गृहशोभा विशेष

‘देश परदेश’, ‘रौकी’, ‘सौतन’, ‘कर्ज’ आदि दर्जनों फिल्मों में नाम कमाने के बाद अभिनेत्री टीना अंबानी ने फिल्म इंडस्ट्री को छोड़ उद्योगपति अनिल अंबानी से शादी की और 2 बेटों जय अनमोल अंबानी और जय अंशुल अंबानी की मां बनीं. शादी के बाद टीना ने केवल परिवार ही नहीं संभाला, बल्कि कई सामाजिक कार्य भी किए. उन्होंने पहले बुजुर्गों के लिए ‘हारमोनी फौर सिल्वर फाउंडेशन’ संस्था खोली. इस के बाद इसे और अधिक कारगर बनाने के लिए मुंबई में कोकिलाबेन धीरुभाई अंबानी हौस्पिटल का निर्माण किया.

टीना अंबानी की दूसरी पारी काफी महत्त्वपूर्ण है, जिसे ले कर वे बहुत खुश हैं. ‘गृहशोभा’ के लिए उन से मिल कर बात करना दिलचस्प रहा. पेश हैं, कुछ अहम अंश:

बौलीवुड से सामाजिक कार्य और हैल्थ केयर की ओर कैसे आना हुआ?

फिल्में करतेकरते शादी हुई, फिर मैं फिल्में छोड़ अपनी दूसरी पारी की ओर बढ़ी. मैं पहले से ही वरिष्ठ नागरिकों के लिए काम करती आ रही हूं. यह काम करतेकरते मैं हैल्थ केयर की ओर बढ़ी और फिर हौस्पिटल का निर्माण किया.

हैल्थ केयर के क्षेत्र में कहां आप को अधिक कमी दिखती है?

हैल्थ केयर भारत में बहुत कम है. केवल गरीब वर्ग को दोषी ठहराना ठीक नहीं. गरीबों के पास न पैसा है न जानकारी, इसलिए उन्हें सही डाक्टर नहीं मिलते, मध्यवर्ग के लिए हैल्थ केयर कठिन और महंगा है. उच्चवर्ग के पास पैसे हैं, तो सही स्किल्ड डाक्टरों की कमी है. अगर आप सरकारी अस्पताल में जाना चाहें तो वहां बहुत भीड़ है, सिस्टम सही नहीं है, बीमार लोगों को इलाज के लिए काफी इंतजार करना पड़ता है, सुविधाएं भी नहीं हैं. जगह की कमी प्रशिक्षित डाक्टरों की कमी आदि पता नहीं कितनी समस्याएं हैं. हमारे हैल्थ केयर सिस्टम में बहुत सारे गैप्स हैं जिन्हें मुझे सरकार के साथ मिल कर भरना है. यह काम आसान नहीं है, काफी चुनौतियां हैं, लेकिन धीरेधीरे सब ठीक हो जाएगा. अधिक से अधिक लोगों को ईमानदारी से इस क्षेत्र में आने की जरूरत है.

परिवार के साथ काम को कैसे संभालती हैं?

परिवार के साथ काम करने में ही खुशी होती है. अब मेरे बच्चे बड़े हो गए हैं, लेकिन जब कभी उन्हें मेरी जरूरत होती है, मैं या मेरे पति हमेशा उन के साथ रहते हैं. मेरा हौस्पिटल हो या फाउंडेशन, मेरी टीम बहुत अच्छा काम कर रही है. फलस्वरूप आज तक मैं वह सब कर पाई जो मैं करना चाहती थी. मेरे हौस्पिटल में

हर तरह की सुविधा है खासकर बच्चों के लिए कई तरह की चिकित्सा उपलब्ध है. वयस्कों के लिए भी कार्डियोलौजी से जुड़ी तमाम सुविधाएं उपलब्ध हैं.

आप की कामयाबी के पीछे आप के पति का कितना सहयोग है?

उन का बहुत सहयोग है. वे स्पेस और फ्रीडम देते हैं. वे मुझे अपने काम के पैशन को बनाए रखने की सलाह देते हैं. मैं जो भी निर्णय लेती हूं उसे पूरी सपोर्ट करते हैं.

क्या आप अपने ‘स्टारडम’ को मिस करती हैं और क्या भविष्य में फिर से अभिनय करने की उम्मीद है?

जिंदगी में 4 फेज होते हैं- बचपन, जवानी, प्रौढ़ावस्था और वृद्धावस्था. आप एक फेज में जीते हैं और आगे बढ़ जाते हैं. मैं हमेशा अगली अवस्था में जाना पसंद करती हूं. पीछे जाना पसंद नहीं करती, क्योंकि उस अवस्था को मैं ने जिया, आनंद लिया और आगे बढ़ गई.

गृहशोभा के पाठकों को क्या मैसेज देना चाहती हैं?

मैं गृहशोभा के सभी पाठकों से आग्रह करती हूं कि वे अपनी हैल्थ को इग्नोर न करें. नियमित चैकअप करवाते रहें. महिलाएं ब्रैस्ट कैंसर से बचने के लिए हर साल मैमोग्राफी करवाएं ताकि समय रहते बीमारी का पता चल जाए व इलाज संभव हो सके.

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