विमान से उतरने के बाद भी डाक्टर शेखर को लग रहा था कि वह अभी भी हवा में उड़ रहा है. लगे भी क्यों न. एक तो करीब 3 महीनों बाद घर लौटने की खुशी, फिर इस दौरान विदेश में मिला मानसम्मान और चलते समय विश्वविख्यात लंदन के किंग्स मैडिकल कालेज में हर वर्ष कुछ महीनों के लिए बतौर विजिटिंग प्रोफैसर आने का अनुबंध. यह खबर सुन कर लतिका तो खुश होगी ही, राशि भी खुशी से नाचने लगेगी. मगर बाहर खड़े लोगों में उसे सिर्फ लतिका ही नजर आई. उस ने बेचैनी से चारों ओर देखा.

‘‘राशि को ढूंढ़ रहे हो न शेखर? मगर मैं उसे जानबूझ कर नहीं लाई, क्योंकि मुझे अकेले में तुम्हें एक खुशखबरी सुनानी है,’’ लतिका चहकी.

‘‘मैं भी तो राशि को खुशखबरी सुनाने को ही ढूंढ़ रहा हूं. खैर जहां इतना इंतजार किया है कुछ देर और सही… तब तक तुम्हारी खबर सुन लेते हैं.’’

‘‘गाड़ी में बैठने के बाद.’’

‘‘वहां ड्राइवर की मौजूदगी में अकेलापन कहां रहेगा?’’ शेखर शरारत से हंसा.

‘‘मैं ड्राइवर को भी नहीं लाई,’’ लतिका ने ट्रौली पार्किंग की ओर मोड़ते हुए कहा.

‘‘मैं समझ गया तुम्हारी इतनी पोशीदा खुशखबरी क्या है,’’ शेखर ने गाड़ी में बैठते ही उसे अपनी ओर खींचते हुए कहा, ‘‘तुम मां बनने वाली हो.’’

‘‘घर पहुंचने तक तो सब्र करो… वैसे तुम्हारा अंदाजा सही है. मैं फिर मां बनने वाली हूं और इस मां को सास भी कहते हैं.’’

‘‘यानी तुम ने मेरी गैरमौजूदगी का फायदा उठा कर मेरी हार्ड कोर प्रोफैशनल बेटी का शादी करने को ब्रेन वाश कर ही दिया.’’

‘‘मैं ने तो बस उसे इतना आश्वासन दिया है कि जिसे उस ने मन में बसाया है उसे तुम सिरआंखों पर बैठाओगे, क्योंकि प्रणव तुम्हारे अभिन्न मित्र अभिनव का बेटा है.’’

‘‘अभिनव का बेटा? मैं नहीं मान सकता,’’ शेखर ने अविश्वास से कहा.

‘‘देख कर मान जाओगे. मजे की बात यह है शेखर कि जिस बच्चे के गर्भ में आते ही उसे अमेरिका का नागरिक बनाने के लिए ऋतु और अभिनव अमेरिका चले गए थे, उसी प्रणव को भारत इतना पसंद आया कि वह यहां से वापस ही नहीं जाना चाहता. उस ने यहीं एक अमेरिकन कंप्यूटर कंपनी की एजेंसी ले ली है. अब अभिनव और ऋतु भी हमेशा के लिए भारत लौट रहे हैं.’’

‘‘प्रणव की उम्र क्या होगी?’’

‘‘अपनी राशि से तो बड़ा ही है, क्योंकि वह तो मेरे गर्भ में तुम्हारे विदेश से लौटने के बाद आई और अभिनव व ऋतु तो तुम्हारे विदेश जाते ही चले गए थे. ऋतु उस समय गर्भवती थी.’’

‘‘तुम्हें कैसे पता कि ऋतु उस समय गर्भवती थी? तुम तो तब नई दुलहन थीं, ऋतु तुम्हें यह सब बताए इतनी घनिष्ठता तो तुम्हारी उस से नहीं थी?’’

‘‘लेकिन अम्मांजी की उस की सास से तो थी. जब उन से उन्हें यह पता चला कि ऋतु गर्भवती है तो मैं ने भी जाना.’’

