रात भर सो नहीं सकी आराध्या अपने पी जी से घर आयी थी छुट्टियों में, घर आते ही मॉम डैड ने रात को अपने पास बिठा लिया और कहा, “आराध्या बेटा तेरी एमबीए कम्प्लीट होने वाली है, अब हम चाहते हैं तेरी शादी कर दी जाए.”

आराध्या ने कोई जवाब नहीं दिया

चुपचाप सुनती रही और फिर अपने कमरे में आ गयी, लेकिन जो तूफ़ान  उसके अंदर चल रहा था उसे समझ नहीं आ रहा था कैसे थामे. अगले दिन उसकी खास सखी रंजना भी यही उसके घर कुछ दिन के लिए आने वाली थी.

आराध्या नहीं चाहती थी की मॉम डैड उसकी शादी की बात रंजना के सामने करे. खैर अगले दिन रंजना आ गयी.

उसकी सहेली रंजना ने आते ही उसका चेहरा पढ़ लिया की कुछ तो है पर उसने उस वक़्त कुछ भी कहना मुनासिब नहीं समझा. दो तीन दिन बाद दोनों सखियां एक साथ थी तो रंजना से  रहा नहीं गया पूछ बैठी, “क्या बात है आराध्या इस बार जब से मैं आयी हूं तुम उदास हो, कुछ तो है मुझे नहीं बताएगी हो सकता है मैं तेरी कुछ मदद कर सकूं.”

“क्या बताऊँ मॉम डैड मेरी शादी करना चाहते है पर तुम तो जानती हो ये पी जी मैंने सिर्फ उनको दिखाने के लिए लिया है, रहती तो मैं अरुण के साथ हूं वो भी लिव इन में, उन्हें अभी कुछ भी मैं बताने की हिम्मत नहीं है मुझमें.

“पर बताना तो पड़ेगा अगर उन्होंने तेरी शादी कही और पक्की कर दी तो क्या होगा, या तू छोड़ पाएगी तू अरुण को.

“नहीं नहीं मैं तो ये सोच भी नहीं सकती, मैंने अपने प्यार को अपना तन मन सब कुछ समर्पित कर दिया है उसके बिना तो मैं जीने की कल्पना भी नहीं कर सकती तू बता रंजना मेरा साथ देगी तो मॉम डैड को मनाने में.”

“चल कुछ देर बाहर चले फिर सोचते है इस बारे में.”

जैसे ही वो कमरे से बाहर गयी तो देखा मॉम बाहर ही थी उनकी आंखो से झर झर आंसू बह रहे थे शायद उन्होंने सब कुछ सुन लिया था.

आराध्या को देखते ही उन्होंने आपा खो दिया और एक थप्पड़ रसीद कर दिया उसके मुँह पर, इतना बड़ा क़दम उठा लिया तुमने, किसी अनजान पर इतना विश्वास की सब कुछ समर्पित कर दिया बिना यह सोचे समझे की इसका अंजाम कुछ भी हो सकता है. वो लड़का कौन है, कैसा है, बिना यह जाने तुमने इतना विश्वास कर लिया उस पर कि अपने मां बाप को भी अंधेरे में रखा मुझे तुमसे यह उम्मीद नहीं थी आराध्या.

रोते रोते अपने कमरे में चली गयी मॉम ……डैड अपने कमरे में ही थे

मॉम को रोता देख कर डैड ने पूछा “ क्या हो गया सुजाता रो क्यूँ रही हो अभी तो अच्छी भली थी.”

सारी बात पता चलने पर डैड भी स्तब्ध रह गए.

मुझे और रंजना को अपने कमरे में बुलाया और बोले “आराध्या कौन है वो और कैसा है लड़का जिसके साथ तुम रह रही हो, हमने तुम पर विश्वास करके तुम्हें दूर भेजा पर तुमने हमारे ही विश्वास को तोड़ दिया और रंजना तुमने भी हमें अंधेरे में रखा, जब भी आराध्या के बारे में तुम से बात की तुम हर बार बहाना बनाती रही, पर तुम्हें भी क्या कहे तुम तो अपनी सखी का साथ दोगी. रंजना को तो काटो खून नहीं अपराध बोध से गढ़ी जा रही थी वो और वो कुछ ना बोल सकी.

आई एम सॉरी डैड, मैं आपको दुखी नहीं करना चाहती थी पर मैं उसे बहुत प्यार करती हूं, आप एक बार उससे मिल लो मेरे कहने पर मुझे पूरा यकीन है वो आपको अच्छा लगेगा.

इतना कह कर आराध्या अपने कमरे में चली गयी एक बोझ उतर गया था उसके मन से. पर यह डर था अब क्या होगा. फिर भी वो बहुत सुकून से सोयी थी मॉम डैड मेरी बात मान जाएंगे.

और उधर मॉम डैड पूरी रात कश्मकश में रहे की क्या किया जाए और अंत में इसी नतीजे पर पहूंचे की उस लड़के को बुला कर इनकी शादी कर दी जाए. और उन्हें एक नई शुरुआत का अवसर दिया जाए.