गृहशोभा विशेष

हिंदी फिल्म ‘पीपली लाइव’ के निर्देशक महमूद फारूकी को अंतत: डेढ़ साल की जेल के बाद अपनी एक महिला मित्र के ही बलात्कार के आरोप से मुक्ति मिल गई. 35 वर्षीय अमेरिकी महिला, जो महमूद और उस की पत्नी अनुजा रिजवी की मित्र थी और उन के घर पर खाना भी खाती थी तथा देर रात तक रुकती भी थी, ने आरोप लगाया था कि उस दिन महमूद ने उस के साथ जबरदस्ती की थी. उस के कपड़े उतार कर उस से ओरल सैक्स किया था.  लोअर अदालत ने महमूद को 7 साल की सजा दी थी पर उच्च न्यायालय ने फैसला बदलते हुए कहा है कि यह सहमति का मामला है और अगर औरत ने धीमे से ‘न’ कहा भी था तो यह पक्का करना असंभव है कि यह आमंत्रण था या इनकार. इस संदेह पर महमूद को रिहा कर दिया गया है.

परिचितों में सैक्स को बलात्कार कहने का जो नया तौरतरीका महिलाओं ने अपनाया है यह सैक्स स्वतंत्रता को कुचल देगा. यदि किसी आदमी या औरत में इतना आकर्षण नहीं है कि वह मौका मिलने पर चाहत न पैदा कर सके और दूसरे के प्रति उदासीन रहे, तो यह प्रकृति के विरुद्ध कहा जाएगा.

बलात्कार बुरा है पर सैक्स उस में चाहे एक तरफ से थोड़ी जबरदस्ती भी हो वास्तव में एकदूसरे के प्रति स्वाभाविक आकर्षण का रूप है और मित्रता को सीमेंट करती है चाहे मित्रता पतिपत्नी के बीच हो या फिर गैर के साथ.

बिना सैक्स के स्त्रीपुरुष मित्रता असल में 2 स्त्रियों और 2 पुरुषों की मित्रता से भी कमजोर होती है. स्त्रीपुरुष मित्रता में एकदूसरे पर न धौंस जमा सकते हैं न मजाक कर सकते हैं. जिन्हें सैक्स रहित मित्रता चाहिए उन्हें दूसरे पुरुष या दूसरी स्त्री से मिलना ही नहीं चाहिए और केवल व्यावहारिक संबंध रखने चाहिए.  पुरुष को सैक्स चाहिए पर वह उसे आनंद तब ही दे है जब मित्रता की चाशनी में डूबा हो. बाजारू औरतों से खरीदे सैक्स में कभी किसी को आनंद नहीं आया है और इसीलिए सभी वेश्यालयों में नाच अवश्य होता है, क्योंकि तभी ग्राहकों को रोका जा सकता है.

उच्च न्यायालय ने सैक्स को एक सही व नई परिभाषा दी है. स्त्रीपुरुष संबंधों को हर समय नैतिकता या जोरजबरदस्ती की निगाहों से नहीं देखा जाना चाहिए. विवाहपूर्व या विवाह बाद दोस्तों में सैक्स के बहुत जोखिम हैं पर जो जोखिम में आनंद पाते हैं उन्हें सहमति होने पर रोकने का अधिकार किसी को नहीं है. आकर्षण पैदा होने पर, 4 कदम चल जाने के बाद कई बार संबंध बन जाने के बाद बलात्कार का आरोप लगाने का जो हथियार दुनिया भर में महिलाएं अपना रही हैं यह उन की कार्यक्षेत्र में ऐंट्री धीमे होने का एक कारण है.  अब पुरुष महिलाओं को हमराज बनाने से कतरा रहे हैं और उन्हें दूरदूर रख रहे हैं. पुरुषों की आपसी मित्रता ज्यादा पकने लगी है जैसे ‘जिंदगी न मिलेगी दोबारा’ या ‘थ्री ईडियट्स’ में दिखाया गया है.

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