मनुष्य एक जिज्ञासु प्राणी है. वह तमाम चीजों के साथसाथ अपना भविष्य भी जानना चाहता है. शायद अपनी इसी मनोवृत्ति की तृप्ति के लिए ही उस ने ज्योतिषशास्त्र की खोज की होगी. लेकिन, बाजार में ज्योतिष के नाम पर मनगढ़ंत किताबों के साथ ढोंगीपाखंडी बाबाओं की भरमार हो गई है. उन का मकसद लोगों की मजबूरियों का लाभ उठाना और पैसा बनाना है.

मामूली पत्थर को भी ये लोग महंगे नगीने के नाम पर बेच कर लोगों को आसानी से ठग लेते हैं. यही कारण है कि हर गली, महल्ला, गांव, शहर, नगर, महानगर में ज्योतिषीय उपाय से समस्या समाधान करने का साइनबोर्ड टंगा हुआ है. मजबूर और बीमार आदमी उन के जाल में आसानी से फंस जाता है.

चाहे उत्तर भारत हो या दक्षिण भारत, चाहे पूर्व भारत हो या पश्चिम भारत, ज्योतिषियों की दुकान हर जगह खुली हुई हैं. आजकल तो टीवी चैनलों और अखबारों में ज्योतिषियों की बाढ़ सी आ गई है. सुबह से कार्यक्रम शुरू होते हैं तो मध्यरात्रि तक चलते रहते हैं. टीवी पर चलने वाले कार्यक्रमों के कंटैंट और प्रेजैंटेशन डर और भय पैदा करने वाले होते हैं.

शुभअशुभ का भ्रमजाल

जन्मकुंडली में 9 ग्रह बताए जाते हैं. ये ग्रह हैं सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु एवं केतु. इस में पृथ्वी का कोई स्थान नहीं है. जबकि वैज्ञानिक तथ्य यह है कि मनुष्य के जीवन पर सब से ज्यादा प्रभाव पृथ्वी का ही पड़ता है.

जब मौसम और जलवायु में बदलाव होता है, तब मनुष्य की जैविक क्रियाओंप्रतिक्रियाओं में परिवर्तन होने लगता है. इन का प्रभाव इतना होता है कि मनुष्य को मौसम के अनुसार कपड़े पहनने पड़ते हैं. लेकिन ज्योतिषशास्त्र में मौसम और जलवायु का मनुष्य पर क्या प्रभाव पड़ता है, इस की कहीं कोई चर्चा नहीं है.

वैज्ञानिकों ने यह सिद्ध किया है कि सूर्य तारा है, ग्रह नहीं. लेकिन ज्योतिषशास्त्र में अब भी सूर्य को ग्रह ही माना जाता है. इस का मुख्य कारण यह है कि ज्योतिषशास्त्र में सैकड़ों सालों से नई खोज हुई ही नहीं है. नई खोज होगी कैसे? आज ऐसे हजारों ज्योतिषी हैं जिन को केवल संस्कृत भाषा का ही ज्ञान है.

शिकार और शिकारी

ज्योतिषियों के शिकार केवल अनपढ़गंवार या सामान्य लोग ही नहीं हैं, बल्कि पढे़लिखे, बुद्धिजीवी, बड़ेबड़े धन्नासेठ, वैज्ञानिक, इंजीनियर, डाक्टर, आईएएस अफसर, आईपीएस अफसर, वकील, नेता, अभिनेताअभिनेत्री भी इन ज्योतिषियों की सेवा लेते हैं. फिल्मी दुनिया में तो जितना अंधविश्वास है उतना तो अनपढ़गंवार लोग भी नहीं मानते हैं.

निर्देशक राकेश रोशन अपनी फिल्मों के नाम क अक्षर से रखते हैं, जैसे ‘करण अर्जुन’, ‘कहो ना प्यार है’, ‘कारोबार’, ‘कामचोर’, ‘कृष’, ‘कोयला’ इत्यादि. ‘कभी सास भी बहू थी’ टीवी धारावाहिक की निर्मात्री और अभिनेता जितेंद्र की बेटी एकता कपूर भी अपने धारावाहिकों और फिल्मों का नाम क अक्षर से ही रखती हैं, जैसे ‘कभी मैं झूठ नहीं बोलता’, ‘कृष्णा कौटेज’, ‘कसौटी जिंदगी की’, ‘कहीं किसी रोज’ इत्यादि. जबकि एकता कपूर की क अक्षर से टाइटल वाली सभी फिल्में फ्लौप हो गईं. जबकि उन की द अक्षर की टाइटल वाली फिल्म ‘द डर्टी पिक्चर’ सफल हो गई. फिर भी उन का अंधविश्वास ज्यों का त्यों है.

