हसीन होती सैकेंड इनिंग

By Shailendra Singh | 22 September 2017
हसीन होती सैकेंड इनिंग

फैशन, मौडलिंग और ऐक्टिंग के लिए पहले महिलाओं की उम्र 20 से 30 साल तक ही परफैक्ट मानी जाती थी. लेकिन अब 35 साल के बाद की उम्र में भी महिलाएं खुद को किसी मौडल या ऐक्ट्रैस से कम नहीं समझतीं. मौका मिलने पर रुपहले परदे से ले कर रैंप शो, कैटवाक और मौडलिंग तक में वे सैकेंड इनिंग का खूब लुत्फ उठा रही हैं.

बदलाव का असर बौलीवुड तक ही सीमित नहीं है, छोटे और बड़े शहरों की घरेलू महिलाएं भी इस चमक में पीछे नहीं हैं. इस कारण देश में ब्यूटी, फैशनेबल ड्रैस और वैलनैस का बिजनैस सब से आगे बढ़ रहा है.

बात केवल श्रीदेवी, हेमामालिनी, माधुरी दीक्षित, मलाइका अरोड़ा, काजोल, जूही चावला की ही नहीं है. छोटेबड़े शहरों में रहने वाली महिलाएं भी अब उम्र की दूसरी पारी में पहले से अधिक अच्छा काम कर रही हैं. फिटनैस और खूबसूरती के हिसाब से भी वे पहले से अधिक खूबसूरत और ग्लैमरस नजर आने लगी हैं. यही वजह है कि आज के दौर में छोटेबड़े सभी तरह के शहरों में ‘मिसेज’ को ले कर तमाम तरह की प्रतियोगिताओं का आयोजन होने लगा है. शादी के बाद महिलाओं की सक्रियता पहले दूसरे सामाजिक कार्यों में होती थी पर अब फैशन, ब्यूटी, रैंप शो और मौडलिंग में भी वे अपनी ब्यूटी और फिटनैस का कमाल दिखा रही हैं.

इस बारे में मिली जानकारी से पता चलता है कि शादी के बाद कैरियर, घरपरिवार, बच्चों का तनाव बहुत सारी आजादी में रुकावट बनता था. 35 की उम्र के बाद जब सारी चीजें करीबकरीब अपने हिसाब से चलने लगती हैं, तो मानसिक रूप से फ्रीनैस का अनुभव होता है. यही वजह है कि आज के समय में महिलाएं अपनी पहली पारी से ज्यादा सक्रिय दूसरी पारी में दिखने लगी हैं.

बात रैंप और ब्यूटी शो तक ही सीमित नहीं है. आज होटलों में होने वाली पार्टियों को देखें तो पता चलता है कि सब से अधिक पार्टियां इस तरह की महिलाओं के द्वारा ही की जाती हैं. ये ही आयोजक होती हैं और ये ही उन में हिस्सा भी लेती हैं. पहले किट्टी पार्टी केवल तंबोला खेलने तक सीमित होती थी. अब किट्टी पार्टी ग्लैमरस हो चुकी है. इस में थीम पार्टी का आयोजन होने लगा है. पार्टी का थीम कुछ इस तरह से रखा जा सकता है जहां महिलाएं अपनी फिटनैस और ब्यूटी को दिखा सकें. थीम पार्टी में पूल पार्टी भी होती है जहां महिलाओं को स्विमवियर पहन कर आना होता है. कभी स्कर्ट पहन कर आने की अलग थीम भी बनती है. थीम पार्टी में जब विजेताओं का चुनाव होता है तो यह देखा जाता है कि किस की स्कर्ट कितनी ऊपर थी, किस ने कैसा स्विमवियर पहना था.

फिटनैस का कमाल

महिलाओं में यह बदलाव फिटनैस के कारण आया है. फिटनैस के पैमाने को देखें तो पुरुषों से अधिक महिलाएं अपनी फिटनैस पर ध्यान देने लगी हैं. जिम से ले कर ब्यूटी पार्लर तक और स्किन स्पैशलिस्ट डाक्टरों से ले कर प्लास्टिक सर्जन तक ये महिलाएं चक्कर लगाने लगी हैं. इन की इसी सोच के कारण आज ब्यूटी और फिटनैस को बनाने में मदद करने वाले बिजनैस बढ़ रहे हैं. किसी भी महिला के शरीर में थोड़ा सा भी फैट बढ़ने से उस की परेशानी बढ़ जाती है. वह किसी भी तरह से अपने वजन को कम करने के प्रयास में जुट जाती है. श्रीदेवी, माधुरी दीक्षित, मलाइका अरोड़ा, काजोल, जूही चावला जैसी महिलाएं इन की रोल मौडल होती हैं. इन्हें देख कर ये खुद को उन की तरह तैयार करने लगती हैं.

शादी के 20 साल के बाद मिसेज यूनिवर्स तक का सफर तय करने वाली रश्मि सचदेवा पहली नौन बौलीवुड सैलिब्रिटी बनीं जिन्हें कांस फिल्म फैस्टिवल में रैड कारपेट पर वाक करने का मौका मिला.

वे कहती हैं, ‘‘अगर हम खुद को पलट कर देखते हैं तो हमें एहसास होता है कि हम पहले से अधिक खूबसूरत लग रही हैं. यह फर्क हमारे अंदर आए आत्मविश्वास के कारण भी महसूस होता है. आज हम हर तरह की डिजाइनर ड्रैस पहन सकती हैं. हमें कभी नहीं लगता कि हम आज के समय में आई किसी मौडल से फिटनैस में पीछे हैं, जो ड्रैस वह पहन सकती है वही हम भी पहन सकती हैं. हमारे उस के साइज तक में कोई फर्क नहीं महसूस होता.

‘‘मैं पूरे भारत में अलगअलग जगहों पर सैलिब्रिटी बन कर गई हूं. हर जगह मैं ने वहां की महिलाओं के साथ बातचीत की. उन के विचार सुने तो पाया कि बदलाव घरघर पहुंच चुका है. भले ही वह महिला रैंप पर न हो पर वह अपने घर में पहले से अधिक सुंदर और फिट दिखने लगी है. इस की बहुत बड़ी वजह मीडिया खासकर महिलाओं के बीच पढ़ी जाने वाली पत्रिकाएं हैं, जिन के कारण यह बदलाव संभव हो सका है. घरघर फैली जागरूकता ने हर महिला की सैकेंड इनिंग को बहुत खूबसूरत बना दिया है. आज इन के चलते ही गारमैंट के बिजनैस में बदलाव आया है. वहां पर डिजाइनर इन्हें ध्यान में रख कर ड्रैस तैयार करने लगे हैं.’’

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