VIDEO : सिर्फ 1 मिनट में इस तरह से करें चेहरे का मेकअप

ऐसे ही वीडियो देखने के लिए यहां क्लिक कर SUBSCRIBE करें गृहशोभा का YouTube चैनल.

आज वनिता सोसाइटी के प्रांगण में बड़ी गहमागहमी थी. मिसेज वर्मा की तेज आवाजें सब के कानों को चीर रही थीं, ‘‘किस ने कहा कि मेरे बेटेबहू का तलाक होने वाला है? तलाक हो मेरे दुश्मनों का. पता नहीं लोग कहां से बातें बना कर ले आते हैं. पहले अपने घर में झांक कर देखो तब दूसरों के बारे में बात करना. जो कहना है मेरे सामने कहो. पीछे बातें करने से क्या लाभ.’’

सब को सुना कर मिसेज वर्मा तो बड़बड़ाती हुई अपने घर चली गईं, परंतु सोसाइटी की अन्य महिलाओं को बातें बनाने का बहुत बड़ा मसाला दे गईं.

‘‘हम ने तो सुना था… पर यार परसों ही तो हम बात कर रहे थे. किस ने बता दिया जा कर वर्मा को… कल रात को भी तो मिसेज वर्मा और उन के बेटेबहू की जोरजोर से चिल्लाने की आवाजें आ रही थी. उन के घर की तो यह रोज की कहानी है. कभी सास के रोने की आवाजें आती हैं तो कभी बहू की. मिसेज वर्मा बहू की बुराई करती हैं तो उन की बहू अपनी सास की. कोई किसी से कम नहीं है,’’ सभी पड़ोसिनें मिसेज वर्मा के बारे में अपनेअपने कयास लगा रही थीं. आश्चर्य की बात यह है कि इस के तीसरे दिन ही उन्हीं में से कुछ महिलाएं मिसेज वर्मा के पास बैठ कर हंसहंस कर बातें करते हुए चायनाश्ता भी कर रही थीं.

वीणा और उस की पड़ोसिन रश्मि के परिवार के बीच घनिष्ठ संबंध थे. दोनों आपस में घरपरिवार की प्रत्येक बात शेयर करती थीं. एक दिन रश्मि को अपनी ही एक पड़ोसिन से वे बातें पता चलीं जो उस ने केवल वीणा के साथ ही शेयर की थीं. रश्मि को ये सब जान कर बहुत दुख हुआ कि जिस सखी पर उस ने भरोसा कर के अपनी अंतरंग बातें तक साझा कर दीं, उस ने ही उस के साथ ऐसा व्यवहार किया. धीरेधीरे रश्मि ने वीणा के परिवार से दूरी बना ली. वीणा की जरा सी नासमझी के कारण दोनों परिवारों के बरसों के बनेबनाए संबंध खराब हो गए.

दरअसल, जिस सहेली को वीणा ने रश्मि के बारे में बताया था उस ने ही रश्मि को फोन कर के समस्त वार्त्तालाप जस का तस सुना दिया.

अर्चना जब अपने नए घर में शिफ्ट हुई तो उस की एक पड़ोसिन ने दूसरी के बारे में सचेत करते हुए कहा, ‘‘अपनी बगल वाली से जरा होशियार रहना. बड़ी तेज है.’’

अर्चना बोली, ‘‘अच्छा वे जो गाउन पहने रहती हैं और ग्रामीण परिवेश से हैं.’’

अर्चना के द्वारा सामान्य शब्दों में कही गई यह बात और अधिक नमकमिर्च लगा कर उस की पड़ोसिन के पास कब और कैसे पहुंच गई उसे पता ही नहीं चला. काफी समय बाद जब एक दिन बातों ही बातों में उस ने अपनी उस पड़ोसिन को अपने घर आमंत्रित किया तो वह बोली, ‘‘न रे बाबा न हम गांव के बेअक्ल लोगों को आप अपने घर न बुलाएं तो ही अच्छा है.’’

