लगती हैं. आपस में विचार न मिलना, एकदूसरे को समय न देना, एकदूसरे की इच्छाओं का खयाल न रखना जैसी समस्याओं के कारण वे खुद को अकेला महसूस करने लगते हैं.

शोधों के अनुसार करीब 10 में 6 विवाहित जोड़े रिश्ते को बचाने के लिए विशेषज्ञों की सलाह लेते हैं.

हाल ही में एक रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में हर साल करीब 1.3 लाख शादियां रजिस्टर होती हैं. इन में से करीब 10 हजार जोड़े शादी से खुश नहीं रहते.

तनाव के कारण एकदूसरे से अलग होने के लिए तलाक के मामलों में भी लगातार वृद्धि हो रही है. पतिपत्नी एकदूसरे से इतने आजिज आ जाते हैं कि हत्या करने से भी नहीं हिचकते.

रिश्तों में कड़वाहट के कारण मैरिटल डिसप्यूट रिसौल्विंग एजेंसी ने शादी में आए तनावों के कारणों को जानने के लिए सर्वे में 243 प्रतिभागियों को शामिल किया.

इस सर्वे में कई कारण सामने आए जिन में 24% व्यक्तिगत समस्याएं या बीमारी, 23% शादी के दौरान मिलने वाला पैसा, सामान और 21% मामले आपसी तालमेल न होने के भी पाए गए.

इन के अलावा क्रूरता, फ्रौड, उम्मीदों पर खरा न उतरना, संसाधनों में कमी जैसे कारण भी सामने आए.

बदलती अपेक्षाएं

एक युवती के उद्गार, ‘‘शादी से पहले मेरा बौयफ्रैंड एकदम अलग था. हम दोनों के बीच बहुत अंडरस्टैंडिंग थी. लेकिन शादी के बाद वह बिलकुल बदल गया है. मुझ से कहता है कि अब मुझे बदलना होगा और उस के मातापिता के हिसाब से चलना होगा. मेरी भी कोई इन्डिविजुएलिटी है.’’

अकसर शादी के बाद लड़की से उम्मीद की जाती है कि वह आधुनिक लड़की से पारंपरिक तौरतरीकों वाली महिला बन जाए. उसे इस दोहरी जिंदगी के लिए मजबूर किया जाता है.

बढ़ती जिम्मेदारियां सीमित अधिकार

कई महिलाएं शादी के बाद काम करना चाहती हैं, लेकिन उन से ऐसा न करने की उम्मीद की जाती है. कई दफा काम करने वाली महिलाओं से घर भी संभालने और कमाई भी घर में देने की उम्मीद की जाती है. परिवारों में घरेलू जिम्मेदारियों को साझा करना भी विवाद का विषय बनता है. यही नहीं वित्तीय फैसले, यहां तक कि सामान्य फैसले लेना भी अभी तक पुरुषों का एकाधिकार माना जाता है.

शीरोज से जुड़ी मनोवैज्ञानिक और लाइफ कोच मोनिका मजीठिया कहती हैं, ‘‘परिवार शुरू करने के लिए अकसर महिलाओं को अपना कैरियर छोड़ना पड़ता है. आज के समय में महिला सिर्फ वित्तीय कारणों के लिए काम नहीं करती, बल्कि वह इस माध्यम से खुद को व्यक्त करना चाहती है. वैवाहिक संघर्ष की सब से बड़ी वजह यह है कि महिलाएं अपनी राय व्यक्त करने और निर्णय लेने की आजादी चाहती हैं, लेकिन विवाह के बाद यही बात झगड़ों की खास वजह बन जाती है.’’

जब हमें यह लगने लगता है कि तमाम कोशिशों के बावजूद कोई फायदा नहीं हो रहा है और स्थिति खराब होती जा रही है, तो भी हताश होने की जरूरत नहीं.

नयामत बावा कुछ उपाय बता रही हैं, जिन्हें अपना कर अपने संबंधों में पहले जैसी गरमाहट ला सकते हैं:

बात करें: बातचीत का रास्ता सदैव खुला रखें. आप के मन में जो है पार्टनर को जरूर बताएं. यही नहीं उस की सुनें भी. हम जैसा महसूस करते हैं वैसे ही कदम भी उठाते हैं. हम में से ज्यादातर लोगों को बस इस बात की परवाह रहती है कि मेरी बात को कितना सुना या समझा गया. इस बारे में बहुत कम लोग सोचते हैं कि सामने वाले की बात सुनना और समझना भी जरूरी होता है.

एकदूसरे के साथ क्वालिटी टाइम बिताएं:  इस में कोई हैरानी वाली बात नहीं है कि हमारा पार्टनर हमारे साथ भरपूर क्वालिटी टाइम नहीं बिताता. ऐसा शायद इसलिए भी महसूस हो सकता है क्योंकि आप ने जो भी समय साथ बिताया हो वह एकदूसरे से झगड़ते हुए अथवा यह सोच कर कि फिर से झगड़ा न हो जाए, आप ने ठीक से बातचीत ही न की हो. साथ में कोई काम करते हुए वक्त बिताने से पार्टनर के साथ संबंध गहरे होते हैं.

संबंधों में सकारात्मकता ढूंढ़ना: अकसर हमारे दिमाग में सिर्फ यही खयाल हावी होने लगता है कि हमारे संबंधों में क्या गलत चल रहा है. ऐसे में आप उन सकारात्मक चीजों को भी नजरअंदाज कर देते हैं, जो आप दोनों के बीच चल रही होती हैं. अपने पार्टनर के साथ सकारात्मक अनुभवों के बारे में सोचें.

गलतियां पकड़नी बंद कर दें: जब हर समय आप की आलोचना हो रही हो, ऐसे में सामने वाले की आलोचना से बच पाना कठिन होता है. आलोचना करने से बचें. कई बार आप को ऐसा लग सकता है कि आप के पार्टनर ने आलोचना करना बंद नहीं किया है. इस के लिए आप को धैर्य रखना होगा.

शारीरिक प्रेम और अंतरंगता: एक स्वस्थ संबंध के लिए यह बेहद जरूरी हिस्सा होता है. अकसर हमारा ईगो हमारे संबंधों के बीच आ जाता है. हम अकसर ऐसा महसूस करते हैं कि अगर हम शारीरिक संबंध नहीं रखेंगे तब हमारे पार्टनर को अपनी गलती का एहसास होगा और फिर वह उसे सुधारने का प्रयास करेगा. लेकिन सच यह है कि ऐसा करने से दोनों के बीच की दूरियां और बढ़ती हैं.

अपनी भावनाएं व्यक्त करें: अपने पार्टनर को बताएं कि आप कैसा महसूस करते हैं, क्या करना चाहते हैं और एकदूसरे के बीच कैसे संबंध की कामना करते हैं. अच्छे दिनों को याद करें. अच्छी यादें ताजा करें. पुरानी तसवीरें देखें और एकदूसरे को बताएं कि उस समय आप ने क्या सब से अधिक ऐंजौय किया.

रिलेशनशिप काउंसलिंग: कई बार एक बाहरी नौनजजमैंटल विचार हमें यह समझने में मदद करते हैं कि हम कहां गलत हैं और हमें अपने संबंध सुधारने के लिए क्या करने की जरूरत है ताकि हमारा पार्टनर उपेक्षित महसूस न करे. काउंसलिंग से संबंधों में समझ व एकदूसरे के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने में मदद मिलती है. इस से कपल्स के बीच समस्या कम होने लगती है.

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