झारखंड के गोड्डा जिले को भारत सरकार ने 2006 में भारत के 250 सब से पिछड़े जिलों में घोषित किया था. यहां विकास की रूपरेखा बना कर काम करना आसान नहीं है और वह भी एक महिला के लिए. मगर दीपिका पांडे पूरे हौसले के साथ यह काम कर रही हैं.

सामान्य कदकाठी, मगर आत्मविश्वास से भरपूर दीपिका फिलहाल गोड्डा जिले में कांग्रेस की जिलाध्यक्ष हैं. इन के पति रत्नेश कुमार टाटा स्टील में हैं, जिन के साथ दीपिका ने इंटरकास्ट मैरिज की है. दीपिका की 2 बेटियां हैं. पेश हैं, उन से कुछ सवाल जवाब:

आप की स्ट्रैंथ क्या है?

मेरी लड़ाई में भीड़ नहीं होती, लोगों का विश्वास होता है और यही मेरी असली ताकत है.

मुख्य रूप से आप किस तरह के विकास कार्य कर रही हैं?

मैं संगठन के माध्यम से जनमुद्दों जैसे पानी, बिजली, सड़क जैसी बुनियादी जरूरतों पर काम कर रही हूं. इन के अलावा किसानों व युवाओं के सुरक्षित भविष्य को निश्चित करने वाली नीतियों को लागू कराने और उन से जुड़े आंदोलनों को मुकाम तक  पहुंचाने के प्रयास में भी लगी हूं. हाल ही में गोड्डा जिले के राजमहल प्रोजैक्ट, जो कोल माइनिंग से जुड़ा है, में हुए एक हादसे में 23 लोग मारे गए. उन के परिवारों को मुआवजा दिलाने के साथसाथ मैं ने घटना की जांच की मांग भी की. कोल माइनिंग क्षेत्र में करप्शन, सेफ्टी, आउटसोर्सिंग आदि मसलों को भी उठाया ताकि स्थानीय लोगों को न्याय मिल सके.

घर परिवार के साथ कैसे मैनेज करती हैं?

मेरा मनोबल पति की अनकंडीशनल सपोर्ट और कम उम्र के बावजूद मेरी परिस्थितियों को समझने व स्वीकारने वाली मेरी बेटियों के सहयोग से अपना काम मैनेज करना मेरे लिए कभी मुश्किल नहीं रहा.

इस मुकाम तक पहुंचने में किस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा?

यह ग्रामीण इलाका है. आमतौर पर लोग अपनी बात खुल कर नहीं रख पाते हैं. ऐसे में आप को उन्हें भरोसा दिलाना पड़ता है कि जब तक वे अपने लिए आवाज नहीं उठाएंगे, कोई उन के लिए नहीं लड़ सकता.