गृहशोभा विशेष

वैसे तो आधार कार्ड भारत सरकार द्वारा जारी किया जाने वाला एक पहचानपत्र है पर सरकार ने जिस तरह से आधार कार्ड का प्रयोग हर जगह करना शुरू किया है उस से यह आम नागरिकों के अधिकारों का हनन करता नजर आ रहा है. आधार को ले कर सरकार की यह जबरदस्ती है कि वह बैंक खाते से ले कर राशनकार्ड तक आधार को जोड़ रही है.

सरकार का काम जनता को सहूलियतें देना है. आधार कार्ड के जरिए सरकार जनता के सामने तमाम तरह की मुश्किलें खड़ी करती जा रही है. जनता को यह बताया जा रहा है कि इस से भ्रष्टाचार रुकेगा, जिस से महंगाई कम होगी. आधार कार्ड का सब से अधिक प्रयोग रसोईगैस में किया गया. रसोईगैस के आधार कार्ड से लिंक होने का जनता को क्या लाभ मिला? आधार कार्ड से रसोईगैस के लिंक होने की योजना के बाद अगर रसोईगैस की कालाबाजारी रुक गई होती तो रसोईगैस के दाम कम होने चाहिए थे. रसोईगैस के दामों में किसी भी तरह की कमी नहीं आई है. आज भी गैस सिलैंडर ब्लैक में मिल रहे हैं.

आधार कार्ड पर 12 नंबर की संख्या छपी होती है. जिसे भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण जारी करता है. यह संख्या भारत में कहीं भी व्यक्ति की पहचान और पते का प्रमाण होती है. भारत का रहने वाला हर नागरिक इस कार्ड को बनवा सकता है. इस में हर व्यक्ति केवल एक बार ही अपना नामांकन करा सकता है. यह कार्ड सरकार द्वारा बिना पैसे लिए बनाया जाता है.

कानूनीरूप से आधार कार्ड एक पहचान मात्र है. यह भारत की नागरिकता का प्रमाणपत्र नहीं है. इस के बाद भी जिस तरह से आधार कार्ड को ले कर सरकार जनता पर दबाव बना रही है वह उस की मनमरजी थोपने जैसा है. यह नागरिक अधिकारों के हनन जैसा है.

आधार कार्ड को नागरिकता का प्रमाण पत्र नहीं माना जा रहा है. देश में पहचानपत्र के नाम पर मतदाता पहचानपत्र ही मान्य है. मतदाता पहचानपत्र की जगह पर आधार कार्ड को मान्यता देने का काम खतरनाक है. जनता के पास कई तरह के पहचानपत्र हैं. इन में राशनकार्ड, ड्राइविंग लाइसैंस, केंद्र सरकार के कर्मचारी का परिचयपत्र प्रमुख हैं. सरकार आधार कार्ड को पहचानपत्र के ऊपर रख रही है. आधार कार्ड को खास बनाने के लिए सरकार ने उस को रसोईगैस, पैन नंबर, मोबाइल नंबर और बैंक खाता नंबर से जोड़ने का काम किया है. बिना आधार कार्ड के आयकर रिटर्न भी दाखिल नहीं हो रहा है. इस के साथ ही, जमीनजायदाद की खरीदफरोख्त में रजिस्ट्री के समय भी आधार कार्ड जरूरी किया जा रहा है.

