पिछले दिनों एअर इंडिया की एक महिला पायलट और क्रू के एक सदस्य को ‘प्रीफ्लाइट अलकोहल टैस्ट’ में फेल होने के बाद सजा के तौर पर 3 माह की ग्राउंड ड्यूटी पर भेज दिया गया. यह मामला डाइरैक्टर जनरल औफ सिविल ऐविएशन तक पहुंचा, क्योंकि एअरक्राफ्ट रूल्स के मुताबिक क्रू मैंबर्स को फ्लाइट के 12 घंटे पहले तक अलकोहल सेवन की इजाजत नहीं है.

इसी तरह पिछले साल नवंबर में दिल्ली के रोहिणी इलाके में रहने वाली प्रीति नाम की 36 वर्षीय महिला ने शराब के नशे में गाड़ी से 5 मजदूरों को कुचल दिया. घटना सुबह 11:30 बजे की थी. प्रीति कार में अकेली थी. हरियाणा हाईवे पर उस ने काम कर रहे 5 मजदूरों को टक्कर मार दी, जिन में से 2 ने मौके पर ही दम तोड़ दिया.

ऐसी कितनी ही घटनाएं आए दिन घटती रहती हैं, जिन में शराब के नशे में डूबी महिलाएं अपना नुकसान कर बैठती हैं. बात सिर्फ दुर्घटनाओं या इमेज खराब होने तक ही सीमित नहीं रहती वरन शराब पीने का खमियाजा कई दफा अपना सब कुछ लुटा कर भी भुगतना पड़ता है.

आमतौर पर जब शराब पीने की बात आती है, तो भारत समेत पूरी दुनिया की महिलाएं पुरुषों पर बात डाल देती हैं, जबकि सच यह है कि अब महिलाएं भी बड़ी संख्या में इस लत की शिकार होने लगी हैं.

हाल ही में और्गनाइजेशन फौर इकौनोमिक कौरपोरेशन ऐंड डैवलपमैंट द्वारा जारी एक ग्लोबल रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि भारत में शराब का सेवन पिछले 20 सालों में 55% तक बढ़ा. शराब सेवन की दृष्टि से 40 देशों की सूची में भारत को तीसरा स्थान मिला है. महिलाओं में इस का प्रयोग तेजी से बढ़ रहा है. आंकड़ों के अनुसार पिछले 10 सालों में हमारे देश में शराब का सेवन करने वाली महिलाओं की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है. ‘वर्ल्ड हैल्थ और्गनाइजेशन’ की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत में करीब 11% महिलाएं शराब का सेवन करती हैं.

आलम यह है कि आजकल शराब को भी कुछ महिलाएं स्टेटस और आजादी से जोड़ कर देखने लगी हैं. यदि उन्हें शराब पीने से रोका जाता है तो वे इसे रूढि़वादी सोच और महिलाओं के प्रति सोचीसमझी साजिश का नाम दे कर हंगामे पर उतर आती हैं. शराब पी कर वे स्वयं को आजाद और आधुनिक महसूस करती हैं.

महिलाओं के लिए अधिक खतरनाक है शराब

शराब का सेवन पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए ही नुकसानदायक होता है. लेकिन महिलाओं की शारीरिक रचना के कारण शराब उन्हें पुरुषों की तुलना में अधिक नुकसान पहुंचाती है.

राजीव गांधी कैंसर इंस्टिट्यूट ऐंड रिसर्च सैंटर की डाक्टर इंदु अग्रवाल बताती हैं कि महिलाएं शराब के प्रभावों के लिए अधिक संवेदनशील होती हैं. बराबर मात्रा में शराब लेने पर महिलाओं के खून में पुरुषों के मुकाबले उस का असर ज्यादा होता है. महिलाओं पर एकसमान ड्रिंक लेने का प्रभाव पुरुषों के मुकाबले दोगुना ज्यादा होता है. इस के कई जैववैज्ञानिक कारण हैं:

शरीर में फैट: महिलाओं का वजन पुरुषों के मुकाबले कम होता है और पुरुष के समान वजन की एक महिला में पुरुष के मुकाबले कम पानी और ज्यादा फैटी टिशू होगा. चूंकि पानी शराब का घनत्व घटाता है, इसलिए महिलाओं के शरीर में शराब का घनत्व ज्यादा लंबे समय तक और अधिक मात्रा में रहता है.