‘‘अच्छा,’’ कह कर शेखर ने सीट से सिर टिका कर आंखें बंद कर लीं. अतीत चलचित्र की भांति उस की आंखों के सामने तैरने लगा…

पड़ोस में रहने वाले जुड़वां भाइयों प्रभव और अभिनव से उस की बहुत दोस्ती थी, खासकर अभिनव से. शेखर की सहपाठिन ऋतु से अभिनव को प्रेम था और उस से मिलने वह अकसर शेखर के साथ कालेज जाता था. अभिनव से शादी करने के चक्कर में ऋतु ने डाक्टरी की पढ़ाई पूरी नहीं की थी. अभिनव ने भी पिता के साथ उन के होटल में बैठना शुरू कर दिया था. लेकिन प्रभव की व्यापार में दिलचस्पी नहीं थी अत: वह अमेरिका चला गया.

एक दिन ऋतु और अभिनव शेखर के डायग्नोस्टिक सैंटर गए. अभिनव बोला, ‘‘यार अपनी शादी को 3-4 साल हो गए, लेकिन अभी तक कोई बच्चा नहीं हुआ. तू सब टैस्ट वगैरह कर के देख कि सब ठीक तो है न.’’

शेखर ने दोनों के सभी जरूरी टैस्ट किए. रिपोर्ट लेने ऋतु अकेली आई थी. पहले तो शेखर थोड़ा हिचकिचाया, लेकिन ऋतु की परिपक्वता देखते हुए उस ने सच बताना ही बेहतर समझा. बोला, ‘‘तुम मां बनने के लिए पूरी तरह सक्षम हो ऋतु, लेकिन अभिनव कभी बाप नहीं बन सकेगा.’’

ऋतु कुछ पलों के लिए हैरान रह गई. फिर संयत हो कर पूछा, ‘‘इलाज के बाद भी नहीं?’’

शेखर ने मायूसी से कहा, ‘‘उस के शरीर में वीर्य के शुक्राणु बनाने का स्रोत नहीं है… जुड़वां बच्चों में कभीकभी ऐसी कमी रह जाती है… एक ही इलाज है कि तुम लोग बच्चा गोद ले लो.’’

‘‘यह बाद में सोचेंगे शेखर. फिलहाल तो यह बात अभि से छिपाने में तुम्हें मेरी मदद करनी होगी. करोगे न?’’ ऋतु ने पूछा.

‘‘जरूर ऋतु, लेकिन एक न एक दिन तो बताना पड़ेगा ही.’’

‘‘अभी नहीं प्रभव के जाने के बाद.’’

‘‘प्रभव आया हुआ है?’’

‘‘आ रहा है, अभिनव को उसे लेने एअरपोर्ट जाना था इसीलिए रिपोर्ट लेने नहीं आ सका.’’

‘‘प्रभव तुम्हें और अभिनव को साथ ले जाने को आ रहा है न?’’ शेखर ने पूछा.

‘‘हां, मगर फिलहाल उस के आने की वजह कुछ और है,’’ ऋतु ने उसांस ले कर कहा, ‘‘प्रभव का वहां किसी सिक्ख लड़की से अफेयर है और अब वह उस के बच्चे की मां बनने वाली है. लड़की के घर वाले इसी शहर में रहते हैं और अड़े हुए हैं कि तुम अपने घर वालों की मौजूदगी में बाकायदा रेशमा से शादी करो वरना हम तुम्हारे सारे खानदान को तबाह कर देंगे. मांबाबूजी डर कर या प्रभव के जिद्दी स्वभाव के कारण शादी के लिए तो मना नहीं कर रहे, लेकिन यह सोच कर बौखलाए हुए हैं कि 3-4 महीने की गर्भवती दुलहन के बारे में रिश्तेदारों से क्या कहेंगे. मांजी ने तो यहां तक कह डाला कि ब्याहे के तो कुछ हुआ नहीं और कुंआरा बाप बन रहा है. यह बात अभि को चुभ गई और वह फौरन तुम्हारे पास टैस्ट करवाने आ गया. इस समय यह रिपोर्ट उसे बुरी तरह आहत कर देगी. घर में वैसे ही बहुत तनाव है तो प्रभव के आते ही और भी ज्वलंत हो जाएगा. शेखर, क्या तुम अभि से यह नहीं कह सकते कि उस की रिपोर्ट कहीं खो गई है?’’

