20 सितंबर, 2016 की सुबह. करीब 9 बजे का समय. सड़क पर लोगों की आवाजाही आम दिनों की तरह थी. दिल्ली के लेबर चौक के पास से 2 युवतियां गुजर रही थीं. सहसा वहां एक बाइक आ कर रुकती है. बाइक सवार बाइक को ठोकर मार कर एक युवती की तरफ लपक कर उस पर एक के बाद एक कैंची से वार करने लगता है. खून से लथपथ लड़की जमीन पर गिर जाती है. मगर युवक  रुकता नहीं. लड़की पर करीब 25-26 दफा वार कर डालता है.

युवक युवती की गरदन को बुरी तरह गोद देता है. पीठ पर भी वार करता है. लात भी जमाता है. यहां तक कि कई नसें भी काट देता है. हैवानियत का यह घिनौना खेल करीब 10 मिनट तक चलता है. इस बीच लोग मूकदर्शक बने खड़े रहते हैं. कोई बचाव के लिए आगे नहीं आता है.

दिलोदिमाग को झकझोर देने वाली इस घटना को देख कर कोई भी समझ सकता है कि वह शख्स उस लड़की से बेतहाशा नफरत करता होगा.

सुरेंद्र नाम का यह शख्स 3 वर्षों से करुणा नाम की उस युवती से प्यार करने का दंभ भरता था. एकतरफा प्यार में पागल यह युवक एक कंप्यूटर ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट चलाता था और शादीशुदा था. उस के 2 बच्चे भी हैं. पत्नी के साथ तलाक का केस चल रहा था. करीब 3 साल पहले करुणा ने उस के सैंटर में दाखिला लिया था. तभी से सुरेंद्र उस का पीछा करने लगा था और प्यार करने का दावा करता था. करुणा ने उस का प्रेमप्रस्ताव ठुकरा दिया था. पुलिस में भी शिकायत की थी. पर सुरेंद्र के प्यार का भूत नहीं उतरा. उसे शक था कि करुणा किसी और से जुड़ी हुई है. करुणा के रिजैक्शन ने सुरेंद्र के अहं पर ऐसी चोट की कि उस ने अपने तथाकथित प्यार के जनून में करुणा का कत्ल ही कर डाला.

ऐसी ही एक घटना 19 सितंबर, 2016 को दिल्ली के मंगोलपुरी इलाके में घटी. जब एक दिलजले आशिक ने अपनी प्रेमिका को तीसरी मंजिल की बालकनी से फेंक दिया. वजह वही थी, एकतरफा प्यार में रिजैक्शन का दर्द.

करीब डेढ़ साल पहले आरोपी अमित ने ब्यूटीपार्लर में काम करने वाली उस युवती से फेसबुक पर दोस्ती की थी. दोनों के बीच जानपहचान बढ़ती गई. व्हाट्सऐप पर खूब चैटिंग भी होने लगी पर अमित द्वारा विवाह का प्रस्ताव रखने पर लड़की ने इनकार कर दिया और इस इनकार की कीमत उसे अपनी जान दे कर चुकानी पड़ी.

दरअसल, 19 सितंबर की रात अमित अपनी बहन के साथ लड़की के घर पहुंचा और बातचीत के दौरान फिर से विवाह का प्रस्ताव रखा पर युवती द्वारा फिर इनकार किए जाने पर वह आगबबूला हो गया और युवती को बालकनी से नीचे फेंक दिया.

इसी तरह गत 23 सितंबर को ईस्ट दिल्ली क्रौस रिवर मौल की तीसरी मंजिल से एक 17 वर्षीय लड़की ने छलांग लगा कर खुदकुशी कर ली. इस घटना की तह में भी एक असफल हिंसक प्रेमी का बदला ही था. दरअसल, यह युवक 1 माह से लड़की को परेशान कर रहा था. लड़की के परिवार वालों ने इंदिरापुरम थाने में आरोपी के खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई थी. मगर वह लड़की का पीछा नहीं छोड़ रहा था.

