छत्तीसगढ़ का शिमला: मैनपाट

By Lalita Goyal | 6 January 2017

छत्तीसगढ़ में भी बर्फ का लुत्फ उठाया जा सकता है. आप को यकीन नहीं हो रहा तो छत्तीसगढ़ के खूबसूरत पर्यटन स्थल मैनपाट जाएं. बर्फ की सफेद चादर से ढकी वादियों का नजारा देख रोमांच से भर उठेंगे.

पर्यटन की अपार संभावनाओं से परिपूर्ण छत्तीसगढ़ के हरेभरे जंगल, झरने और पहाड़ सहज ही पर्यटकों का मन मोह लेते हैं. बहुत कम सैलानियों को शायद ही यह पता होगा की छत्तीसगढ़ में मैनपाट एक ऐसी खूबसूरत जगह है जहां बर्फ गिरती है और सर्दियों में यह इलाका बर्फ की सफेद चादर से ढक जाता है. मैनपाट में काफी ठंडक रहती है, यही कारण है कि इसे ‘छत्तीसगढ़ का शिमला’ कहा जाता है.

मैनपाट छतीसगढ़ का एक पर्यटन स्थल है. यह स्थल अंबिकापुर नगर, जो पूर्व सरगुजा, विश्रामपुर के नाम से भी जाना जाता है, 75 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. मैनपाट विंध्य पर्वतमाला पर स्थित है. समुद्र की सतह से इस की ऊंचाई 3,780 फुट है. मैनपाट की लंबाई 28 किलोमीटर और चौड़ाई 12 किलोमीटर है. यह बहुत ही आकर्षक स्थल है.

छत्तीसगढ़ के मैनपाट की वादियां शिमला का एहसास दिलाती हैं खासकर सावन और सर्दी के मौसम में. प्रकृति की अनुपम छटाओं से परिपूर्ण मैनपाट को सावन में बादल घेरे रहते हैं, तब इस की खूबसूरती और भी बढ़ जाती है. लगता है, जैसे आकाश से बादल धरा पर उतर रहे हों. अंबिकापुर से दरिमा होते हुए कमलेश्वरपुर तक पक्की घुमावदार सड़क और दोनों ओर घने जंगल मैनपाट पहुंचने से पहले ही हर किसी को प्रफुल्लित कर देते हैं.

मैनपाट की वादियां यों तो पहले से ही खूबसूरत हैं, लेकिन बादलों की वजह से इस की खूबसूरती में चारचांद लग जाते हैं. शिमला, कुल्लूमनाली जैसे पर्यटन स्थलों में प्रकृति की अनुपम छटा देख चुके लोग जब मैनपाट की वादियों को देखते हैं तो इस की तुलना शिमला से करते हैं.

यहां पर्यटकों को सावधानी से वाहन चलाना पड़ता है. रिमझिम फुहारों के कारण कई स्थानों पर तो दिन में भी वाहनों की लाइट जलाने की जरूरत पड़ जाती है.

अंबिकापुर से दरिमा होते हुए मैनपाट जाने के मार्ग में जैसेजैसे चढ़ाई ऊपर होती जाती है, सड़क के दोनों ओर के घने जगल अनायास ही लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं. मैनपाट में सुबह काफी देर से होती है देर तक तक घना कोहरा छाया रहता है और दोपहर में भी धूप के बावजूद गरमाहट का एहसास नहीं होता. जुलाई महीने में मैनपाट ही ऐसा नजारा देख पर्यटक आश्चर्यचकित रह जाते हैं.

प्राकृतिक संपदा से भरपूर बादलों से घिरे मैनपाट में सरभंजा जलप्रपात, टाइगर पौइंट और फिश पौइंट मुख्य दर्शनीय स्थल हैं. शहरी कोलाहल, प्रदूषण, भागमभाग और रोजमर्रा के तनाव से हट कर हरियाली के बीच मैनपाट पर्यटकों को खासा लुभाता है. यहां पहुंच कर पर्यटकों को बादलों को नजदीक से देखने का अनुभव प्राप्त होता है.

पर्यटकों के लिए यहां होटल के अलावा कुछ निजी रिजौर्ट और गैस्ट हाउस भी ठहरने के लिए उपलब्ध हैं. छत्तीसगढ़ के शिमला के नाम से विख्यात मैनपाट की प्राकृतिक सुंदरता से हर कोई वाकिफ है और यही कारण है कि हर मौसम में यहां दूर-दूर से पर्यटक पहुंचते हैं.