‘‘कह दूंगा सीमन कम था इसलिए बराबर जांच नहीं हो सकी. वैसे तो सब ठीक ही लग रहा है, फिर भी दोबारा जांच करना चाहूंगा. प्रभव के आने के चक्कर में आज तो वह आने से रहा और कल मैं एक खास कोर्स करने के लिए यूरोप जा रहा हूं.’’

ऋतु उस का धन्यवाद कर के चली गई. उस के बाद फिर उस से कभी मुलाकात नहीं हुई. लौटने पर पता चला कि प्रभव के साथ पहले तो अभिनव व ऋतु और फिर मांबाप भी अमेरिका चले गए हैं.

शेखर ने सोचा कि प्रभव की भावी गर्भवती बहू को यहां बुला कर शादी करवाने के बजाय सब ने वहीं जा कर शादी करवाना बेहतर समझा होगा.

‘‘घर आ गया शेखर,’’ लतिका की आवाज पर उस का ध्यान टूटा. गाड़ी से उतरते ही राशि आ कर उस से लिपट गई.

‘‘पापा, आप के लिए टब में क्लोन डाल कर गरम पानी भर दिया है ताकि जल्दी से आप की थकान उतर जाए,’’ राशि ने कहा.

‘‘पापा की थकान तो आप को देखते ही उतर जाती है,’’ शेखर हंसा.

तभी बाहर गाड़ी रुकने की आवाज आई.

‘‘लगता है प्रणव आ गया,’’ कह कर राशि बाहर भागी. शेखर भी उस के पीछेपीछे गया.

प्रणव को देख कर उसे लगा जैसे कालेज के दिनों के अभिनव या प्रभव में से कोई उस के सामने खड़ा हो. शेखर उस से बड़ी खुशी से मिला और सब का हालचाल पूछा.

‘‘प्रभव अंकल और रेशमा आंटी तो अलबामा, अमेरिका में हैं और मम्मीपापा कनाडा के वैनकूवर में.’’

‘‘कब से?’’

‘‘मेरे जन्म के कुछ ही महीनों बाद चले गए थे. मैं ने तो होश ही वहीं संभाला,’’ प्रणव ने बताया.

‘ऋतु समझदार है उस ने बच्चे को असली मांबाप से दूर रखना ही बेहतर समझा होगा,’ शेखर ने सोचा.

‘‘तुम्हारे मम्मीपापा कब तक आएंगे?’’

‘‘आप लोगों के बारे में सुनते ही मम्मी तो यहां आने को छटपटाने लगी हैं, लेकिन पापा को तो बिजनैस और घर वगैरह बेचने को समय चाहिए, इसलिए मम्मी अगले हफ्ते अकेली ही आ रही हैं.’’

‘‘बहुत खूब… मजा रहेगा फिर तो,’’ लतिका बोली.

‘‘हां आंटी, मगर उस से पहले मुझे यह पता चल जाए कि अंकल ने मुझे पसंद कर लिया तो अच्छा रहेगा,’’ प्रणव धीरे सेबोला.

‘‘वह तुम अभी पूछ लो न शेखर से,’’ लतिका ने कहा.

‘‘कहिए अंकल, क्या आप ने मुझे पसंद कर लिया?’’ प्रणव ने धीमी आवाज में पूछा.

शेखर चौंक पड़ा कि प्रणव की आंखों में वही याचना है, जो रिपोर्ट छिपाने को कहते हुए ऋतु की आंखों में थी. कैसे भूल सकता था शेखर उन आंखों को… और वही आंखें आज प्रणव के चेहरे पर थीं यानी प्रणव ऋतु का ही बेटा था. मगर यह कैसे मुमकिन हुआ?

‘‘कहिए न अंकल?’’ प्रणव ने मनुहार किया.

‘‘तुम्हें यह गलतफहमी कैसे हो गई कि मैं तुम्हें पसंद नहीं करूंगा?’’ शेखर हंसा.

‘‘मेरी बेटी की पसंद ही मेरी पसंद है और फिर तुम्हें नकारने की कोई वजह भी नहीं है.’’

प्रणव ने राहत की सांस ली. फिर बोला, ‘‘मम्मी ने तो मुझे डरा ही दिया था कि आप मानेंगे नहीं.’’