जायदाद और बैंक से आधार के जुड़ने से जनता की डोर सरकार के हाथों में चली जा रही है. इस से एक जंजीर सी बन रही है. यह जंजीर जनता के लिए ऐसी हथकड़ी बनती जा रही जिसे वह खुद अपने गले में डालने को मजबूर होती जा रही है. आधार को हर तरह से फूलप्रूफ व्यवस्था बताने वाली सरकार मतदाता पहचानपत्र को मजबूत बनाने का काम नहीं कर रही है. असल में वोट देने के सिस्टम में सरकार कोई सुधार नहीं करना चाहती है. सरकार को पता है कि वोटकार्ड में सुधार से फर्जी वोटिंग रुक सकती है, जो नेताओं के हित में नहीं है. सरकार खुद को जवाबदेही से मुक्त रखना चाहती है. आरटीआई से ले कर राजनीतिक दलों को चंदा देने तक को वह जवाबदेही के दायरे में नहीं लाना चाहती है. जनता से हर पारदर्शिता की बात करने वाले नेता खुद पारदर्शी व्यवस्था पर यकीन नहीं करते.

अपराधियों के घेरे में आधार

यह सच है कि आज के समय में आधार कार्ड आसानी से बिना पैसा खर्च किए बन जाता है. हालत यह है कि अब धोखाधड़ी कर के भी आधार कार्ड बनाए जा रहे हैं. उत्तर प्रदेश की स्पैशल टास्क फोर्स यानी एसटीएफ ने कानपुर में ऐसे गिरोह को पकड़ा जो आधार कार्ड बनाने वाली संस्था यूआईडीएआई के सर्वर में सेंधमारी कर के आधार कार्ड बनाता था. गिरोह के लोगों ने ऐसा सौफ्टवेयर बना लिया था जो इस काम में मदद करता था. इस की मदद से फर्जी आधार कार्ड धड़ल्ले से बन रहे थे.

यूआईडीएआई के डिप्टी डायरैक्टर ने इस बात की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई थी. पुलिस को जांच में पता चला कि यह काम कानपुर की विश्व बैंक कालोनी में रहने वाले सौरभ सिंह और उस के साथियों द्वारा अंजाम दिया जा रहा है.

विश्व बैंक कालोनी कानपुर शहर के बर्रा थाना क्षेत्र में आती है. पुलिस ने 9 सितंबर को सौरभ को पकड़ा तो उस ने अपने पूरे गिरोह का खुलासा किया. जिस के आधार पर पुलिस ने 10 और लोगों को पकड़ा. इन में शुभम सिंह, सत्येंद्र, तुलसीराम, कुलदीप, चमन गुप्ता और गुड्डू गोंड शामिल थे. ये लोग कानपुर, फतेहपुर, मैनपुरी, प्रतापगढ़, हरदोई और आजमगढ़ के रहने वाले थे. ये लोग यूआईडीएआई के बायोमैट्रिक मानकों को बाइपास कर के फर्जी आधार कार्ड बनाने का काम करते थे.

एसटीएफ के आईजी अमिताभ यश ने बताया कि आधार बनाने वाले गिरोह के सदस्य बायोमैट्रिक डिवाइस से अधिकृत औपरेटर से फिंगर पिं्रट ले लेते थे. उस के बाद बटरपेपर पर लेजर से प्रिंटआउट निकालते थे और कृत्रिम फिंगर प्रिंट निकालते थे.

इस कृत्रिम प्रिंट का उपयोग कर के आधार कार्ड की वैबसाइट पर लौगइन कर के इनरोलमैंट की प्रक्रिया की जाती थी. जब हैकर्स द्वारा क्लोन फिंगर प्रिंट बनाए जाने लगे तो यूआईडीएआई ने फिंगर प्रिंट के साथ ही साथ आईआरआईएस यानी रेटिना स्कैनर को भी प्रोसैस का हिस्सा बना दिया. तब गिरोह ने इस का भी क्लाइंट एप्लीकेशन बना लिया. जिस से वे फिंगर प्रिंट और आईआरआईएस दोनों को बाईपास कर ने में सफल हो गए. यह सौफ्टवेयर 5-5 हजार रुपए में बेचा जाने लगा. इस तरह एक औपरेटर की आईडी पर कई मशीनें काम करने लगीं. इस गिरोह के पास पुलिस को 11 लैपटौप, 12 मोबाइल, 18 फर्जी आधार कार्ड, 46 फर्जी फिंगर प्रिंट, 2 फिंगर प्रिंट स्कैनर, 2 रेटिना स्कैनर और साथ में आधार कार्ड बनाने वाले दूसरे सामान भी मिले.