उस ने लड़की का अपने साथ लिया गया फोटो व्हाट्सऐप पर डाल दिया. इस घटना से लड़की को इतनी शर्मिंदगी उठानी पड़ी कि उस ने आहत हो कर अपनी जान दे दी.

ऐसी घटनाएं समाचारों की सुर्खियां बनती रहती हैं. हाई प्रोफाइल केसेज (1996 का प्रियदर्शिनी मट्टू हत्याकांड/नैना साहनी तंदूर कांड) हों या मध्य अथवा निम्नवर्गीय केसेज जनून और अहं के आवेश में पागल पुरुष (भले ही वह पति हो या प्रेमी) स्त्री के प्रति हिंसक हो उठता है. तब उसे अपने ही प्रेम को बेदर्दी से मौत के घाट उतारते जरा भी संकोच नहीं होता है.

अब सवाल उठता है कि प्रेम जैसे खूबसूरत और दिल के रिश्ते में बदला और नफरत जैसे नकारात्मक भावों की जगह कहां है? प्रेम तो ऐसा एहसास है. जो दिल की गहराइयों को छूता है. सच्चा प्यार करने वाला इनसान कभी अपने प्रेमी को दुखतकलीफ में नहीं देख सकता. वह तो प्रेमी के चेहरे पर मुसकान सजाने के लिए अपने प्राणों तक की बाजी लगा सकता है. फिर जान लेना तो कल्पनातीत बात है. दरअसल, इन घटनाओं के मूल में है रिजैक्शन.

प्यार में रिजैक्शन

जिंदगी में अकसर हम चीजें रिजैक्ट करते हैं. कभी कोई चीज, जो हमें पसंद न हो उसे, तो कभी नौकरी, जो रास न आ रही हो या फिर कभी कोई आइडिया जो हमारी अपेक्षाओं के अनुकूल न हो. जैसे अप्रूवल, वैसे ही रिजैक्शन. दोनों ही हमारी जिंदगी के हिस्से हैं. इस से हैल्दी कंपीटिशन और बेहतर क्वालिटी निश्चित होती है. मगर मुश्किल तब पैदा होती है जब मनुष्य एकदूसरे को रिजैक्ट करते हैं खासकर जब लड़की/ स्त्री किसी लड़के/पुरुष को रिजैक्ट करती है.

मर्दवादी मानसिकता पर चोट

ऐसा होने पर उन के अहं पर चोट लगती है. लड़के कभी यह सहने को तैयार नहीं होते कि कोई लड़की उन के प्रेम को अस्वीकार कर किसी और को गले लगा ले. वे प्रेम पर एकाधिकार चाहते हैं. दरअसल, बचपन से ही हमारे यहां घरों में लड़कों की हर इच्छा पूरी की जाती है. मनपसंद चीज न मिलने पर यदि वे तोड़फोड़ भी करते हैं, तो भी घर वाले कुछ नहीं कहते.

घर के पुरुष महिलाओं पर रोब झाड़ते हैं. भाइयों के आगे बहनों में चुप रह कर सब सह जाने की आदत डाली जाती है. नतीजतन बड़े हो कर भी बहुत से लड़के स्वयं को इस मर्दवादी मानसिकता से मुक्त नहीं कर पाते.

नफरत में बदलती चाहत

इस तरह की मर्दवादी मानसिकता वाले शख्स जब एकतरफा प्यार में किसी को जनून की हद तक चाहने लगते हैं और लड़की यदि उन की इस चाहत को गंभीरता से नहीं लेती या अस्वीकार कर देती है, तो उन के प्यार को नफरत में बदलते देर नहीं लगती.

इस संदर्भ में क्रिमिनल साइकोलौजिस्ट अनुजा कपूर कहती हैं, ‘‘एक अध्ययन में पाया गया है कि किसी के प्रति एकतरफा चाहत जब जनून का रूप ले लेती है, तो वह इनसान को बड़े से बड़ा अपराध तक करने को मजबूर कर देती है. नाकाम चाहत में कुछ व्यक्ति डिप्रैशन में आ जाते हैं, तो कुछ घटिया करतूतों पर उतर आते हैं जैसे धमकी भरे मैसेज भेजना, पीछा करना, परेशान करना आदि. नफरत के ज्वार में बह कर कुछ लड़के कई दफा लड़की के साथसाथ अपनी जिंदगी भी बरबाद कर लेते हैं.’’