‘‘प्रणव, तुम चाहो तो मेरी रजामंदी सैलिबे्रट करने के लिए राशि को कहीं डिनर पर ले जा सकते हो, क्योंकि मैं तो आज रात कुछ खाना नहीं चाह रहा और फिलहाल तो टब में लेटने जा रहा हूं,’’ शेखर मुसकराया.

‘‘घंटे भर के लिए,’’ लतिका ने कहा, ‘‘मगर वह खुशखबरी तो सुनाओ जो तुम एअरपोर्ट पर सुनाने वाले थे.’’

‘‘वह तो मैं मजाक कर रहा था,’’ कह कर शेखर अपने कमरे में चला गया.

वाकई अब तो वह बात मजाक ही बन गई थी. पैथोलौजी में उस की विशिष्ट उपलब्धियों के कारण ही उसे विजिटिंग प्रोफैसर बनने का मौका मिल रहा था और आज वही उपलब्धियां प्रणव के रूप में उस के मुंह पर तमाचे मार रही थीं. अभिनव के वीर्य की जांच उस ने स्वयं एक बार नहीं कई बार की थी. अगर एक मित्र की जांच में उस से भूल हो सकती है तो अन्य लोगों की जांच में न जाने कितनी खामियां रहती होंगी?

शेखर फिर बाहर आया. राशि अपने कमरे में तैयार हो रही थी और प्रणव लतिका के साथ बैठा था.

‘‘मैं ने प्रभव के बालबच्चों के बारे में तो पूछा ही नहीं प्रणव. कितने बच्चे हैं उस के?’’

‘‘1 लड़की और 1 लड़का अंकल. तान्या मुझ से कुछ महीने बड़ी है और गौरव कुछ साल छोटा. लेकिन हम दोनों में बहुत दोस्ती है. गौरव की पढ़ाई खत्म होने वाली है. इसलिए मैं उस के लिए कोई अच्छी नौकरी ढूंढ़ रहा हूं, क्योंकि प्रभव अंकल की तरह उस की भी बिजनैस में कोई दिलचस्पी नहीं है.’’

‘‘और तुम्हें अपने पापा की तरह नौकरी पसंद नहीं है,’’ लतिका बोली.

‘‘ऐसी बात नहीं है आंटी, अमेरिका में तो मैं भी नौकरी ही करता था और यहां मेरी कंपनी ने मुझे मार्केट सर्वे के लिए भेजा था. यहां आ कर मुझे बहुत अच्छा लगा तो मैं ने सोचा कि कोई और एजेंट नियुक्त करने के बजाय मैं खुद ही क्यों न एजेंसी ले लूं, क्योंकि जो काम मैं नौकरी में करता हूं यानी कंपनी के प्रोडक्ट्स की बिक्री वही एजेंसी लेने पर करूंगा.’’

‘‘फैसला तो वाकई बहुत सही है. तुम्हारी उम्र कितनी होगी बरखुरदार यानी डेट औफ बर्थ क्या है?’’ शेखर ने बड़ी सफाई से प्रणव की जन्मतिथि पूछ ली.

राशि तैयार हो कर आ गई तो प्रणव जाने के लिए उठ खड़ा हुआ. शेखर आ कर टब में लेट गया. यह तो पक्का हो गया था कि शादी से पहले रेशमा के गर्भ में आई बच्ची तान्या है और जन्मतिथि के मुताबिक प्रणव ऋतु और अभिनव का बेटा है, जो उस की जांच के बाद पैदा हुआ है. उस की बारबार की जांच बिलकुल गलत थी, उसे ऋतु के सामने यह हार तो स्वीकार करनी ही होगी, यह सोच कर वह बेचैन था और कोशिश के बावजूद भी लतिका से वह अपनी बेचैनी छिपा नहीं सका.

‘‘जिस उत्साह से तुम आए थे शेखर वह तो बिलकुल गायब ही हो गया, ऐसा क्यों?’’ लतिका उस से बोली.

‘‘तुम भी कमाल करती हो लतिका. बेटी परायी हो रही है यह सुन कर किसे दुख नहीं होगा?’’ शेखर ने बड़ी कुशलता से बात छिपाई.