छत्तीसगढ़ में भी बर्फ का लुत्फ उठाया जा सकता है. आप को यकीन नहीं हो रहा तो छत्तीसगढ़ के खूबसूरत पर्यटन स्थल मैनपाट जाएं. बर्फ की सफेद चादर से ढकी वादियों का नजारा देख रोमांच से भर उठेंगे.

पर्यटन की अपार संभावनाओं से परिपूर्ण छत्तीसगढ़ के हरेभरे जंगल, झरने और पहाड़ सहज ही पर्यटकों का मन मोह लेते हैं. बहुत कम सैलानियों को शायद ही यह पता होगा की छत्तीसगढ़ में मैनपाट एक ऐसी खूबसूरत जगह है जहां बर्फ गिरती है और सर्दियों में यह इलाका बर्फ की सफेद चादर से ढक जाता है. मैनपाट में काफी ठंडक रहती है, यही कारण है कि इसे ‘छत्तीसगढ़ का शिमला’ कहा जाता है.

मैनपाट छतीसगढ़ का एक पर्यटन स्थल है. यह स्थल अंबिकापुर नगर, जो पूर्व सरगुजा, विश्रामपुर के नाम से भी जाना जाता है, 75 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. मैनपाट विंध्य पर्वतमाला पर स्थित है. समुद्र की सतह से इस की ऊंचाई 3,780 फुट है. मैनपाट की लंबाई 28 किलोमीटर और चौड़ाई 12 किलोमीटर है. यह बहुत ही आकर्षक स्थल है.

छत्तीसगढ़ के मैनपाट की वादियां शिमला का एहसास दिलाती हैं खासकर सावन और सर्दी के मौसम में. प्रकृति की अनुपम छटाओं से परिपूर्ण मैनपाट को सावन में बादल घेरे रहते हैं, तब इस की खूबसूरती और भी बढ़ जाती है. लगता है, जैसे आकाश से बादल धरा पर उतर रहे हों. अंबिकापुर से दरिमा होते हुए कमलेश्वरपुर तक पक्की घुमावदार सड़क और दोनों ओर घने जंगल मैनपाट पहुंचने से पहले ही हर किसी को प्रफुल्लित कर देते हैं.

मैनपाट की वादियां यों तो पहले से ही खूबसूरत हैं, लेकिन बादलों की वजह से इस की खूबसूरती में चारचांद लग जाते हैं. शिमला, कुल्लूमनाली जैसे पर्यटन स्थलों में प्रकृति की अनुपम छटा देख चुके लोग जब मैनपाट की वादियों को देखते हैं तो इस की तुलना शिमला से करते हैं.

यहां पर्यटकों को सावधानी से वाहन चलाना पड़ता है. रिमझिम फुहारों के कारण कई स्थानों पर तो दिन में भी वाहनों की लाइट जलाने की जरूरत पड़ जाती है.

अंबिकापुर से दरिमा होते हुए मैनपाट जाने के मार्ग में जैसेजैसे चढ़ाई ऊपर होती जाती है, सड़क के दोनों ओर के घने जगल अनायास ही लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं. मैनपाट में सुबह काफी देर से होती है देर तक तक घना कोहरा छाया रहता है और दोपहर में भी धूप के बावजूद गरमाहट का एहसास नहीं होता. जुलाई महीने में मैनपाट ही ऐसा नजारा देख पर्यटक आश्चर्यचकित रह जाते हैं.

प्राकृतिक संपदा से भरपूर बादलों से घिरे मैनपाट में सरभंजा जलप्रपात, टाइगर पौइंट और फिश पौइंट मुख्य दर्शनीय स्थल हैं. शहरी कोलाहल, प्रदूषण, भागमभाग और रोजमर्रा के तनाव से हट कर हरियाली के बीच मैनपाट पर्यटकों को खासा लुभाता है. यहां पहुंच कर पर्यटकों को बादलों को नजदीक से देखने का अनुभव प्राप्त होता है.

पर्यटकों के लिए यहां होटल के अलावा कुछ निजी रिजौर्ट और गैस्ट हाउस भी ठहरने के लिए उपलब्ध हैं. छत्तीसगढ़ के शिमला के नाम से विख्यात मैनपाट की प्राकृतिक सुंदरता से हर कोई वाकिफ है और यही कारण है कि हर मौसम में यहां दूर-दूर से पर्यटक पहुंचते हैं.

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