दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक मंत्री संदीप कुमार को मंत्री पद से हटा दिया, क्योंकि एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर घूमने लगा, जिस में संदीप कुमार किसी औरत के साथ सैक्स संबंध बना रहा था. अरविंद केजरीवाल ने नैतिकता के मानदंडों के नाम पर संदीप कुमार को हटा दिया कि उस के मंत्री विवादों से ऊपर रहें.

अगर यह क्लिप वास्तव में संदीप कुमार का किसी औरत के साथ है, जो उस की पत्नी नहीं है तो चटखारे लेने की बात तो हो सकती है पर उस में नैतिकता का सवाल उठाने का हक पत्नी को है किसी और को नहीं. सैक्स का सहमति से होना नैतिकता के दायरे में आए यह जरूरी नहीं खासकर तब जब न उस औरत ने उसी दिन आपत्ति की हो और न पत्नी ने. अब विवाद खड़ा होने पर वह औरत शिकायत करने जा पहुंची है, क्योंकि शायद उसे लगा वह नाहक बदनाम हो जाएगी.

यह तर्क चाहे बुरा लगे पर सच यह है कि सदियों से विवाह की परंपरा के बावजूद विवाहेतर संबंध बनते रहे हैं. इस पर आपत्ति और नैतिकता का सवाल असल में औरतों को बदनाम करने के लिए उठाया जाता रहा है. किसी औरत के गैरपति से संबंध बनाने की सजा औरत को ही मिलती रही है, पति को नहीं. आज भी हम इन गैरबराबरी वाले विचारों से उठ नहीं पाए हैं और नैतिकता को कोरा सैक्स से जोड़ रहे हैं.

इसी वजह से ज्यादातर औरतें छुईमुई बनी रहती हैं, अपने को घर की दीवारों में कैद रखती हैं, किसी मर्द से बात करती घबराती हैं. नौकरीपेशा हों तो रातदिन डरती हैं कि कहीं कोई ऊंचनीच न हो जाए. विवाहिताओं की तो छोडि़ए, अविवाहिताएं भी इसी कारण उस युवक से प्रेम निवेदन करने से कतराती हैं, जो उन के उपयुक्त है और जिस के साथ जीवनसुख मिल सकता है. युवा प्रेम निवेदन करता है तो पहले वे इनकार करती हैं और बाद में ही झिझक कम होती है.

इस थोथी नैतिकता के कारण औरतों का व्यक्तित्व सामाजिक परंपराओं, सदाचरण, अस्मिता में खो जाता है. पुरुष हर तरह का जोखिम ले सकता है, औरत इस इज्जत को बचाने के लिए अपने को कुरबान कर देती है. संदीप कुमार के जिस भी औरत के साथ संबंध थे वे पत्नी से धोखा हो सकते हैं पर जनता को उस से कोई मतलब नहीं, जब तक यह साबित न हो जाए कि एक नेता देह के रूप में कुछ वसूली कर रहा था.

अगर वीडियो चोरीछिपे बनाया गया है तो यह वीडियो ही अनैतिकता के दायरे में है. निजी स्वतंत्रता को राजनीति के ढेर में दफना देना शायद जरूरी है पर यह जनता की ज्यादती है. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन भी मोनिका लेविंस्की के मामले में फंसे थे इस तरह की छद्म नैतिकता के चक्कर में.

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