लतिका की भी आंखें भर आईं, ‘‘बेटी तो होती ही पराया धन है लेकिन दुखी होने से कैसे चलेगा? बेटी की शादी नहीं करनी?’’

‘‘बड़ी शान से करेंगे. फिलहाल और सब कुछ भूल कर शादी की तैयारी ही करते हैं.’’

शेखर के उत्साह से लतिका आश्वस्त हो गई.

अगली सुबह सैर करते हुए शेखर की मुलाकात डाक्टर अशोक से हो गई. वे कैंसर अनुसंधान संस्थान के मुख्य चिकित्सक थे. वे अपने सभी मरीजों को टैस्ट के लिए शेखर के पास ही भेजते थे. शेखर ने बातचीत के दौरान उन से पूछा कि क्या कभी उन्हें ऐसा नहीं लगा कि उस की दी हुई रिपोर्ट गलत है?

‘‘अगर ऐसा लगता शेखर तो मैं लगातार 2 दशकों से तुम्हीं से क्यों काम करवाता रहता? हमारे संस्थान में भी प्रयोगशाला है, जहां सभी टैस्ट मेरी निगरानी में होते हैं. जब तक तुम्हारी और मेरी रिपोर्ट में तालमेल नहीं होता मैं इलाज के बारे में कोई निर्णय नहीं लेता. अभी तक तुम्हारी और मेरी रिपोर्ट एक ही सी होती हैं. बतौर पैथोलौजिस्ट तुम और तुम्हारा स्टाफ मरीज के प्रति अपनी जिम्मेदारी बखूबी समझता है शेखर और यह कहना मेरा ही नहीं शहर के सभी जानेमाने डाक्टरों का है,’’ डाक्टर अशोक ने सराहना के स्वर में कहा.

डाक्टर अशोक की तारीफ से शेखर को इतनी हिम्मत तो मिली कि वह अपने डायग्नोस्टिक सैंटर पर जा सके, लतिका और राशि की खुशी बांट सके. लतिका चाहती थी कि ऋतु को लेने प्रणव के साथ वे सब भी जाएं लेकिन शेखर ऐन वक्त पर जाना टाल गया. वह जानता था कि ऋतु की आंखों के व्यंग्य से आहत हो कर वह जरूर विचलित हो जाएगा जिस से लतिका और राशि दोनों की खुशी खराब हो जाएगी. बेहतर रहेगा ऋतु से अकेले में मिल कर माफी मांग ले. यह सोचतेसोचते उसे पता नहीं चला कि वह कब नींद के आगोश में चला गया. मोबाइल की घंटी से उस की नींद टूटी.

‘‘सौरी शेखर, तुम्हें डिस्टर्ब किया.’’

‘‘अरे ऋतु… माफ करना तुम्हें रिसीव करने नहीं आ सका,’’ उस ने आवाज पहचान कर कहा.

‘‘मैं तुम्हारी दुविधा समझ रही हूं शेखर इसीलिए मैं ने तुम्हें लतिका और राशि के घर पहुंचने से पहले फोन किया है. मेरा तुम से अकेले में मिलना बहुत जरूरी है. प्रणव के औफिस जाने के बाद मैं तुम्हें फोन करूंगी.’’

ऋतु ने रिसीवर रखा ही था कि बाहर गाड़ी के रुकने की आवाज आई. शेखर बाहर आ गया.

‘‘सास कैसी लगी राशि?’’

‘‘बहुत थकी हुई और कुछ हद तक डरी हुई,’’ राशि हंसी, ‘‘प्रणव बता रहा था कि उन्होंने पहली बार इतना लंबा सफर अकेले किया है, महज मुझे देखने के लिए.’’

‘‘मगर थकान और घबराहट की वजह से ठीक से देख भी नहीं सकीं,’’ शेखर हंसा.

‘‘बहुत अच्छी तरह से देखा पापा और मम्मी से फोन नंबर भी लिया कि सुबह आप का धन्यवाद करेंगी कि आप ने उन के बेटे को मेरे लिए पसंद किया है,’’ राशि इतराई.

‘‘ज्यादा न इतरा,’’ लतिका बोली, ‘‘उस का बेटा तुम से इक्कीस ही होगा उन्नीस नहीं.’’