ऋतु चौधरी जब फिल्मों में अभिनेत्री बनने आईं और निर्देशक सुभाष घई से मिलीं तो सुभाष घई ने ऋतु चौधरी को सलाह दी कि उन के लिए म अक्षर लक्की है. उन की सभी फिल्मों की अभिनेत्रियों के नाम म अक्षर से हैं. इसलिए तुम अपना नाम म से रख लो. तो ऋतु चौधरी महिमा चौधरी बन गईं. और फिल्म बनी ‘परदेस.’ इतना कर्मकांड करने के बाद भी न फिल्म परदेस चली और न ही अभिनेत्री महिमा चौधरी का कैरियर आगे बढ़ सका.

सीमा से परे अंधविश्वास

यह अंधविश्वास केवल हिंदू धर्म में नहीं है. इसलाम धर्म को मानने वाले भी अंधविश्वासी होते हैं. जब यूसुफ खान फिल्म में अभिनेता बनने आए तो उन्होंने प्रसिद्ध ज्योतिषी पंडित नरेंद्र शर्मा से अपना नामकरण संस्कार दिलीप कुमार के रूप में कराया. शाहरुख खान पन्ना पहनते हैं, तो सलमान खान फिरोजा ब्रेसलेट.

केवल फिल्मी हस्तियां ही नहीं, बल्कि कई प्रधानमंत्रियों को अपने तांत्रिक मित्रों के कारण काफी प्रसिद्धिअप्रसिद्धि भी मिली. इंदिरा गांधी एकमुखी रुद्राक्ष की माला पहनती थीं और कई बाबाओं के यहां आतीजाती रहती थीं. इस के बावजूद उन का जीवन काफी संघर्षपूर्ण रहा. प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा के बारे में भी ऐसा ही कहा जाता है. प्रधानमंत्री पी वी नरसिंहा राव तांत्रिक चंद्रास्वामी से संबंध होने के बावजूद हवाला घोटाला में फंसे और उन की काफी फजीहत हुई.

इसरो हमारे देश की सब से बड़ी विज्ञान की प्रयोगशाला है. लेकिन इस के कई अध्यक्ष भी ऐसेऐसे वैज्ञानिक हुए हैं जो कर्मकांड और अंधविश्वास को मानते रहे हैं. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान परिषद यानी इसरो के वैज्ञानिक रौकेट लौंच करने से पहले वेंकेटेश्वर स्वामी के तिरुपति बालाजी मंदिर में पूजाअर्चना करते हैं. इस पूजा में इसरो के अध्यक्ष स्वयं उपस्थित रहते हैं.

2014 की आईएएस टौपर इरा सिंघल ने एक साक्षात्कार में कहा कि वे ज्योतिष से जान गई थीं कि इस बार उन का चयन आईएएस में हो जाएगा.

बच्चन परिवार हो या अंबानी परिवार, राजनेता हो या नौकरशाह इन बड़े लोगों ने भी जानेअनजाने में अंधविश्वास का प्रचारप्रसार किया. अपनी सुरक्षा को ले कर एक सवाल के जवाब में अपने को सब से ईमानदार नेता के रूप में पेश करने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि मेरी हथेली में जीवनरेखा लंबी है. मुझे कोई नहीं मार सकता. वहीं केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी जब अपना भविष्य जानने के लिए राजस्थान के भीलवाड़ा के कारोई कसबे में पंडित नाथूलाल व्यास के पास गईं तो मीडिया और सोशल मीडिया में उन की काफी आलोचना हुई थी.

ऐश्वर्या राय की शादी के समय अमिताभ बच्चन ने ग्रहनक्षत्रों को खुश करने के लिए मंदिरों का खूब दौरा किया था. वहीं, अंबानी बंधुओं में दरार पाटने के लिए मोरारी बापू से सलाह ली गई थी. फिर भी दोनों अंबानी भाई अलग हुए. कोई टोटका दोनों को एकसाथ न रख सका.

