भारत के रोजगार बाजार में वर्ष 2016 में थोड़ी आशाजनक प्रवृत्ति दिखी है. इस साल कौशल आधारित रोजगार की तरफ बढ़ते झुकाव के साथ ही सूचना प्रौद्योगिकी और इस से संबंधित रोजगार में बढ़ोतरी हुई है. कई सालों में पहली बार बाजार में फिर से रौनक लौटी है, जिस से रोजगार की तलाश करने वालों को अपनी क्षमता के मुताबिक कैरियर का रास्ता चुनने का विकल्प मिला है.

महिलाओं के लिए 2016 खासतौर पर शानदार वर्ष रहा है, क्योंकि कईर् मौके सिर्फ उन के लिए उपलब्ध रहे हैं. चाहे आईटी, ई-कौमर्स या कोई दूसरा उद्योग हो, इस साल महिला कार्यशक्ति के लिए नए और गतिशील रास्ते खुले हैं, जिस से वे उस कैरियर को चुन सकती हैं, जिस में उन की दिलचस्पी रही हो.

रोजगार बाजार का संक्षिप्त निरीक्षण

2016 में इतनी ज्यादा संभावनाएं दिखने से उद्योग के कई विशेषज्ञों ने पूर्वानुमान व्यक्त किया है कि 2017 रोजगार तलाश करने वालों के लिए समान रूप से सकारात्मक वर्ष रहेगा. प्रमुख पेशेवर रिक्रूटमैंट कंसल्टैंसी मिशेल पेज द्वारा किए गए बाजार के विश्लेषण के मुताबिक सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ जैसी राष्ट्र निर्माण पहल के चलते लगातार प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के देश में प्रवाह के कारण भारत की आर्थिक वृद्वि सकारात्मक बनी रहेगी.

रिपोर्ट के मुताबिक इस तरह के सकारात्मक तथ्यों के साथ देश में रोजगार का परिदृश्य भी ऐसी ही उम्मीदें दिखा रहा है. इस विश्लेषण के लिए सर्वेक्षण में जिन कंपनियों को शामिल किया गया, उन में से 80 फीसदी नियोक्ताओं ने संकेत दिया है कि अगले 12 महीनों में भारत में नियुक्तियों से संबंधित गतिविधियों के स्थिर से ले कर मजबूत बने रहने तक की संभावना है, जो एशिया में औसत के मुकाबले काफी ज्यादा होगी.

सर्वेक्षण में कहा गया है कि 60 फीसदी से ज्यादा कंपनियों द्वारा अगले साल कर्मचारियों की संख्या में बढ़ोतरी किए जाने की संभावना है. इन नए कर्मचारियों में 45 फीसदी मध्यम दर्जे के प्रबंधक होंगे. इस के अलावा विश्लेषण में यह भी कहा गया है कि 83 फीसदी कंपनियों ने 2017 में विविधता को मध्यम से ले कर उच्च प्राथमिकता दी है.

आजकल भारत में कई संगठनों ने महिलाओं को कौरपोरेट क्षेत्र का हिस्सा बनने के लिए प्रोत्साहित कर लैंगिक समानता को प्राथमिकता देना शुरू किया है. वे महिलाओं की पेशेवर योग्यता को बढ़ाने के लिए काम का बेहतर माहौल दे कर अपना योगदान कर रहे हैं.

अब आइए भारत में महिलाओं के लिए कैरियर के कुछ बेहतर अवसरों की पड़ताल करते हैं, जिन के लिए 2017 में मजबूत रुझान बने रहने की संभावना है:

वर्चुअल सहयोगात्मक (कोलैब्रेशन)  अवसर: वर्चुअल सहयोग का मतलब ऐसे खास तरीके से है, जिस में प्रौद्योगिकी आधारित संचार के जरीए 2 या इस से ज्यादा वर्चुअल टीम सदस्यों के बीच सामूहिक प्रयास के मौके बनाए जाते हैं. जहां यह पूरी तरह से पारंपरिक सहयोग के समान है, वहीं फर्क इस तथ्य में है कि इस तरह के सहयोगात्मक मौडल में शामिल सहभागी दूसरे के साथ फिजिकल तरीके से संपर्क नहीं करते और करीबकरीब पूरी तरह से वर्चुअल नैटवर्क के जरीए संपर्क करते हैं. आसान शब्दों में वर्चुअल कोलैब्रेशन व्यक्ति को औनलाइन जैसे शब्द, दृश्य या लिखित रूप में संचार करने की इजाजत देता है.