स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब प्रेमी/पति साइकोपैथ हो. इन का कोई भरोसा नहीं होता. अपने जनून में ये बर्बरता की हद तक जा सकते हैं.

साइकोपैथ प्रेमियों के लक्षण

साइकोलौजिस्ट डा. गौरव गुप्ता का कहना है, ‘‘साइकोपैथ जोड़तोड़ या झांसा देने में माहिर होते हैं. किसी लड़की/लड़के की शुरुआती मुलाकातों में इस बात का पता नहीं चल पाता कि  वह साइकोपैथ के साथ है. इस तरह के व्यक्ति के किसी के साथ जुड़ने पर उस के जीवन में काफी बदलाव नजर आने लगते हैं. वह अपने पहनावे को ले कर सतर्क होने लगता है. ऐसा व्यक्ति अपने पार्टनर को बोलने नहीं देता. सामने वाले की बातों को नजरअंदाज करता है. दूसरे की योजनाओं को चुटकियों में पलट कर अपनी योजना थोप देता है. अगर आप ब्रेकअप करने का प्रयास करेंगे तो वह परेशान हो उठेगा, माफी मांगेगा, लेकिन यह सब प्लानिंग के तहत होता है. उसे कभी अपने किए का पछतावा नहीं होता. वह आंखों में आंखें डाल कर झूठ बोलने में माहिर होता है. वह धीरेधीरे आप को दोस्तों से अलग करता जाएगा और केवल वही आप की जिंदगी में रहेगा ताकि वह आप पर और अधिकार जमा सके. उस का व्यवहार पलपल बदलता है. हर बार वह अपने बुरे बरताव के लिए माफी मांगेगा, लेकिन उस में सुधार नहीं होता.’’

कानून की ढीली पकड़

इस तरह की घटनाओं की एक और मुख्य वजह कानून की ढीली पकड़ भी है. इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि भारत में महिलाओं के हित में अनेक कानून बने हैं. फिर भी उन के खिलाफ अपराधों में कमी नहीं आ रही. वजह है कानून की ढीली पकड़ और अपराधी को सजा मिलने में होने वाला विलंब.

बड़े से बड़ा अपराध कर के भी अपराधी बच निकलता है. सजा मिलती भी है तो वर्षों बाद. ऐसे में लोगों के बीच कानून का खौफ घटा है. लड़कियों के साथ खुलेआम छेड़छाड़, कहीं भी शराबसिगरेट पीना, बीच सड़क पर थूकना, गंदगी फैलाना, गालियां देना, ट्रैफिक नियमों की अवहेलना जैसे काम करने के बावजूद व्यक्ति को सजा मिलनी तो दूर उसे टोकने वाला भी कोई नहीं होता है. वह स्वयं को सिस्टम के ऊपर समझने लगता है और फिर जो मन करता है वही करने लगता है.

न कहें मगर संभल कर

लाइफ कोच, अनामिका यदुवंशी कहती हैं, ‘‘जिस शख्स के लिए आप का दिल गवाही न दे रहा हो उसे अपने साथी के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता. अत: न कहते समय कुछ बातों का खयाल रखें ताकि सामने वाला आप से बदला लेने को उतारू न हो.’’

न कहना हो तो न करें इंतजार: किसी को भी ज्यादा समय तक मौका दे कर आप उस के मन में यह संशय पनपने का समय दे रही हैं कि कहीं न कहीं उस के पास अब भी मौका है. जितनी देर आप लटकी रहेंगी, उतनी ही उस की उम्मीदें बढ़ती रहेंगी. ऐसे में किसी को ज्यादा दिनों तक लटका कर न कहने से आप उसे न केवल ज्यादा दुख देंगी, बल्कि इस से उस का ईगो भी ज्यादा हर्ट होगा और वह अपना गुस्सा संभालने की स्थिति में नहीं रहेगा.