पुलिस को अभी तक यह पता नहीं है कि इस गिरोह ने कितने फर्जी आधार कार्ड बनाए होंगे. आधार कार्ड बनाने वाले फर्जी औपरेटर का पता लगा कर पुलिस ने यूआईडीएआई को जानकारी दे दी है. यूआईडीएआई से मिली जानकारी के अनुसार, पूरे देश में करीब 81 लाख आधार कार्ड निष्क्रिय किए गए हैं. सरकार जिस आधार कार्ड पर भरोसा कर के देश की हर बीमारी का हल आधार कार्ड में तलाश कर रही है वही आधार कार्ड इतनी बड़ी संख्या में फर्जी निकल रहे हैं. जिस तरह से सरकार ने हर काम में आधार को जोड़ने का काम शुरू किया, उस से बड़ी संख्या में आधार कार्ड का फर्जीवाड़ा होने लगा है. इस की तमाम तरह की खबरें पूरे देश से आ रही हैं. केवल आधार को एकमात्र हल मान कर हर जगह आधार की जरूरत बताई जा रही है, जबकि इस से जनता की गोपनीयता को खतरा पैदा हो रहा है.

गोपनीयता को खतरा

पहले बैंक खाता, पैन कार्ड को आधार से लिंक करने के  बाद अब मोबाइल नंबर को आधार नंबर से लिंक किया जाएगा. सरकार ने फरवरी 2018 तक इस काम को पूरा करने का लक्ष्य रखा है. असल में सरकार जनता को यह बता रही है कि मोबाइल फोन के आधार से लिंक होने से फर्जी मोबाइल नंबर बंद हो जाएंगे, जिस से तमाम तरह के अपराध खत्म हो जाएंगे. आधार कार्ड बैंक खातों और पैन नंबर से लिंक्ड है. साथ में खाताधारकों की व्यक्तिगत जानकारी उस में है. ऐसे में अपराधियों के लिए बैंक के खाते से पैसा निकालने के लिए मोबाइल पर ओटीपी कोड हासिल करना सरल हो जाएगा. जिस से बैंक से पैसा बहुत आराम से निकल जाएगा और खाताधारक को पता ही नहीं चलेगा. यही नहीं, किसी साइबर अपराधी को किसी व्यक्ति का केवल आधार नंबर मिल जाए तो वह उस की पूरी गोपनीय जानकारी हासिल कर सकता है.

जनता को आधार कार्ड के लाभ बताने के लिए सरकार कहती है कि आधार कार्ड जीवनभर की पहचान है, आधार कार्ड को हर सब्सिडी के लिए जरूरी बना दिया गया है. यही नहीं, सरकार द्वारा तमाम तरह के कंपीटिशन के लिए फौर्म भरने से ले कर मार्कशीट तक में इस को जोड़ा जा रहा है. ट्रेन में टिकट में छूट पाने के लिए आधार कार्ड एक सहारा है. अब यह जन्म प्रमाणपत्र से ले कर मृत्यु प्रमाणपत्र तक में जरूरी हो गया है. रिटायर होने वाले कर्मचारियों के लिए पीएफ लेने में यह जरूरी हो गया है.

सरकार ने जिस तरह से आधार कार्ड का महिमामंडन किया है उस से यह उपयोगी कम, सिरदर्द अधिक बन गया है. चूंकि आधार कार्ड भी फर्जी तरह से बनने लगे हैं, इसलिए यह साफ है कि आधार भी उतना सुरक्षित नहीं है जितना सरकार दावा कर रही है. ऐसे में सारी जानकारी एक ही जगह देनी परेशानी का सबब बन सकता है.

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