‘‘यह उन्नीसइक्कीस का चक्कर छोड़ कर सो जाओ अब,’’ शेखर बोला.

मगर वह खुद सो नहीं सका. यही सोचता रहा कि क्यों मिलना चाह रही है ऋतु उस से?

अगले दिन ऋतु ने प्रणव के औफिस जाते ही शेखर को फोन कर के अपने घर बुला लिया. ऋतु को देखते ही शेखर को लगा कि प्रणव ने सिर्फ कदकाठी और चेहरे की लंबाई बाप की ली है अन्य नैननक्श तो ऋतु के ही हैं यानी वह शतप्रतिशत प्रणव की मां है. अपनी गलती का सही सुबूत मिलते ही वह ग्लानि और अपराधबोध से ग्रस्त हो गया.

‘‘मेरा यकीन करो शेखर, मैं ने प्रणव को भारत आने से बहुत रोका, लेकिन वह नहीं माना और भारत आ गया. वह भी इसी शहर में और उसी कंपनी में माल बेचने जिस में तुम्हारी बेटी काम करती है. इस सब से तुम्हें जो तकलीफ पहुंची है उस का अंदाजा मुझे है और उसी की क्षमायाचना के लिए मैं ने तुम्हें यहां…’’

‘‘तुम ने अभी कहा ही क्या है ऋतु जिस की तुम क्षमा मांग रही हो,’’ शेखर बीच में ही बोला, ‘‘तुम जो भी चाहे कहो, क्योंकि तुम्हारी व्यथा जो तुम ने मेरी गलत रिपोर्ट जानने के बाद झेली…’’

‘‘कौन सी गलत रिपोर्ट?’’ ऋतु ने हैरानी से पूछा.

‘‘वही जो प्रणव के रूप में मेरा मुंह चिढ़ा रही है और मुझे मजबूर कर रही है कि मैं अपने पेशे से संन्यास ले लूं. अगर अपने दोस्त की ही सही जांच नहीं कर सका तो गैरों की क्या करूंगा?’’

‘‘ओह, अब समझी,’’ ऋतु ने उसांस ले कर कहा, ‘‘यानी तुम और मैं दोनों ही अलगअलग अपराध भावना से ग्रस्त हैं. उस से मुक्त होने के लिए तो सब विस्तार से बताना होगा.’’

‘‘तुम्हें याद है शेखर, जब मैं रिपोर्ट लेने आई थी तो मैं ने बताया था कि प्रभव पहुंचने वाला है. उस के आने के बाद जो चखचख होनी थी वह हुई. मांजी ने दोनों भाइयों की तुलना करते हुए कहा कि अभिनव तो ब्याहता के साथ भी संयम से रह रहा है और प्रभव को परायी लड़की के साथ भी ऊंचनीच का खयाल नहीं है. इस पर प्रभव बड़ी बेशर्मी से हंसा कि लगता है अभिनव के हिस्से का लिबिडो भी मुझे ही मिल गया है. यह बात एक बार फिर मुझे कहीं गहरे कचोट गई. उस रात मुझे नींद नहीं आई. प्रभव भी वहां बेचैनी से टहल रहा था. जाहिर है वह भी तनावग्रस्त था क्योंकि मांबाबू जी ने उस की समस्या सुनने से पहले ही उसे कोसना शुरू कर दिया था.

‘‘परसों तक अगर रेशमा के भाई को शादी की तारीख नहीं बताई तो उन लोगों के लोकल कौंटैक्ट हम सब की जिंदगी दुश्वार कर देंगे… और वैसे भी जब मुझे शादी करनी ही रेशमा से है तो क्यों न सब की रजामंदी और हंसीखुशी से करूं. लेकिन मां और बाबूजी कुछ सुनने को ही तैयार नहीं हैं,’’ प्रभव ने हताश स्वर में कहा.

‘‘मैं ने प्रभव से कहा कि वह भी तो अपनी बात शांति से समझाने के बजाय चिल्लाने लगता है तब उस ने जवाब दिया कि जब भी वह तनाव में होता है सिवा चिल्लाने के और कुछ नहीं कर सकता और उस का तनाव दूर होता है सैक्स करने से. उस के बाद प्रभव ने सैक्स पर भाषण ही दे डाला. उस के अनुसार सैक्स भी जीवन में उतना ही आवश्यक है जितना खानापीना या बाथरूम जाना.

