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20 साल की कुहू भोसले फिटनैस कोच और  भारत की एकमात्र बिकिनी ऐथलीट हैं. स्वभाव से हंसमुख, शांत कुहू ने बिकिनी पहन कर ऐमचर ओलिंपिया में ब्रौंज मैडल जीता है और अब लुधियाना में आयोजित होने वाली ‘वूमन बिकिनी फिटनैस’ प्रतियोगिता में भाग लेने वाली हैं.

अगर उस में उन्हें ‘प्रो कार्ड’ मिल जाता है तो वे विश्व में कहीं भी किसी भी प्रतियोगिता में भाग लेने में सक्षम हो जाएंगी. यह खेल भारत में पौपुलर नहीं है, लेकिन कुहू को इसे सीखने और करने में बहुत मजा आता है. यों बनीं ऐथलीट कुहू बताती हैं, ‘‘जब मैं  17 साल की थी तो मैं ने जिम जौइन किया था. 1 साल जिम करने के बाद मेरे ट्रेनर ने मुझे एक फिटनैस प्रतियोगिता को देखने के लिए भेजा. वहां मुझे यह खेल बहुत पसंद आया. आज तक मैं ने पुरुषों को इस क्षेत्र में देखा था.

विदेशों में महिलाएं इस खेल में हैं, पर भारत में नहीं थीं. शो देखने के बाद मैं ने इस क्षेत्र में कदम रखने की ठानी और फिर उसी हिसाब से फिटनैस ट्रेनिंग और डाइट फौलो की और देश की टौप बिकिनी ऐथलीट बन गई.

इस क्षेत्र में जाने की प्रेरणा कैसे मिली पूछे जाने पर कुहू बताती हैं, ‘‘मेरी मां जौय भोसले और पिता नागेश भोसले कला के क्षेत्र से हैं. ऐसे में उन्होंने हर तरह की आजादी दी है. उन्होंने हमेशा कहा है कि जो भी चीज आप को खुशी दे उसे करो. मातापिता ने मुझे बहुत पैम्पर किया है. मैं बहुत साहसी हूं. किसी बात को किसी से कहने में घबराती नहीं. रैंप पर जा कर मुझे कभी शर्म महसूस नहीं हुई. जिस क्षेत्र में आने से लड़कियां घबराती हैं. मैं ने उसी में नाम कमाया.

मेरे मातापिता ने हर तरह से मुझे सहयोग दिया है.’’ संघर्ष के बारे में कुहू का कहना है, ‘‘आप जो भी काम करना चाहें उस में संघर्ष होता ही है. इस क्षेत्र में संघर्ष अपनेआप को फिट रखने और सही तरह से स्टेज पर परफौम करना होता है. इस के लिए सही समय पर सोना, 7 घंटे की नींद पूरी करना और मानसिक संतुलन बनाए रखना जरूरी होता है.’’

लोगों की परवाह नहीं आसपास के लोग कुछ भी कहें कुहू उस पर ध्यान नहीं देती. उन की कोशिश है कि इस खेल को भारत में भी पौपुलर किया जाए. उन का कहना है, ‘‘कुछ लोग इस खेल को अच्छा कहते हैं तो कुछ खराब, पर मैं इसे विश्व स्तर पर ले जाना चाहती हूं. मैं खुद एक प्रोफैशनल कोच हूं. लेकिन पोजिंग के लिए कोच रखा है, जो मुझे अलगअलग पोज मंच पर दिखाने की प्रैक्टिस करवाते हैं. डाइट पर काफी ध्यान रखना पड़ता है, ताकि वजन और फिगर दोनों मैंटेन रहें.

मैं कभी जंक फूड नहीं खाती. हमेशा न्यूट्रिशस और हैल्दी फूड खाती हूं. मैं पूरा महीना एक तरह का भोजन नहीं करती. इस में समयसमय पर बदलाव करती रहती हूं. कभी राइस, फ्रैश फ्रूट्स, ब्रैड, एग तो कभी चिकन, पनीर, घी, फ्रैश सब्जियां आदि रूटीन से लेती हूं.

अपनेआप को अपडेट करने के लिए कुहू अपने कोच, दोस्त और इंटरनैट का सहारा लेती हैं. कुहू ओलिंपिया विनर्स ब्राजील की ऐंजेलिका और अमेरिका की कोर्टनीकिंग को फौलो करती हैं, वे उन से बहुत प्रभावित हैं. यूथ से वे कहती हैं, ‘‘जो भी लड़की इस क्षेत्र में आना चाहे आ सकती है. यह बहुत ही मजेदार खेल है. इस खेल से मसल्स स्ट्रौंग होती हैं जिस से फिटनैस कायम करती है.’’