मुख्यतया 5 तरह के वर्चुअल कोलैब्रेशन हैं:

सिंक्रोनस कोलैब्रेशन: सिंक्रोनस वर्चुअल कोलैब्रेशन में टीम के सदस्य एकदूसरे के साथ तुरंत जानकारी का आदानप्रदान करते हैं. इस तरह के कोलैब्रेशन के कुछ प्रमुख उदाहरण हैं. चैट रूम और इंस्टैंट मैसेंजर्स.

ऐसिंक्रोनस कोलैब्रेशन: ऐंसिंक्रोनस कोलैब्रेशन मौडल में सहभागी मैसेज और आइडिया का जवाब तुरंत दे सकते हैं. ई मेल, शेयर्र्ड डाटाबेसेज, औनलाइन डिस्कशन बोर्ड इस तरह के कोलैब्रेशन के कुछ प्रमुख उदाहरण हैं.

औडियो कौन्फ्रैंसिंग कोलैब्रेशन: औडियो कौन्फ्रैंस से कोलैब्रेशन में टीम के सदस्यों को बगैर किसी विजुअल डिस्क्रिप्शन के एकदूसरे से शाब्दिक रूप से संचार करने का अवसर मिलता है. इस तरह के कोलैब्रेशन के कुछ प्रमुख उदाहरणों में फोन काल, कौन्फ्रैंस काल आदि शामिल हैं.

वीडियो कौन्फ्रैंसिंग कोलैब्रेशन: वीडियो कौन्फ्रैंसिंग के वर्चुअल मौडल में सहभागी को रियल टाइम में एकदूसरे के साथ शाब्दिक और दृश्य के जरीए संचार करने का अवसर मिलता है. ग्रुप वीडियो कौन्फ्रैंसिंग और डैस्कटौप वीडियो कौन्फ्रैंस इस तरह के कोलैब्रेशन के कुछ उदाहरण हैं.

कंप्यूटर मीडिएटेड कम्युनिकेशन: वर्चुअल कोलैब्रेशन के कंप्यूटर मेडिएटेड कम्युनिकेशन मौडल से टीम के सदस्यों को टैक्स्ट, चित्र या आंकड़ों के इस्तेमाल से संचार करने का अवसर मिलता है. ये बगैर किसी प्रभावी रियल टाइम वौयस या वीडियो चित्र के कंप्यूटर के जरीए प्राप्त किए जाते हैं. ऐप्लिकेशन स्पैसिफिक ग्रुपवेयर कंप्यूटर मीडिएटेड कम्युनिकेशन का एक उदाहरण है.

स्टोरीटैलर्स: स्टोरी टैलिंग (कहानी कहना) दुनिया की सब से पुरानी कलाओं में से एक है. भारत में स्टोरीटैलर्स पारंपरिक रूप से दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए थिएटर या ऐसे दूसरे विजुअल आर्ट का हिस्सा रहे हैं. हालांकि ज्यादा लोग स्टोरी टैलिंग को ठोस पेशेवर विकल्प के रूप में स्वीकार नहीं करेंगे. फिर क्यों इस गतिविधि को आजकल सब से ज्यादा प्रचलित कैरियर में से एक माना जा रहा है?

इस का जवाब बाजार की मांग में है. पिछले 2 सालों से भारत में गैरपारंपरिक कैरियर विकल्पों में तेजी दिखनी शुरू हुई है, जो उच्च रचनात्मक पेशेवरों के बीच काफी लोकप्रिय साबित हो रहे हैं. भारत में ऐसा ही एक पेशा है स्टोरी टैलिंग, जो कई लोगों खासकर महिलाओं के बीच तेजी से लोकप्रियता हासिल कर रहा है. जिन लोगों के पास मौकों के इस्तेमाल करने का हुनर हो और जो बांध कर रखने वाली, अविस्मरणीय और विनोदपूर्ण कहानियां कह सकते हैं, वे इस पेशे के लिए बिलकुल अनुकूल हैं.

छोटे उद्यमियों का उद्भव: भारतीय एमएसएमई उद्योग अपने अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र की वजह से पिछले कुछ वर्षों में सब से तेजी से बढ़ रहे क्षेत्रों में से एक बन गया है. अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र की वजह से ऐसे व्यवसायों के विकास के लिए कई अवसर पैदा हुए हैं. यह देश में स्टार्टअप कल्चर को बढ़ावा देने के लिए भी अनुकूल है और इस से कईर् छोटे उद्यमियों को अपना स्वयं का व्यवसाय तैयार करने में भी मदद मिली है. सरकार ने उभरते उद्यमियों को एक ऐसा मजबूत प्लेटफौर्म मुहैया कराने के लिए अपने ‘मेक इन इंडिया’ और ‘स्टार्टअप इंडिया’ अभियानों के तहत कई पहलों की घोषणा की है ताकि उन के व्यवसाय के विकास को सुगम बनाया जा सके.

