गृहशोभा विशेष

प्रौपर्जी वैबसाइट की संस्थापक प्रिया महेश्वरी अपनी जिंदगी के शुरुआती दौर में साधारण जिंदगी जीने वाली और साधारण सपने देखने वाली महिलाओं की तरह ही थीं. प्रिया का जन्म राजस्थान के एक छोटे से गांव के रुढि़वादी परिवार में हुआ. पर परिवार की रुढि़वादी सोच प्रिया को प्रभावित न कर सकी. उन के विचार ऊंचे और सकारात्मक थे. प्रिया ने अपनी मुश्किल भरी जिंदगी में सिर्फ 3 बातों पर ही विश्वास किया, जो थीं मेहनत, दृढ़ संकल्प और सकारात्मक रवैया. इन 3 बातों के दम पर ही इन्होंने अपनी जिंदगी को सफल बनाया.

व्यवसायी बनने की प्रेरणा

अपनी जिंदगी और व्यवसाय की शुरुआत के बारे में बताते हुए प्रिया कहती हैं, ‘‘मैं बड़ी हो रही थी तब मेरा सपना था कि मैं कुछ बनूं, क्योंकि मेरे परिवार में किसी भी स्त्री ने कभी भी कोई काम नहीं किया था. मुझे कामकाजी महिलाएं हमेशा प्रेरित करती आई थीं. शादी के बाद मुझे अमेरिका जा कर पढ़ने का मौका मिला, जहां मैं ने यूनिवर्सिटी औफ पैनसिल्वेनिया से पढ़ाई की. फिर अमेरिका में कुछ साल काम करने के बाद मैं भारत वापस आई, तो मैं ने देखा कि भारत बहुत तेजी से विकास कर रहा है और एक आम इंसान की मुश्किलों को हल करने के लिए बहुत कुछ किया जा सकता है. तब मेरे दिमाग में प्रौपर्जी का आइडिया आया.’’

क्या है प्रौपर्जी

अपने व्यवसाय के बारे में बताते हुए प्रिया कहती हैं, ‘‘प्रौपर्जी रियल एस्टेट के क्षेत्र में एक अनोखी वैबसाइट है, जो ग्राहकों को प्रौपर्टी खरीदनेबेचने के बारे में निर्णय लेने से पहले सही और निष्पक्ष सलाह देती है. जिस से वे जागरूक हो कर फैसले ले सकें. प्रौपर्जी के जरीए हम रियल एस्टेट बाजार में सचाई, ईमानदारी पारदर्शिता और व्यावसायिकता लाने की कोशिश करते हैं. हमारी औनलाइन रिसर्च टीम स्वतंत्र रूप से प्रौपर्टी का विश्लेषण कर खरीदारों के लिए एक ऐसा डाटा तैयार करती है, जो उन्हें निर्णय लेने में काफी सहायता करता है.‘‘हमारी वैबसाइट खरीदारों को बिल्डरों, उन की परियोजनाओं, प्रौपर्टी की लोकेशन, बिल्डर की रेटिंग, प्रौपर्टी दर और उस की खरीद पर लगने वाले ब्याज के बारे में निष्पक्ष जानकारी देती है. जो खरीदार प्रौपर्जी की सेवाएं लेते हैं, उन से सुविधा शुल्क लिया जाता है. इस तरह यह वैबसाइट रियल एस्टेट से जुड़ी दूसरी वैबसाइटों से एकदम अलग है.’’

आसान नहीं थी राह

प्रिया को भी अपना व्यवसाय जमाने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा. लेकिन अपनी सूझबूझ और सकारात्मक रवैये की वजह से वे मुश्किलों से उबर सकीं. वे बताती हैं, ‘‘मुझे शुरुआत में बहुत मुसीबतें आईं और अभी भी मुझे मुसीबतों का सामना करना पड़ता है.‘‘शुरुआत में मेरे लिए सब से बड़ी चुनौती थी वैबसाइट बनाना और अपनी एक टीम बनाना. मेरे हिसाब से टीम बनाना सब से बड़ी चुनौती थी. काम की शुरुआत में आप के पास इतने पैसे नहीं होते कि आप सभी को बाजार भाव के हिसाब से तनख्वाह दे  सकें. ऐसे में सभी कर्मचारियों को अपनी टीम में रखना और उन का हौसला बनाए रखना बहुत कठिन हो जाता है. मेरी दूसरी चुनौती थी धन जुटाना. लेकिन मेरी इन दोनों चुनौतियों का समाधान निकला.’’

जिंदगी के अच्छे बुरे पल

प्रिया की जिंदगी में अच्छेबुरे पलों का आनाजाना लगा रहा. वे अपने वर्तमान समय को अपनी जिंदगी का सब से अच्छा पल मानती हैं. वे कहती हैं, ‘‘मेरी जिंदगी हमेशा बहुत कठिन रही पर मैं ने सभी चुनौतियों से कुछ न कुछ जरूर सीखा. यही सीख मुझे मेरे कठिन समय से बाहर लाई.’’ प्रगतिशील महिलाओं को संदेश देते हुए प्रिया कहती हैं कि अपनी जिंदगी को खुल कर जियो और सकारात्मक रवैया रखो.

आप इस लेख को सोशल मीडिया पर भी शेयर कर सकते हैं