गृहशोभा विशेष

स्वरा जैसे ही घर में घुसी मां संगीता उसे गले लगा कर झूम उठी, “मालूम है स्वरा बहुत ही अच्छा रिश्ता तय कर दिया तेरे पापा ने तेरा, इतना हैंडसम इतना शालीन, यूएस में हार्ट सर्जन है, फादर भी डाक्टर हैं, पापा के बचपन दोस्त. अचानक वेबसाइट पर सर्च करते समय मिल गए, पापा ने कौल किया, बात की, तेरा फोटो तेरा गाना भी मेल कर दिया, उन्हें तू बेहद पसंद है. मैं बेहद खुश हूं. मैं जानती थी तेरा भाग्य बहुत अच्छा है, मैं आज तेरी तरफ से पूरी संतुष्ट हो गई….” वह स्वरा को पकड़े खुशी के मारे गोल गोल घूमे जा रही थी.

“अरे मगर सुनो तो मम्मी मैं आपसे बताने ही वाली थी मैं और दीपेश अपार्टमेंट में साथ रह रहे हैं.”

“मतलब…?…दीपेश कौन?” त्योरियां चढ़ गईं वह रुक गई थी.

“मतलब… मम्मी लिव इन में..…मैं आपको बताने ही…”

वह वाक्य पूरा करती की पापा का झन्नाटेदार तमाचा उसके गाल लाल कर गया, आंखों से आंसू बरसने लगे.

“तू इंटर्नशिप करने गई थी न कि ये सब करने. घर से दूर पड़ता था तो तूने वहीं पीजी में रहना तय किया था. मैं तो सोच भी नहीं पा रहा और तू किस बेशर्मी से बता रही है. क्या जवाब दूंगा मैं देवेंद्र को, तुझपर कितने विश्वास होने के कारण मैं ने तेरी हकीकत जाने बिना रिश्ता तय कर दिया. तूने हमें कहीं का नहीं छोड़ा.”

पिता भानु प्रताप का चेहरा उतर गया था, वह धम्म सोफे पे चेहरा ढांक के बैठी हुई  संगीता के पार्श्व में बैठ गए थे.

“मुझे माफ कर दीजिए मम्मी पापा….दीपेश मेरा अच्छा दोस्त बन गया था. पीजी में शोरगुल बहुत था पढ़ाई हो नही पाती थी. सो हम लोगों ने ऐसा निर्णय ले लिया. आपसे पूछती तो आप कभी नहीं तैयार होते. पढ़ाई में हम दोनों को एक दूसरे से बहुत हेल्प रहती है. हम पीजी के लिए कोचिंग भी साथ ले रहे हैं. उसे भी आगे पढ़ना है, बढ़ना है और मुझे भी. वो बहुत ब्रिलिएंट है, उसे भी हार्ट सर्जन ही बनना है, वह क्लीयर कर लेगा नेक्स्ट ईयर आप देख लेना.

हम दोनों ही शादी के झंझट में इसीलिए फंसना भी नहीं चाहते. मैं इसीलिए आई थी कि पहले बात कर लूं आप दोनों से फिर उससे मिला भी दूंगी. स्वरा जिस आत्मविश्वास से कह रही थी उससे संगीता और भानु को यही समझ आया की वक़्त बदलने लगा है हमें अपनी सोच के दायरे को ही बढ़ाना होगा. कभी कहीं कुछ परिवर्तन सही भी हो सकते हैं.