न फंसें विज्ञापनों के भ्रामक जाल में

By Lalita Goyal | 17 June 2017
न फंसें विज्ञापनों के भ्रामक जाल में

16 वर्षीय सान्या अपने चेहरे के सांवलेपन और पिंपल्स से बहुत परेशान थी. उस ने अनेक उपाय किए पर कोई फायदा न हुआ. फिर उस ने टीवी पर एक ब्यूटी क्रीम का विज्ञापन देखा, जिस में चेहरे को गोरा व बेदाग बनाने की बात कही जा रही थी. विज्ञापन से प्रभावित हो कर सान्या ने भी वह क्रीम औनलाइन और्डर कर दी.

क्रीम की डिलीवरी पा कर सान्या खुश थी. उसे लग रहा था कि अब जल्द ही वह गोरी व बेदाग त्वचा की मलिका हो जाएगी. क्रीम पर लिखे निर्देशानुसार रात को सान्या ने कुछ दिन क्रीम लगाई. लेकिन इस से सान्या का पूरा चेहरा लाल होने लगा था और पूरे चेहरे पर जलन और खुजली मचने लगी.

अब सान्या को पछतावा हो रहा था कि क्यों उस ने बिना सोचेसमझे विज्ञापन के झांसे में आ कर इतनी बड़ी मुसीबत मोल ले ली. सान्या जैसे अनेक किशोर विज्ञापन से आकर्षित हो कर कोई भी प्रोडक्ट खरीद लेते हैं और धोखा खा जाते हैं. बदले में उन के पास सिवा पछतावे के कोई और उपाय नहीं बचता.

औनलाइन शौपिंग : धोखे की गुंजाइश ज्यादा

रोहन कई दिन से अपने लिए आईपैड खरीदने की सोच रहा था, लेकिन सभी आईपैड उस के बजट से बाहर थे. ऐसे में एक दिन इंटरनैट पर उस ने औनलाइन एक आईपैड देखा, जो उस के बजट में मिल रहा था. रोहन ने बिना सोचेसमझे आईपैड और्डर कर दिया.

जब आईपैड आया तो पता चला कि उस की कोईर् गारंटीवारंटी नहीं थी. साथ ही आईपैड की मैन्यूफैक्चरिंग डेट भी बहुत पुरानी थी. शायद इसीलिए उसे वह आईपैड मार्केट रेट से कम दाम में मिल गया था. सस्ते के चक्कर में आ कर रोहन को पुराने आईपैड से ही काम चलाना पड़ा.

इसी तरह कई औनलाइन फैशन साइट्स पर आकर्षक ड्रैसेज बहुत कम कीमत पर मिलने का विज्ञापन दिया जाता है और किशोर विज्ञापन के झांसे में आ कर औनलाइन शौपिंग कर लेते हैं, लेकिन जब ड्रैस उन के सामने आती है तो न तो ड्रैस का कलर वह होता है जो विज्ञापन में दिखाया गया होता है और न ही उस का फैब्रिक.

इसलिए औनलाइन शौपिंग करते समय सिर्फ विज्ञापनों के वादों पर न जाएं बल्कि पूरी तरह जांचपड़ताल करने के बाद ही शौपिंग करें और साथ ही अगर औनलाइन शौपिंग में कैश औन डिलीवरी का औप्शन हो तो वही लें ताकि आप डिलीवरी के बाद प्रोडक्ट की जांचपरख कर ही पेमैंट करें.

विज्ञापन और सेहत से खिलवाड़

टीवी पर दिखाए जाने वाले कई विज्ञापनों में दिखाया जाता है कि फलांफलां टौनिक पीने से आप की हाइट बढ़ जाएगी और फलां जूस पीने से आप का वजन कम हो जाएगा और आप किसी फिल्मी स्टार की भांति स्लिमट्रिम और फिट दिखने लगेंगे. ऐसे विज्ञापनों के झांसे में आने से बचें और बिना डाक्टर की सलाह के कोई हैल्थ टौनिक न लें.

किशोरावस्था में लड़कों को बौडी बनाने की और लड़कियों को खूबसूरती बढ़ाने और मैंटेंड फिगर पाने की चाहत होती है, जिस के चलते वे विज्ञापनों के झांसे में आ जाते हैं और सेहत से खिलवाड़ कर बैठते हैं. जहां पैसे की तो बरबादी होती ही है, सेहत पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है.

एक के साथ एक फ्री का लालच

कई बार किशोर किसी मौल या शौपिंग स्टोर में जाते हैं और वहां जा कर एक के साथ एक फ्री या बाय वन गैट टू फ्री के झांसे में आ जाते हैं और बिना जरूरत का सामान भी खरीद लाते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि स्कीम में  उन्हें सस्ता सामान मिल रहा है जबकि यह कंपनियों की स्ट्रेटजी होती है. वे अपना सामान निकालने के लिए ऐसी युक्तियां रचते हैं, वह प्रोडक्ट मार्केट में आउटडेटेट हो चुका होता है इसलिए ऐसा सामान खरीदने से बचें.

तंत्र मंत्र यंत्र के धोखे

वे किशोर छात्र जो पढ़ाई में कमजोर होते हैं परीक्षा में सफलता पाने के लिए देर रात आने वाले रत्नों, मंत्रों और यंत्रों के विज्ञापनों के झांसे में आ जाते हैं जो दावा करते हैं कि उक्त रत्न को धारण करने से उन्हें परीक्षा में सफलता मिलेगी.

ये विज्ञापन वास्तव में सिर्फ छलावा होते हैं जो अपना धंधा चमकाने के लिए किशोरों को मेहनत की राह से भटकाते हैं जिन के भरोसे रह कर छात्र अपनी पढ़ाई छोड़ कर रत्नों के जरिए सफलता पाने की आस में रहते हैं, लेकिन जब परीक्षा परिणाम आता है तो उन के सामने वास्तविकता आती है.

इसलिए अपनी मेहनत और लगन पर विश्वास रखें और ऐसे अंधविश्वास भरे विज्ञापनों के भ्रामक जाल से बचें.

पेरैंट्स की सलाह लें

कोई भी शौपिंग करने से पहले पेरैंट्स की सलाह लें. सिर्फ विज्ञापनों में दिखाए गए वादों पर भरोसा न करें, क्योंकि विज्ञापनों में सिर्फ प्रोडक्ट की खूबियों को उजागर किया जाता है, सब अच्छाअच्छा दिखाया जाता है. अगर विज्ञापन में कोई उत्पाद आप को पसंद आता भी है तो उसे खरीदने से पहले किसी ऐसे व्यक्ति की राय लें जिस ने वह उत्पाद प्रयोग किया हो यानी विज्ञापन के दिखावों पर न जाएं अपनी अक्ल लगाएं.

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