‘मास्टर शैफ सीजन-5’ की विजेता रहीं कोलकाता की कीर्ति भौतिका ने कोलकाता के जीडी बिड़ला कालेज से न्यूट्रिशन में ग्रैजुएशन किया है. कोलकाता के साल्टलेक इलाके में कीर्ति एक बेकरी शौप चलाती हैं. कीर्ति इसे बेकरी के बजाय केकरी कहना ज्यादा पसंद करती हैं. उन का केकरी सुगरप्लम केकरी के नाम से जाना जाता है और पूरे साल्टलेक में एगलैस केक व पेस्ट्री के लिए बहुत लोकप्रिय है.

कीर्ति ने महज 18 साल की उम्र में शैफ का कैरियर अपनाया और बेकरी सुगरप्लम केकरी से इस की शुरुआत की. कालेज में ग्रैजुएशन की पढ़ाई के साथ कीर्ति ने बेकरी शौप को बखूबी मैनेज किया. पिछले कई सालों से कीर्ति का वर्क शैड्यूल बड़ा व्यस्त रहा है. टाइम मैनेजमैंट से ले कर बेकरी मैनेजमैंट तक का सारा काम वे बड़ी शिद्दत से पूरा करती हैं. यही वजह है कि दिन की शुरुआत सुबह 5 बजे से होती है.

कीर्ति ने अपनी फाइनल डिश से मास्टर शैफ के जजों- विकास खन्ना, कुणाल कपूर और जोराबर कालरा का दिल जीत लिया था. पेश हैं कीर्ति से बातचीत के कुछ अंश:

मास्टर शैफ की जर्नी कैसी रही? सब से ज्यादा गर्व कब महसूस हुआ?

बहुत अच्छी रही. हर चैलेंज के दौरान मैं ने कुछ न कुछ सीखा. इस शो की सब से बड़ी उपलब्धि मेरे लिए यह रही कि हर दिन मैं ने सीखा. इस के अलावा बहुत सारे लोगों से मिली, जो दुनिया के अलगअलग हिस्सों से आए थे. शो के दौरान दुनिया के अलगअलग हिस्सों में जाना हुआ. शो में भाग लेने वाले हम सब एक बड़े परिवार की तरह थे बिलकुल फैमिली की तरह. यह पहला मौका था जब मैं अपने परिवार से इतनी दूर गई और वह भी कई महीनों के लिए. सब से अच्छी बात यह रही कि मैं ने बहुत दोस्त बनाए.

रही बात गर्व महसूस करने की तो ऐसा मौका 2 बार आया. उस क्षण को मैं जीतेजी कभी नहीं भूल पाऊंगी, जब मास्टर शैफ में मुझे मेरे नाम का ऐप्रन मिला. इस के अलावा उस समय भी मुझे बहुत गर्व महसूस हुआ जब फाइनल ऐपिसोड में मेरे मम्मीपापा शो में मौजूद थे और शो का खिताब जीतते हुए उन्होंने मुझे देखा.

इस पूरी जर्नी में माथे पर शिकन लाने वाली कोई बात थी क्या?

नौनवैज को ले कर शुरुआत में थोड़ी परेशानी हुई थी. मजेदार बात यह है कि मास्टर शैफ का सीजन-4 वैज शो था. सब के इतना कहने के बाद भी मैं ने उस सीजन में भाग नहीं लिया था. सीजन-5 सामान्य था. जाहिर है इस में नौनवैज भी शामिल था. मास्टर शैफ में मुझे कई मौकों पर नौनवैज भी बनाना पड़ा. पहले तो मेरे पापा को यह बात गंवारा नहीं थी कि मैं नौनवैज बनाऊं. उन्होंने कहा कि घरपरिवार के लोग शो में तुम्हें नौनवैज बनाते देखेंगे तो बहुत बातें बनाएंगे. हमारे परिवार की बड़ी आलोचना होगी. लेकिन मैं ने पापा को किसी तरह इस के लिए मना लिया.

मास्टर शैफ में आप को जीत दिलाने वाली डिश कौन सी थी?

वह डिश थी एर्ल ग्रे टी ऐंड फिग टार्ट विद हनी सिट्रस क्रीम फिलिंग. इस डिश ने सभी जजों का दिल जीत लिया था.

मास्टर शैफ का खिताब जीतने के बाद लाइफ में कैसा और कितना बदलाव आया?

मास्टर शैफ का खिताब जीतने के बाद मेरे जीवन में बहुत बदलाव आया. पहले मैं होम कुक थी, पर अब मास्टर शैफ हूं. इस नाते मैं अपनी जिम्मेदारी बखूबी समझती हूं. मेरा मानना है कि सिर्फ स्वाद काफी नहीं है, फूड का हैल्दी होना भी जरूरी है, इसलिए मैं ज्यादा से ज्यादा अपनी बनाई डिशेज में हैल्दी सामग्री का इस्तेमाल करती हूं. मसलन, मैदे की जगह आटा, जिस में बहुत फाइबर होता है, का प्रयोग करती हूं. इसी तरह कम से कम चीनी का प्रयोग या फिर चीनी के बदले शहद का इस्तेमाल करती हूं.

आगे की क्या योजना है?

2 साल पहले मैं ने सुगरप्लम केकरी खोली थी. अब मैं एक फूड स्टूडियो पर काम करना चाहूंगी. इस स्टूडियो से मैं बेकिंग क्लास लूंगी. यहां मैं भी बहुत कुछ सीखूंगी. मास्टर शैफ के दौरान मैं ने पाया कि हर इनसान के पास सिखाने के लिए कुछ न कुछ जरूर होता है. स्टूडियो में जितने लोगों से मैं मिलूंगी, उन को सिखाने के साथसाथ मैं खुद भी सीखूंगी.