परिणाम: ऐसी पहलों ने कई महिलाओं को आगे आने और अपनी स्वयं की इच्छाओं और शर्तों के आधार पर स्वयं को कौरपोरेट जगत में स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करना शुरू किया है. भारत में कई महिला उद्यमी मौजूद हैं लेकिन अभी सामूहिक रूप से महिला केंद्रित व्यवसायों का प्रतिशत काफी कम है. चूंकि महिलाओं को पारंपरिक रूप से हमारे समाज में गृहिणी होने में विश्वास किया जाता है और इन में से ज्यादातर महिलाएं पारिवारिक वजह से या सामाजिक दबाव की वजह से अपनी महत्त्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाने में दिलचस्पी नहीं लेती हैं.

नैशनल सैंपल सर्वे और्गेनाइजेशन द्वारा कराई सिक्स्थ इकौनोमिक सैंसस की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में सिफ 14% व्यावसायिक प्रतिष्ठान मौजूदा समय में महिला उद्यमियों द्वारा संचालित हैं. इस से पता चलता है कि लगभग 5.85 करोड़ व्यवसायों में से सिर्फ 80.5 लाख ही महिलाओं द्वारा संचालित हैं.

डिजाइन, क्रिएटिव और आर्ट में कैरियर: लगभग सभी लोगों में अपने कार्य क्षेत्र में रचनात्मकता लाने की प्रतिभा होती है. यह ऐसा तरीका हो सकता है जिस में वे अंकगणितीय समीकरण को हल करते हैं, किसी ऊंची इमारत के लिए ब्लूप्रिंट तैयार करते हैं या अपनी कलात्मक रचनाओं के जरीए भावनाओं को प्रदर्शित करने की उन की क्षमता, रचनात्मकता किसी भी स्वरूप में इस्तेमाल की जा सकती है.

डिजाइन, क्रिएटिव और आर्ट में कुछ लोकप्रिय कैरियर अवसर निम्नलिखित हैं:

आर्किटैक्ट: लंबे समय से आर्किटैक्चर के क्षेत्र में अध्ययन करने या कैरियर निर्माण को पुरुषप्रधान पेशे के तौर पर देखा जाता रहा है. हालांकि महिलाओं को वास्तुकला के तौर पर कैरियर अपनाने से नहीं रोका जाता है, लेकिन उन्हें अन्य प्रतिस्पर्धियों से भेदभाव समेत और कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. हालांकि इस क्षेत्र में हालात में अब काफी बदलाव आया है.

भले ही यह एक पारंपरिक कैरियर विकल्प है, लेकिन वास्तुकार बनने से व्यक्ति अपनी रचनात्मकता को सामने ला सकता है और विशेष डिजाइन तैयार कर सकता है. अपना प्रोजैक्ट शुरू होने पर वह वास्तव में अपने सपने को साकार कर सकता है.

फिल्म निर्माण: फिल्म निर्माण एक ऐसा पेशा है जो अब धीरेधीरे भारत में कई महिलाओं का पसंदीदा कैरियर बनता जा रहा है. चाहे यह किसी स्वतंत्र फिल्म या एक संपूर्ण बौलीवुड फिल्म का निर्देशन हो, देश में महिला फिल्म निर्माताओं को इस क्षेत्र में उन की योग्यताओं और क्षमताओं के लिए सराहा जा रहा है. उभरते कैरियर के तौर पर फिल्म निर्माण अगले कुछ वर्षों में कई महिलाओं के लिए एक भरोसेमंद कैरियर विकल्प बनने के लिए तैयार है.

स्वतंत्र सेवा प्रदाताओं में तेजी: स्वतंत्र सेवा प्रदाता आईएसपी वे लोग हैं, जो किसी संगठन या अपनी स्वयं की परियोजना के लिए विशेष सेवाएं मुहैया कराने के लिए सहमत होते हैं और किसी कंपनी या कौरपोरेट प्रतिष्ठान से जुड़े नहीं होते हैं. यह काफी हद तक फ्रीलांसिंग जैसा है, लेकिन आईएसपी किसी व्यक्ति या संगठन के लिए सिर्फ कुछ खास कार्य से ही समान्यतया एक बार सेवा मुहैया कराने के आधार पर जुड़े होते हैं.

