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देश में तेजी से बढ़ते डिजिटाइजेशन के नाम पर हर कार्य औनलाइन किए जाने की अनिवार्यता के चलते जहां आमजन परेशानी का अनुभव करता है तो वहीं औनलाइन कार्य से जुड़े कियोस्क सैंटर्स लोगों की जेब पर डाका डालने का काम कर रहे हैं. मोदी सरकार द्वारा आधार कार्ड को बैंक खाते, मोबाइल नंबर, एलपीजी गैस आदि से लिंक कराने को अनिवार्य किए जाने से देश की जनसंख्या का एक बड़ा वर्ग अपने रोजमर्रा के काम छोड़ कर आधार लिंक कराने के लिए इन औनलाइन सैंटर्स के चक्कर लगाने पर मजबूर है. सरकारी नौकरियों में अब प्रतियोगी परीक्षाओं के जरिए चयन होने लगा है. अखबारों के माध्यम से पद विज्ञापित कर औनलाइन पोर्टल के माध्यम से परीक्षाओं के फौर्म भरवाए जाते हैं. ऐसे में बेरोजगार युवकयुवतियां सरकारी नौकरी की आस में इन औनलाइन कियोस्क सैंटर्स के इर्दगिर्द चक्कर पर चक्कर लगा कर अपना अमूल्य समय व धन खराब करने पर मजबूर हैं.

मध्य प्रदेश में पटवारी की भरती के लिए व्यावसायिक परीक्षा मंडल, भोपाल द्वारा आयोजित होने जाने वाली परीक्षा के  9,235 पदों के लिए 10 लाख से अधिक आवेदन इन कियोस्क सैंटर्स द्वारा भरे गए हैं. इस परीक्षा को पास कर बेरोजगार युवकयुवतियां पटवारी बन कर रोजगार प्राप्त कर पाएं या नहीं, परंतु प्रदेशभर में स्थापित हजारों कियोस्क सैंटर्स ने 15 दिनों में अंधाधुंध कमाई कर अपना रोजगार स्थापित कर लिया है.

सर्वर डाउन होने के नाम पर आवेदकों से फौर्म भरने के नाम पर 500-500 रुपए  तक की राशि वसूल कर के लाचार और मजबूर आवेदकों का आर्थिक शोषण करने में इन के द्वारा कोई कसर नहीं छोड़ी गई है. मनमरजी से चलने वाले ये कियोस्क सैंटर्स ग्राहकों को खुलेआम लूट रहे हैं.

औनलाइन कियोस्क सैंटर

डिजिटल इंडिया के नाम पर नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा हर गांव व शहर में औनलाइन कामकाज के लिए लोगों को सहूलियत देने हेतु कौमन सर्विस सैंटर खुलवाए गए थे. 10×10 फुट की दुकानों में स्थापित इन सर्विस सैंटर्स में कंप्यूटर सिस्टम, यूपीएस, प्रिंटर, स्कैनर की सुविधा होनी अनिवार्य है, लेकिन कई कियोस्क सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ाते किसी सरकारी विभाग के दफ्तर की तरह सुविधा शुल्क के नाम पर खुलेआम वसूली कर रहे हैं. शहरों में हर गलीचौराहे पर खुले इन कियोस्क सैंटर्स पर आधार कार्ड, पैन कार्ड के आवेदन, संशोधन जैसे महत्त्वपूर्ण कार्यों के साथ केंद्र और राज्य सरकार की सभी प्रकार की भरतियों के लिए औनलाइन फौर्म भरने का काम भी किया जाता है.

बिजली बिल, टैलीफोन बिल, जीवन बीमा प्रीमियम भरने के साथ डीटीएच और मोबाइल रिचार्ज जैसे कार्य भी इन कियोस्क सैंटर्स के माध्यम से कराए जा रहे हैं. स्कूल या विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्रछात्राओं की फीस हो या किसी भी प्रकार का सरकारी चालान, सरकारी विभागों की सभी प्रकार की निविदाएं भरने के कार्य भी कियोस्क सैंटर्स के माध्यम से औनलाइन ही किए जाते हैं.

औनलाइन कार्य के लिए इन सैंटर्स को पोर्टल शुल्क के नाम पर अलगअलग प्रकार के कार्यों के लिए 50 से ले कर 500 रुपए तक का कमीशन मिलता है. उपभोक्ताओं या ग्राहकों की मजबूरी यह है कि उन्हें इन कियोस्क सैंटर्स पर जा कर ही ये कार्य संपादित कराने पड़ते हैं. ऐसे में इन सैंटर्स द्वारा उन की मजबूरी का बेजा फायदा उठाया जाता है.