मोटी फीस वसूली

सामान्यतया ये ज्योतिषी एक डाक्टर से ज्यादा फीस लेते हैं. यंत्रमंत्रतंत्र और कर्मकांड करनेकराने के नाम पर तो मोटी रकम वसूली जाती है, वहीं रुद्राक्ष, लौकेट, अंगूठी, रत्न, माला, शंख की कीमत सैकड़े से शुरू हो कर लाखों में चली जाती है. बेजान दारूवाला एक प्रसिद्ध ज्योतिषी हैं. 5 साल तक आप का कैरियर कैसा रहेगा, यह बताने के लिए वे करीब 5,275 रुपए लेते हैं. प्रसिद्ध ऐस्ट्रोलौजर के एन राव के शिष्य एस गणेश की फीस 6,000 रुपए है. 3 साल तक आप का कैरियर कैसा रहेगा, यह बताने के लिए कंप्यूटर ऐस्ट्रोलौजी के जनक अजय भाम्बी 4,500 रुपए लेते हैं. प्रेमपाल शर्मा प्रति प्रश्न 2,100 रुपए लेते हैं. सुरेश श्रीमाली टैलीफोन पर सलाह देने के लिए एक व्यक्ति से 11,000 रुपए झटक लेते हैं.

जादवपुर यूनिवर्सिटी में विजिटिंग फैकल्टी डा. सुरेंद्र कपूर वीडियो कौंफ्रैंसिंग के जरिए सलाह देने के लिए 15 मिनट का 2,100 रुपए लेते हैं. ऋतु शुक्ला आप का जीवन 2 साल तक कैसा रहेगा, यह बताने के लिए 11,000 रुपए लेती हैं. दूरसंचार कंपनी एयरसेल अपनी ज्योतिषसेवा से प्रतिमाह 2 करोड़ रुपए का कारोबार करती है. एयरसेल की ज्योतिषसेवा के करीब 20 लाख ग्राहक हैं. हालांकि सब की फीस क्लाइंट की स्थिति के हिसाब से घटतीबढ़ती रहती है.

भारत का संविधान तंत्रमंत्रयंत्र, जादूटोना, शकुनअपशकुन, शुभअशुभ, मुहूर्त, गंडातावीज, और भभूत आदि को प्रतिबंधित करता है. भारतीय संविधान के 10 मूल कर्तव्यों में एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देना भी है. लेकिन यहां अंधविश्वास को ही आगे बढ़ाने वालों की भीड़ ज्यादा है.

अंधविश्वास को बढ़ावा देती हस्तियां

–       तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव को वास्तुशास्त्र में इतना विश्वास है कि वे अपना आधिकारिक कार्यालय वास्तुशास्त्र के अनुसार 2 बार बदलवा चुके हैं.

–       धार्मिक पाखंड पर बनी बहुचर्चित फिल्म ‘पीके’ के अभिनेता आमिर खान अपनी हर फिल्म दिसंबर में रिलीज करने को शुभ मानते हैं.

–       कैटरीना कैफ अपनी हर फिल्म की रिलीज से पहले अजमेर शरीफ दरगाह जा कर दुआ मांगती हैं.

–       अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी अपनी आईपीएल टीम राजस्थान रौयल्स की सफलता के लिए मैच के दौरान 2 घडि़यां पहनती हैं.

–       परेश रावल अपनी किसी भी फिल्म की शूटिंग के पहले दिन लोकेशन पर नहीं जाते हैं.

–       बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मोती पहनते हैं.

–       शिवसेना नेता और 5 बार के सांसद मोहन रावले अपने चुनाव अभियान के दौरान सिर्फ पीली शर्ट ही पहनते हैं.

–       महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने अपना नाम बदल कर अशोक राव चव्हाण कर लिया.

–       वकील व पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने नौर्थ ब्लौक में अपने कार्यालय के बाहर गणेश की बड़ी मूर्ति लगवा ली थी.

–       धर्मनिरपेक्ष देश की राजधानी दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का घर गणेश की मूर्तियों से भरा हुआ था. फिर भी वे चुनाव हार गईं.

–       अभिनेता सुनील शेट्टी अंक ज्योतिष के अनुसार अपने नाम की स्पैलिंग स्ह्वठ्ठद्ग- स्द्धद्गह्लह्ल4 लिखते हैं.

–       ज्योतिष और अंकशास्त्र में 13 को अशुभ माना जाता है. इसरो ने रौकेट पीएसएलवी 12 के बाद 13 नहीं बनाया, पीएसएलवी-14 बनाया है.

–       राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव पन्ना पहनते हैं.

– अमलेश प्रसाद

VIDEO : पीकौक फेदर नेल आर्ट

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