ऐंजाइम: महिलाओं में ऐंजाइम का स्तर कम होता है, जो अमाशय और यकृत में शराब को मैटाबोलाइज कर सके. परिणामस्वरूप महिलाओं के खून में शराब की मात्रा ज्यादा हो जाती है.

हारमोन: मासिकचक्र के दौरान हारमोन के स्तर में बदलाव से महिलाओं द्वारा अलकोहल मैटाबोलाइज करने का तरीका प्रभावित होता है.

शराब के सेवन के प्रभाव

शराब के सेवन से न केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य भी बुरी तरह प्रभावित होता है, जिस का प्रभाव व्यक्ति के निजी और प्रोफैशनल जीवन पर पड़ने लगता है.

शारीरिक स्वास्थ्य पर असर

लिवर डिजीज: जो लोग लगातार अधिक मात्रा में शराब का सेवन करते हैं उन्हें लिवर की सूजन और लिवर सिरोसिस जैसी परेशानियों से जूझना पड़ता है. अगर इन का समय रहते उपचार न कराया जाए तो लिवर पूरी तरह खराब हो सकता है, जो जीवन के लिए घातक होता है.

रक्तदाब बढ़ना: शराब का सेवन रक्तदाब को बढ़ा देता है. महिलाओं में शराब के सेवन से होने वाले उच्च रक्तदाब का खतरा पुरुषों से दोगुना होता है.

थकान: अधिक मात्रा में शराब का सेवन करने से विटामिन बी12 की मात्रा कम हो जाती है, जिस के कारण थकान होती है. चक्कर आना, भ्रमित होना जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं.

मोटापा: शराब शरीर में लैप्टिन के स्तर को कम कर देती है. यह भूख को नियंत्रित करने वाला हारमोन है. इस का स्तर कम होने से भूख अधिक लगती है, जिस से कैलोरी का इनटेक अधिक होता है और मोटापा बढ़ता है. शराब के सेवन के बाद उन चीजों को खाने का मन करता है, जिन में कैलोरी की मात्रा अधिक होती है. इस से वजन बढ़ने का खतरा और अधिक बढ़ जाता है.

प्रजनन क्षमता प्रभावित होती: फर्टिलिटी ऐक्सपर्ट डा. अरविंद वैद्य बताते हैं, ‘‘शराब के सेवन से समयपूर्व मेनोपौज, बांझपन, गर्भपात आदि का खतरा बढ़ जाता है. जो महिलाएं नियमित शराब का सेवन करती हैं उन का मासिकचक्र गड़बड़ा जाता है. इस के सेवन से अंडोत्सर्ग पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. अंडों की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है. जो महिलाएं गर्भावस्था के दौरान शराब का सेवन करती हैं उन के गर्भस्थ शिशु का स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है. हमारे देश में पिछले 5 वर्षों में बांझपन की समस्या 20 से 30% बढ़ गई है. इस के प्रमुख कारणों में शराब का लगातार बढ़ता सेवन भी एक है.’’

मानसिक स्वास्थ्य पर असर

अनिद्रा और अवसाद: सरोज सुपर स्पैश्यलिटी अस्पताल के मनोचिकित्सक, डा. संदीप गोविल कहते हैं, ‘‘शराब का सेवन करने से अनिद्रा की समस्या बढ़ जाती है, जिस से मानसिक तनाव बढ़ता है. लगातार तनाव की स्थिति अवसाद में बदल जाती है. अगर अवसाद की स्थिति से बाहर आने का प्रयास न किया जाए और शराब का सेवन जारी रखा जाए तो व्यक्ति गहरे अवसाद में चला जाता है. गहरे अवसाद को आत्महत्या के सब से प्रमुख कारणों में से एक माना जाता है.’’

मस्तिष्क का क्षतिग्रस्त हो जाना: डा. संदीप बताते हैं, ‘‘शराब के कारण मस्तिष्क में विषाक्तता बढ़ती है, जिस के कारण याददाश्त प्रभावित होती है और डिमेंशिया होने का खतरा बढ़ जाता है. शराब मस्तिष्क की कोशिकाओं को क्षतिग्रस्त कर देती है. इस से मिरगी का खतरा बढ़ जाता है. महिलाओं में यह प्रभाव अधिक होता है. शराब मस्तिष्क की क्षतिग्रस्त कोशिकाओं के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया को भी धीमा करती है.’’