अत: आप की किसी लड़के में रुचि नहीं है तो शुरूआत से ही सारी चीजें साफ रखनी चाहिए.

सब से बेहतरीन तरीका है ईमानदारी से सीधे तौर पर न कहना: मैसेज से कहें न. सामने न कहने से किसी के भी अहं को चोट लग सकती है, क्योंकि हो सकता है वह उस समय भावनाओं से अभिभूत हो या फिर जब आप न कहें वह उस समय नशे में हो और आप पर गुस्सा करे, चिल्लाए. अत: इन स्थितियों से बचने के लिए अपनी अस्वीकृति मैसेज द्वारा भेज सकती हैं.

अनदेखा करें: कोई आप की प्रतिक्रिया पाने के लिए लगातार आप को मैसेज करेगा. आप के सामने गिड़गिड़ाएगा कि आप उसे क्यों छोड़ रही हैं. हो सकता है, आप को सब के सामने बेइज्जत भी करे या आप का मजाक उड़ाए. ऐसे में आप को खुद को सही ठहराने के लिए कोई सफाई देने की जरूरत नहीं है. बस हर स्थिति को अनदेखा करें और धैर्य रखें.

न कह कर मत करें हां: भले ही कोई आप को कितने भी मैसेज करे या दबाव बनाए, लेकिन अपना मन या निर्णय न बदलें. उसे यह मौका कतई न दें कि वह आप की नजरों में आप को ही दोषी बना दे और इस कारण आप उस से बातचीत जारी रखें. यदि आप नहीं चाहती हैं तो दोस्ती रखने की भी जरूरत नहीं है. उसे दुख न हो, इस के लिए दूसरी कहानी बनाने की जरूरत नहीं है और न ही भविष्य के लिए उसे फिर से उम्मीद बंधाने की जरूरत है.

यदि उसे अनदेखा करना मुश्किल है, तो ब्लौक कर दें. एक बार जब कोई न कर देता है और किसी भी तरह का कोई संबंध नहीं रखता तो अधिकांश लोग आगे बढ़ जाते हैं.

आप को न कहने का हक है. बस इस के बारे में खुद को स्पष्टवादी रखे, लेकिन स्थिति साफ रखें. अस्पष्टता लिए कोई गुंजाइश न छोड़ें बिना दुख पहुंचाए न कहने का सब से बेहतर तरीका यही है.

अनामिका यदुवंशी कहती हैं कि पुरुषों को नफरत से नहीं, सकारात्मक सोच से डील करना चाहिए. यदि न आप का साथी कह रहा है या दुनिया में आप को सब से ज्यादा समझने वाला अथवा वह जो आप को खुद भी बहुत प्यार करता है, पर उस की कोई मजबूरी है तब उस की न को दिल पर न ले कर उस की भावनाओं को समझें वरना उस की न को अहं पर ले कर आप खुद को नुकसान पहुंचाएंगे और भविष्य के लिए बड़ी समस्याएं खड़ी करेंगे.

न का सीधा असर दिमाग पर: दरअसल, जब हम न सुनते हैं तो हमारे दिमाग का कुछ हिस्सा तेजी से कार्य करता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जब आप शारीरिक रूप से दर्द या दुख महसूस करते हैं तो उस का सीधा असर दिमाग पर होता है. इसी कारण न सुनना ज्यादा दुख पहुंचाता है.

मनोवैज्ञानिक घावों को भी भरा जा सकता है: भावनात्मक दर्द, किसी की अस्वीकृति और मानसिक पीड़ा से उत्पन्न घावों को भरा जा सकता है. इस के लिए हमें सकारात्मक सोच रखनी होगी. सकारात्मक सोच के साथ जीवन के दोनों पहलुओं हां और न को साथ ले कर चलें. निश्चय ही किसी की न आप को कभी परेशान नहीं करेगी.