फैशन को एक नए रूप में लोगों तक पहुंचाने का काम कर रहीं डिजाइनर करिश्मा शाहनी खान पुणे की हैं. भारत की कला और संस्कृति को उन्होंने डिजाइन के जरीए कहने की कोशिश की है. अत्यंत शांत और नम्र स्वभाव की करिश्मा का ब्रैंड ‘क.श.’ देश के हैंडीक्राफ्ट को विश्व स्तर तक पहुंचाने के लिए लगातार तत्पर है. आगे चल कर क्या बनना है, यह करिश्मा ने पहले से तय नहीं किया था. जिस काम में मन लग जाता, वे बस वही करने लगती थीं. मन एक जगह ठहरता ही नहीं था. और ऐसा शायद इसलिए था कि एक दिन उन को कुछ बड़ा काम करना था. अपने बारे में करिश्मा बताती हैं, ‘‘मैं पुणे की हूं और फैशन की पढ़ाई मैं ने यूके के लंदन कालेज औफ फैशन से की.’’

वे आगे कहती हैं, ‘‘मुझे घूमनेफिरने का बहुत शौक है इसलिए एक वक्त ऐसा भी आया था जब मैं अर्कियोलौजिस्ट बनना चाहती थी. कई बार सोचती थी कि अफ्रीका जा कर रहूंगी पर बीच में यह फैशन डिजाइनिंग आ गई.’’

ऐसे हुई शुरुआत

अपनी पढ़ाई के सिलसिले में करिश्मा ने कई देशों की यात्रा की और अलगअलग जगहों की संस्कृतियों और पहनावे के बारे में जानकारी भी हासिल की. इस के बाद उन्होंने भारत वापस आ कर अपने लिए काम करने का मन बनाया. वे बताती हैं, ‘‘पढ़ाई के दौरान मैं ने कई जगहों पर इंटर्नशिप की. 3-4 साल तक यही चलता रहा. फिर एक दिन ऐसा आया जब मैं ने सोचा कि मैं अपने लिए कुछ करूं तो मैं वापस भारत आ गई. यहां लोगों ने मेरे काम को सराहा और मुझे और्डर मिलने लगे. फिर मैं ने अपना ब्रैंड बनाने का चांस लिया. इस में परिवार का सहयोग जरूरी था, जो शुरू में मेरे मातापिता व बहन का मिला और अब मेरे पति का मिल रहा है.

टर्निंग पौइंट

हर किसी की जिंदगी में एक ऐसा पल आता है, जो उस को एक नई दिशा देता है. अपने जीवन के टर्निंग पौइंट का जिक्र करते हुए करिश्मा कहती हैं, ‘‘लोग मुझ से अकसर मेरे जीवन का टर्निंग पौइंट क्या रहा, इस के बारे में पूछते हैं. मेरा यही कहना है कि लेबल के जरीए मुझे अपनी कला को दिखाने का मौका अब मिल रहा है, लेकिन कालेज में जब मैं ने अपना अंतिम शो किया था. वह काफी प्रशंसनीय था. वही मेरी जिंदगी का टर्निंग पौइंट था. इस से मुझे अपना काम शुरू करने का प्रोत्साहन मिला.’’ खुद के दम पर नाम बनाने को करिश्मा अपनी उपलब्धि नहीं मानतीं. वे मानती हैं कि जिस दिन वे देश का नाम ऊंचा कर सकीं, उस दिन वे खुद को सही माने में सफल मानेंगी. उन का कहना है, ‘‘जब मेरे जीवन के सब से बड़े अचीवमैंट की बात होती है तो मैं यही कहती हूं कि अभी तक तो कोई नहीं मिली, आगे मिलना बाकी है. मैं अपने देश को विश्व स्तर तक पहुंचाना चाहती हूं, जहां लोग सिर्फ यहां के कपड़े पहनें ही नहीं, बल्कि उस की कद्र करना भी सीखें. मैं बाहर पढ़ी हूं इसलिए मुझे पता है कि विदेशों में हमारे कपड़ों की काफी अहमियत है.’’

जिंदगी में आई मुश्किल

भारत में प्रेम विवाह और वह भी दूसरे धर्म में करना तो मुश्किल है ही और यदि किसी तरह यह हो जाए तो दकियानूसी सामाजिक सोच के चलते इसे निभाना मुश्किल है. कुछ ऐसा ही करिश्मा के साथ भी हुआ. लेकिन उन के परिवार वालों ने उन का साथ दिया. इस बारे में वे कहती हैं, ‘‘मेरी जिंदगी में एक बड़ी मुश्किल तब आई थी जब मैं ने शादी की, क्योंकि मैं हिंदू परिवार से हूं और मेरे पति मुसलिम, लेकिन जब मेरी शादी हुई तो वह मेरे लिए सब से अच्छा पल था, क्योंकि मुझे मेरी खुशी मिली. साथ ही परिवार वाले भी अपना माइंड सैट कर आगे बढ़े और इसे सहर्ष स्वीकार किया.’’

प्रगतिशील महिलाओं को संदेश देते हुए करिश्मा कहती हैं, ‘‘वे अपने अंदर कुतूहल व आत्मविश्वास बनाए रखें, साथ ही यह सोच भी रखें कि आप जो चाहें वह कर सकती हैं. अपनी शिक्षा अवश्य पूरी करें ताकि आप एक सफल पत्नी, मां और उद्यमी बन सकें.’’