संभावित कैरियर विकल्प के तौर पर आईएसपी बनना किसी व्यक्ति को कामकाजी जिंदगी के बेहतर संतुलन में सक्षम बनाता है, क्योंकि इस में कार्य के घंटे स्वतंत्र हैं. वे या तो वर्क फ्रौम होम का विकल्प अपना सकते हैं या प्राप्त हुई परियोजना के आधार पर काम कर सकते हैं. यह उन महिलाओं के लिए भी आकर्षक विकल्प हो सकता है, जो या तो विशेष अवसर तलाश रही हैं या ऐसी विशेष सेवाएं पेश कर अपने कौशल के दायरे को व्यापक बनाना चाहती हैं.

निष्कर्ष

कई उद्योग जानकारों द्वारा अगले वर्ष रोजगार बाजार अनुकूल रहने की भविष्यवाणी किए जाने के साथ ही उपरोक्त कैरियर रुझानों से यह स्पष्ट हो गया है कि 2017 में रोजगार तलाशने वालों के लिए उपयुक्त अवसर होंगे. इस के अलावा लगभग सभी नियोक्ता कंपनियां जाति, धर्म या लिंग भेदभाव से अलग विविध एवं उपयुक्त कार्य परिवेश तैयार करने की संभावना तलाश रही हैं, जिस से 2017 में लोगों को अपनी पसंद का रोजगार अवसर तलाशने में मदद मिल सकती है. कहने का मतलब यह है कि हम यह उम्मीद कर सकते हैं कि नया वर्ष भारत में सभी प्रतिभाशाली महिलाओं के लिए नई संभावनाएं ले कर आ रहा है.

साइरी चहल, शीरोज की संस्थापक एवं सीईओ

खुद बनाया रास्ता

ट्रांसजैंडर एक ऐसा शब्द है जिसे सुनते ही जानेअनजाने हम अपनी भौंहें चढ़ा लेते हैं. सामाजिक रूप से जागरूक व्यक्तियों को छोड़ दें तो शेष लोगों के लिए अभी भी यह शब्द और इस का अर्थ एक टैबू है. ट्रांसवूमन को नीची नजरों से देखा जाता है. लोगों की पिछड़ी मानसिकता का नतीजा है कि हम इन लोगों को अकसर इनसान के आधारभूत अधिकारों से भी वंचित कर देते हैं.

फिर इन में से कुछ ऐसे होते हैं जो अपने आत्मबल व लगन की बदौलत इस तरह की समस्याओं को पार कर आगे बढ़ते हैं और अपना मकसद पूरा करते हैं. ऐसी ही एक कहानी है, पोनी नाम की ट्रांसजैंडर वूमन की, जिस ने हर तरह के सामाजिक धब्बे को धता बताते हुए अपने डांस के पैशन को एक मुकाम तक पहुंचाया और सामाजिक रूप से बहिष्कृत स्लम के बच्चों को भी इस शिक्षा का अधिकारी बनाया.

टूटिकोरैन में जन्मी पोनी अपने परिवार में सब से छोटी हैं. बचपन से ही डांस उन का पैशन था.

शुरू में उन के जैंडर ऐक्सप्रैशन की वजह से उन्हें ट्रेनिंग देने से इनकार कर दिया गया. पोनी ने 20 साल की उम्र में सैक्स रिअसाइनमैंट सर्जरी कराई थी. मैथ्स से बीएससी करने के बाद उन्होंने भरतनाट्यम और डांस में एमए किया. कभी सपना देखना नहीं छोड़ा. फिर एक एनजीओ की ओर से आमंत्रण मिला तो तुरंत उस अवसर को स्वीकार किया. यहां वे शुरू में 20 छात्रों को पढ़ाती थीं. धीरेधीरे समाज द्वारा स्वीकृत न किए जाने का उन का भय लुप्त होता गया. उन्हें छात्रों से बहुत सम्मान मिलता था. इस से उन्हें अपनी डांस क्लासेज शुरू करने की प्रेरणा मिली तो 2006 में चैन्नई में ‘अभिनया नृत्यालया’ की शुरुआत की. इस के लिए सरकार से  1 लाख लोन भी मिला.

पोनी का मुख्य मकसद स्लम के बच्चों को पढ़ाना है, क्योंकि जब वे कम उम्र की थीं तब उन्हें एक डांस क्लास में लेने से इसलिए इनकार कर दिया था कि वहां केवल ब्राह्मणों के बच्चों को ही सिखाया जाता है.

आज पोनी की डांस ऐकैडमी में स्लम के बच्चे और कुछ ट्रांसजैंडर्स भी हैं. पोनी इन बच्चों की आंखों को भी सपने देखने का हौसला दे रही हैं. डिस्कवरी चैनल पर आनेवाले शो ‘इंडिया माई वे’ में भी इन की कहानी दिखाई गई.