गर्भावस्था में कतई न करें सेवन

डा. अरविंद वैद्य के अनुसार गर्भावस्था के दौरान शराब का सेवन बिलकुल नहीं करना चाहिए. जब गर्भवती महिला शराब पीती है, तो प्लैसेंटा के द्वारा वह शिशु तक पहुंच जाती है. इस से गर्भस्थ शिशु के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर कई नकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं. चूंकि इस समय बच्चे का पाचनतंत्र विकसित हो रहा होता है, इसलिए यहां वयस्क शरीर की तुलना में शराब का ब्रेकडाउन अत्यधिक धीमा होता है और बच्चे के रक्त में शराब का स्तर काफी समय तक बना रहता है. गर्भावस्था के दौरान किसी भी समय कितनी भी मात्रा में शराब का सेवन गर्भस्थ शिशु को हानि पहुंचा सकता है खासकर पहली और दूसरी तिमाही में.

शराब से कैंसर का डर

इंटरनैशनल ऐजेंसी फौर रिसर्च इन टू कैंसर (आईएआरसी, विश्व स्वास्थ्य संगठन का एक अंग) ने शराब को ग्रुप 1 कार्सिनोजेन के रूप में वर्गीकृत किया है. इस का मतलब है कि इस बात का ठोस प्रमाण है कि शराब से कैंसर होता है. शराब सिर, गरदन, आहारनली, यकृत, आंत, मलाशय व स्तन कैंसर का एक प्रमुख कारण है.

डा. जय गोपाल शर्मा, राजीव गांधी कैंसर रिसर्च सैंटर बताते हैं कि शराब से अग्नाशय के कैंसर तथा कई अन्य तरह के कैंसर का खतरा बढ़ता है. इन में से प्रत्येक कैंसर में खतरा ली गई शराब की मात्रा के अनुसार बढ़ता है.

यदि प्रयास किया जाए तो शराब की लत आसानी से छोड़ी जा सकती है. हाल ही में पूर्व सिने अभिनेत्री पूजा भट्ट ने स्वयं को इस लत से आजाद किया है. 45 साल की पूजा ने पिछले साल 25 दिसंबर से शराब का त्याग किया और फिर दोबारा इसे हाथ नहीं लगाया. इस संदर्भ में उन का कहना है कि उन के पिता महेश भट्ट के एक मैसेज ने उन्हें शराब छोड़ने को प्रेरित किया और वे इस पर पूरी तरह कायम हैं. वे जिंदगी को ज्यादा बेहतर ढंग से जीने के अपने फैसले से बहुत खुश हैं.

वास्तव में यदि दृढ़निश्चय के साथ शराब छोड़ने का प्रयास किया जाए तो इस की लत से आजाद होना कतई कठिन नहीं है.

क्या कहता है कानून

शराब सेवन से जुड़े कानूनी पक्ष की जानकारी देते हुए सीनियर ऐडवोकेट कुनाल मदान बताते हैं कि 4 राज्यों गुजरात, बिहार, नागालैंड और मणिपुर में शराब की बिक्री व उपभोग पर पूरी तरह प्रतिबंध है. इस के अतिरिक्त सामान्य रूप से मोटर ह्विकल ऐक्ट 1988 के सैक्शन 185 के मुताबिक कोई व्यक्ति जब शराब या किसी ड्रग के प्रभाव में रह कर ड्राइविंग करते हुए पकड़ा जाता है, तो उसे पहली दफा सजा के तौर पर 6 माह की जेल, क्व2 हजार जुर्माना या दोनों हो सकते हैं. 3 साल के अंदर यही गलती दोहराने पर 2 साल तक की सजा, क्व3 हजार जुर्माना या दोनों का भागीदार बनना पड़ता है. हाल ही में मोटर ह्विकल अमैंडमैंट बिल, 2016 के अंतर्गत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में यूनियन कैबिनेट द्वारा जुर्माने की राशि क्व10 हजार कर दी गई है.