लूट पर नियंत्रण नहीं

आज सरकारी नौकरी के आवेदन के लिए बेरोजगारों से भारीभरकम फीस वसूल की जा रही है. सरकार के किसी भी विभाग द्वारा होने वाली परीक्षा के लिए 250 से ले कर 1,000 रुपए तक परीक्षा शुल्क लिया जा रहा है. मध्य प्रदेश सरकार द्वारा तो लाइसैंस फीस ले कर हर गांवशहर में एमपी औनलाइन कियोस्क सैंटर खोले गए हैं जिन्हें परीक्षा फौर्म भरने के लिए परीक्षा शुल्क के साथ

50 से 500 रुपए तक पोर्टल शुल्क मिलता है. बावजूद इस के, ये कियोस्क सैंटर्स परीक्षा संबंधी दस्तावेजों को स्कैन व अपलोड करने के नाम पर बेरोजगारों से पोर्टल शुल्क के अलावा अतिरिक्त राशि भी धड़ल्ले से वसूल कर के उन की जेबों पर डाका डाल रहे हैं.

नवोदय विद्यालय में कक्षा में प्रवेश के लिए ली जाने वाली प्रवेश परीक्षा के फौर्म भी इस बार मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा औनलाइन भरे गए और इन सैंटर्स द्वारा नन्हेंमुन्ने बच्चों के साथसाथ अभिभावकों को भी परेशान करने के लिए उन से मनमाफिक वसूली की गई. इसी प्रकार मध्य प्रदेश सरकार की राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा के औनलाइन आवेदन के लिए किसी भी प्रकार का शुल्क कियोस्क सैंटर्स को न लेने के निर्देश दिए जाने के बाद भी उन के द्वारा पोर्टल शुल्क के नाम पर अवैध वसूली की गई.

फीस के नाम पर गड़बड़झाला

मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत लगभग 10 लाख छात्रछात्राओं के हाईस्कूल और हायर सैकंडरी परीक्षा के फौर्म तथा 9वीं कक्षा के नामांकन फौर्म भरने के नाम पर प्रतिपरीक्षार्थी 25 रुपए का पोर्टल शुल्क प्रतिवर्ष वसूल किया जा रहा है. नियम के अनुसार, इस पोर्टल फीस में परीक्षा फौर्म भरने के साथ परीक्षार्थी की फोटो के स्कैन करने का कार्य करना होता है, परंतु मध्य प्रदेश में परीक्षा फौर्म भरने का कार्य अधिकांश सरकारी स्कूलों द्वारा अपने संसाधनों से किया जाता है.

सरकारी स्कूल में कार्यरत एक प्राचार्य बताते हैं कि परीक्षा फौर्म के डाटा में किसी प्रकार की गड़बड़ी न हो, इस के लिए स्कूल के शिक्षकों द्वारा स्कूल के कंप्यूटर सिस्टम के माध्यम से एमपी औनलाइन की वैबसाइट पर माध्यमिक शिक्षा मंडल के लिंक पर जा कर परीक्षा फौर्म भरे जाते हैं, जबकि परीक्षार्थियों की फीस एमपी औनलाइन के माध्यम से भरी जाती है. इस में दिलचस्प बात यह है कि कियोस्क सैंटर्स भी फीस भरने के लिए ईपिन के रूप में जो पासवर्ड उपयोग करते हैं वह प्राचार्य के मोबाइल नंबर पर आता है.

साइबर क्षेत्र के जानकार बताते हैं कि जब परीक्षा फौर्म प्राचार्य अपने लौगइन से भरते हैं तो फीस की पेमैंट स्कूल बैंक खाते या डैबिड, क्रैडिट कार्य के माध्यम से की जा सकती है. एमपी औनलाइन और माध्यमिक शिक्षा मंडल के उच्च अधिकारियों की मिलीभगत से यह गोरखधंधा 3 वर्षों से चल रहा है और कियोस्क सैंटर्स 25 रुपए प्रतिछात्र के हिसाब से कमीशन के रूप में करोड़ों का वारेन्यारे कर रहे हैं.

सुविधा नहीं दुविधा केंद्र

लोगों का कहना है कि जब मोबाइल के माध्यम से औनलाइन शौपिंग का चलन बढ़ रहा है और रुपयों का भुगतान भी ईवौलेट से हो रहा है, तो फिर औनलाइन पोर्टल की निर्भरता क्यों खत्म नहीं की जा रही है? इस का सीधा सा जवाब यही है कि सरकार प्रतिवर्ष लाखों रुपए लाइसैंस फीस की वसूली कर इन औनलाइन सैंटर्स? को प्रश्रय देने के साथ आम नागरिकों की जेब ढीली करने के षड्यंत्र में भागीदार है.