पड़ोसिन की बातें सुन कर अर्चना को तो कोई जवाब ही नहीं सूझा. दरअसल, एकदूसरे की चुगली करने के लिए महिलाएं बदनाम हैं. कहावत है कि महिलाएं अपने पेट में बात पचा ही नहीं पातीं. उन्हें अपने से अधिक दूसरे के घर में क्या हो रहा है इस की चिंता रहती है. एकदूसरे की चुगली करते कब घंटों बीत जाते हैं उन्हें पता ही नहीं चलता.

निंदा रस का मजा

हरिशंकर परसाईजी ने आज से बरसों पूर्व निंदा रस के बारे में लिखा था कि यह एक ऐसा रस है जिस का रसपान करने में महिलाओं को सर्वाधिक मजा आता है पर दुनिया गोल है के सिद्धांत की ही भांति 4 महिलाओं के द्वारा 5वीं के बारे में की हुई चुगली एक से दूसरी तक होते हुए कब 5वीं तक वृहदस्वरूप में पहुंच जाती है यह चुगली करने वाली तक को भी पता नहीं चलता और इस का नतीजा कई बार बड़े ही भयावह रूप में सामने आता है.

अस्मि की नई पड़ोसिन जब आई तो सर्दियों के दिनों में अकसर अस्मि उसे चाय पर बुला लेती. अगलबगल के फ्लैटों की महिलाएं भी आ जातीं. चाय के साथ पड़ोस की कुछ चर्चा होना तो स्वाभाविक सी बात थी. उधर अस्मि की नई पड़ोसिन अन्य पड़ोसिनों के घर जा कर वहां की गई बातों को नमकमिर्च लगा कर दूसरों को बताती, जिस में वह स्वयं को तो साफ बचा लेती और बाकियों को फंसा देती.

यद्यपि इस प्रकार की चुगली में कामकाजी महिलाएं समय की कमी के कारण कम ही शामिल हो पाती हैं, परंतु घर का काम समाप्त कर के पासपड़ोस के हर घर के बारे में बातें करना आमतौर पर महिलाओं की आदत में शुमार होता है. इस का कारण है उन की सोच के दायरे का बेहद सीमित होना और व्यर्थ की बातें करने के लिए भरपूर समय होना. कई बार जानेअनजाने में दूसरे के बारे में हमारे द्वारा कही गई बात जब हमारे ही सामने आती है तो काफी शर्मनाक स्थिति हो जाती है और अपनी स्थिति साफ करने के लिए आप को बारबार अपना स्पष्टीकरण देना पड़ता है, इसलिए जहां तक हो इन सब से यथासंभव बचने का प्रयास करना चाहिए.

पहले तोलें फिर बोलें

यह सही है कि निंदा रस में बड़ा मजा आता है, परंतु यह निंदा रस आप के अंदर तो नकारात्मकता भरता ही है, कई बार दूसरों के सामने भी आप की स्थिति को खराब कर देता है. कहा जाता है कि दीवारों के भी कान होते हैं, इसलिए आज आप के द्वारा दूसरों के बारे में कही गई बात कभी न कभी सामने वाले के पास पहुंच ही जाएगी. ऐसे में आप के संबंध बिगड़ते देर नहीं लगेगी.

अपने पड़ोसियों से सदैव एकजैसा व्यवहार रखें, न स्वयं किसी दूसरे के व्यक्तिगत जीवन के बारे में जानने की जिज्ञासा रखें और न ही दूसरों को अपने बारे में व्यर्थ की जानकारी दें. आप के जीवन या परिवार से जुड़ी कोई समस्या यदि आप के जीवन में है तो उसे पड़ोसियों के बीच में न गाएं, क्योंकि वे आप की समस्या का कोई समाधान तो दे नहीं सकते, फिर उन के सामने गाना गाने से क्या लाभ. समस्या सदैव उसे बताएं जो आप की समस्या का समाधान कर सके.