‘‘कह नहीं सकती प्रभव के तर्क से प्रभावित हो कर या अभिनव को नपुंसक होने के दंश से बचाने के लिए मैं ने उस रात स्वयं को प्रभव को सौंप दिया. अगली सुबह प्रभव वाकई शांत हो गया और उस ने बड़े धैर्य से मांबाबूजी को स्थिति से समझौता करने को मना लिया.

‘‘रेशमा अधिक छुट्टियां लेना नहीं चाहती थी और शादी की तारीख तय होने पर ही आने वाली थी. लेकिन अचानक उस का ब्लडप्रैशर इतना बढ़ गया कि डाक्टर ने उस के सामान्य होने तक रेशमा को सफर करने से रोक दिया. इस से पहले कि रेशमा सफर करने लायक होती मेरे गर्भवती होने की पुष्टि हो गई.

‘‘अभिनव बेहद खुश हुआ. किसी को कुछ शक होने का सवाल ही नहीं था, क्योंकि उस रिपोर्ट के बारे में तो सिवा मेरे व तुम्हारे किसी को पता ही नहीं था. बस मुझे यह फिक्र थी कि तुम से सचाई कैसे छिपाऊंगी, इसलिए मैं ने हालात का फायदा उठाया.

‘‘मैं ने प्रभव को उकसाया कि बजाय रेशमा को यहां बुलाने के हम सभी क्यों न वहां जा कर उस की शादी करवा दें. यों भी अभिनव और मेरे जाने की औपचारिकता तो पूरी हो ही चुकी थी और अपने बच्चे को अमेरिका की नागरिकता दिलवाने की दुहाई दे कर मैं अभिनव को तुम्हारे लौटने से पहले ही वहां ले गई. वहां जा कर मांबाबूजी को बहुत अच्छा लगा और मैं ने उन्हें हमेशा वहीं रहने को मना लिया.

‘‘उस के बाद मैं बेफिक्र हो गई थी. मगर प्रणव ने यहां आ कर मेरे पैरों तले से जमीन खिसका दी. पश्चिमी सभ्यता का प्रभाव या अभिनव को सचाई का कड़वा एहसास न होने देने का दर्प, मैं कह नहीं सकती कि हकीकत क्या है पर उस रात मेरे और प्रभव के बीच जो भी हुआ था उस की मुझे कोई ग्लानि नहीं है. लेकिन यह सोच कर कि तुम खासकर लतिका इस सचाई को कतई स्वीकार नहीं करेगी और इस से पहले कि तुम बेटे या बाप से कोई पूछताछ करो मैं ने तुम से मिल कर तुम्हें सब साफसाफ बताना बेहतर समझा.’’

‘‘तुम्हारे जीवट की दाद देता हूं ऋतु. एक बार हिम्मत कर के तुम ने अभिनव को डिप्रैशन से बचाया था और इस बार हिम्मत कर के मेरा नर्वस ब्रेकडाउन होने से रोका है. लतिका को इस बारे में कुछ मालूम नहीं है. उसे कह दिया था कि बेटी परायी हो जाएगी यह सोच कर व्यग्र हूं. असलियत सिर्फ तुम्हें और मुझे मालूम है और आज के बाद हम भी कभी इस का जिक्र नहीं करेंगे.’’

‘‘यानी तुम ने मुझे माफ कर दिया?’’

‘‘माफ करने से अगर तुम्हारा मतलब यह है ऋतु कि तुम ने जो कुछ किया उसे मैं ने सही मान लिया है तो समाज के मूल्यों या मान्यताओं को बदलने या उन का मूल्यांकन करने का मुझे कोई अधिकार नहीं है, न ही अभिनव को असलियत बता कर उस की बसीबसाई दुनिया उजाड़ने का हक,’’ शेखर ने सपाट स्वर में कहा, ‘‘तुम ने उस समय जो कुछ किया था वह महज हालात के दबाव में किया था. आज अभिनव के सुखचैन और बच्चों की खुशी की खातिर उसे चुपचाप स्वीकार कर लेना मेरा महज गलत और सही के बीच तालमेल बैठाने का प्रयास है.’’

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